हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ - Class 6 Social Science Hindi CBSE Notes
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CBSE Notes for Class 6 – Chapter-wise Revision Notes
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हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ - Class 6 Social Science Hindi CBSE Notes
हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ
अध्याय 14. हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ
हमारे आस-पास अनेक प्रकार की आर्थिक गतिविधियाँ होती हैं। इस अध्याय में आर्थिक गतिविधियों के तीन प्रमुख क्षेत्रकों—प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक—तथा उनके बीच की परस्पर निर्भरता को समझाया गया है।
आर्थिक गतिविधियाँ
- आर्थिक गतिविधियाँ वे गतिविधियाँ हैं जिनमें मौद्रिक मूल्य का अर्जन होता है।
- समय के साथ लोगों की आजीविका से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों की संख्या और प्रकार में वृद्धि हुई है।
- प्राचीन समय में कृषि, पशुपालन, औजार बनाना, मिट्टी के बर्तन बनाना और कपड़ा बनाना प्रमुख गतिविधियाँ थीं।
- आज कंप्यूटर, मोबाइल फोन और ड्रोन का निर्माण, बैंकिंग, विद्यालय, होटल, परिवहन, फर्नीचर निर्माण, सॉफ्टवेयर निर्माण तथा मशीनों की मरम्मत जैसी अनेक आर्थिक गतिविधियाँ होती हैं।
आर्थिक क्षेत्रक
आर्थिक क्षेत्रक ऐसे व्यापक समूह हैं जिनमें समान विशेषताओं वाली विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को शामिल किया जाता है।
मुख्य आर्थिक क्षेत्रक तीन हैं:
| क्षेत्रक | मुख्य आधार |
|---|---|
| प्राथमिक क्षेत्रक | प्रकृति से सीधे कच्चे माल का प्राप्त करना |
| द्वितीयक क्षेत्रक | कच्चे माल को अन्य वस्तुओं में बदलना |
| तृतीयक क्षेत्रक | प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों को सेवाएँ प्रदान करना |
प्राथमिक गतिविधियाँ
प्राथमिक गतिविधियाँ वे आर्थिक गतिविधियाँ हैं जिनमें लोग वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रत्यक्ष रूप से प्रकृति पर निर्भर रहते हैं।
मुख्य उदाहरण:
- कृषि
- खनन
- मछली पकड़ना
- पशुपालन
- वानिकी
- कुक्कुट पालन
- ग्रीनहाउस कृषि
मुख्य विशेषता: प्राकृतिक संसाधनों से सीधे कच्चा माल प्राप्त किया जाता है।
प्राथमिक क्षेत्रक के उदाहरण
| गतिविधि | प्राप्त वस्तु |
|---|---|
| कृषि | अनाज और सब्जियाँ |
| वानिकी | लकड़ी |
| खनन | कोयला आदि |
| मत्स्य पालन | मछलियाँ |
| कुक्कुट पालन | अंडे |
| पशुपालन | दूध आदि |
द्वितीयक गतिविधियाँ
द्वितीयक गतिविधियाँ वे आर्थिक गतिविधियाँ हैं जिनमें प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त कच्ची सामग्री को रूपांतरित करके अन्य वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है।
- कच्चे माल को उपयोगी या बिक्री योग्य उत्पादों में बदला जाता है।
- विनिर्माण और निर्माण कार्य इसमें शामिल हैं।
- भवन और सड़क निर्माण भी द्वितीयक क्षेत्रक का भाग हैं।
- पानी, बिजली और गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी इसमें शामिल है।
द्वितीयक क्षेत्रक के उदाहरण
| कच्चा माल | तैयार उत्पाद |
|---|---|
| अनाज | आटा |
| मूँगफली | तेल |
| चाय की पत्तियाँ | चाय |
| लकड़ी | फर्नीचर और कागज |
| कपास | कपड़ा |
| लौह अयस्क | इस्पात |
तृतीयक गतिविधियाँ
तृतीयक गतिविधियाँ वे आर्थिक गतिविधियाँ हैं जो प्राथमिक और द्वितीयक गतिविधियों में लगे लोगों को आवश्यक सेवाएँ प्रदान करती हैं।
- इस क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है।
- इसमें ऐसी सेवाएँ शामिल होती हैं जिन्हें प्रत्यक्ष रूप से देखा नहीं जा सकता, लेकिन वे आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं।
- परिवहन, बैंकिंग, व्यापार, संचार और व्यवसाय प्रबंधन इसके उदाहरण हैं।
तृतीयक क्षेत्रक के प्रमुख उदाहरण
- परिवहन
- बैंकिंग
- स्वास्थ्य सेवाएँ
- शिक्षण
- चिकित्सा
- कानूनी सेवाएँ
- विपणन
- खुदरा व्यापार
- संचार
- सॉफ्टवेयर तैयार करना
- होटल और रेस्तरां सेवाएँ
- गोदाम सेवाएँ
- तकनीकी और मरम्मत सेवाएँ
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों में अंतर
| प्राथमिक क्षेत्रक | द्वितीयक क्षेत्रक | तृतीयक क्षेत्रक |
|---|---|---|
| प्रकृति से सीधे संसाधन प्राप्त करता है। | कच्चे माल को अन्य उत्पादों में बदलता है। | अन्य क्षेत्रकों को सेवाएँ प्रदान करता है। |
| कृषि, खनन, मत्स्य पालन आदि। | विनिर्माण और निर्माण आदि। | परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि। |
