भारत, अर्थात इंडिया - Class 6 Social Science Hindi CBSE Notes
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भारत, अर्थात इंडिया - Class 6 Social Science Hindi CBSE Notes
भारत, अर्थात इंडिया
अध्याय 5. भारत, अर्थात इंडिया
यह अध्याय भारत के प्राचीन नामों, उसकी भौगोलिक पहचान तथा भारत और इंडिया नामों की उत्पत्ति के बारे में बताता है। इसमें भारतीय तथा विदेशी स्रोतों के आधार पर भारत की पहचान और उसके बदलते नामों को समझाया गया है।
भारत और भारतीय उपमहाद्वीप
- आज का भारत एक आधुनिक राष्ट्र है जिसकी निश्चित सीमाएँ, राज्य और जनसंख्या है।
- प्राचीन समय में भारतीय उपमहाद्वीप की सीमाएँ और राजनीतिक स्वरूप आज से अलग थे।
- इस क्षेत्र को सामान्यतः भारतीय उपमहाद्वीप कहा जाता है।
- इतिहास के अलग-अलग काल में इस क्षेत्र के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग हुआ।
प्राचीन भारतीय नाम
| नाम | अर्थ/विशेषता |
|---|---|
| सप्त सैंधव | सात नदियों की भूमि; ऋग्वेद में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए प्रयोग। |
| भारतवर्ष | समूचे भारतीय उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त नाम। |
| जम्बूद्वीप | प्रारंभ में जम्बू वृक्ष के फल के द्वीप के अर्थ में; बाद में भारतीय उपमहाद्वीप का पर्याय बना। |
| भारत | बाद के समय में भारतीय उपमहाद्वीप के लिए अधिक प्रचलित नाम। |
सप्त सैंधव
- ऋग्वेद में भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को सप्त सैंधव कहा गया है।
- सप्त सैंधव का अर्थ है—सात नदियों की भूमि।
- ‘सैंधव’ शब्द सिंधु से आया है।
भारतवर्ष
- महाभारत में ‘भारतवर्ष’ शब्द का प्रयोग मिलता है।
- भारतवर्ष का अर्थ ‘भरत का देश’ है।
- ‘भरत’ नाम का उल्लेख सबसे पहले ऋग्वेद में मिलता है।
- बाद के साहित्य में ‘भरत’ नाम विभिन्न राजाओं के लिए भी मिलता है।
जम्बूद्वीप
- ‘जम्बूद्वीप’ का अर्थ जम्बू वृक्ष के फल का द्वीप बताया गया है।
- जम्बू वृक्ष भारत में पाया जाने वाला सामान्य वृक्ष है।
- बाद में जम्बूद्वीप भारतीय उपमहाद्वीप का पर्याय बन गया।
- सम्राट अशोक के एक शिलालेख में ‘जम्बूद्वीप’ नाम से संपूर्ण भारत का वर्णन किया गया है।
- अशोक के समय जम्बूद्वीप में आज के भारत के साथ बांग्लादेश, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान के कुछ भाग भी सम्मिलित थे।
भारत नाम का प्रचलन
- कुछ शताब्दियों बाद भारतीय उपमहाद्वीप के लिए सामान्यतः ‘भारत’ नाम का प्रयोग होने लगा।
- विष्णु पुराण में भारत को समुद्र के उत्तर और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में स्थित देश के रूप में बताया गया है।
- ‘भारत’ नाम आज भी देश के लिए व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है।
भारत की भौगोलिक पहचान
- प्राचीन भारतीय साहित्य में भारत के विभिन्न क्षेत्रों, नदियों और लोगों का उल्लेख मिलता है।
- महाभारत में कश्मीर, कुरुक्षेत्र, वंग, प्राग्ज्योतिष, कच्छ और केरल जैसे क्षेत्रों का उल्लेख है।
- प्राचीन तमिल साहित्य में भी भारत की व्यापक भौगोलिक सीमा का वर्णन मिलता है।
- इससे पता चलता है कि प्राचीन भारतीय अपने विस्तृत भूगोल से परिचित थे।
इंडिया नाम की उत्पत्ति
- भारत के लिए ‘इंडिया’ नाम की उत्पत्ति सिंधु नदी से संबंधित है।
- प्राचीन फारसियों ने सिंधु क्षेत्र को हिंद, हिद या हिंदू जैसे शब्दों से संबोधित किया।
- प्राचीन फारसी में ‘हिंद’ मुख्यतः एक भौगोलिक शब्द था; इसे हिंदू धर्म के अर्थ में नहीं समझना चाहिए।
