स्थलरूप एवं जीवन - Class 6 Social Science Hindi CBSE Notes

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CBSE Notes for Class 6 – Chapter-wise Revision Notes

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स्थलरूप एवं जीवन - Class 6 Social Science Hindi CBSE Notes

स्थलरूप एवं जीवन

Class 6 Social Science Hindi Updated : 12 September 2026

अध्याय 3. स्थलरूप एवं जीवन

इस अध्याय में पृथ्वी की सतह के प्रमुख स्थलरूपों—पर्वत, पठार और मैदान—का अध्ययन किया गया है। साथ ही यह समझाया गया है कि अलग-अलग स्थलरूपों के अनुसार मानव जीवन, व्यवसाय, वनस्पति, जीव-जंतु और संस्कृति किस प्रकार प्रभावित होते हैं।

स्थलरूप

  • स्थलरूप – पृथ्वी की सतह के भौतिक स्वरूप को स्थलरूप कहते हैं।
  • स्थलरूप लाखों वर्षों में आकार लेते हैं।
  • इनका पर्यावरण और जीवन के साथ महत्वपूर्ण संबंध होता है।
  • स्थलरूपों को व्यापक रूप से तीन प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जाता है—पर्वत, पठार और मैदान।

स्थलरूप और जीवन

  • विभिन्न स्थलरूपों में अलग-अलग प्रकार की जलवायु पाई जाती है।
  • प्रत्येक स्थलरूप में अलग-अलग प्रकार के पेड़-पौधे और जीव-जंतु पाए जाते हैं।
  • मनुष्य ने विभिन्न स्थलरूपों के अनुसार स्वयं को ढाला है।
  • अलग-अलग स्थलरूपों पर रहने वाली मानव आबादी की संख्या भी अलग-अलग होती है।

पर्वत

  • पर्वत – आसपास की भूमि से अधिक ऊँचे स्थलरूप को पर्वत कहते हैं।
  • पर्वतों की पहचान चौड़े आधार, खड़ी ढलानों और सँकरे शिखरों से की जा सकती है।
  • अधिक ऊँचाई वाले कुछ पर्वत हिम से ढके रहते हैं।
  • अधिक ऊँचाई पर हिम स्थायी रूप से जमी रह सकती है।

पहाड़ी

  • कम ऊँचाई वाले ऊँचे स्थान, जिनकी ढलान अपेक्षाकृत कम खड़ी और शिखर गोलाकार होते हैं, पहाड़ी कहलाते हैं।
  • पहाड़ियाँ पर्वतों की तुलना में सामान्यतः कम ऊँची होती हैं।

ऊँचाई

  • ऊँचाई (Altitude) – समुद्र तल से किसी वस्तु या स्थान की ऊँचाई को ऊँचाई कहते हैं।
  • किसी पर्वत, उड़ते हुए पक्षी, वायुयान या उपग्रह की ऊँचाई समुद्र तल से मापी जा सकती है।

हिम और हिमपात

  • अधिक ऊँचाई वाले ठंडे क्षेत्रों में वर्षण हिम के रूप में हो सकता है।
  • हिम और ओले जल के ठोस रूप में गिरने के उदाहरण हैं।
  • वर्षण – वायुमंडल से भूमि पर किसी भी रूप में जल के गिरने को वर्षण कहते हैं।
  • वर्षा, हिमपात और ओले वर्षण के सामान्य रूप हैं।

पर्वत श्रेणियाँ

  • विश्व के अधिकांश पर्वतों को पर्वत श्रेणियों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • हिमालय – एशिया की प्रमुख पर्वत श्रेणी।
  • आल्प्स – यूरोप की प्रमुख पर्वत श्रेणी।
  • एंडीज़ – दक्षिणी अमेरिका की प्रमुख पर्वत श्रेणी।
  • कुछ पर्वत श्रेणियाँ हजारों किलोमीटर तक फैली हुई हैं।

विश्व की प्रमुख पर्वत चोटियाँ

  • एवरेस्ट गिरिशृंग – हिमालय की सबसे ऊँची चोटी तथा विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी।
  • कंचनजंगा गिरिशृंग – हिमालय की प्रमुख ऊँची चोटियों में से एक।
  • अकोंकागुआ गिरिशृंग – एंडीज़ पर्वत श्रेणी की सबसे ऊँची चोटी।
  • किलिमंजारो गिरिशृंग – पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक स्वतंत्र पर्वत।
  • ब्लांक गिरिशृंग – आल्प्स का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर।
  • अनाईमुडी गिरिशृंग – दक्षिण भारत की सबसे ऊँची पर्वत चोटी।

नवीन और प्राचीन पर्वत

  • हिमालय जैसे ऊँचे और नुकीली चोटियों वाले पर्वत अपेक्षाकृत नवीन पर्वत हैं।
  • अरावली जैसी पर्वत श्रेणियाँ बहुत पुरानी हैं।
  • अपरदन के कारण पुराने पर्वतों और पहाड़ियों के आकार अधिक गोल हो सकते हैं।
  • उत्थान और अपरदन जैसी प्रक्रियाएँ आज भी पर्वतीय क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं।

पर्वतीय वन

  • पर्वतों की ढलानों पर पाए जाने वाले वनों को पर्वतीय वन कहते हैं।
  • पर्वतीय वनों में चीड़, फर, स्प्रूस और देवदार जैसे शंकुधारी वृक्ष पाए जाते हैं।
  • इन वृक्षों की पत्तियाँ सामान्यतः पतली और नुकीली होती हैं।
  • अधिक ऊँचाई पर वृक्षों की जगह घास, काई और लाइकेन उगते हैं।

काई

  • काई (Moss) – छोटा हरा पौधा या वनस्पति, जिसमें फूल और वास्तविक जड़ें नहीं होतीं।
  • यह प्रायः मखमली आवरण की तरह फैली हुई दिखाई देती है।

लाइकेन

  • लाइकेन – पौधे के समान जीव, जो सामान्यतः चट्टानों, दीवारों या पेड़ों से चिपके हुए पाए जाते हैं।

पर्वतीय जीव-जंतु

  • पर्वतों के घने वन, नदियाँ, झीलें, घास के मैदान और कंदराएँ अनेक जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में हिम तेंदुआ, हिमालयन तहर, याक, भालू, पर्वतीय खरगोश, आइबेक्स, गोल्डन ईगल और ग्रे फॉक्स जैसे जीव पाए जाते हैं।

हिमालय की नदियाँ

  • हिमालय से निकलने वाली भारतीय नदियों में गंगा विशालतम नदी है।
  • गंगा की अनेक सहायक नदियाँ हैं।
  • यमुना और घाघरा हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदियाँ हैं।
  • सोन नदी विंध्याचल की श्रेणियों से निकलती है।