| कच्चे माल का स्रोत। | कच्चे माल का रूपांतरण। | सेवाओं का प्रावधान। |
तीनों क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता
तीनों आर्थिक क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं। किसी वस्तु को प्राकृतिक संसाधन से अंतिम उत्पाद में बदलने के लिए तीनों क्षेत्रकों की अलग-अलग भूमिकाएँ होती हैं।
सरल क्रम:
प्राकृतिक संसाधन → प्राथमिक क्षेत्रक → कच्चा माल → द्वितीयक क्षेत्रक → तैयार उत्पाद → तृतीयक क्षेत्रक → परिवहन/विपणन/बिक्री → उपभोक्ता
यदि किसी एक क्षेत्रक की गतिविधि रुक जाती है, तो अन्य क्षेत्रकों की गतिविधियाँ भी प्रभावित हो सकती हैं।
डेयरी सहकारिता — खेत से थाली तक
- गुजरात के किसान गायों और भैंसों का दूध निकालकर डेयरी में बेचते हैं।
- दूध की गुणवत्ता और मात्रा के आधार पर किसानों को भुगतान किया जाता है।
- दूध का प्रत्यक्ष उत्पादन प्राकृतिक स्रोत से होता है, इसलिए यह प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि है।
- दूध को कारखानों में संसाधित करके दूध पाउडर, घी, पनीर, मक्खन आदि बनाया जाता है। यह द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधि है।
- इन उत्पादों को ट्रकों, लॉरियों, रेल और अन्य परिवहन साधनों से अलग-अलग स्थानों तक पहुँचाया जाता है।
- विपणन और खुदरा विक्रय तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ हैं।
सहकारी संगठन
सहकारी संगठन व्यक्तियों का ऐसा समूह है जो स्वेच्छा से एक साथ आकर अपनी आर्थिक तथा सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करता है।
- सहकारी संगठन के सभी सदस्य उसके स्वामी होते हैं।
- निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।
- सहकारिता में सदस्य मिलकर अपने कार्यों को व्यवस्थित करते हैं।
- अमूल की स्थापना 1946 में श्री त्रिभुवनदास पटेल और डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में हुई।
- सहकारी प्रयास से किसानों, विशेषकर महिलाओं, को एकजुट होने और दूध के उत्पादन तथा बिक्री पर अपना नियंत्रण बढ़ाने में सहायता मिली।
बिचौलिया
बिचौलिया वह व्यक्ति है जो उत्पादकों से सामान खरीदकर उपभोक्ताओं को बेचता है।
- बिचौलिया उत्पादक और उपभोक्ता के बीच कार्य करता है।
- वह अपनी सेवा के लिए शुल्क लेता है।
दूध के उत्पादन से तैयार उत्पाद तक
| चरण | गतिविधि | क्षेत्रक |
|---|---|---|
| 1 | गाय/भैंस से दूध प्राप्त करना | प्राथमिक |
| 2 | दूध का प्रसंस्करण | द्वितीयक |
| 3 | दूध से घी, पनीर, मक्खन आदि बनाना | द्वितीयक |
| 4 | परिवहन | तृतीयक |
| 5 | विपणन और खुदरा बिक्री | तृतीयक |
पाश्चरीकरण
पाश्चरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें दूध को एक निश्चित तापमान तक गर्म किया जाता है ताकि हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हों और दूध को सुरक्षित रखा जा सके।
कारखाना
कारखाना वह भवन या भवनों का समूह है जहाँ वस्तुओं का निर्माण किया जाता है या विभिन्न घटकों को मिलाकर अंतिम उत्पाद तैयार किया जाता है।
खुदरा
खुदरा माल की थोड़ी मात्रा में अंतिम उपभोक्ताओं तक बिक्री है, जिसका उद्देश्य माल का पुनर्विक्रय नहीं होता।
निर्यात
निर्यात उन वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री है जो एक देश में उत्पादित होकर दूसरे देश के खरीदारों या उपभोक्ताओं को बेची जाती हैं।
गोदाम
गोदाम ऐसी विशाल इमारत या स्थान है जहाँ उत्पादों को बेचने, उपयोग करने या दुकानों पर भेजने से पहले रखा जाता है।
पाठ्यपुस्तक बनने की प्रक्रिया
अध्याय में चित्र 14.1 के माध्यम से पाठ्यपुस्तकों के निर्माण की प्रक्रिया दिखाई गई है। पेड़ से लकड़ी प्राप्त करने से लेकर कागज बनाने, उस पर मुद्रण करने और अंततः पाठ्यपुस्तक तैयार करने तक कई आर्थिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं।
इस प्रक्रिया में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक अलग-अलग चरणों में योगदान करते हैं।
कागज का पुनर्चक्रण
- प्रयोग किए गए कागज का पुनर्चक्रण करके नया कागज बनाया जा सकता है।
- एक टन कागज के पुनर्चक्रण से 17 पेड़ों और 2.5 घन मीटर लैंडफिल स्थान की बचत की जा सकती है।
- पुनर्चक्रित कागज का उपयोग करने से ऊर्जा और पानी की भी बचत होती है।
- विद्यालय में कागज का विवेकपूर्ण उपयोग करना पर्यावरण की दृष्टि से उपयोगी है।
महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ
| शब्द | परिभाषा |
|---|---|
| मौद्रिक मूल्य | किसी वस्तु के मूल्य को मुद्रा के मूल्य के रूप में मापना। |
| आर्थिक क्षेत्रक | समान विशेषताओं वाली आर्थिक गतिविधियों का व्यापक समूह। |
