भारतीय सभ्यता का प्रारंभ - Class 6 Social Science Hindi CBSE Notes
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भारतीय सभ्यता का प्रारंभ - Class 6 Social Science Hindi CBSE Notes
भारतीय सभ्यता का प्रारंभ
अध्याय 6. भारतीय सभ्यता का प्रारंभ
यह अध्याय भारतीय उपमहाद्वीप की प्रारंभिक नगरीय सभ्यता, जिसे सिंधु, हड़प्पा अथवा सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा जाता है, के विकास और उपलब्धियों का अध्ययन कराता है। इसमें नगर-योजना, जल-प्रबंधन, कृषि, व्यापार, शिल्प, दैनिक जीवन तथा सभ्यता के ह्रास के कारणों को समझाया गया है।
सभ्यता क्या है?
सभ्यता मानव समाज के उन्नत चरण को कहा जाता है। किसी सभ्यता में सामान्यतः निम्नलिखित विशेषताएँ पाई जाती हैं—
- शासन और प्रशासन – समाज और उसके विभिन्न कार्यों के प्रबंधन की व्यवस्था।
- नगरीकरण – नगरों का विकास, नगर-योजना, जल-प्रबंधन और जल-निकास व्यवस्था।
- विभिन्न प्रकार के शिल्प – पत्थर, धातु आदि से वस्तुओं का निर्माण।
- व्यापार – वस्तुओं का आंतरिक और बाहरी आदान-प्रदान।
- लेखन – अभिलेख रखने और संचार के लिए लेखन प्रणाली।
- सांस्कृतिक विचार – कला, स्थापत्य, साहित्य, श्रुति परंपराएँ और सामाजिक रीति-रिवाज।
- कृषि उत्पादकता – गाँवों के साथ-साथ नगरों के लिए भी पर्याप्त भोजन का उत्पादन।
विश्व में सभ्यताओं का आरंभ
- विश्व के विभिन्न भागों में सभ्यताओं का आरंभ अलग-अलग समय पर हुआ।
- मेसोपोटामिया में लगभग 6,000 वर्ष पहले सभ्यता का आरंभ हुआ।
- इसके कुछ शताब्दियों बाद प्राचीन मिस्र की सभ्यता का विकास हुआ।
- भारतीय उपमहाद्वीप में भी एक विकसित नगरीय सभ्यता का उदय हुआ, जिसे हड़प्पा या सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा जाता है।
सिंधु-सरस्वती सभ्यता
- इस सभ्यता को सिंधु सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता तथा सिंधु-सरस्वती सभ्यता जैसे नामों से जाना जाता है।
- इस सभ्यता के निवासियों को हड़प्पाई या हड़प्पावासी कहा जाता है।
- यह विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है।
- इसका विकास मुख्य रूप से सिंधु और उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों तथा अन्य विस्तृत क्षेत्रों में हुआ।
- इस विकास प्रक्रिया को भारत का पहला नगरीकरण भी कहा जाता है।
गाँव से नगर
- सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों ने विशाल मैदानों को उपजाऊ बनाया।
- उपजाऊ भूमि कृषि के लिए अनुकूल थी।
- लगभग 3500 सा.सं.पू. से इस क्षेत्र के गाँव नगरों में बदलने लगे।
- लगभग 2600 सा.सं.पू. में बढ़ते व्यापार और विनिमय के कारण कई नगर महानगरों में विकसित हुए।
- नगरों के विकास के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से कृषि उपज की निरंतर आपूर्ति आवश्यक थी।
प्रमुख हड़प्पाई नगर
| नगर | आधुनिक क्षेत्र |
|---|---|
| धौलावीरा | गुजरात |
| हड़प्पा | पंजाब, पाकिस्तान |
| कालीबंगा | राजस्थान |
| मोहनजो-दड़ो | सिंध, पाकिस्तान |
| राखीगढ़ी | हरियाणा |
| लोथल | गुजरात |
| गणवेरीवाला | चोलिस्तान मरुस्थल, पाकिस्तान |
हड़प्पा नाम क्यों?