पर्वतीय जीवन

  • पर्वतीय भूभाग सामान्यतः खड़े ढलानों के साथ ऊबड़-खाबड़ और ऊँचे-नीचे होते हैं।
  • कुछ घाटियों में नियमित रूप से कृषि की जा सकती है।
  • ढलानों पर सीढ़ीनुमा खेत बनाकर की जाने वाली कृषि को वेदिका कृषि कहते हैं।
  • अनेक पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि की अपेक्षा पशुपालन को अधिक महत्व दिया जाता है।
  • पर्यटन पर्वतीय लोगों के लिए आय का महत्वपूर्ण साधन है।
  • स्कीइंग, हाइकिंग, पर्वतारोहण और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियाँ पर्वतीय पर्यटन का हिस्सा हैं।

पर्वतीय जीवन की चुनौतियाँ

  • खड़ी ढलानों के कारण कृषि करना कठिन होता है।
  • भूस्खलन पर्वतीय क्षेत्रों की एक प्रमुख प्राकृतिक चुनौती है।
  • बादल फटना आकस्मिक बाढ़ का कारण बन सकता है।
  • हिमस्खलन भी पर्वतीय क्षेत्रों में गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है।
  • भारी हिमपात और अत्यधिक ठंड भी लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।
  • पर्यटकों की अनियंत्रित संख्या पर्वतीय पर्यावरण पर दबाव डाल सकती है।

पर्वत और संस्कृति

  • विश्व के अनेक पारंपरिक समुदाय पर्वतों को पवित्र मानते हैं।
  • एवरेस्ट गिरिशृंग को तिब्बती लोग ‘चोमोलुंगमा’ कहते हैं।
  • नेपाल में इसे ‘सागरमाथा’ कहा जाता है।
  • कैलाश पर्वत को हिंदू, बौद्ध, जैन और बॉन धर्म के अनुयायी पवित्र मानते हैं।

पठार

  • पठार – ऐसी स्थलाकृति जो आसपास की भूमि से ऊँची होती है और जिसकी सतह प्रायः चपटी होती है।
  • पठार के कुछ किनारे सीधे ढलान वाले हो सकते हैं।
  • पठारों की ऊँचाई कुछ सौ मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक हो सकती है।

प्रमुख पठार

  • तिब्बत का पठार – विश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा पठार।
  • तिब्बत के पठार की औसत ऊँचाई लगभग 4500 मीटर है।
  • अधिक ऊँचाई के कारण तिब्बत के पठार को ‘विश्व की छत’ कहा जाता है।
  • दक्कन का पठार – मध्य और दक्षिण भारत में स्थित बहुत प्राचीन पठारों में से एक।

पठार और खनिज

  • पठारों में खनिजों के प्रचुर भंडार पाए जाते हैं।
  • इसी कारण पठारों को ‘खनिजों का भंडार-गृह’ भी कहा जाता है।
  • पठारों में खनन एक प्रमुख गतिविधि है।
  • छोटानागपुर पठार में लौह, कोयला और मैंगनीज के प्रचुर भंडार पाए जाते हैं।

पठार और कृषि

  • कई पठारों में चट्टानी मिट्टी पाई जाती है, जो मैदानी मिट्टी की तुलना में कम उपजाऊ होती है।
  • इस कारण सामान्य पठार कृषि के लिए कम अनुकूल होते हैं।
  • ज्वालामुखी से बने लावा पठारों में उपजाऊ काली मिट्टी पाई जाती है।

पठार और जलप्रपात

  • पठारों में अनेक आकर्षक जलप्रपात पाए जाते हैं।
  • विक्टोरिया जलप्रपात – दक्षिण अफ्रीका में जाम्बेजी नदी पर स्थित है।
  • हुंडरू जलप्रपात – छोटानागपुर पठार में स्वर्णरेखा नदी पर स्थित है।
  • जोग जलप्रपात – पश्चिमी घाट में शरावती नदी पर स्थित है।
  • नोहकलिकाई जलप्रपात – मेघालय के पठार क्षेत्र में स्थित है।

मैदान

  • मैदान – विस्तृत, सपाट या हल्के तरंगित धरातल वाली स्थलाकृति को मैदान कहते हैं।
  • मैदानों में सामान्यतः ऊँची पहाड़ियाँ या गहरी घाटियाँ नहीं होतीं।
  • सामान्यतः मैदानों की ऊँचाई समुद्र तल से 300 मीटर से अधिक नहीं होती।
  • पर्वत श्रेणियों से निकलने वाली नदियों की बाढ़ से मैदानों का निर्माण हो सकता है।

तलछट

  • तलछट – रेत, चट्टानों के कण और गाद जैसे पदार्थों को तलछट कहते हैं।
  • नदियाँ तलछट को अपने साथ बहाकर मैदानों में जमा करती हैं।
  • तलछट के जमा होने से मैदानों की मिट्टी उपजाऊ बनती है।

मैदान और कृषि

  • उपजाऊ मिट्टी के कारण मैदान कृषि के लिए अत्यंत अनुकूल होते हैं।
  • मैदानों में विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं।
  • मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का प्रमुख आर्थिक व्यवसाय कृषि है।
  • मैदान विविध प्रकार की वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का भी भरण-पोषण करते हैं।

मैदानी जीवन

  • प्राचीन सभ्यताएँ नदियों के उपजाऊ मैदानों के आसपास विकसित हुई थीं।
  • आज भी विश्व की बड़ी जनसंख्या मैदानों में रहती है।
  • गंगा के मैदान में भारत की कुल जनसंख्या का एक बड़ा भाग निवास करता है।
  • गंगा के मैदान में कृषि और मत्स्य पालन प्रमुख व्यवसाय हैं।

गंगा के मैदान की प्रमुख फसलें

  • खाद्य फसलें – चावल, गेहूँ, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा और रागी।
  • रेशेदार फसलें – कपास, जूट और सन।
  • पारंपरिक कृषि मुख्यतः वर्षा पर निर्भर रही है।
  • नहरों और भूमिगत जल के उपयोग से सिंचाई में वृद्धि हुई है।

मैदानी क्षेत्रों की चुनौतियाँ

  • सिंचाई से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है।
  • भूमिगत जल के अधिक उपयोग से भूमिगत जलस्तर में गिरावट आई है।
  • बढ़ती जनसंख्या और प्रदूषण भी मैदानी क्षेत्रों की प्रमुख समस्याएँ हैं।

नदियाँ और संस्कृति

  • विश्व की अनेक नदियाँ सांस्कृतिक मूल्यों को धारण करती हैं।
  • कई समुदाय नदी के स्रोत और संगम स्थलों को पवित्र मानते हैं।
  • भारत में नदियों के पवित्र स्थलों पर त्योहार, समारोह और धार्मिक क्रियाएँ आयोजित की जाती हैं।
  • मैदानों में हल्की ढलान होने के कारण नदियों में नौका-संचालन अपेक्षाकृत सुगम होता है।

संगम स्थल

  • संगम स्थल – दो या दो से अधिक नदियों के मिलने के स्थान को संगम स्थल कहते हैं।
  • भारत में अनेक नदी संगम स्थलों को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

मरुस्थल

  • मरुस्थल – ऐसे विस्तृत और शुष्क क्षेत्र जहाँ बहुत कम वर्षा होती है।
  • मरुस्थलों की वनस्पति और प्राणि जगत की अपनी विशेषताएँ होती हैं।
  • कुछ मरुस्थल गर्म होते हैं, जैसे अफ्रीका का सहारा और भारत का थार मरुस्थल।
  • कुछ मरुस्थल ठंडे होते हैं, जैसे एशिया का गोबी मरुस्थल।
  • कुछ विशेषज्ञ अंटार्कटिका महाद्वीप को भी मरुस्थल मानते हैं।