| प्राथमिक क्षेत्रक | प्रकृति से सीधे कच्चा माल प्राप्त करने वाली गतिविधियों का समूह। |
| द्वितीयक क्षेत्रक | कच्चे माल को अन्य उत्पादों में बदलने वाली गतिविधियों का समूह। |
| तृतीयक क्षेत्रक | प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों को सेवाएँ प्रदान करने वाली गतिविधियों का समूह। |
| सहकारी संगठन | स्वेच्छा से एक साथ आए व्यक्तियों का ऐसा समूह जो आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करता है। |
| बिचौलिया | उत्पादकों से सामान खरीदकर उपभोक्ताओं को बेचने वाला व्यक्ति। |
| पाश्चरीकरण | दूध को निश्चित तापमान तक गर्म करके हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की प्रक्रिया। |
| खुदरा | माल की थोड़ी मात्रा को अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाकर बेचने की प्रक्रिया। |
| निर्यात | एक देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं को दूसरे देश में बेचना। |
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण तथ्य
- आर्थिक गतिविधियों के तीन प्रमुख क्षेत्रक हैं—प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक।
- प्राथमिक क्षेत्रक प्रकृति से सीधे कच्चा माल प्राप्त करता है।
- द्वितीयक क्षेत्रक कच्चे माल को अन्य उत्पादों में बदलता है।
- तृतीयक क्षेत्रक मुख्य रूप से सेवाएँ प्रदान करता है।
- तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है।
- कृषि, खनन, मत्स्य पालन और वानिकी प्राथमिक क्षेत्रक के उदाहरण हैं।
- विनिर्माण और निर्माण द्वितीयक क्षेत्रक के उदाहरण हैं।
- परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ तृतीयक क्षेत्रक के उदाहरण हैं।
- दूध का उत्पादन प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि है।
- दूध से घी, पनीर, मक्खन और दूध पाउडर बनाना द्वितीयक गतिविधि है।
- दूध के उत्पादों का परिवहन, विपणन और खुदरा बिक्री तृतीयक गतिविधियाँ हैं।
- तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
- अमूल सहकारी संगठन का उदाहरण है।
- अमूल की स्थापना 1946 में श्री त्रिभुवनदास पटेल और डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में हुई।
Quick Revision
प्राथमिक → प्रकृति से कच्चा माल → कृषि, खनन, मत्स्य पालन, पशुपालन, वानिकी
द्वितीयक → कच्चे माल का रूपांतरण → विनिर्माण, कारखाने, निर्माण
तृतीयक → सेवाएँ → परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, संचार
मुख्य सूत्र:
प्रकृति → प्राथमिक क्षेत्रक → कच्चा माल → द्वितीयक क्षेत्रक → तैयार वस्तु → तृतीयक क्षेत्रक → परिवहन/विपणन/बिक्री → उपभोक्ता
हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ
अध्याय 14. हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ
इस भाग में आर्थिक गतिविधियों के वर्गीकरण और प्राथमिक तथा द्वितीयक क्षेत्रकों की प्रमुख विशेषताओं को समझेंगे।
आर्थिक गतिविधियाँ
- आर्थिक गतिविधियाँ वे गतिविधियाँ हैं जिनमें मौद्रिक मूल्य का अर्जन होता है।
- समय के साथ लोगों की आजीविका से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के प्रकार बढ़े हैं।
- पहले कृषि, पशुपालन, औजार बनाना, मिट्टी के बर्तन और कपड़े बनाना जैसी गतिविधियाँ प्रमुख थीं।
- आज कंप्यूटर, मोबाइल फोन और ड्रोन का निर्माण, बैंकिंग, विद्यालय, होटल, परिवहन, फर्नीचर निर्माण, सॉफ्टवेयर निर्माण और मशीनों की मरम्मत जैसी अनेक गतिविधियाँ होती हैं।
आर्थिक क्षेत्रक
आर्थिक क्षेत्रक समान विशेषताओं वाली आर्थिक गतिविधियों का व्यापक समूह है।
आर्थिक गतिविधियों को मुख्यतः तीन क्षेत्रकों में बाँटा जाता है:
| क्षेत्रक | मुख्य आधार |
|---|---|
| प्राथमिक क्षेत्रक | प्रकृति से सीधे कच्चा माल प्राप्त करना |
| द्वितीयक क्षेत्रक | कच्चे माल को अन्य वस्तुओं में बदलना |
| तृतीयक क्षेत्रक | अन्य क्षेत्रकों को सेवाएँ प्रदान करना |
प्राथमिक गतिविधियाँ
प्राथमिक गतिविधियाँ वे आर्थिक गतिविधियाँ हैं जिनमें लोग वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रत्यक्ष रूप से प्रकृति पर निर्भर रहते हैं।
मुख्य उदाहरण:
- कृषि
- खनन
- मछली पकड़ना
- पशुपालन
- वानिकी
- कुक्कुट पालन
- ग्रीनहाउस कृषि
प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता
- प्राथमिक क्षेत्रक में प्रकृति से सीधे संसाधन प्राप्त किए जाते हैं।
- कृषि में भूमि और जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होता है।
- वानिकी में जंगलों से लकड़ी प्राप्त की जाती है।
- खनन में पृथ्वी से खनिज निकाले जाते हैं।