- लगभग एक शताब्दी पहले 1920–21 में हड़प्पा इस सभ्यता से संबंधित पहला उत्खनित नगर था।
- इसी कारण इस सभ्यता के निवासियों को हड़प्पाई और सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता कहा जाने लगा।
- बाद में अनेक अन्य नगरों और बस्तियों की खोज से पता चला कि सभ्यता सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक फैली हुई थी।
नगर-योजना
- हड़प्पाई नगरों में सुव्यवस्थित नगर-योजना दिखाई देती है।
- नगरों में सामान्यतः चौड़ी सड़कें थीं।
- सड़कें सामान्यतः चारों दिशाओं की ओर उन्मुख होती थीं।
- अधिकांश नगरों के चारों ओर किलेबंदी मिलती है।
- कई नगरों में दो प्रमुख भाग पाए गए—ऊपरी नगर और निचला नगर।
- ऊपरी नगर में संभवतः अभिजात वर्ग रहता था।
- निचले नगर में सामान्य लोग रहते थे।
- बड़े और छोटे घरों के निर्माण की गुणवत्ता में अधिक अंतर नहीं दिखाई देता।
- भवनों के निर्माण में मुख्यतः ईंटों का प्रयोग किया गया।
धौलावीरा की विशेषता
- धौलावीरा में अन्य नगरों की तुलना में तीन अलग-अलग क्षेत्र थे।
- वहाँ अनेक भवनों की नींव पत्थरों से बनाई गई थी।
- धौलावीरा जल-प्रबंधन की उन्नत व्यवस्था के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
मोहनजो-दड़ो का महास्नानागार
- मोहनजो-दड़ो में प्रसिद्ध महास्नानागार मिला है।
- इसका आकार लगभग 12 × 7 मीटर है।
- इसकी ईंटों पर जलरोधक सामग्री की परत चढ़ाई गई थी।
- इसके आसपास छोटे-छोटे कमरे और एक कुआँ भी मिला है।
- स्नानागार के पानी को निकालने के लिए नाली की व्यवस्था थी।
- इसके वास्तविक उद्देश्य को लेकर विभिन्न व्याख्याएँ दी गई हैं, जैसे सार्वजनिक स्नान, राजसी स्नान या धार्मिक कार्य।
- पुस्तक के अनुसार इसके उद्देश्य के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना कठिन है क्योंकि संबंधित अन्य ऐतिहासिक स्रोत उपलब्ध नहीं हैं।
जल प्रबंधन
- हड़प्पावासी जल प्रबंधन और स्वच्छता को बहुत महत्व देते थे।
- घरों में स्नान के लिए अलग स्नानागार होते थे।
- घरों के स्नानागार जल-निकास प्रणाली से जुड़े हुए थे।
- जल-निकास की नालियाँ सामान्यतः सड़कों के नीचे बनाई जाती थीं।
- मोहनजो-दड़ो में ईंटों से बने कुओं से पानी निकाला जाता था।
- अन्य क्षेत्रों में तालाब, झरने और मानव निर्मित जलाशय भी जल के स्रोत रहे होंगे।
धौलावीरा के जलाशय
- धौलावीरा में विशाल जलाशयों का निर्माण किया गया था।
- सबसे बड़ा जलाशय लगभग 73 मीटर लंबा बताया गया है।
- चट्टान काटकर बनाए गए जलाशयों में से एक लगभग 33 मीटर लंबा था।
- धौलावीरा में कम से कम छह विशाल जलाशय बनाए गए थे।
- इनमें से अधिकांश जलाशय भूमिगत नालियों से जुड़े थे।
- इन नालियों की सहायता से जल का संग्रह और वितरण किया जाता था।
हड़प्पावासियों की कृषि
- हड़प्पावासियों ने अनेक बस्तियाँ नदियों के किनारे बसाईं।
- नदियाँ जल उपलब्ध कराने के साथ आसपास की भूमि को उपजाऊ बनाती थीं।
- वे दलहन, सब्जियाँ, जौ, गेहूँ, मोटे अनाज, बाजरा और कभी-कभी धान उगाते थे।
- हड़प्पावासी यूरेशिया में कपास उगाने वाले प्रारंभिक लोगों में थे।
- कपास का उपयोग कपड़ा बनाने में किया जाता था।
- खेती के लिए हल सहित अनेक उपकरणों का प्रयोग किया जाता था।
हड़प्पावासियों का भोजन
- हड़प्पावासी भोजन के लिए विभिन्न प्रकार की फसलों और पशु उत्पादों पर निर्भर थे।
- वे अनेक पशुओं को मांस के लिए पालते थे।
- मछलियों के लिए वे नदियों और समुद्रों पर निर्भर रहते थे।
- पुरातात्त्विक खोजों में बड़ी संख्या में पशुओं की हड्डियाँ और मछलियों के अवशेष मिले हैं।
- मिट्टी के पात्रों की वैज्ञानिक जाँच से दुग्ध उत्पाद, हल्दी, अदरक और केले जैसे पदार्थों के अवशेष मिले हैं।
- इससे उनके भोजन की विविधता का पता चलता है।