मरुस्थलीय जीवन

  • कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोग मरुस्थलीय पर्यावरण के अनुसार स्वयं को ढाल लेते हैं।
  • थार मरुस्थल के समुदाय लोकगीतों, किंवदंतियों और लोककथाओं जैसी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सँजोकर रखते हैं।

टिनै – पाँच दृश्यभूमियाँ

टिनै दृश्यभूमि मुख्य व्यवसाय
कुरिंजी पर्वतीय क्षेत्र आखेट और संग्रह करना
मुल्लई घास के मैदान और वन पशुपालन
मरुदम उपजाऊ कृषि के मैदान कृषि
नेयदल तटीय क्षेत्र मत्स्य पालन और समुद्री यात्रा
पालै शुष्क, मरुस्थल जैसे प्रदेश घुमंतू और योद्धा

मानव अनुकूलन और लचीलापन

  • मनुष्य ने विभिन्न स्थलाकृतियों में अपने रहने और जीवन-यापन के तरीके विकसित किए हैं।
  • स्थलरूप के अनुसार लोगों के व्यवसाय, घर, भोजन और जीवन-शैली में अंतर दिखाई देता है।
  • अनुकूलन – किसी परिस्थिति या पर्यावरण के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता।
  • लचीलापन – चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करने या उनके अनुसार ढलने की क्षमता।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

शब्द परिभाषा
स्थलरूप पृथ्वी की सतह के भौतिक स्वरूप को स्थलरूप कहते हैं।
पर्वत आसपास की भूमि से अधिक ऊँचा स्थलरूप, जिसकी ढलान खड़ी और शिखर सँकरा हो सकता है।
पठार आसपास की भूमि से ऊँची और प्रायः चपटी सतह वाली स्थलाकृति।
मैदान विस्तृत, सपाट या हल्के तरंगित धरातल वाली स्थलाकृति।
घाटी पहाड़ों के बीच का निचला क्षेत्र, जिसमें प्रायः नदी या जलधारा बहती है।
भूस्खलन पर्वतीय भूखंड के बड़े भाग या चट्टान के अचानक टूटकर गिरने की घटना।
आकस्मिक बाढ़ किसी स्थान पर अचानक आने वाली बाढ़।
हिमस्खलन पर्वत से अचानक हिम के गिरने की घटना।
तलछट रेत, चट्टानों के कण और गाद जैसे पदार्थ जो नदियों द्वारा बहाकर जमा किए जाते हैं।
संगम स्थल दो या दो से अधिक नदियों के मिलने का स्थान।
अनुकूलन परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता।
लचीलापन चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करने या उनके अनुसार ढलने की क्षमता।

पर्वत, पठार और मैदान में अंतर

आधार पर्वत पठार मैदान
आकार ऊँचा और प्रायः खड़ी ढलानों वाला ऊँचा और प्रायः चपटी सतह वाला विस्तृत और सपाट या हल्का तरंगित
प्रमुख गतिविधि पशुपालन, कृषि और पर्यटन खनन तथा कुछ क्षेत्रों में कृषि मुख्यतः कृषि
विशेषता ऊँचे शिखर और खड़ी ढलान चपटी ऊँची सतह उपजाऊ मिट्टी और कृषि के लिए अनुकूल

त्वरित पुनरावृत्ति

  • तीन प्रमुख स्थलरूप – पर्वत, पठार और मैदान।
  • पर्वतों की प्रमुख विशेषताएँ – ऊँचाई, खड़ी ढलान और सँकरे शिखर।
  • हिमालय अपेक्षाकृत नवीन पर्वत श्रेणी है।
  • अरावली बहुत पुरानी पर्वत श्रेणियों में से एक है।
  • तिब्बत का पठार विश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा पठार है।
  • तिब्बत के पठार को ‘विश्व की छत’ कहा जाता है।
  • पठार खनिजों के महत्वपूर्ण भंडार हैं।
  • मैदान नदियों द्वारा लाई गई तलछट के कारण उपजाऊ बनते हैं।
  • मैदानों में कृषि प्रमुख आर्थिक गतिविधि है।
  • नदियाँ आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक महत्व भी रखती हैं।
  • मरुस्थल गर्म या ठंडे दोनों प्रकार के हो सकते हैं।
  • मनुष्य अलग-अलग स्थलरूपों के अनुसार स्वयं को ढालता है।
  • हर स्थलरूप मानव जीवन के लिए कुछ अवसर और कुछ चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है।

स्थलरूप एवं जीवन

Class 6 Social Science Hindi Updated : 12 September 2026

अध्याय 3. स्थलरूप एवं जीवन

स्थलरूप

  • स्थलरूप – पृथ्वी की सतह के भौतिक स्वरूप को स्थलरूप कहते हैं।
  • स्थलरूप लाखों वर्षों में आकार लेते हैं।
  • स्थलरूपों का पर्यावरण और मानव जीवन के साथ महत्वपूर्ण संबंध होता है।
  • स्थलरूपों को व्यापक रूप से तीन प्रमुख प्रकारों में बाँटा जाता है—पर्वत, पठार और मैदान।

स्थलरूप और जीवन

  • विभिन्न स्थलरूपों में अलग-अलग प्रकार की जलवायु पाई जाती है।
  • प्रत्येक स्थलरूप में अलग-अलग प्रकार के पेड़-पौधे और जीव-जंतु पाए जाते हैं।
  • मनुष्य ने विभिन्न स्थलरूपों के अनुसार स्वयं को ढाला है।
  • अलग-अलग स्थलरूपों पर रहने वाले लोगों की संख्या भी अलग-अलग होती है।
  • प्रत्येक स्थलरूप मानव जीवन के लिए कुछ अवसर और कुछ चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है।

पर्वत

  • पर्वत – आसपास की भूमि से अधिक ऊँचा स्थलरूप पर्वत कहलाता है।
  • पर्वतों की पहचान चौड़े आधार, खड़ी ढलान और सँकरे शिखर से की जा सकती है।
  • अधिक ऊँचाई वाले कुछ पर्वत हिम से ढके रहते हैं।
  • बहुत अधिक ऊँचाई पर हिम स्थायी रूप से जमी रह सकती है।

पहाड़ी

  • पहाड़ी – कम ऊँचाई वाला ऊँचा स्थल, जिसकी ढलान कम खड़ी और शिखर अधिक गोलाकार होता है।
  • पहाड़ियाँ सामान्यतः पर्वतों की तुलना में कम ऊँची होती हैं।

ऊँचाई

  • ऊँचाई – समुद्र तल से किसी वस्तु या स्थान की ऊँचाई को ऊँचाई कहते हैं।
  • पर्वत, उड़ते हुए पक्षी, वायुयान या उपग्रह की ऊँचाई समुद्र तल से मापी जा सकती है।