- मत्स्य पालन में जल स्रोतों से मछलियाँ प्राप्त की जाती हैं।
- पशुपालन से दूध आदि प्राप्त किए जाते हैं।
प्राथमिक क्षेत्रक के प्रमुख उदाहरण
| गतिविधि | प्राप्त होने वाली वस्तु |
|---|---|
| कृषि | अनाज और सब्जियाँ |
| वानिकी | लकड़ी |
| खनन | कोयला आदि |
| मत्स्य पालन | मछलियाँ |
| कुक्कुट पालन | अंडे |
| पशुपालन | दूध आदि |
प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधियों के प्रकार
- कृषि: अनाज और सब्जियों की खेती।
- ग्रीनहाउस कृषि: नियंत्रित वातावरण में कृषि करना।
- खनन: खदानों से खनिज और अन्य संसाधन निकालना।
- मत्स्य पालन: मछलियों का पालन या पकड़ना।
- वानिकी: वन संसाधनों से संबंधित गतिविधियाँ।
- पशुपालन: पशुओं से संबंधित उत्पादन गतिविधियाँ।
द्वितीयक गतिविधियाँ
द्वितीयक गतिविधियाँ वे आर्थिक गतिविधियाँ हैं जिनमें प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त कच्ची सामग्री को रूपांतरित करके अन्य वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है।
- इस क्षेत्रक में कच्चे माल को उपयोगी उत्पादों में बदला जाता है।
- विनिर्माण द्वितीयक क्षेत्रक की प्रमुख गतिविधि है।
- भवनों और सड़कों का निर्माण भी इसमें शामिल है।
- पानी, बिजली और गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी द्वितीयक क्षेत्रक में शामिल है।
कच्चे माल का रूपांतरण
| कच्चा माल | रूपांतरित उत्पाद |
|---|---|
| अनाज | आटा |
| मूँगफली | तेल |
| चाय की पत्तियाँ | चाय |
| लकड़ी | फर्नीचर और कागज |
| कपास | कपड़ा |
| लौह अयस्क | इस्पात |
द्वितीयक क्षेत्रक के प्रमुख कार्य
- कच्चे माल का प्रसंस्करण करना।
- कच्चे माल से नए उत्पाद तैयार करना।
- विभिन्न वस्तुओं का विनिर्माण करना।
- भवनों और सड़कों का निर्माण करना।
- पानी, बिजली और गैस जैसी आवश्यक वस्तुएँ प्रदान करना।
प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक में अंतर
| प्राथमिक क्षेत्रक | द्वितीयक क्षेत्रक |
|---|---|
| प्रकृति से सीधे कच्चा माल प्राप्त करता है। | कच्चे माल को अन्य वस्तुओं में बदलता है। |
| प्राकृतिक संसाधनों पर प्रत्यक्ष निर्भरता होती है। | प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त कच्चे माल पर आधारित होता है। |
| कृषि, खनन, मत्स्य पालन आदि इसके उदाहरण हैं। | विनिर्माण और निर्माण इसके उदाहरण हैं। |
प्रमुख शब्द
- मौद्रिक मूल्य: किसी वस्तु के मूल्य को मुद्रा के रूप में मापना।
- आर्थिक क्षेत्रक: समान विशेषताओं वाली आर्थिक गतिविधियों का व्यापक समूह।
- प्राथमिक क्षेत्रक: प्रकृति से सीधे कच्चा माल प्राप्त करने वाली गतिविधियों का समूह।
- द्वितीयक क्षेत्रक: कच्चे माल को अन्य उत्पादों में बदलने वाली गतिविधियों का समूह।
- कच्चा माल: वह सामग्री जिसका उपयोग अन्य वस्तुएँ बनाने में किया जाता है।
- प्रसंस्करण: कच्चे माल को उपयोगी या तैयार उत्पाद में बदलने की प्रक्रिया।
Exam Booster
- आर्थिक गतिविधियों के तीन मुख्य क्षेत्रक हैं—प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक।
- प्राथमिक क्षेत्रक का आधार प्रकृति और प्राकृतिक संसाधन हैं।
- कृषि, खनन, मत्स्य पालन, पशुपालन और वानिकी प्राथमिक क्षेत्रक के उदाहरण हैं।
- द्वितीयक क्षेत्रक में कच्चे माल का रूपांतरण होता है।
- अनाज से आटा बनाना द्वितीयक गतिविधि है।
- मूँगफली से तेल निकालना द्वितीयक गतिविधि है।
- लकड़ी से फर्नीचर बनाना द्वितीयक गतिविधि है।
- कपास से कपड़ा बनाना द्वितीयक गतिविधि है।
- लौह अयस्क से इस्पात बनाना द्वितीयक गतिविधि है।
Quick Revision
आर्थिक गतिविधियाँ → आर्थिक क्षेत्रक → 3 प्रकार
प्राथमिक → प्रकृति से सीधे कच्चा माल
द्वितीयक → कच्चे माल से तैयार/अन्य उत्पाद
तृतीयक → सेवाएँ
याद रखने का सूत्र:
प्रकृति → कच्चा माल → रूपांतरण → तैयार वस्तु
हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ
अध्याय 14. हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ
इस भाग में तृतीयक क्षेत्रक, तीनों क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता, डेयरी सहकारिता तथा कागज और पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया को समझेंगे।
तृतीयक गतिविधियाँ
तृतीयक गतिविधियाँ वे आर्थिक गतिविधियाँ हैं जो प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों में कार्य करने वाले लोगों को आवश्यक सेवाएँ प्रदान करती हैं।
- तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है।
- इस क्षेत्रक में वस्तुओं के बजाय मुख्य रूप से सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।