- फारसी स्रोतों के आधार पर प्राचीन यूनानियों ने इस क्षेत्र को इंडोई अथवा इंडिके कहा।
- यूनानी भाषा में ‘ह’ ध्वनि नहीं होने के कारण ‘हिंद’ से ‘इंड’ रूप विकसित हुआ।
विभिन्न भाषाओं में भारत के नाम
| भाषा/स्रोत | प्रयुक्त नाम |
|---|---|
| भारतीय | भारत, भारतवर्ष, जम्बूद्वीप |
| फारसी | हिंद |
| यूनानी | इंडोई / इंडिके |
| चीनी | यिन्तू / तु-यिदं |
| अरबी और फारसी | हिंदुस्तान |
| अंग्रेजी | इंडिया |
| फ्रेंच | इन्डे |
हिंदुस्तान
- ‘हिंदुस्तान’ शब्द का प्रयोग लगभग 1800 वर्ष पूर्व एक फारसी शिलालेख में मिलता है।
- बाद में भारत पर आक्रमण करने वालों ने भारतीय उपमहाद्वीप के लिए इस शब्द का प्रयोग किया।
चीनी यात्रियों और भारत
- प्राचीन चीनियों ने भारत के साथ संपर्क स्थापित किया था।
- चीनी ग्रंथों में भारत के लिए यिन्तू या तु-यिदं जैसे नाम मिलते हैं।
- इन नामों की उत्पत्ति भी मूलतः सिंधु शब्द से हुई।
- जुआनज़ांग (Xuanzang) ने 7वीं शताब्दी में चीन से भारत की यात्रा की।
- उन्होंने भारत के कई भागों का भ्रमण किया, विद्वानों से मिले और बौद्ध ग्रंथों को एकत्र किया।
- भारत में लगभग 17 वर्ष रहने के बाद वे चीन लौटे और संस्कृत ग्रंथों का चीनी भाषा में अनुवाद किया।
भारत अर्थात इंडिया
- भारतीय संविधान की शुरुआत में “India, that is Bharat” वाक्यांश का प्रयोग किया गया है।
- संविधान के हिंदी अनुवाद में “भारत अर्थात इंडिया” लिखा गया है।
- भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
| शब्द | परिभाषा |
|---|---|
| भारतीय उपमहाद्वीप | विश्व का वह विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र जिसे इतिहास में विभिन्न नामों से जाना गया। |
| निवासी | वे लोग जो किसी स्थान विशेष में रहते हैं। |
| संविधान | किसी देश के आधारभूत सिद्धांतों और कानूनों को बताने वाला प्रलेख। |
भारत के नामों में परिवर्तन
| क्रम | नाम | मुख्य स्रोत/संबंध |
|---|---|---|
| 1 | सप्त सैंधव | ऋग्वेद |
| 2 | भारतवर्ष | महाभारत |
| 3 | जम्बूद्वीप | प्राचीन भारतीय परंपरा और अशोक के शिलालेख |
| 4 | भारत | प्राचीन भारतीय साहित्य में बाद में अधिक प्रचलित |
| 5 | हिंद | फारसी स्रोत |
| 6 | इंडोई / इंडिके | यूनानी स्रोत |
| 7 | इंडिया | बाद की यूरोपीय भाषाओं में विकसित रूप |
महत्वपूर्ण अंतर
| भारत | इंडिया |
|---|---|
| प्राचीन भारतीय नाम है। | सिंधु से विकसित विदेशी नाम-परंपरा से संबंधित है। |
| भारतवर्ष आदि नामों से भारतीय साहित्य में मिलता है। | हिंद → इंडोई/इंडिके → इंडिया के रूप में नाम विकसित हुआ। |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- ऋग्वेद में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए सप्त सैंधव नाम मिलता है।
- सप्त सैंधव का अर्थ है—सात नदियों की भूमि।
- महाभारत में भारतवर्ष और जम्बूद्वीप शब्द मिलते हैं।
- ‘भारतवर्ष’ का अर्थ है—भरत का देश।
- अशोक ने एक शिलालेख में जम्बूद्वीप नाम का प्रयोग किया।
- विष्णु पुराण में भारत को समुद्र के उत्तर और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में बताया गया है।
- फारसियों के ‘हिंद’ शब्द का संबंध सिंधु से था।
- यूनानियों ने भारत के लिए इंडोई/इंडिके नाम का प्रयोग किया।
- चीनी स्रोतों में भारत के लिए यिन्तू और तु-यिदं जैसे नाम मिलते हैं।
- ‘हिंदुस्तान’ शब्द का प्रयोग लगभग 1800 वर्ष पूर्व एक फारसी शिलालेख में मिलता है।
- जुआनज़ांग ने 7वीं शताब्दी में भारत की यात्रा की।