हिम

  • बहुत ऊँचे और ठंडे स्थानों पर वर्षण हिम के रूप में हो सकता है।
  • हिम जल का ठोस रूप है।
  • हिम और ओले जल के ठोस रूप में गिरने के उदाहरण हैं।

वर्षण

  • वर्षण – वायुमंडल से भूमि पर किसी भी रूप में जल के गिरने को वर्षण कहते हैं।
  • वर्षा, हिमपात और ओले वर्षण के सामान्य रूप हैं।

पर्वत श्रेणी

  • पर्वत श्रेणी – आपस में जुड़े हुए या एक-दूसरे के निकट स्थित पर्वतों की लंबी श्रृंखला को पर्वत श्रेणी कहते हैं।
  • विश्व के अधिकांश पर्वतों को पर्वत श्रेणियों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • हिमालय – एशिया की प्रमुख पर्वत श्रेणी है।
  • आल्प्स – यूरोप की प्रमुख पर्वत श्रेणी है।
  • एंडीज़ – दक्षिणी अमेरिका की प्रमुख पर्वत श्रेणी है।
  • कुछ पर्वत श्रेणियाँ हजारों किलोमीटर तक फैली हुई हैं।

विश्व की प्रमुख पर्वत चोटियाँ

पर्वत चोटी स्थिति / विशेषता
एवरेस्ट गिरिशृंग हिमालय की सबसे ऊँची चोटी और विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी
कंचनजंगा गिरिशृंग हिमालय की प्रमुख ऊँची चोटी
अकोंकागुआ गिरिशृंग एंडीज़ पर्वत श्रेणी की सबसे ऊँची चोटी
किलिमंजारो गिरिशृंग पूर्वी अफ्रीका में स्थित स्वतंत्र पर्वत
ब्लांक गिरिशृंग आल्प्स का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर
अनाईमुडी गिरिशृंग दक्षिण भारत की सबसे ऊँची पर्वत चोटी

नवीन पर्वत

  • हिमालय जैसे ऊँचे और नुकीली चोटियों वाले पर्वत अपेक्षाकृत नवीन पर्वत हैं।
  • नवीन पर्वत भी पृथ्वी के इतिहास की दृष्टि से लाखों वर्ष पुराने हो सकते हैं।
  • हिमालय की ऊँचाई आज भी बढ़ रही है।

प्राचीन पर्वत

  • अरावली पर्वत श्रेणी बहुत पुरानी पर्वत श्रेणियों में से एक है।
  • अपरदन के कारण पुराने पर्वतों और पहाड़ियों की चोटियाँ गोलाकार हो सकती हैं।

पर्वतीय वन

  • पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले वनों को पर्वतीय वन कहते हैं।
  • पर्वतीय वनों में चीड़, फर, स्प्रूस और देवदार जैसे शंकुधारी वृक्ष पाए जाते हैं।
  • इन वृक्षों की पत्तियाँ सामान्यतः पतली और नुकीली होती हैं।
  • अधिक ऊँचाई पर वृक्षों की जगह घास, काई और लाइकेन उगते हैं।

काई

  • काई – छोटा हरा पौधा या वनस्पति, जिसमें फूल और वास्तविक जड़ें नहीं होतीं।
  • काई प्रायः मखमली आवरण की तरह फैली हुई दिखाई देती है।

लाइकेन

  • लाइकेन – पौधे के समान जीव, जो सामान्यतः चट्टानों, दीवारों या पेड़ों से चिपके हुए पाए जाते हैं।

पर्वतीय जीव-जंतु

  • पर्वतों के वन, नदियाँ, झीलें, घास के मैदान और कंदराएँ अनेक जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं।
  • हिम तेंदुआ, हिमालयन तहर, याक, भालू और पर्वतीय खरगोश जैसे जीव पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
  • गोल्डन ईगल, पेरेग्रिन फाल्कन, आइबेक्स और ग्रे फॉक्स भी पर्वतीय क्षेत्रों के जीव हैं।

हिमालय की नदियाँ

  • हिमालय से निकलने वाली भारतीय नदियों में गंगा विशालतम नदी है।
  • गंगा की अनेक सहायक नदियाँ हैं।
  • यमुना और घाघरा हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदियाँ हैं।
  • सोन नदी गंगा के मैदान के दक्षिण में स्थित विंध्याचल की श्रेणियों से निकलती है।

पर्वतीय जीवन

  • पर्वतीय भूभाग सामान्यतः खड़े ढलानों के साथ ऊबड़-खाबड़ और ऊँचे-नीचे होते हैं।
  • पर्वतीय क्षेत्रों की कुछ घाटियों में नियमित रूप से कृषि की जा सकती है।
  • ढलानों पर सीढ़ीनुमा खेत बनाकर की जाने वाली कृषि को वेदिका कृषि कहते हैं।
  • अनेक पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि की अपेक्षा पशुपालन को अधिक महत्व दिया जाता है।
  • पर्यटन पर्वतीय लोगों के लिए आय का महत्वपूर्ण साधन है।

पर्वतीय पर्यटन

  • पर्वतों की स्वच्छ हवा और मनोरम प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
  • स्कीइंग, हाइकिंग, पर्वतारोहण और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियाँ पर्वतीय क्षेत्रों में की जाती हैं।
  • लोग अनेक शताब्दियों से पर्वतों पर स्थित पवित्र स्थलों की तीर्थयात्रा करते रहे हैं।
  • बहुत अधिक पर्यटकों के आने से पर्वतीय पर्यावरण पर दबाव पड़ सकता है।

पर्वतीय जीवन की चुनौतियाँ

चुनौती अर्थ / प्रभाव
भूस्खलन पर्वतीय भूखंड या चट्टान का अचानक टूटकर गिरना
आकस्मिक बाढ़ किसी स्थान पर अचानक आने वाली बाढ़
बादल फटना अचानक बहुत तेज वर्षा होने की घटना
हिमस्खलन पर्वत से अचानक हिम का गिरना
भारी हिमपात अधिक मात्रा में हिम गिरने से उत्पन्न कठिनाई
अत्यधिक ठंड पर्वतीय क्षेत्रों में जीवन और आवागमन को प्रभावित करने वाली स्थिति

पर्वत और संस्कृति

  • विश्व के अनेक पारंपरिक समुदाय पर्वतों को पवित्र स्थल मानते हैं।
  • एवरेस्ट गिरिशृंग की ऊँचाई 8848 मीटर है।
  • तिब्बती लोग एवरेस्ट को ‘चोमोलुंगमा’ कहते हैं।
  • नेपाल में एवरेस्ट को ‘सागरमाथा’ कहा जाता है।
  • कैलाश पर्वत को हिंदू, बौद्ध, जैन और बॉन धर्म के अनुयायी पवित्र मानते हैं।

पठार

  • पठार – ऐसी स्थलाकृति जो आसपास की भूमि से ऊँची होती है और जिसकी सतह प्रायः चपटी होती है।
  • पठार के कुछ किनारे सीधे ढलान वाले हो सकते हैं।
  • पठारों की ऊँचाई कुछ सौ मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक हो सकती है।