- परिवहन, बैंकिंग, व्यापार और व्यवसाय प्रबंधन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
- शिक्षक, चिकित्सक, नर्स, अधिवक्ता और विमान चालक भी सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- तकनीशियन, मैकेनिक और बिजली मिस्त्री भी तृतीयक क्षेत्रक की सेवाओं में योगदान करते हैं।
तृतीयक क्षेत्रक के प्रमुख उदाहरण
| गतिविधि | उदाहरण |
|---|---|
| परिवहन | ट्रक, रेल, विमान आदि द्वारा सामान पहुँचाना |
| बैंकिंग | बैंक द्वारा वित्तीय सेवाएँ प्रदान करना |
| स्वास्थ्य | चिकित्सक और नर्स की सेवाएँ |
| शिक्षा | शिक्षक द्वारा शिक्षा प्रदान करना |
| व्यापार | वस्तुओं की खरीद-बिक्री |
| संचार | मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से संचार सेवाएँ |
| मरम्मत | मोबाइल, टेलीविजन, कार और ट्रैक्टर की मरम्मत |
| होटल और रेस्तरां | भोजन और आतिथ्य सेवाएँ |
तीनों क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक अलग-अलग दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में वे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
- प्राथमिक क्षेत्रक कच्चा माल उपलब्ध कराता है।
- द्वितीयक क्षेत्रक कच्चे माल को उपयोगी या तैयार वस्तुओं में बदलता है।
- तृतीयक क्षेत्रक परिवहन, विपणन, बिक्री और अन्य सेवाओं के माध्यम से दोनों क्षेत्रकों की सहायता करता है।
उदाहरण: किसान अनाज पैदा करता है → मिल में अनाज से आटा बनाया जाता है → परिवहन द्वारा आटा बाजार तक पहुँचता है → दुकानदार उसे उपभोक्ताओं को बेचता है।
डेयरी सहकारिता — खेत से थाली तक
- गुजरात के किसान गायों और भैंसों से दूध प्राप्त करते हैं।
- किसान दूध को अपने आसपास की डेयरी में बेचते हैं।
- दूध की गुणवत्ता और मात्रा के आधार पर किसानों को भुगतान किया जाता है।
- दूध के उत्पादन की गतिविधि प्राथमिक क्षेत्रक से संबंधित है।
- दूध को विभिन्न खाद्य उत्पादों में बदलना द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधि है।
- परिवहन, विपणन और खुदरा बिक्री तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ हैं।
अमूल सहकारी संगठन
- आनंद जिले के किसान पहले अपना दूध आसपास के गाँवों में बेचते थे।
- दूध जल्दी खराब होने के कारण किसानों को कम कीमत पर दूध बेचने की कठिनाई होती थी।
- कई किसान बिचौलियों पर निर्भर थे।
- किसानों ने सामूहिक रूप से सहकारी संगठन बनाने का निर्णय लिया।
- अमूल की स्थापना 1946 में श्री त्रिभुवनदास पटेल और डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में हुई।
- सहकारी संगठन के माध्यम से किसानों ने दूध के उत्पादन और बिक्री पर अपना नियंत्रण बढ़ाया।
- किसान दूध के उत्पादन, पाश्चरीकरण और बिक्री से जुड़े निर्णय सामूहिक रूप से लेने लगे।
- बाद में दूध से मक्खन और दूध पाउडर जैसे उत्पाद भी बनाए जाने लगे।
सहकारी संगठन
सहकारी संगठन व्यक्तियों का ऐसा समूह है जो स्वेच्छा से एक साथ आकर अपनी आर्थिक तथा सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करता है।
- सभी सदस्य सहकारी संगठन के स्वामी होते हैं।
- निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।
- सदस्य अपने कार्यों को आपस में साझा करते हैं।
- सहकारिता से सदस्य अपनी आर्थिक गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित ढंग से कर सकते हैं।
बिचौलिया
बिचौलिया वह व्यक्ति है जो उत्पादकों से सामान खरीदकर उपभोक्ताओं को बेचता है।
- बिचौलिया उत्पादक और उपभोक्ता के बीच कार्य करता है।
- वह अपनी सेवा के लिए शुल्क लेता है।
- अमूल की सहकारी व्यवस्था ने किसानों की बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में सहायता की।
दूध से विभिन्न उत्पाद
| चरण | कार्य | क्षेत्रक |
|---|---|---|
| 1 | गाय या भैंस से दूध प्राप्त करना | प्राथमिक |
| 2 | दूध का प्रसंस्करण | द्वितीयक |
| 3 | दूध से घी, पनीर, मक्खन और दूध पाउडर बनाना | द्वितीयक |
| 4 | उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना | तृतीयक |
| 5 | विपणन और खुदरा बिक्री | तृतीयक |
पाश्चरीकरण
पाश्चरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें दूध को एक निश्चित तापमान तक गर्म किया जाता है ताकि हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट किए जा सकें और दूध को सुरक्षित रखा जा सके।
खुदरा
खुदरा माल की थोड़ी मात्रा को अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुँचाकर बेचने की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य माल का पुनर्विक्रय नहीं होता।
निर्यात
निर्यात किसी देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं को दूसरे देश के खरीदारों या उपभोक्ताओं को बेचना है।