सक्रिय व्यापार
- हड़प्पावासी अपनी सभ्यता के भीतर तथा भारत के अन्य क्षेत्रों के साथ व्यापार करते थे।
- वे अन्य सभ्यताओं और संस्कृतियों के साथ भी व्यापार करते थे।
- उन्होंने आभूषण, लकड़ी, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ, संभवतः सोना, कपास और कुछ खाद्य वस्तुएँ निर्यात कीं।
- कार्नेलियन के मनके उनके प्रिय आभूषणों में थे।
- कार्नेलियन मुख्यतः गुजरात में पाया जाने वाला लाल रंग का पत्थर है।
- हड़प्पा के कारीगरों ने मनकों में छेद करने की तकनीक विकसित की थी।
- उन्होंने शंख से सुंदर चूड़ियाँ भी बनाई थीं।
व्यापार के मार्ग
- व्यापार के लिए स्थल मार्ग, नदी मार्ग और समुद्री मार्ग का उपयोग किया जाता था।
- दूरस्थ क्षेत्रों तक वस्तुएँ पहुँचाने के लिए समुद्री मार्ग महत्वपूर्ण था।
- यह भारत की प्रारंभिक गहन समुद्री गतिविधियों में से एक थी।
- गुजरात और सिंध के तटीय क्षेत्रों में कई हड़प्पाई बस्तियाँ स्थित थीं।
लोथल का बंदरगाह
- गुजरात के लोथल में एक विशाल बेसिन मिला है।
- यह लगभग 217 मीटर लंबा और 36 मीटर चौड़ा था।
- संभावना है कि इसका उपयोग नावों के माध्यम से वस्तुओं के आयात और निर्यात के लिए किया जाता था।
- यह हड़प्पावासियों की समुद्री व्यापार क्षमता को दर्शाता है।
हड़प्पाई मुहरें
- अनेक हड़प्पाई बस्तियों से हजारों छोटी मुहरें मिली हैं।
- मुहरें सामान्यतः स्टीऐटाइट नामक मुलायम पत्थर से बनाई जाती थीं।
- उन्हें गर्म करके कठोर बनाया जाता था।
- मुहरों पर विभिन्न पशुओं के चित्र मिलते हैं।
- इन पर लेखन प्रणाली के कुछ संकेत भी दिखाई देते हैं।
- इन संकेतों और प्रतीकों का अर्थ अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है।
- इनका संबंध किसी प्रकार की व्यापारिक गतिविधियों से माना जाता है।
धातु विज्ञान
- हड़प्पावासी धातुओं के उपयोग और धातु-कला में कुशल थे।
- तांबे में टिन मिलाने से कांस्य बनता है।
- कांस्य तांबे की तुलना में अधिक कठोर होता है।
- हड़प्पावासियों ने कांस्य का उपयोग उपकरण और बर्तन बनाने में किया।
प्राचीन जीवन
- पुरातत्त्ववेत्ताओं ने हड़प्पावासियों द्वारा बनाई और उपयोग की गई अनेक वस्तुएँ खोजी हैं।
- इनमें कांस्य दर्पण, पकी मिट्टी के पात्र, पत्थर के बाट और कांस्य की छेनी शामिल हैं।
- धौलावीरा से खेल-बोर्ड प्राप्त हुआ है।
- करनपुरा से मिट्टी की सीटी मिली है।
- इससे पता चलता है कि बच्चों और वयस्कों के मनोरंजन के लिए खेल और खिलौने भी थे।
सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक वस्तुएँ
- हड़प्पाई स्थलों से अनेक मूर्तियाँ और प्रतीकात्मक वस्तुएँ मिली हैं।
- इनमें प्रसिद्ध ‘नर्तकी’ की कांस्य प्रतिमा भी शामिल है।
- स्वास्तिक वाली मुहरें भी मिली हैं।
- कुछ मुहरों पर पशुओं से घिरे हुए त्रिमुखी देवता जैसे चित्र दिखाई देते हैं।
- मिट्टी की मूर्तियाँ और चित्रित पात्र भी मिले हैं।
- इन वस्तुओं से हड़प्पावासियों के सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक जीवन की जानकारी मिलती है।
सिंधु-सरस्वती सभ्यता का ह्रास
- लगभग 1900 सा.सं.पू. के आसपास इस सभ्यता के नगरों का ह्रास होने लगा।
- नगर धीरे-धीरे खाली होते गए।
- कई लोग परिवर्तित वातावरण में ग्रामीण जीवन-शैली अपनाकर छोटी बस्तियों में रहने लगे।
- पूर्व की सरकार या प्रशासनिक व्यवस्था भी धीरे-धीरे समाप्त होती प्रतीत होती है।
सभ्यता के ह्रास के प्रमुख कारण
| कारण | प्रभाव |
|---|---|
| जलवायु परिवर्तन | लगभग 2200 सा.सं.पू. से वर्षा में कमी और शुष्कता की स्थिति उत्पन्न हुई। |
| कृषि पर प्रभाव | कम वर्षा के कारण कृषि कठिन हुई और नगरों में खाद्य आपूर्ति कम हुई। |
| सरस्वती नदी का सूखना | सरस्वती नदी का मध्य बेसिन सूख गया और कालीबंगा तथा बनावली जैसे नगर छोड़ दिए गए। |