तिब्बत का पठार

  • तिब्बत का पठार विश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा पठार है।
  • इसकी औसत ऊँचाई लगभग 4500 मीटर है।
  • अधिक ऊँचाई के कारण इसे ‘विश्व की छत’ कहा जाता है।
  • यह पूर्व से पश्चिम दिशा में लगभग 2500 किलोमीटर तक फैला हुआ है।

दक्कन का पठार

  • दक्कन का पठार मध्य और दक्षिण भारत में स्थित है।
  • यह विश्व के सबसे पुराने पठारों में से एक है।
  • यह कई लाख वर्ष पहले ज्वालामुखी की सक्रियता के कारण बना था।

पठार और खनिज

  • पठारों में खनिजों के प्रचुर भंडार पाए जाते हैं।
  • इसी कारण पठारों को ‘खनिजों का भंडार-गृह’ कहा जाता है।
  • पठारों में खनन एक प्रमुख गतिविधि है।
  • पूर्वी अफ्रीका का पठार सोने और हीरे के खनन के लिए प्रसिद्ध है।
  • छोटानागपुर पठार में लौह, कोयला और मैंगनीज के प्रचुर भंडार पाए जाते हैं।

पठार और कृषि

  • कई पठारों में चट्टानी मिट्टी पाई जाती है।
  • चट्टानी मिट्टी सामान्यतः मैदानी मिट्टी की तुलना में कम उपजाऊ होती है।
  • इस कारण कई पठार कृषि के लिए कम अनुकूल होते हैं।
  • ज्वालामुखी से बने लावा पठार उपजाऊ हो सकते हैं।
  • लावा पठारों में समृद्ध काली मिट्टी पाई जाती है।

पठार और जलप्रपात

  • पठारों में अनेक आकर्षक जलप्रपात पाए जाते हैं।
  • विक्टोरिया जलप्रपात – दक्षिण अफ्रीका में जाम्बेजी नदी पर स्थित है।
  • हुंडरू जलप्रपात – छोटानागपुर पठार में स्वर्णरेखा नदी पर स्थित है।
  • जोग जलप्रपात – पश्चिमी घाट में शरावती नदी पर स्थित है।
  • नहकालीकाई जलप्रपात – मेघालय के पठारी क्षेत्र में स्थित है और लगभग 340 मीटर की ऊँचाई से गिरता है।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

शब्द परिभाषा
स्थलरूप पृथ्वी की सतह के भौतिक स्वरूप को स्थलरूप कहते हैं।
पर्वत आसपास की भूमि से अधिक ऊँचा स्थलरूप पर्वत कहलाता है।
पहाड़ी कम ऊँचाई वाला ऊँचा स्थल, जिसकी ढलान अपेक्षाकृत कम खड़ी और शिखर गोलाकार होता है।
पर्वत श्रेणी पर्वतों की लंबी श्रृंखला को पर्वत श्रेणी कहते हैं।
पर्वतीय वन पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले वनों को पर्वतीय वन कहते हैं।
पठार आसपास की भूमि से ऊँची और प्रायः चपटी सतह वाली स्थलाकृति को पठार कहते हैं।
भूस्खलन पर्वतीय भूखंड के बड़े भाग या चट्टान के अचानक टूटकर गिरने की घटना।
हिमस्खलन पर्वत से अचानक हिम के गिरने की घटना।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • स्थलरूप के तीन प्रमुख प्रकार – पर्वत, पठार और मैदान।
  • हिमालय – अपेक्षाकृत नवीन पर्वत श्रेणी।
  • अरावली – बहुत पुरानी पर्वत श्रेणी।
  • एवरेस्ट गिरिशृंग – विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी।
  • तिब्बत का पठार – विश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा पठार।
  • तिब्बत का पठार – ‘विश्व की छत’ कहलाता है।
  • दक्कन का पठार – भारत के प्राचीन पठारों में से एक।
  • पठार खनिजों के प्रचुर भंडार के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • छोटानागपुर पठार – लौह, कोयला और मैंगनीज के भंडार के लिए महत्वपूर्ण।
  • वेदिका कृषि – पर्वतीय ढलानों को सीढ़ीनुमा बनाकर की जाने वाली कृषि।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • स्थलरूप पृथ्वी की सतह के भौतिक स्वरूप हैं।
  • पर्वत ऊँचे और प्रायः खड़ी ढलानों वाले स्थलरूप हैं।
  • पठार ऊँचे तथा प्रायः चपटे स्थलरूप हैं।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में शंकुधारी वृक्ष और अनेक विशिष्ट जीव पाए जाते हैं।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि, पशुपालन और पर्यटन प्रमुख गतिविधियाँ हैं।
  • भूस्खलन, बादल फटना और हिमस्खलन पर्वतीय क्षेत्रों की प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
  • पठार खनिजों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
  • लावा पठारों की मिट्टी कृषि के लिए उपजाऊ हो सकती है।

स्थलरूप एवं जीवन

Class 6 Social Science Hindi Updated : 12 September 2026

अध्याय 3. स्थलरूप एवं जीवन

मैदान

  • मैदान – विस्तृत, सपाट या हल्के तरंगित धरातल वाले स्थलरूप को मैदान कहते हैं।
  • मैदानों में सामान्यतः ऊँची पहाड़ियाँ या गहरी घाटियाँ नहीं होती हैं।
  • सामान्यतः मैदानों की ऊँचाई समुद्र तल से 300 मीटर से अधिक नहीं होती है।
  • मैदान मानव निवास और कृषि के लिए सबसे अनुकूल स्थलरूपों में से एक हैं।

मैदानों का निर्माण

  • अनेक मैदानों का निर्माण पर्वतों से निकलने वाली नदियों द्वारा किया जाता है।
  • नदियाँ अपने साथ रेत, चट्टानों के छोटे कण और गाद बहाकर लाती हैं।
  • नदियों द्वारा लाए गए इन पदार्थों के लंबे समय तक जमा होने से उपजाऊ मैदानों का निर्माण होता है।

तलछट

  • तलछट – नदियों द्वारा बहाकर लाए गए रेत, चट्टानों के कण और गाद जैसे पदार्थों को तलछट कहते हैं।
  • नदियाँ तलछट को मैदानी क्षेत्रों में जमा करती हैं।
  • तलछट के जमाव के कारण मैदानी मिट्टी उपजाऊ बनती है।

मैदान और कृषि

  • उपजाऊ मिट्टी के कारण मैदान कृषि के लिए अत्यंत अनुकूल होते हैं।
  • मैदानी क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं।
  • कृषि मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की प्रमुख आर्थिक गतिविधियों में से एक है।
  • समतल भूमि के कारण सिंचाई और कृषि कार्य अपेक्षाकृत आसान होते हैं।

मैदानी जीवन

  • मैदान मानव निवास के लिए अनुकूल होते हैं, इसलिए यहाँ बड़ी संख्या में लोग रहते हैं।
  • प्राचीन काल की अनेक सभ्यताएँ नदियों के उपजाऊ मैदानों के आसपास विकसित हुई थीं।
  • आज भी विश्व की बड़ी जनसंख्या मैदानी क्षेत्रों में निवास करती है।
  • मैदान कृषि के साथ-साथ परिवहन और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अनुकूल होते हैं।