अध्याय के अनुसार अमूल जैसे सहकारी संगठन अपने उत्पादों का विपणन भारत के विभिन्न भागों में करते हैं और कई देशों में उनका निर्यात भी किया जाता है।
पाठ्यपुस्तक बनने की प्रक्रिया
पाठ्यपुस्तक बनाने की प्रक्रिया में तीनों आर्थिक क्षेत्रकों की भूमिका होती है। पेड़ से लकड़ी प्राप्त करने से लेकर कागज बनाने और उस पर मुद्रण करके पाठ्यपुस्तक तैयार करने तक विभिन्न गतिविधियाँ होती हैं।
सरल क्रम:
पेड़ → लकड़ी/काष्ठीय रेशे → लगदी → कागज → मुद्रण → पाठ्यपुस्तक
पाठ्यपुस्तक निर्माण में क्षेत्रकों की भूमिका
| क्षेत्रक | भूमिका |
|---|---|
| प्राथमिक | प्रकृति से आवश्यक कच्चा माल प्राप्त करना |
| द्वितीयक | कच्चे माल से लगदी और कागज बनाना तथा मुद्रण द्वारा पुस्तक तैयार करना |
| तृतीयक | परिवहन, वितरण और अन्य सेवाओं के माध्यम से उत्पाद को आगे पहुँचाना |
कागज का पुनर्चक्रण
- प्रयोग किए गए कागज का पुनर्चक्रण करके नया कागज बनाया जा सकता है।
- एक टन कागज के पुनर्चक्रण से 17 पेड़ों और 2.5 घन मीटर लैंडफिल स्थान की बचत की जा सकती है।
- पुनर्चक्रित कागज का उपयोग करने से लगभग 70 प्रतिशत ऊर्जा और पानी की बचत हो सकती है।
- कागज का विवेकपूर्ण उपयोग और पुनर्चक्रण प्राकृतिक संसाधनों की बचत में सहायता करता है।
क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता — प्रमुख उदाहरण
| प्राथमिक | द्वितीयक | तृतीयक |
|---|---|---|
| दूध का उत्पादन | दूध से मक्खन/पनीर आदि बनाना | परिवहन और बिक्री |
| पेड़ों से कच्चा माल | कागज का निर्माण | वितरण और परिवहन |
| कृषि से अनाज | अनाज से आटा बनाना | आटे का परिवहन और खुदरा बिक्री |
प्रमुख शब्द
- तृतीयक क्षेत्रक: प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों को सेवाएँ प्रदान करने वाला क्षेत्रक।
- सेवा क्षेत्रक: तृतीयक क्षेत्रक का दूसरा नाम।
- सहकारी संगठन: आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए स्वेच्छा से एक साथ आए व्यक्तियों का समूह।
- बिचौलिया: उत्पादक से सामान खरीदकर उपभोक्ता को बेचने वाला व्यक्ति।
- पाश्चरीकरण: दूध को निश्चित तापमान तक गर्म करके हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की प्रक्रिया।
- खुदरा: अंतिम उपभोक्ता को थोड़ी मात्रा में माल बेचने की प्रक्रिया।
- निर्यात: एक देश में उत्पादित वस्तुओं या सेवाओं को दूसरे देश में बेचना।
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक का एक साथ उदाहरण
दूध का उदाहरण:
गाय/भैंस → दूध उत्पादन → प्राथमिक क्षेत्रक
दूध → प्रसंस्करण → घी/पनीर/मक्खन/दूध पाउडर → द्वितीयक क्षेत्रक
उत्पाद → परिवहन → विपणन → खुदरा बिक्री → तृतीयक क्षेत्रक
Exam Booster
- तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है।
- परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और संचार तृतीयक गतिविधियों के उदाहरण हैं।
- तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
- दूध का उत्पादन प्राथमिक गतिविधि है।
- दूध को घी, पनीर, मक्खन या दूध पाउडर में बदलना द्वितीयक गतिविधि है।
- दूध के उत्पादों का परिवहन, विपणन और खुदरा बिक्री तृतीयक गतिविधियाँ हैं।
- सहकारी संगठन में सदस्य सामूहिक रूप से निर्णय लेते हैं।
- अमूल एक दुग्ध सहकारी संगठन का उदाहरण है।
- अमूल की स्थापना 1946 में हुई।
- पाश्चरीकरण में दूध को निश्चित तापमान तक गर्म किया जाता है।
- खुदरा बिक्री अंतिम उपभोक्ता तक माल की थोड़ी मात्रा पहुँचाने से संबंधित है।
- कागज के पुनर्चक्रण से पेड़ों, ऊर्जा, पानी और लैंडफिल स्थान की बचत होती है।
Quick Revision
प्राथमिक → प्रकृति से कच्चा माल
द्वितीयक → कच्चे माल का रूपांतरण
तृतीयक → सेवाएँ, परिवहन, विपणन और बिक्री
डेयरी उदाहरण:
दूध उत्पादन → प्राथमिक → प्रसंस्करण → द्वितीयक → परिवहन/विपणन/खुदरा → तृतीयक
मुख्य बात: तीनों आर्थिक क्षेत्रक अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े और परस्पर निर्भर हैं।
हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ
अध्याय 14. हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ — Assignment
इस अभ्यास में आर्थिक गतिविधियों के तीन क्षेत्रकों—प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक—तथा उनकी परस्पर निर्भरता, सहकारी संगठन और दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों का अभ्यास किया गया है।
भाग A — बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. आर्थिक गतिविधियों को मुख्य रूप से कितने क्षेत्रकों में वर्गीकृत किया जाता है?