- भारतीय संविधान में “India, that is Bharat” वाक्यांश है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- ऋग्वेद → सप्त सैंधव
- महाभारत → भारतवर्ष, जम्बूद्वीप
- अशोक → जम्बूद्वीप
- विष्णु पुराण → भारत की भौगोलिक पहचान
- फारसी → हिंद
- यूनानी → इंडोई / इंडिके
- चीनी → यिन्तू / तु-यिदं
- लगभग 1800 वर्ष पूर्व → हिंदुस्तान का फारसी शिलालेख में प्रयोग
- 7वीं शताब्दी → जुआनज़ांग की भारत यात्रा
- 1950 → भारतीय संविधान लागू
भारत, अर्थात इंडिया
अध्याय 5. भारत, अर्थात इंडिया
इस अध्याय में भारत के प्राचीन एवं आधुनिक नामों, भारतीय उपमहाद्वीप की पहचान तथा भारत नाम के विकास का अध्ययन किया गया है।
भारतीय उपमहाद्वीप
- आज का भारत एक आधुनिक राष्ट्र है जिसकी निश्चित सीमाएँ, राज्य और जनसंख्या है।
- 500, 2000 या 5000 वर्ष पहले इस क्षेत्र की सीमाएँ और राजनीतिक स्वरूप आज से अलग थे।
- विश्व के इस क्षेत्र को सामान्यतः भारतीय उपमहाद्वीप कहा जाता है।
- इतिहास के अलग-अलग काल में इस क्षेत्र के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग हुआ।
- प्राचीन पुस्तकों, यात्रियों एवं तीर्थयात्रियों के वृत्तांतों तथा शिलालेखों से भारत के अतीत के बारे में जानकारी मिलती है।
भारत की भौगोलिक पहचान
- भारतीय उपमहाद्वीप की भौगोलिक सीमाएँ समय के साथ बदलती रही हैं।
- इसके उत्तर में हिमालय और दक्षिण में हिंद महासागर स्थित है।
- भारत के पश्चिम में अरब सागर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी है।
- प्राचीन साहित्य में भारत के विभिन्न क्षेत्रों, नदियों और लोगों का उल्लेख मिलता है।
भारत के प्राचीन नाम
| नाम | मुख्य जानकारी |
|---|---|
| सप्त सैंधव | ऋग्वेद में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए प्रयुक्त नाम; अर्थ—सात नदियों की भूमि। |
| भारतवर्ष | महाभारत में समूचे भारतीय उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त नाम। |
| जम्बूद्वीप | प्राचीन नाम, जो बाद में भारतीय उपमहाद्वीप का पर्याय बन गया। |
| भारत | बाद के समय में भारतीय उपमहाद्वीप के लिए अधिक प्रचलित नाम। |
सप्त सैंधव
- ऋग्वेद भारत का सबसे प्राचीन ग्रंथ है।
- ऋग्वेद में उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को ‘सप्त सैंधव’ कहा गया है।
- सप्त सैंधव का अर्थ है—‘सात नदियों की भूमि’।
- ‘सैंधव’ शब्द सिंधु से आया है।
- सिंधु का अर्थ सिंधु नदी या सामान्य रूप से एक नदी से संबंधित है।
भारतवर्ष
- महाभारत भारत के प्रसिद्ध प्राचीन ग्रंथों में से एक है।
- महाभारत में ‘भारतवर्ष’ शब्द का प्रयोग किया गया है।
- भारतवर्ष का अर्थ है—‘भरत का देश’।
- ‘भरत’ नाम का उल्लेख सबसे पहले ऋग्वेद में मिलता है।
- ऋग्वेद में ‘भरत’ एक प्रमुख वैदिक समूह के लिए प्रयुक्त हुआ था।
- बाद के साहित्य में ‘भरत’ नाम विभिन्न महाराजाओं के लिए भी मिलता है।
महाभारत में वर्णित क्षेत्र
- महाभारत में भारतीय उपमहाद्वीप के अनेक क्षेत्रों का उल्लेख मिलता है।
- काश्मीर — लगभग आज का कश्मीर।
- कुरुक्षेत्र — आज हरियाणा का भाग।
- वंग — बंगाल का भाग।
- प्राग्ज्योतिष — कुछ-कुछ असम का भाग।
- कच्छ — आज का कच्छ।
- केरल — लगभग आज का केरल।
जम्बूद्वीप
- जम्बूद्वीप का अर्थ ‘जम्बू वृक्ष के फल का द्वीप’ बताया गया है।
- जम्बू वृक्ष भारत में पाया जाने वाला एक सामान्य वृक्ष है।
- इसे जम्बुल वृक्ष, मालाबार प्लम या जामुन वृक्ष भी कहा जाता है।
- बाद में जम्बूद्वीप भारतीय उपमहाद्वीप का पर्याय बन गया।