गंगा का मैदान

  • गंगा का मैदान भारत का एक विशाल और उपजाऊ मैदानी क्षेत्र है।
  • भारत की कुल जनसंख्या का एक बड़ा भाग गंगा के मैदान में निवास करता है।
  • इस क्षेत्र में कृषि और मत्स्य पालन प्रमुख व्यवसाय हैं।
  • गंगा और उसकी सहायक नदियाँ इस मैदान को जल और उपजाऊ तलछट प्रदान करती हैं।

गंगा के मैदान की प्रमुख फसलें

  • खाद्य फसलें – चावल, गेहूँ, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा और रागी।
  • रेशेदार फसलें – कपास, जूट और सन।
  • पारंपरिक कृषि मुख्यतः वर्षा पर निर्भर रही है।
  • नहरों और भूमिगत जल के उपयोग से सिंचाई की सुविधाओं में वृद्धि हुई है।

सिंचाई

  • सिंचाई – फसलों को कृत्रिम साधनों द्वारा जल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सिंचाई कहते हैं।
  • नहरें और भूमिगत जल सिंचाई के महत्वपूर्ण साधन हैं।
  • सिंचाई की सहायता से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है।

भूमिगत जल की समस्या

  • कृषि के लिए भूमिगत जल का अधिक उपयोग किया जा रहा है।
  • भूमिगत जल के अत्यधिक उपयोग से कई क्षेत्रों में जलस्तर नीचे जा रहा है।
  • भूमिगत जल का संतुलित उपयोग भविष्य के लिए आवश्यक है।

मैदानी क्षेत्रों की चुनौतियाँ

  • बढ़ती जनसंख्या मैदानी क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डालती है।
  • भूमिगत जल का अत्यधिक उपयोग जलस्तर में गिरावट का कारण बन सकता है।
  • प्रदूषण भी मैदानी क्षेत्रों की प्रमुख समस्याओं में से एक है।

नदियाँ और मानव जीवन

  • नदियाँ मनुष्य को जल उपलब्ध कराती हैं और कृषि में सहायता करती हैं।
  • नदियों के आसपास उपजाऊ मैदान विकसित होते हैं।
  • नदियाँ मत्स्य पालन तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
  • मैदानी क्षेत्रों में हल्की ढलान के कारण नदियों में नौका-संचालन अपेक्षाकृत आसान होता है।

नदियाँ और संस्कृति

  • विश्व की अनेक नदियाँ केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।
  • भारत में अनेक नदियों को पवित्र माना जाता है।
  • नदियों के स्रोत और संगम स्थलों को कई समुदाय पवित्र मानते हैं।
  • नदियों के पवित्र स्थलों पर त्योहार, समारोह और धार्मिक क्रियाएँ आयोजित की जाती हैं।

संगम स्थल

  • संगम स्थल – दो या दो से अधिक नदियों के मिलने के स्थान को संगम स्थल कहते हैं।
  • भारत में अनेक संगम स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

मरुस्थल

  • मरुस्थल – ऐसे विस्तृत और शुष्क क्षेत्र जहाँ बहुत कम वर्षा होती है।
  • मरुस्थलों में जल की उपलब्धता बहुत कम होती है।
  • मरुस्थलों की वनस्पति और जीव-जंतु वहाँ की कठिन परिस्थितियों के अनुकूल होते हैं।
  • मरुस्थल गर्म और ठंडे दोनों प्रकार के हो सकते हैं।

गर्म मरुस्थल

  • गर्म मरुस्थलों में तापमान बहुत अधिक हो सकता है और वर्षा बहुत कम होती है।
  • सहारा – अफ्रीका का प्रसिद्ध गर्म मरुस्थल है।
  • थार – भारत का प्रमुख गर्म मरुस्थल है।

ठंडे मरुस्थल

  • ठंडे मरुस्थलों में तापमान बहुत कम रहता है और वर्षा भी कम होती है।
  • गोबी – एशिया का प्रसिद्ध ठंडा मरुस्थल है।
  • कुछ विशेषज्ञ अंटार्कटिका को भी बहुत कम वर्षण के कारण मरुस्थल मानते हैं।

मरुस्थलीय जीवन

  • मरुस्थलों की कठिन परिस्थितियों के बावजूद मनुष्य ने वहाँ के पर्यावरण के अनुसार स्वयं को ढाल लिया है।
  • मरुस्थलीय समुदाय उपलब्ध जल और प्राकृतिक संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करते हैं।
  • थार मरुस्थल के समुदायों की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएँ हैं।
  • लोकगीत, किंवदंतियाँ और लोककथाएँ थार की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण भाग हैं।

प्राकृतिक दृश्यभूमि और मानव जीवन

  • अलग-अलग प्राकृतिक दृश्यभूमियों में रहने वाले लोगों के जीवन और व्यवसाय अलग-अलग होते हैं।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में आखेट और संग्रह जैसी गतिविधियाँ देखने को मिल सकती हैं।
  • घास के मैदानों में पशुपालन प्रमुख गतिविधि हो सकती है।
  • उपजाऊ मैदानों में कृषि और तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन प्रमुख व्यवसाय हो सकते हैं।

टिनै

  • प्राचीन तमिल संगम साहित्य में प्राकृतिक दृश्यभूमियों और उनसे जुड़े मानव जीवन का विस्तृत वर्णन मिलता है।
  • इन दृश्यभूमियों को टिनै कहा गया है।
  • टिनै में प्राकृतिक पर्यावरण के साथ वहाँ के लोगों के व्यवसाय और जीवन-पद्धति को भी जोड़ा गया है।
  • पाँच प्रमुख टिनै – कुरिंजी, मुल्लई, मरुदम, नेयदल और पालै हैं।

पाँच टिनै

टिनै दृश्यभूमि मुख्य व्यवसाय / जीवन
कुरिंजी पर्वतीय क्षेत्र आखेट और संग्रह करना
मुल्लई घास के मैदान और वन पशुपालन
मरुदम उपजाऊ कृषि के मैदान कृषि
नेयदल तटीय क्षेत्र मत्स्य पालन और समुद्री यात्रा
पालै शुष्क और मरुस्थल जैसा क्षेत्र घुमंतू और योद्धा

मानव अनुकूलन

  • अनुकूलन – पर्यावरण और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता को अनुकूलन कहते हैं।
  • मनुष्य ने पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल जैसी अलग-अलग स्थलाकृतियों के अनुसार जीवन के तरीके विकसित किए हैं।
  • स्थलरूप के अनुसार लोगों के व्यवसाय, भोजन, आवास और जीवन-शैली में अंतर दिखाई देता है।

लचीलापन

  • लचीलापन – चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करने तथा उनके अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता है।
  • मनुष्य का लचीलापन उसे कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों में भी जीवन-यापन करने में सहायता करता है।

स्थलरूप और प्रमुख आर्थिक गतिविधियाँ

स्थलरूप प्रमुख गतिविधियाँ
पर्वत पशुपालन, वेदिका कृषि और पर्यटन
पठार खनन और कृषि
मैदान कृषि, मत्स्य पालन और अन्य आर्थिक गतिविधियाँ
मरुस्थल स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पशुपालन तथा अन्य गतिविधियाँ