- दो
- तीन
- चार
- पाँच
2. निम्नलिखित में से कौन-सी प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि है?
- बैंकिंग
- कृषि
- फर्नीचर निर्माण
- परिवहन
3. प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधियों में लोग मुख्य रूप से किस पर निर्भर रहते हैं?
- प्रकृति
- बैंक
- विद्यालय
- होटल
4. निम्नलिखित में से कौन-सी द्वितीयक गतिविधि है?
- मछली पकड़ना
- कृषि
- कपास से कपड़ा बनाना
- बैंकिंग
5. अनाज से आटा बनाना किस क्षेत्रक की गतिविधि है?
- प्राथमिक
- द्वितीयक
- तृतीयक
- कोई नहीं
6. तृतीयक क्षेत्रक को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
- कृषि क्षेत्रक
- विनिर्माण क्षेत्रक
- सेवा क्षेत्रक
- प्राकृतिक क्षेत्रक
7. निम्नलिखित में से कौन तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधि है?
- खनन
- कृषि
- परिवहन
- वानिकी
8. सहकारी संगठन में निर्णय किस प्रकार लिए जाते हैं?
- केवल एक व्यक्ति द्वारा
- सामूहिक रूप से
- केवल सरकार द्वारा
- केवल बिचौलियों द्वारा
9. अमूल की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
- 1942
- 1946
- 1950
- 1960
10. दूध का उत्पादन किस क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधि है?
- प्राथमिक
- द्वितीयक
- तृतीयक
- सेवा
11. दूध से पनीर, मक्खन और दूध पाउडर बनाना किस क्षेत्रक से संबंधित है?
- प्राथमिक
- द्वितीयक
- तृतीयक
- केवल व्यापार
12. उत्पादक से सामान खरीदकर उपभोक्ता को बेचने वाला व्यक्ति क्या कहलाता है?
- उत्पादक
- उपभोक्ता
- बिचौलिया
- किसान
13. दूध को निश्चित तापमान तक गर्म करके हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
- पुनर्चक्रण
- पाश्चरीकरण
- विनिर्माण
- खुदरा
14. अंतिम उपभोक्ता को थोड़ी मात्रा में माल बेचने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
- निर्यात
- खुदरा
- खनन
- प्रसंस्करण
15. तीनों आर्थिक क्षेत्रकों के बीच कैसा संबंध होता है?
- कोई संबंध नहीं
- केवल प्रतिस्पर्धा का
- परस्पर निर्भरता का
- केवल सरकारी नियंत्रण का
भाग B — रिक्त स्थान भरिए
1. आर्थिक गतिविधियों के तीन प्रमुख __________ होते हैं।
2. प्राथमिक क्षेत्रक प्रत्यक्ष रूप से __________ पर निर्भर रहता है।
3. कच्चे माल को अन्य वस्तुओं में बदलने वाली गतिविधियाँ __________ क्षेत्रक में आती हैं।
4. तृतीयक क्षेत्रक को __________ क्षेत्रक भी कहा जाता है।
5. कृषि, खनन और मत्स्य पालन __________ क्षेत्रक के उदाहरण हैं।
6. कपास से कपड़ा बनाना __________ क्षेत्रक की गतिविधि है।
7. परिवहन और बैंकिंग __________ क्षेत्रक की गतिविधियाँ हैं।
8. सहकारी संगठन में निर्णय __________ रूप से लिए जाते हैं।
9. अमूल की स्थापना __________ में हुई थी।
10. दूध को सुरक्षित रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया को __________ कहते हैं।
भाग C — सही या गलत लिखिए
1. कृषि प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि है।
2. खनन तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधि है।
3. द्वितीयक क्षेत्रक में कच्चे माल का रूपांतरण किया जाता है।
4. तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक कहा जाता है।
5. बैंकिंग प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि है।
6. दूध का उत्पादन प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि है।
7. दूध से पनीर बनाना द्वितीयक गतिविधि है।
8. परिवहन तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधि है।
9. सहकारी संगठन में सभी सदस्य सामूहिक रूप से निर्णय ले सकते हैं।
10. तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे से पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं।
भाग D — एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दीजिए
1. आर्थिक गतिविधियों के तीन प्रमुख क्षेत्रकों के नाम लिखिए।
2. प्राथमिक क्षेत्रक क्या है?