युद्ध और आक्रमण का प्रश्न
- पहले यह माना जाता था कि युद्ध या आक्रमण के कारण हड़प्पाई नगरों का विनाश हुआ होगा।
- लेकिन पुरातात्त्विक प्रमाणों में युद्ध या आक्रमण के स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं।
- अध्याय के अनुसार हड़प्पावासियों के पास सेना या युद्ध के हथियार होने के प्रमाण नहीं मिले।
- इसलिए हड़प्पाई सभ्यता अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण सभ्यता प्रतीत होती है।
हड़प्पा संस्कृति की निरंतरता
- नगरों के समाप्त होने के बाद भी हड़प्पाई संस्कृति और प्रौद्योगिकी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।
- इनकी अनेक सांस्कृतिक और तकनीकी विशेषताएँ भारतीय सभ्यता के अगले चरणों तक पहुँचीं।
- लोगों का ग्रामीण जीवन की ओर लौटना सभ्यता के पूर्ण अंत के बजाय एक बड़े परिवर्तन को दर्शाता है।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
| शब्द | परिभाषा |
|---|---|
| सभ्यता | मानव समाज के उन्नत चरण को सभ्यता कहा जाता है। |
| धातुविज्ञान | धातुओं के निष्कर्षण, शुद्धिकरण, मिश्रण तथा उनके गुणों के वैज्ञानिक अध्ययन को धातुविज्ञान कहते हैं। |
| सहायक नदी | वह नदी जो किसी बड़ी नदी या झील में मिलती है। |
| किलेबंदी | सुरक्षा के उद्देश्य से किसी बस्ती या नगर के चारों ओर बनाई गई विशाल दीवार। |
| अभिजात वर्ग | समाज का उच्च स्तर, जैसे शासक, अधिकारी, प्रशासक तथा प्रायः पुरोहित या पुजारी। |
| जलाशय | वह विशाल प्राकृतिक या कृत्रिम स्थान जहाँ जल का भंडारण किया जाता है। |
| दलहन | फसलों की वह श्रेणी जिसमें सेम, मटर के दाने और विभिन्न दालें शामिल हैं। |
महत्वपूर्ण अंतर
| हड़प्पा सभ्यता | सिंधु-सरस्वती सभ्यता |
|---|---|
| इस नाम का आधार हड़प्पा नगर की प्रारंभिक खोज है। | यह नाम सिंधु और सरस्वती नदी क्षेत्रों में सभ्यता के व्यापक विस्तार को दर्शाता है। |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- हड़प्पा सभ्यता को सिंधु सभ्यता और सिंधु-सरस्वती सभ्यता भी कहा जाता है।
- हड़प्पा सभ्यता को भारत का पहला नगरीकरण कहा गया है।
- लगभग 3500 सा.सं.पू. से गाँव नगरों में बदलने लगे।
- लगभग 2600 सा.सं.पू. में कई नगर महानगरों में विकसित हुए।
- हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो प्रारंभ में खोजे गए प्रमुख नगरों में थे।
- धौलावीरा अपने विशाल जलाशयों और जल-प्रबंधन के लिए प्रसिद्ध है।
- मोहनजो-दड़ो में प्रसिद्ध महास्नानागार मिला है।
- लोथल में विशाल बंदरगाह जैसी संरचना मिली है।
- हड़प्पावासी कृषि, शिल्प, धातुकर्म और व्यापार में कुशल थे।
- हड़प्पावासियों ने कांस्य का उपयोग उपकरण और बर्तन बनाने में किया।
- लगभग 1900 सा.सं.पू. के आसपास नगरों का ह्रास होने लगा।
- जलवायु परिवर्तन, वर्षा में कमी और सरस्वती नदी के सूखने को ह्रास के प्रमुख कारणों में माना गया है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- हड़प्पा सभ्यता → भारत की प्रारंभिक नगरीय सभ्यता
- 3500 सा.सं.पू. → गाँवों का नगरों में परिवर्तन शुरू
- 2600 सा.सं.पू. → नगरों का महानगरों में विकास
- हड़प्पा → पहला उत्खनित नगर
- धौलावीरा → विशाल जलाशय और जल-प्रबंधन
- मोहनजो-दड़ो → महास्नानागार
- लोथल → विशाल बंदरगाह जैसी संरचना
- कृषि → गेहूँ, जौ, बाजरा, दलहन, सब्जियाँ, कभी-कभी धान
- व्यापार → स्थल, नदी और समुद्री मार्ग
- मुहरें → व्यापारिक गतिविधियों से संबंधित
- तांबा + टिन → कांस्य
- लगभग 1900 सा.सं.पू. → नगरों का ह्रास
- मुख्य कारण → जलवायु परिवर्तन, वर्षा में कमी और सरस्वती नदी का सूखना
भारतीय सभ्यता का प्रारंभ
अध्याय 6. भारतीय सभ्यता का प्रारंभ
सभ्यता क्या है?