सम्राट अशोक और जम्बूद्वीप
- अशोक एक प्राचीन भारतीय सम्राट थे।
- उनके एक शिलालेख में ‘जम्बूद्वीप’ नाम का प्रयोग संपूर्ण भारत के वर्णन के लिए किया गया है।
- अशोक के समय जम्बूद्वीप में आज के भारत के साथ बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कुछ भाग भी सम्मिलित थे।
- अशोक की तिथि अध्याय में लगभग 250 सा.सं.पू. मानी गई है।
‘भारत’ नाम का प्रचलन
- कुछ शताब्दियों के बाद भारतीय उपमहाद्वीप के लिए सामान्यतः ‘भारत’ नाम का प्रयोग होने लगा।
- प्राचीन भारतीय ग्रंथों की सही तिथि निर्धारित करना कठिन है, इसलिए यह निश्चित रूप से बताना कठिन है कि पूरे उपमहाद्वीप के लिए यह नाम पहली बार कब प्रयोग हुआ।
- महाभारत में ‘भारतवर्ष’ शब्द स्पष्ट रूप से पूरे उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त हुआ है।
- बाद के समय में ‘भारत’ नाम अधिक प्रचलित हो गया।
विष्णु पुराण में भारत
- विष्णु पुराण में भारत की भौगोलिक पहचान का वर्णन मिलता है।
- इसके अनुसार जो देश समुद्र के उत्तर और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में स्थित है, उसे भारत कहा जाता है।
- यह वर्णन भारत की प्राकृतिक भौगोलिक सीमाओं को दर्शाता है।
प्राचीन भारत की भौगोलिक जानकारी
- प्राचीन भारतीय साहित्य में विभिन्न नदियों और क्षेत्रों के नाम मिलते हैं।
- महाभारत में उपमहाद्वीप के अलग-अलग भागों का उल्लेख मिलता है।
- प्राचीन तमिल साहित्य में भी भारत की व्यापक भौगोलिक सीमा का वर्णन मिलता है।
- एक प्राचीन तमिल कविता में राजा की प्रसिद्धि को दक्षिण में कन्याकुमारी से उत्तर में महान पर्वत तथा पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर तक बताया गया है।
- इससे संकेत मिलता है कि प्राचीन भारतीय अपने विस्तृत भूगोल से परिचित थे।
महत्वपूर्ण शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| उपमहाद्वीप | महाद्वीप के भीतर स्थित एक बड़ा और विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र। |
| निवासी | वे लोग जो किसी स्थान विशेष में रहते हैं। |
| सप्त सैंधव | सात नदियों की भूमि। |
| भारतवर्ष | भरत का देश। |
| जम्बूद्वीप | जम्बू वृक्ष के फल का द्वीप; बाद में भारतीय उपमहाद्वीप का पर्याय। |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- ऋग्वेद में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को सप्त सैंधव कहा गया है।
- सप्त सैंधव का अर्थ सात नदियों की भूमि है।
- ‘सैंधव’ शब्द सिंधु से आया है।
- महाभारत में भारतवर्ष और जम्बूद्वीप शब्द मिलते हैं।
- भारतवर्ष का अर्थ भरत का देश है।
- ‘भरत’ नाम का सबसे पहला उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।
- अशोक के एक शिलालेख में जम्बूद्वीप नाम का प्रयोग हुआ है।
- विष्णु पुराण में भारत को समुद्र के उत्तर और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में बताया गया है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- ऋग्वेद → सप्त सैंधव → सात नदियों की भूमि
- महाभारत → भारतवर्ष और जम्बूद्वीप
- भारतवर्ष → भरत का देश
- अशोक → जम्बूद्वीप का शिलालेखीय उल्लेख
- विष्णु पुराण → भारत की भौगोलिक पहचान
- बाद के समय में → ‘भारत’ नाम अधिक प्रचलित
भारत, अर्थात इंडिया
अध्याय 5. भारत, अर्थात इंडिया
इस भाग में भारत के लिए विदेशी लोगों द्वारा प्रयुक्त नामों, ‘इंडिया’ नाम की उत्पत्ति तथा भारत से जुड़े विदेशी यात्रियों के विवरण का अध्ययन किया गया है।
विदेशियों ने इंडिया नाम कैसे रखा?