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

शब्द परिभाषा
मैदान विस्तृत, सपाट या हल्के तरंगित धरातल वाले स्थलरूप को मैदान कहते हैं।
तलछट रेत, चट्टानों के कण और गाद जैसे पदार्थ जो नदियों द्वारा बहाकर जमा किए जाते हैं।
सिंचाई फसलों को कृत्रिम साधनों द्वारा जल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया।
संगम स्थल दो या दो से अधिक नदियों के मिलने का स्थान।
मरुस्थल विस्तृत और शुष्क क्षेत्र जहाँ बहुत कम वर्षा होती है।
टिनै प्राचीन तमिल साहित्य में प्राकृतिक दृश्यभूमि और उससे जुड़े मानव जीवन का वर्गीकरण।
अनुकूलन परिस्थितियों और पर्यावरण के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता।
लचीलापन चुनौतियों का सामना करने और उनके अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता।

पर्वत, पठार और मैदान में अंतर

आधार पर्वत पठार मैदान
धरातल ऊँचा और खड़ी ढलानों वाला ऊँचा और प्रायः चपटा सपाट या हल्का तरंगित
कृषि सीमित, वेदिका कृषि की जाती है कई क्षेत्रों में कम अनुकूल अत्यधिक अनुकूल
प्रमुख गतिविधि पशुपालन और पर्यटन खनन कृषि
जनसंख्या अपेक्षाकृत कम क्षेत्र के अनुसार भिन्न अधिक

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • मैदान सामान्यतः समुद्र तल से 300 मीटर से अधिक ऊँचे नहीं होते हैं।
  • नदियों द्वारा लाई गई तलछट मैदानों को उपजाऊ बनाती है।
  • गंगा का मैदान भारत का प्रमुख उपजाऊ और घनी आबादी वाला क्षेत्र है।
  • गंगा के मैदान में कृषि और मत्स्य पालन प्रमुख व्यवसाय हैं।
  • सहारा और थार गर्म मरुस्थलों के उदाहरण हैं।
  • गोबी ठंडे मरुस्थल का उदाहरण है।
  • टिनै की पाँच दृश्यभूमियाँ – कुरिंजी, मुल्लई, मरुदम, नेयदल और पालै।
  • कुरिंजी – पर्वतीय क्षेत्र।
  • मुल्लई – घास के मैदान और वन।
  • मरुदम – उपजाऊ कृषि के मैदान।
  • नेयदल – तटीय क्षेत्र।
  • पालै – शुष्क और मरुस्थल जैसा क्षेत्र।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • मैदान विस्तृत और लगभग सपाट स्थलरूप हैं।
  • नदियाँ तलछट जमा करके उपजाऊ मैदानों का निर्माण करती हैं।
  • उपजाऊ मिट्टी के कारण मैदान कृषि और मानव निवास के लिए अनुकूल होते हैं।
  • नदियों का आर्थिक और सांस्कृतिक दोनों प्रकार का महत्व है।
  • मरुस्थलों में वर्षा बहुत कम होती है।
  • मरुस्थल गर्म और ठंडे दोनों प्रकार के हो सकते हैं।
  • प्राचीन तमिल साहित्य में पाँच प्राकृतिक दृश्यभूमियों को टिनै कहा गया है।
  • मनुष्य विभिन्न स्थलरूपों के अनुसार अपने जीवन और व्यवसाय को ढालता है।
  • अनुकूलन और लचीलापन मनुष्य को कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों में जीवन-यापन करने में सहायता करते हैं।

स्थलरूप एवं जीवन

Class 6 Social Science Hindi Updated : 12 September 2026

अध्याय 3. स्थलरूप एवं जीवन — Assignment

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. नदियों द्वारा बहाकर लाई गई रेत, चट्टानों के कण और गाद को क्या कहा जाता है?

    (क) चट्टान    (ख) तलछट    (ग) खनिज    (घ) मिट्टी

  2. मैदानों की प्रमुख विशेषता क्या है?

    (क) बहुत अधिक ऊँचाई    (ख) खड़ी ढलान    (ग) समतल धरातल    (घ) अत्यधिक ठंड

  3. मैदानों में कृषि के लिए अनुकूलता का प्रमुख कारण क्या है?

    (क) बर्फ    (ख) उपजाऊ मिट्टी    (ग) कम जनसंख्या    (घ) ऊँची पर्वत चोटियाँ

  4. भारत के गंगा के मैदान में लगभग कितने लोग रहते हैं?

    (क) 10 करोड़    (ख) 20 करोड़    (ग) 40 करोड़    (घ) 60 करोड़

  5. गंगा के मैदान में निम्नलिखित में से कौन-सी खाद्य फसल उगाई जाती है?

    (क) चावल    (ख) जूट    (ग) कपास    (घ) सन

  6. गंगा के मैदान में प्रमुख व्यवसाय कौन-से हैं?

    (क) खनन और पर्यटन

    (ख) मत्स्य पालन और कृषि

    (ग) आखेट और संग्रह

    (घ) समुद्री यात्रा और पशुपालन

  7. सिंचाई के लिए निम्नलिखित में से किसका उपयोग किया जाता है?

    (क) नहरें और भूमिगत जल

    (ख) केवल बर्फ

    (ग) केवल समुद्री जल

    (घ) केवल ओस

  8. दो या दो से अधिक नदियों के मिलने के स्थान को क्या कहते हैं?

    (क) डेल्टा    (ख) संगम स्थल    (ग) पठार    (घ) घाटी

  9. निम्नलिखित में से कौन-सा गर्म मरुस्थल है?

    (क) गोबी    (ख) थार    (ग) अंटार्कटिका    (घ) कोई नहीं

  10. गोबी किस प्रकार का मरुस्थल है?

    (क) गर्म मरुस्थल    (ख) ठंडा मरुस्थल    (ग) तटीय मरुस्थल    (घ) पर्वतीय मरुस्थल

  11. टिनै में कुरिंजी किस दृश्यभूमि को दर्शाता है?

    (क) तटीय क्षेत्र    (ख) पर्वतीय क्षेत्र    (ग) कृषि मैदान    (घ) शुष्क क्षेत्र

  12. टिनै में मरुदम किससे संबंधित है?

    (क) पर्वतीय क्षेत्र    (ख) घास के मैदान और वन    (ग) उपजाऊ कृषि के मैदान    (घ) तटीय क्षेत्र

  13. नेयदल दृश्यभूमि से संबंधित प्रमुख व्यवसाय क्या है?

    (क) कृषि    (ख) पशुपालन    (ग) मत्स्य पालन और समुद्री यात्रा    (घ) आखेट

  14. पालै किस प्रकार के प्रदेश को दर्शाता है?

    (क) पर्वतीय प्रदेश    (ख) शुष्क, मरुस्थल जैसे प्रदेश    (ग) तटीय प्रदेश    (घ) उपजाऊ मैदान

  15. पर्यावरण और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता को क्या कहते हैं?