- सभ्यता मानव समाज के उन्नत चरण को कहा जाता है।
- सभ्यता में केवल नगरों का विकास ही नहीं, बल्कि शासन, व्यापार, शिल्प, लेखन, कृषि और सांस्कृतिक जीवन भी शामिल होते हैं।
सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ
- शासन और प्रशासन – समाज के विभिन्न कार्यों को व्यवस्थित करने की व्यवस्था।
- नगरीकरण – नगरों की योजना, विकास, जल-प्रबंधन और जल-निकास व्यवस्था।
- शिल्प – पत्थर, धातु आदि से उपकरण, आभूषण और अन्य वस्तुओं का निर्माण।
- व्यापार – वस्तुओं का आंतरिक और बाहरी आदान-प्रदान।
- लेखन – अभिलेख रखने और संचार के लिए लेखन प्रणाली।
- सांस्कृतिक विचार – कला, स्थापत्य, साहित्य, श्रुति परंपराएँ और सामाजिक रीति-रिवाज।
- कृषि उत्पादकता – गाँवों के साथ-साथ नगरों के लिए पर्याप्त भोजन का उत्पादन।
प्राचीन सभ्यताओं का आरंभ
- विश्व के अलग-अलग भागों में सभ्यताओं का आरंभ अलग-अलग समय पर हुआ।
- मेसोपोटामिया में लगभग 6,000 वर्ष पहले सभ्यता का आरंभ हुआ।
- इसके कुछ शताब्दियों बाद प्राचीन मिस्र की सभ्यता का विकास हुआ।
- भारतीय उपमहाद्वीप में भी एक विकसित सभ्यता का उदय हुआ, जिसे हड़प्पा या सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा जाता है।
सिंधु-सरस्वती सभ्यता
- इस सभ्यता को सिंधु सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और सिंधु-सरस्वती सभ्यता जैसे नामों से जाना जाता है।
- इसके निवासियों को हड़प्पाई या हड़प्पावासी कहा जाता है।
- यह विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है।
- इस सभ्यता का विस्तार सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक था।
- इस विकास प्रक्रिया को भारत का पहला नगरीकरण कहा गया है।
गाँव से नगर का विकास
- सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों ने विशाल मैदानों को उपजाऊ बनाया।
- उपजाऊ भूमि कृषि के लिए अनुकूल थी।
- लगभग 3500 सा.सं.पू. से गाँव नगरों में बदलने लगे।
- लगभग 2600 सा.सं.पू. में बढ़ते व्यापार और विनिमय के कारण कई नगर महानगरों में बदल गए।
- नगरों के जीवन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से पर्याप्त कृषि उपज मिलना आवश्यक था।
सरस्वती नदी
- सरस्वती नदी प्राचीन काल में हिमालय की तलहटी से हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के कुछ क्षेत्रों से होकर बहती थी।
- वर्तमान में इसे भारत में घग्गर और पाकिस्तान में हाकरा के नाम से जाना जाता है।
- आज यह एक मौसमी नदी है और मुख्यतः वर्षा ऋतु में बहती है।
- सरस्वती का वर्णन सबसे पहले ऋग्वेद में मिलता है।
हड़प्पा नाम क्यों पड़ा?
- लगभग 1920–21 में हड़प्पा इस सभ्यता से संबंधित पहला उत्खनित नगर था।
- इसी कारण इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता और इसके लोगों को हड़प्पावासी कहा गया।
- बाद में अनेक अन्य स्थलों की खोज से पता चला कि यह सभ्यता बहुत बड़े क्षेत्र में फैली हुई थी।
प्रमुख हड़प्पाई नगर
| नगर | वर्तमान क्षेत्र |
|---|---|
| हड़प्पा | पंजाब, पाकिस्तान |
| मोहनजो-दड़ो | सिंध, पाकिस्तान |
| धौलावीरा | गुजरात |
| राखीगढ़ी | हरियाणा |
| कालीबंगा | राजस्थान |
| लोथल | गुजरात |
महत्वपूर्ण शब्द
- सहायक नदी – वह नदी जो किसी बड़ी नदी या झील में मिलती है।
- नगरीकरण – नगरों का विकास और उनका व्यवस्थित विस्तार।
- किलेबंदी – सुरक्षा के लिए नगर या बस्ती के चारों ओर बनाई गई विशाल दीवार।
- अभिजात वर्ग – समाज का उच्च वर्ग, जैसे शासक, अधिकारी और प्रशासक।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- सिंधु-सरस्वती सभ्यता भारत की प्रारंभिक विकसित नगरीय सभ्यताओं में से एक थी।
- इस सभ्यता को सिंधु, हड़प्पा और सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा जाता है।
- इसके निवासियों को हड़प्पाई या हड़प्पावासी कहा जाता है।
- 3500 सा.सं.पू. – गाँवों का नगरों में परिवर्तन शुरू।
- 2600 सा.सं.पू. – नगरों का महानगरों में विकास।
- 1920–21 – हड़प्पा का उत्खनन इस सभ्यता की पहचान में महत्वपूर्ण रहा।
- भारत का पहला नगरीकरण – हड़प्पाई नगरों के विकास को कहा गया है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- सभ्यता → मानव समाज का उन्नत चरण
- मेसोपोटामिया → लगभग 6,000 वर्ष पहले सभ्यता का आरंभ