- भारत के लिए ‘इंडिया’ नाम की उत्पत्ति मुख्य रूप से सिंधु नदी के नाम से जुड़ी है।
- प्राचीन फारसियों ने सिंधु नदी के क्षेत्र को ‘सिंध’ कहा।
- फारसी भाषा में ‘सिंध’ का रूप बदलकर ‘हिंद’, ‘हिद’ या ‘हिंदू’ जैसे शब्दों में आया।
- यहाँ प्राचीन फारसी का ‘हिंद’ एक भौगोलिक शब्द था, जिसका संबंध हिंदू धर्म से नहीं था।
सिंधु से हिंद और इंडिया
| भाषा/समुदाय | प्रयुक्त नाम |
|---|---|
| सिंधु क्षेत्र | सिंध |
| प्राचीन फारसी | हिंद |
| प्राचीन यूनानी | इंडोई / इंडिके |
| अंग्रेजी | इंडिया |
फारसी लोगों द्वारा ‘हिंद’ नाम
- प्राचीन ईरान (फारस) के लोगों ने भारत का उल्लेख बहुत पहले किया था।
- छठी शताब्दी सा.सं.पू. में एक फारसी सम्राट ने सिंधु नदी के क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया।
- फारसियों ने अपने लेखों और शिलालेखों में इस क्षेत्र को हिंद, हिद या हिंदू कहा।
- ये शब्द उनकी भाषा में सिंध के रूपांतरण थे।
- प्राचीन फारसी में ‘हिंद’ मूलतः एक भौगोलिक शब्द था।
यूनानियों द्वारा इंडिया का नाम
- प्राचीन यूनानियों ने फारसी स्रोतों के आधार पर इस क्षेत्र को इंडोई अथवा इंडिके कहा।
- यूनानी भाषा में ‘ह’ अक्षर नहीं था।
- इस कारण ‘हिंद’ शब्द से ‘इंड’ रूप विकसित हुआ।
- आगे चलकर इसी नाम-परंपरा से इंडिया नाम विकसित हुआ।
प्राचीन चीनियों द्वारा भारत के नाम
- प्राचीन चीनियों ने भी भारत से संपर्क स्थापित किया था।
- विभिन्न चीनी ग्रंथों में भारत के लिए ‘यिन्तू’ या ‘तु-यिदं’ जैसे नाम मिलते हैं।
- इन शब्दों की उत्पत्ति भी मूलतः सिंधु शब्द से हुई थी।
- ‘तियन्’ जैसे एक अन्य चीनी शब्द को भी ‘सिंधु’ से लिया गया बताया गया है।
- ‘तियन्’ को ‘स्वर्ग तुल्य स्वामी’ के अर्थ में भी समझा जा सकता है।
हिंदुस्तान
- ‘हिंदुस्तान’ शब्द आज भी भारत के लिए जाना-पहचाना नाम है।
- यह शब्द आज से लगभग 1800 वर्ष पूर्व पहली बार एक फारसी शिलालेख में प्रयोग किया गया था।
- बाद में भारत पर आक्रमण करने वालों ने भारतीय उपमहाद्वीप के वर्णन के लिए इस शब्द का प्रयोग किया।
जुआनज़ांग की भारत यात्रा
- जुआनज़ांग (Xuanzang) चीन के प्रसिद्ध विद्वान और यात्री थे।
- उन्होंने 7वीं शताब्दी सा.सं. में चीन से भारत की यात्रा की।
- उन्होंने भारत के कई भागों का भ्रमण किया।
- वे भारत के विद्वानों से मिले और बौद्ध ग्रंथों को एकत्र किया।
- लगभग 17 वर्ष बाद वे चीन वापस लौटे।
- चीन लौटकर उन्होंने अपने साथ ले जाए गए संस्कृत ग्रंथों का चीनी भाषा में अनुवाद किया।
- बाद की शताब्दियों में कई अन्य चीनी विद्वानों ने भी भारत की यात्रा की।
भारतीय संविधान और भारत का नाम