    (क) अनुकूलन    (ख) तलछट    (ग) सिंचाई    (घ) प्रवाह

रिक्त स्थान भरिए

  1. नदियों द्वारा बहाकर लाई गई रेत, चट्टानों के कण और गाद को __________ कहते हैं।
  2. मैदान कृषि के लिए __________ स्थलरूपों में से एक हैं।
  3. भारत का एक प्रमुख उपजाऊ मैदान __________ का मैदान है।
  4. दो या दो से अधिक नदियों के मिलने के स्थान को __________ कहते हैं।
  5. सहारा अफ्रीका का प्रसिद्ध __________ मरुस्थल है।
  6. गोबी एशिया का प्रसिद्ध __________ मरुस्थल है।
  7. टिनै की पाँच दृश्यभूमियों में कुरिंजी, मुल्लई, मरुदम, नेयदल और __________ शामिल हैं।
  8. मरुदम दृश्यभूमि का प्रमुख व्यवसाय __________ है।

सही या गलत लिखिए

  1. मैदानों में सामान्यतः समतल या हल्का तरंगित धरातल पाया जाता है।
  2. तलछट मैदानों की मिट्टी को उपजाऊ बनाने में सहायता करती है।
  3. गंगा के मैदान में कृषि का कोई महत्व नहीं है।
  4. नदियाँ मानव जीवन के लिए आर्थिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं।
  5. सहारा एक ठंडा मरुस्थल है।
  6. थार एक गर्म मरुस्थल है।
  7. कुरिंजी तटीय क्षेत्र से संबंधित है।
  8. नेयदल तटीय क्षेत्र से संबंधित है।

एक शब्द / एक वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. मैदानों को उपजाऊ बनाने वाले नदियों द्वारा लाए गए पदार्थ क्या कहलाते हैं?
  2. भारत का प्रमुख गर्म मरुस्थल कौन-सा है?
  3. एशिया का प्रसिद्ध ठंडा मरुस्थल कौन-सा है?
  4. टिनै में पर्वतीय क्षेत्र को क्या कहा गया है?
  5. टिनै में तटीय क्षेत्र को क्या कहा गया है?
  6. दो नदियों के मिलने के स्थान को क्या कहते हैं?

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. मैदान क्या हैं? उनकी दो विशेषताएँ लिखिए।
  2. नदियाँ मैदानों को उपजाऊ कैसे बनाती हैं?
  3. गंगा के मैदान में कृषि क्यों महत्वपूर्ण है?
  4. सिंचाई क्या है? इसके दो साधन लिखिए।
  5. मैदानी क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या पाए जाने के दो कारण लिखिए।
  6. नदियाँ मानव जीवन में क्यों महत्वपूर्ण हैं?
  7. मरुस्थल क्या है? इसके दो प्रमुख प्रकार लिखिए।
  8. मनुष्य मरुस्थलीय क्षेत्रों में किस प्रकार जीवन-यापन करता है?

अंतर स्पष्ट कीजिए

  1. गर्म मरुस्थल और ठंडे मरुस्थल में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  2. पर्वतीय क्षेत्र और मैदानी क्षेत्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  3. कुरिंजी और नेयदल दृश्यभूमि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  4. मरुदम और पालै दृश्यभूमि में अंतर स्पष्ट कीजिए।

टिनै से संबंधित प्रश्न

टिनै दृश्यभूमि मुख्य व्यवसाय
कुरिंजी ____________ ____________
मुल्लई ____________ ____________
मरुदम ____________ ____________
नेयदल ____________ ____________
पालै ____________ ____________

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. मैदानी क्षेत्रों की प्रमुख विशेषताओं और मानव जीवन में उनके महत्व का वर्णन कीजिए।
  2. गंगा के मैदान में कृषि और मत्स्य पालन के महत्व को समझाइए।
  3. नदियाँ मानव जीवन और संस्कृति को किस प्रकार प्रभावित करती हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
  4. मरुस्थलीय क्षेत्रों में मानव जीवन की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  5. प्राचीन तमिल साहित्य में वर्णित पाँच टिनै दृश्यभूमियों का वर्णन उनके प्रमुख व्यवसायों सहित कीजिए।

गतिविधि आधारित प्रश्न

  1. भारत के मानचित्र में गंगा नदी और गंगा के मैदान को पहचानकर दर्शाइए।
  2. भारत के मानचित्र में थार मरुस्थल को चिन्हित कीजिए।
  3. विश्व के मानचित्र में सहारा और गोबी मरुस्थल को चिन्हित कीजिए।
  4. अपने क्षेत्र की प्रमुख स्थलरूप विशेषता लिखिए और बताइए कि वहाँ के लोगों के जीवन पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है।

परीक्षा अभ्यास – सोचिए और उत्तर दीजिए

  1. यदि किसी मैदान में नदियों द्वारा तलछट जमा होना बंद हो जाए, तो कृषि पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
  2. मैदानी क्षेत्रों में भूमिगत जल के अत्यधिक उपयोग से कौन-सी समस्या उत्पन्न हो सकती है?
  3. यदि आप मरुस्थल में रहते हों तो जल का उपयोग किस प्रकार सावधानी से करेंगे?
  4. टिनै की अवधारणा से हमें मानव जीवन और प्राकृतिक पर्यावरण के संबंध के बारे में क्या पता चलता है?

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Prepare with Confidence

Success in examinations depends on regular practice, conceptual understanding, and effective revision. Our Class 6 CBSE Notes are designed to help students study smarter instead of studying longer. By revising chapter-wise notes regularly, learners can improve their understanding, remember important concepts for a longer period, and write better answers during examinations.

Along with these notes, students can also explore NCERT Solutions, MCQ Questions, Online Tests, Important Questions, Study Materials, and other learning resources available on ATP Education. Together, these resources provide complete academic support for effective learning and better examination preparation.

Start exploring the CBSE Notes for Class 6 today and make your learning journey easier with well-organized chapter-wise notes, quick revision material, and reliable study resources prepared especially for CBSE students.

Benefits of Studying with Our CBSE Notes

  • Chapter-wise Coverage: Every chapter is explained in a structured and easy-to-follow format.
  • Latest CBSE Syllabus: Notes are prepared according to the latest CBSE curriculum and NCERT guidelines.
  • Quick Revision: Revise important concepts, formulas, definitions, and key points in less time.
  • Simple Language: Difficult topics are explained in clear and student-friendly language for better understanding.
  • Concept-Based Learning: Focus on understanding concepts instead of memorizing answers.
  • Exam-Oriented Preparation: Helps students prepare effectively for class tests, unit tests, half-yearly, annual, and board examinations.
  • Subject-wise Organization: Easily access notes for Mathematics, Science, English, Hindi, Social Science, Physics, Chemistry, Biology, Economics, and more.
  • Time-Saving Study Material: Well-organized notes reduce study time and improve learning efficiency.
  • Improves Answer Writing: Learn important points and present answers in a better and more organized manner.
  • Boosts Confidence: Regular revision strengthens concepts and increases confidence before examinations.
  • Free Learning Resource: Access high-quality CBSE Notes without any subscription or hidden charges.
  • Available in Hindi & English Medium: Study comfortably in your preferred medium with chapter-wise notes.