- 3500 सा.सं.पू. → गाँव से नगर
- 2600 सा.सं.पू. → नगरों का महानगरों में विकास
- हड़प्पा → पहला उत्खनित प्रमुख नगर
- सिंधु-सरस्वती सभ्यता → भारत का पहला नगरीकरण
- सरस्वती → वर्तमान घग्गर-हाकरा से संबंधित नदी
भारतीय सभ्यता का प्रारंभ
अध्याय 6. भारतीय सभ्यता का प्रारंभ
नगर-योजना
- हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगर सुव्यवस्थित नगर-योजना के अनुसार बनाए गए थे।
- नगरों में चौड़ी सड़कें और गलियाँ बनाई गई थीं।
- सड़कें सामान्यतः चारों दिशाओं की ओर उन्मुख होती थीं।
- अधिकांश नगरों के चारों ओर किलेबंदी की गई थी।
- नगर सामान्यतः दो भागों में विभाजित थे—ऊपरी नगर और निचला नगर।
- ऊपरी नगर में संभवतः अभिजात वर्ग के लोग रहते थे।
- निचले नगर में सामान्य लोग रहते थे।
- कुछ बड़े भवन सामूहिक उद्देश्यों के लिए बनाए गए थे, जैसे गोदाम।
- भवनों के निर्माण में सामान्यतः ईंटों का प्रयोग किया जाता था।
- बड़े और छोटे घरों के निर्माण की गुणवत्ता में बहुत अधिक अंतर नहीं मिलता।
मोहनजो-दड़ो का महास्नानागार
- मोहनजो-दड़ो का महास्नानागार हड़प्पा सभ्यता की प्रसिद्ध संरचनाओं में से एक है।
- इसका आकार लगभग 12 × 7 मीटर है।
- ईंटों के ऊपर जलरोधक सामग्री की परत चढ़ाई गई थी।
- स्नानागार के चारों ओर छोटे-छोटे कमरे बने हुए थे।
- एक कमरे के अंदर कुआँ भी मिला है।
- पानी को बाहर निकालने के लिए नाली की व्यवस्था थी।
- स्नानागार को समय-समय पर स्वच्छ पानी से भरा जाता था।
- इसके उपयोग के बारे में विभिन्न व्याख्याएँ दी गई हैं, लेकिन निश्चित निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।
जल प्रबंधन
- हड़प्पावासी जल प्रबंधन और स्वच्छता को बहुत महत्त्व देते थे।
- घरों में स्नान के लिए अलग स्नानागार होते थे।
- घर जल-निकास प्रणाली से जुड़े हुए थे।
- जल-निकास की नालियाँ सामान्यतः सड़कों के नीचे बनाई जाती थीं।
- मोहनजो-दड़ो में ईंटों से बने कुओं से पानी निकाला जाता था।
- अन्य क्षेत्रों में तालाब, झरने और मानव निर्मित जलाशय जल के स्रोत रहे होंगे।
धौलावीरा के जलाशय
- धौलावीरा गुजरात के कच्छ के रण में स्थित है।
- धौलावीरा में विशाल जलाशयों की एक विकसित प्रणाली मिली है।
- सबसे बड़े जलाशय की लंबाई लगभग 73 मीटर थी।
- धौलावीरा में कम-से-कम छह विशाल जलाशय बनाए गए थे।
- जलाशय पत्थरों और चट्टानों को काटकर भी बनाए गए थे।
- अधिकांश जलाशय भूमिगत नालियों से जुड़े हुए थे।
- इनका उद्देश्य जल के संचयन और वितरण में सहायता करना था।
कृषि
- हड़प्पावासियों की अनेक बस्तियाँ नदियों के किनारे बसी थीं।
- नदियाँ जल उपलब्ध कराने के साथ आसपास की भूमि को उपजाऊ बनाती थीं।
- हड़प्पावासी कृषि पर बहुत अधिक निर्भर थे।
- वे दलहन, सब्जियाँ, जौ, गेहूँ, कुछ मोटे अनाज, बाजरा और कभी-कभी धान उगाते थे।
- हड़प्पावासी यूरेशिया में कपास उगाने वालों में सबसे प्रारंभिक लोगों में थे।
- कपास का उपयोग कपड़ा बनाने में किया जाता था।
- कृषि के लिए हल सहित विभिन्न उपकरणों का प्रयोग किया जाता था।
दलहन
दलहन फसलों की वह श्रेणी है जिसमें सेम, मटर के दाने और विभिन्न प्रकार की दालें शामिल होती हैं।
गाँव और नगर का संबंध
- गहन कृषि गतिविधियाँ सैकड़ों छोटे ग्रामीण स्थलों और गाँवों द्वारा संचालित होती थीं।
- नगरों के जीवित रहने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से पर्याप्त कृषि उपज आवश्यक थी।
- गाँव नगरों को भोजन उपलब्ध कराते थे।
- इससे गाँव और नगरों के बीच आर्थिक निर्भरता का पता चलता है।
हड़प्पावासियों का भोजन
- हड़प्पावासी विभिन्न प्रकार के अनाज, दलहन और सब्जियाँ खाते थे।
- वे जौ, गेहूँ, मोटे अनाज, बाजरा और कभी-कभी धान का उपयोग करते थे।
- मांस के लिए उन्होंने अनेक पशुओं को पाला।
- मछलियों के लिए वे नदियों और समुद्रों पर निर्भर रहते थे।
- मिट्टी के खाना पकाने वाले पात्रों की वैज्ञानिक जाँच से भोजन के अनेक अवशेष मिले हैं।
- इन अवशेषों में दूध उत्पादों के साथ हल्दी, अदरक और केले के प्रमाण भी मिले हैं।
- इससे उनके भोजन में विविधता का पता चलता है।
सक्रिय व्यापार
- हड़प्पावासी अपनी सभ्यता के भीतर और भारत के अन्य क्षेत्रों के साथ व्यापार करते थे।