- भारतीय संविधान की शुरुआत में “India, that is Bharat” वाक्यांश का प्रयोग किया गया है।
- हिंदी अनुवाद में इसे “भारत अर्थात इंडिया” लिखा गया है।
- भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ।
भारत के नामों का विकास
| स्रोत/भाषा | भारत के लिए नाम | मुख्य आधार |
|---|---|---|
| प्राचीन भारतीय | भारत, भारतवर्ष, जम्बूद्वीप | भारतीय साहित्य एवं परंपरा |
| फारसी | हिंद | सिंधु |
| यूनानी | इंडोई / इंडिके | फारसी ‘हिंद’ से विकसित |
| चीनी | यिन्तू / तु-यिदं | सिंधु से संबंधित |
| अरबी और फारसी | हिंदुस्तान | हिंद + स्तान |
| अंग्रेजी | इंडिया | इंडोई/इंडिके से विकसित नाम-परंपरा |
महत्वपूर्ण अंतर
| भारत | इंडिया |
|---|---|
| प्राचीन भारतीय नाम है। | विदेशी नाम-परंपरा से विकसित नाम है। |
| भारतवर्ष आदि नामों से भारतीय ग्रंथों में मिलता है। | इसकी नाम-परंपरा सिंधु → हिंद → इंडोई/इंडिके से जुड़ी है। |
महत्वपूर्ण शब्द
- सिंधु — वह नदी जिसके नाम से भारत के कई विदेशी नाम विकसित हुए।
- हिंद — प्राचीन फारसी में भारत/सिंधु क्षेत्र के लिए प्रयुक्त भौगोलिक नाम।
- इंडोई — प्राचीन यूनानी नाम।
- इंडिके — प्राचीन यूनानी नाम।
- हिंदुस्तान — भारत के लिए प्रयुक्त एक ऐतिहासिक नाम।
- जुआनज़ांग — 7वीं शताब्दी में भारत आने वाले प्रसिद्ध चीनी यात्री।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- ‘इंडिया’ नाम की नाम-परंपरा सिंधु नदी से संबंधित है।
- फारसियों ने सिंधु क्षेत्र के लिए हिंद शब्द का प्रयोग किया।
- प्राचीन यूनानियों ने भारत को इंडोई/इंडिके कहा।
- यूनानी भाषा में ‘ह’ अक्षर नहीं था।
- प्राचीन फारसी में ‘हिंद’ एक भौगोलिक शब्द था।
- ‘हिंदुस्तान’ शब्द का प्रयोग लगभग 1800 वर्ष पूर्व एक फारसी शिलालेख में हुआ।
- जुआनज़ांग ने 7वीं शताब्दी में भारत की यात्रा की।
- जुआनज़ांग लगभग 17 वर्ष बाद चीन लौटे।
- भारतीय संविधान में “India, that is Bharat” लिखा है।
- भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ।
त्वरित पुनरावृत्ति
- सिंधु → हिंद → इंडोई/इंडिके → इंडिया
- फारसी → हिंद
- यूनानी → इंडोई / इंडिके
- चीनी → यिन्तू / तु-यिदं
- लगभग 1800 वर्ष पूर्व → हिंदुस्तान का फारसी शिलालेख में प्रयोग
- 7वीं शताब्दी → जुआनज़ांग की भारत यात्रा
- 1950 → भारतीय संविधान लागू
भारत, अर्थात इंडिया
अध्याय 5. भारत, अर्थात इंडिया — Assignment
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
- ऋग्वेद में भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को क्या कहा गया है?
- भारतवर्ष
- सप्त सैंधव
- जम्बूद्वीप
- हिंदुस्तान
- ‘सप्त सैंधव’ का अर्थ क्या है?