3. द्वितीयक क्षेत्रक क्या है?
4. तृतीयक क्षेत्रक को किस नाम से भी जाना जाता है?
5. सहकारी संगठन क्या है?
6. बिचौलिया किसे कहते हैं?
7. पाश्चरीकरण क्या है?
8. खुदरा किसे कहते हैं?
भाग E — लघु उत्तरीय प्रश्न
1. आर्थिक क्षेत्रक से क्या समझते हैं?
2. प्राथमिक क्षेत्रक की कोई चार गतिविधियाँ लिखिए।
3. प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक में क्या अंतर है?
4. द्वितीयक क्षेत्रक की चार गतिविधियों के उदाहरण दीजिए।
5. तृतीयक क्षेत्रक की प्रमुख गतिविधियाँ कौन-कौन-सी हैं?
6. तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक क्यों कहा जाता है?
7. सहकारी संगठन की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
8. बिचौलिया किस प्रकार उत्पादक और उपभोक्ता के बीच कार्य करता है?
भाग F — अंतर स्पष्ट कीजिए
| प्राथमिक क्षेत्रक | द्वितीयक क्षेत्रक |
|---|---|
| प्रकृति से सीधे कच्चा माल प्राप्त करता है। | कच्चे माल को अन्य वस्तुओं में बदलता है। |
| कृषि, खनन, मत्स्य पालन आदि इसके उदाहरण हैं। | विनिर्माण और निर्माण इसके उदाहरण हैं। |
| द्वितीयक क्षेत्रक | तृतीयक क्षेत्रक |
|---|---|
| कच्चे माल को तैयार या अन्य उत्पादों में बदलता है। | आवश्यक सेवाएँ प्रदान करता है। |
| विनिर्माण और निर्माण इसके उदाहरण हैं। | परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य आदि इसके उदाहरण हैं। |
भाग G — मिलान कीजिए
| स्तंभ A | स्तंभ B |
|---|---|
| 1. कृषि | क. तृतीयक क्षेत्रक |
| 2. फर्नीचर निर्माण | ख. प्राथमिक क्षेत्रक |
| 3. बैंकिंग | ग. द्वितीयक क्षेत्रक |
| 4. सहकारी संगठन | घ. सामूहिक स्वामित्व और निर्णय |
| 5. पाश्चरीकरण | ङ. दूध को निश्चित तापमान तक गर्म करना |
भाग H — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों को उदाहरण सहित समझाइए।
2. तीनों आर्थिक क्षेत्रक एक-दूसरे पर किस प्रकार निर्भर हैं? एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
3. अमूल की डेयरी सहकारिता की कहानी के आधार पर सहकारी संगठन के महत्त्व को समझाइए।
4. दूध के उत्पादन से लेकर उसके विभिन्न उत्पादों की बिक्री तक प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों की भूमिका समझाइए।
भाग I — गतिविधि आधारित प्रश्न
1. अपने आसपास दिखाई देने वाली पाँच आर्थिक गतिविधियों की सूची बनाइए और उन्हें प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक क्षेत्रक में वर्गीकृत कीजिए।
2. किसी एक वस्तु के निर्माण की प्रक्रिया चुनिए और उसमें तीनों क्षेत्रकों की भूमिका बताइए।
3. अपने आसपास मौजूद किसी सहकारी संगठन का नाम लिखिए और उसके कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए।
4. अपने विद्यालय में कागज के विवेकपूर्ण उपयोग के पाँच उपाय लिखिए।
भाग J — प्रवाह चित्र बनाइए
1. दूध के उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पहुँचने की प्रक्रिया को निम्न क्रम में पूरा कीजिए:
दूध उत्पादन → __________ → __________ → परिवहन → __________ → उपभोक्ता
2. कागज/पाठ्यपुस्तक बनने की प्रक्रिया को प्रवाह चित्र के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
पेड़ → __________ → __________ → मुद्रण → पाठ्यपुस्तक
भाग K — सोचिए और उत्तर दीजिए
1. यदि प्राथमिक क्षेत्रक से कच्चा माल प्राप्त न हो, तो द्वितीयक क्षेत्रक पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
2. यदि परिवहन की सुविधा उपलब्ध न हो, तो प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों की गतिविधियाँ किस प्रकार प्रभावित हो सकती हैं?
3. अमूल जैसी सहकारी व्यवस्था से किसानों को किस प्रकार सहायता मिल सकती है?
4. यदि तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं, तो किसी एक क्षेत्रक के रुक जाने का दूसरे क्षेत्रकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
भाग L — Quick Exam Practice
1. प्राथमिक क्षेत्रक — ____________________
2. द्वितीयक क्षेत्रक — ____________________
3. तृतीयक क्षेत्रक — ____________________
4. सहकारी संगठन — ____________________
5. बिचौलिया — ____________________
6. पाश्चरीकरण — ____________________
7. खुदरा — ____________________
8. निर्यात — ____________________
MCQs — Answer Key
| प्रश्न | उत्तर | प्रश्न | उत्तर | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | b | 6 | c | 11 | b |
| 2 | b | 7 | c | 12 | c |
| 3 | a | 8 | b | 13 | b |
| 4 | c | 9 | b | 14 | b |
| 5 | b | 10 | a | 15 | c |
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