- वे भारत के बाहर की सभ्यताओं और संस्कृतियों के साथ भी व्यापार करते थे।
- वे आभूषण, लकड़ी, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ, संभवतः सोना, कपास और कुछ खाद्य वस्तुएँ निर्यात करते थे।
- कार्नेलियन के मनके उनके प्रिय आभूषणों में शामिल थे।
- हड़प्पाई कारीगर कार्नेलियन के मनकों में छेद करने की तकनीक जानते थे।
- शंख से सुंदर चूड़ियाँ भी बनाई जाती थीं।
- व्यापार में स्थल मार्ग, नदी मार्ग और समुद्री मार्गों का प्रयोग किया जाता था।
कार्नेलियन के मनके
- कार्नेलियन लाल रंग का एक पत्थर है।
- यह गुजरात में पाया जाता था।
- इससे सुंदर मनके बनाए जाते थे।
- हड़प्पाई कारीगर मनकों में छेद करके उन्हें धागे में पिरोते थे।
समुद्री व्यापार और लोथल
- हड़प्पावासियों ने दूर के क्षेत्रों के लिए समुद्री मार्गों का उपयोग किया।
- यह भारत की प्रथम गहन समुद्री गतिविधि मानी गई है।
- गुजरात और सिंध के तटीय क्षेत्रों में अनेक हड़प्पाई बस्तियाँ मिली हैं।
- लोथल गुजरात में स्थित एक छोटी हड़प्पाई बस्ती थी।
- लोथल में लगभग 217 मीटर लंबा और 36 मीटर चौड़ा विशाल बेसिन मिला है।
- संभावना है कि इसका उपयोग नावों द्वारा वस्तुओं के आयात और निर्यात के लिए किया जाता था।
हड़प्पाई मुहरें
- व्यापक व्यापार के लिए व्यापारियों और उनके सामान की पहचान आवश्यक थी।
- अनेक हड़प्पाई बस्तियों से हजारों छोटी मुहरें मिली हैं।
- मुहरें सामान्यतः मुलायम पत्थर स्टिऐटाइट से बनाई जाती थीं।
- मुहरों को गर्म करके कठोर बनाया जाता था।
- मुहरों पर सामान्यतः विभिन्न जानवरों के चित्र बनाए गए हैं।
- इन पर लेखन प्रणाली के कुछ संकेत भी मिलते हैं।
- हड़प्पाई लेखन प्रणाली का अर्थ अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है।
- मुहरों का संबंध व्यापारिक गतिविधियों से माना जाता है।
धातु विज्ञान
- हड़प्पावासी तांबे की कलाकारी में कुशल थे।
- तांबे में टिन मिलाने पर कांस्य धातु बनती है।
- कांस्य तांबे की तुलना में अधिक कठोर होता है।
- हड़प्पावासी कांस्य का उपयोग उपकरण और बर्तन बनाने में करते थे।
प्राचीन जीवन
- पुरातत्त्वविदों को हड़प्पावासियों द्वारा बनाई और उपयोग की गई अनेक वस्तुएँ मिली हैं।
- इन वस्तुओं से उनके दैनिक जीवन के बारे में जानकारी मिलती है।
- धौलावीरा से कांस्य दर्पण और पकी मिट्टी के पात्र मिले हैं।
- पत्थर पर उकेरा गया खेल-बोर्ड भी मिला है।
- मिट्टी की सीटी भी मिली है।
- हड़प्पावासी वयस्कों और बच्चों के मनोरंजन के लिए विभिन्न खेल खेलते थे।
- भार तौलने के पत्थर और कांस्य की छैनी जैसी वस्तुएँ भी मिली हैं।
सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक वस्तुएँ
- हड़प्पाई स्थलों से अनेक सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक वस्तुएँ मिली हैं।
- इनमें छोटी मूर्तियाँ, मुहरें और अन्य कलात्मक वस्तुएँ शामिल हैं।
- मोहनजो-दड़ो से कांस्य की प्रसिद्ध ‘नर्तकी’ की लघु प्रतिमा मिली है।
- नमस्ते की मुद्रा में बैठी पकी मिट्टी की मूर्ति भी मिली है।
- लोथल से एक पात्र मिला है जिस पर प्यासे कौए की कहानी का चित्रण है।
- इन वस्तुओं से हड़प्पावासियों की कला, जीवन और सांस्कृतिक विचारों की जानकारी मिलती है।
हड़प्पा सभ्यता का ह्रास
- लगभग 1900 सा.स.पू. के आसपास सिंधु-सरस्वती सभ्यता का ह्रास हुआ।
- इसके नगर धीरे-धीरे खाली होते गए।
- लोग बदलते वातावरण में ग्रामीण जीवन-शैली अपनाने लगे।
- पूर्व की सरकार या प्रशासन के समाप्त होने के संकेत मिलते हैं।
- हड़प्पावासी छोटी-छोटी बस्तियों में बिखर गए।
हड़प्पा सभ्यता के ह्रास के कारण
- पहले यह माना जाता था कि युद्ध या आक्रमण के कारण नगरों का विनाश हुआ।
- लेकिन युद्ध या आक्रमण के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं।
- हड़प्पावासियों के पास सेना या युद्ध के हथियार होने के प्रमाण भी नहीं मिले।
- एक प्रमुख कारण जलवायु में परिवर्तन और वर्षा में कमी माना जाता है।
- लगभग 2200 सा.सं.पू. से जलवायु परिवर्तन के कारण शुष्कता बढ़ी।
- वर्षा में कमी से कृषि कठिन हुई और नगरों में खाद्य आपूर्ति कम हुई होगी।
- दूसरा प्रमुख कारण सरस्वती नदी के मध्य बेसिन का सूखना माना गया है।
- कालीबंगा और बनावली जैसे नगरों को अचानक छोड़ दिया गया।
नगरों का अंत या नई शुरुआत?