- सात पर्वतों की भूमि
- सात समुद्रों की भूमि
- सात नदियों की भूमि
- सात राज्यों की भूमि
- ‘सैंधव’ शब्द किस शब्द से आया है?
- भारत
- सिंधु
- भरत
- हिंद
- ‘भारतवर्ष’ का अर्थ क्या है?
- नदियों का देश
- भरत का देश
- जम्बू का देश
- पर्वतों का देश
- ‘भरत’ नाम का सबसे पहला उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?
- रामायण
- महाभारत
- ऋग्वेद
- विष्णु पुराण
- ‘जम्बूद्वीप’ का संबंध किस वृक्ष से है?
- पीपल
- नीम
- जम्बू
- बरगद
- अशोक के एक शिलालेख में भारत के लिए किस नाम का प्रयोग हुआ है?
- भारतवर्ष
- जम्बूद्वीप
- सप्त सैंधव
- इंडिया
- विष्णु पुराण में भारत को किसके बीच स्थित बताया गया है?
- दो नदियों के बीच
- समुद्र के उत्तर और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण
- दो महासागरों के बीच
- दो पर्वतों के बीच
- प्राचीन फारसियों ने भारत के लिए किस नाम का प्रयोग किया?
- हिंद
- इंडोई
- यिन्तू
- भारत
- प्राचीन यूनानियों ने भारत के लिए कौन-सा नाम प्रयोग किया?
- हिंदुस्तान
- भारतवर्ष
- इंडोई / इंडिके
- जम्बूद्वीप
- ‘हिंद’ शब्द मूल रूप से किस प्रकार का शब्द था?
- धार्मिक
- भौगोलिक
- राजनीतिक
- सामाजिक
- ‘हिंदुस्तान’ शब्द का प्रयोग लगभग कितने वर्ष पहले एक फारसी शिलालेख में हुआ था?
- 500 वर्ष
- 1000 वर्ष
- 1800 वर्ष
- 3000 वर्ष
- जुआनज़ांग भारत की यात्रा किस शताब्दी में आए?
- 5वीं शताब्दी
- 6वीं शताब्दी
- 7वीं शताब्दी
- 8वीं शताब्दी
- जुआनज़ांग भारत से चीन लौटने के बाद मुख्य रूप से क्या कार्य किया?
- युद्ध किया
- संस्कृत ग्रंथों का चीनी में अनुवाद किया
- राज्य स्थापित किया
- व्यापार किया
- भारतीय संविधान में भारत के लिए कौन-सा वाक्यांश प्रयोग किया गया है?
- भारत इज़ इंडिया
- India, that is Bharat
- भारतवर्ष इज़ इंडिया
- हिंद, दैट इज़ इंडिया
रिक्त स्थान भरिए
- ऋग्वेद में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को __________ कहा गया है।
- सप्त सैंधव का अर्थ __________ है।
- भारतवर्ष का अर्थ __________ है।
- अशोक के एक शिलालेख में __________ नाम का प्रयोग मिलता है।
- फारसियों ने भारत को __________ नाम से संबोधित किया।
- यूनानियों ने भारत को __________ अथवा __________ कहा।
- भारतीय संविधान __________ में लागू हुआ।
- जुआनज़ांग ने __________ शताब्दी में भारत की यात्रा की।
सही या गलत लिखिए
- ऋग्वेद में सप्त सैंधव का उल्लेख मिलता है।
- सप्त सैंधव का अर्थ सात नदियों की भूमि है।
- भारतवर्ष का अर्थ भरत का देश है।
- अशोक ने जम्बूद्वीप नाम का प्रयोग नहीं किया था।
- प्राचीन फारसी में ‘हिंद’ एक भौगोलिक शब्द था।
- यूनानी भाषा में ‘ह’ अक्षर था।
- जुआनज़ांग चीन से भारत आए थे।
- भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ।
एक शब्द में उत्तर दीजिए
- सात नदियों की भूमि के लिए ऋग्वेद में प्रयुक्त नाम क्या है?
- ‘भरत का देश’ किसे कहा गया है?
- जम्बूद्वीप नाम किस प्राचीन सम्राट के शिलालेख में मिलता है?
- प्राचीन फारसी नाम जो सिंधु से संबंधित था, क्या था?
- प्राचीन यूनानी नाम ‘इंडोई’ किस क्षेत्र के लिए था?
- 7वीं शताब्दी में भारत आने वाले चीनी यात्री का नाम क्या था?
लघु उत्तरीय प्रश्न
- भारतीय उपमहाद्वीप से क्या अभिप्राय है?
- सप्त सैंधव का क्या अर्थ है?
- ‘भारतवर्ष’ शब्द का क्या अर्थ है?
- जम्बूद्वीप नाम की उत्पत्ति किससे संबंधित है?
- अशोक के समय जम्बूद्वीप में कौन-कौन से वर्तमान क्षेत्र सम्मिलित थे?
- विष्णु पुराण में भारत की भौगोलिक पहचान किस प्रकार की गई है?
- फारसियों ने भारत को ‘हिंद’ क्यों कहा?
- यूनानी शब्द ‘इंडोई’ या ‘इंडिके’ का संबंध किससे है?
अंतर स्पष्ट कीजिए
- भारत और इंडिया में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- भारतवर्ष और जम्बूद्वीप में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- सप्त सैंधव और भारतवर्ष में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- प्राचीन भारतीय नाम और विदेशी नामों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
मिलान कीजिए
| कॉलम A | कॉलम B |
|---|---|
| 1. ऋग्वेद | (a) हिंद |
| 2. महाभारत | (b) जम्बूद्वीप |
| 3. अशोक | (c) सप्त सैंधव |
| 4. फारसी | (d) भारतवर्ष |
| 5. यूनानी | (e) इंडोई / इंडिके |
स्रोत और नाम पहचानिए
| स्रोत/समुदाय | भारत के लिए प्रयुक्त नाम |
|---|---|
| ऋग्वेद | ________________ |
| महाभारत | ________________ |
| अशोक का शिलालेख | ________________ |
| फारसी | ________________ |
| यूनानी | ________________ |
| चीनी | ________________ |
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- भारत के प्राचीन नामों का वर्णन करते हुए उनके स्रोतों की चर्चा कीजिए।
- ‘इंडिया’ नाम की उत्पत्ति सिंधु नदी से किस प्रकार जुड़ी है? क्रमबद्ध रूप से समझाइए।
- भारतीय उपमहाद्वीप की पहचान में प्राचीन ग्रंथों की क्या भूमिका रही है?
- जुआनज़ांग की भारत यात्रा और उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।
सोचिए और उत्तर दीजिए
- भारत के लिए अलग-अलग नाम क्यों प्रचलित हुए होंगे?
- यदि किसी देश का नाम उसकी भौगोलिक विशेषता से रखा जाए, तो आप अपने देश के लिए कौन-सा नाम चुनेंगे और क्यों?
- प्राचीन यात्रियों के वृत्तांत इतिहास को समझने में किस प्रकार उपयोगी हो सकते हैं?
- भारत के नामों के इतिहास से हमें भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन विविधता के बारे में क्या पता चलता है?
मानचित्र अभ्यास
- भारत के मानचित्र पर हिमालय को चिह्नित कीजिए।
- अरब सागर और बंगाल की खाड़ी को चिह्नित कीजिए।
- सिंधु नदी को मानचित्र पर पहचानिए।
- कश्मीर, कच्छ और केरल को मानचित्र पर चिह्नित कीजिए।
त्वरित परीक्षा अभ्यास
- ऋग्वेद → सप्त सैंधव
- सप्त सैंधव → सात नदियों की भूमि
- महाभारत → भारतवर्ष और जम्बूद्वीप
- भारतवर्ष → भरत का देश
- अशोक → जम्बूद्वीप
- फारसी → हिंद
- यूनानी → इंडोई / इंडिके
- चीनी → यिन्तू / तु-यिदं
- जुआनज़ांग → 7वीं शताब्दी में भारत यात्रा
- संविधान → “India, that is Bharat”
Why Choose CBSE Notes for Class 6?
Reading the complete textbook is essential for building knowledge, but revision notes help students organize that knowledge effectively. Our CBSE Revision Notes for Class 6 summarize every chapter by highlighting important concepts, definitions, keywords, formulas, examples, and important points that students should remember during examinations. This approach saves valuable study time and makes revision much easier.
Students often find it difficult to revise lengthy chapters before examinations. Our notes solve this problem by presenting important information in a structured format that is easy to understand and remember. Regular revision using these notes helps improve confidence and strengthens conceptual clarity.
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