- नगरों के समाप्त होने का अर्थ हड़प्पा संस्कृति का पूर्ण अंत नहीं था।
- हड़प्पा की संस्कृति और प्रौद्योगिकी का अधिकांश भाग आगे भी बना रहा।
- लोग ग्रामीण बस्तियों में लौट गए।
- ग्रामीण जीवन-शैली में भोजन और जल तक अपेक्षाकृत सहज पहुँच थी।
- इस प्रकार हड़प्पा सभ्यता की कई परंपराएँ आगे की भारतीय सभ्यता में पहुँच गईं।
महत्वपूर्ण शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जलाशय | विशाल प्राकृतिक या कृत्रिम स्थान जहाँ जल का भंडारण किया जाता है। |
| दलहन | सेम, मटर के दाने और दालों जैसी फसलों की श्रेणी। |
| धातु विज्ञान | धातुओं के निष्कर्षण, शुद्धिकरण, मिश्रण तथा उनके गुणों के अध्ययन से संबंधित विज्ञान। |
| किलेबंदी | सुरक्षा के लिए किसी नगर या बस्ती के चारों ओर बनाई गई विशाल दीवार। |
| अभिजात वर्ग | समाज का उच्च वर्ग, जैसे शासक, अधिकारी और प्रशासक। |
महत्वपूर्ण अंतर
| ऊपरी नगर | निचला नगर |
|---|---|
| संभवतः अभिजात वर्ग के लोग रहते थे। | सामान्य लोग रहते थे। |
| नगर का एक विशिष्ट भाग। | नगर का दूसरा प्रमुख भाग। |
| तांबा | कांस्य |
|---|---|
| एक धातु। | तांबे में टिन मिलाने से बनने वाली अधिक कठोर धातु। |
| अपेक्षाकृत नरम। | तांबे की तुलना में अधिक कठोर। |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- मोहनजो-दड़ो का प्रसिद्ध महास्नानागार लगभग 12 × 7 मीटर का है।
- धौलावीरा में विशाल जलाशयों की विकसित प्रणाली मिली है।
- धौलावीरा का सबसे बड़ा जलाशय लगभग 73 मीटर लंबा था।
- हड़प्पावासी जल प्रबंधन और स्वच्छता को महत्त्व देते थे।
- लोथल गुजरात में स्थित हड़प्पाई बस्ती है।
- लोथल में विशाल बेसिन मिला है, जिसका संबंध समुद्री व्यापार से माना जाता है।
- हड़प्पाई मुहरें मुख्यतः स्टिऐटाइट से बनाई जाती थीं।
- हड़प्पाई मुहरों पर जानवरों के चित्र और लेखन के संकेत मिलते हैं।
- तांबे में टिन मिलाने से कांस्य बनता है।
- हड़प्पावासी कृषि, शिल्प और व्यापार में कुशल थे।
- लगभग 1900 सा.स.पू. के आसपास इस सभ्यता का ह्रास हुआ।
- जलवायु परिवर्तन, वर्षा में कमी और सरस्वती नदी के मध्य बेसिन के सूखने को प्रमुख कारणों में माना गया है।
- युद्ध या आक्रमण को सभ्यता के ह्रास का निश्चित कारण मानने के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- नगर-योजना → चौड़ी सड़कें, गलियाँ, किलेबंदी और व्यवस्थित नगर।
- महास्नानागार → मोहनजो-दड़ो।
- विशाल जलाशय → धौलावीरा।
- समुद्री व्यापार → लोथल।
- प्रमुख फसलें → जौ, गेहूँ, बाजरा, मोटे अनाज, कभी-कभी धान, दलहन और सब्जियाँ।
- कपास → कपड़ा बनाने में उपयोग।
- मुहरें → पहचान और व्यापार से संबंधित।
- कांस्य → तांबा + टिन।
- मनोरंजन → खेल-बोर्ड, सीटी और अन्य खिलौने।
- ह्रास → लगभग 1900 सा.स.पू. के आसपास।
- प्रमुख कारण → जलवायु परिवर्तन, वर्षा में कमी और सरस्वती नदी के मध्य बेसिन का सूखना।
- परिणाम → नगरों का ह्रास और ग्रामीण जीवन-शैली की ओर वापसी।
भारतीय सभ्यता का प्रारंभ
अध्याय 6. भारतीय सभ्यता का प्रारंभ – Assignment
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
सही विकल्प चुनिए।
- मानव समाज के उन्नत चरण को क्या कहा जाता है?
- संस्कृति
- सभ्यता
- प्रशासन
- व्यापार
- भारतीय उपमहाद्वीप की प्रारंभिक सभ्यता को किस नाम से जाना जाता है?
- वैदिक सभ्यता
- मौर्य सभ्यता
- हड़प्पा सभ्यता
- गुप्त सभ्यता
- हड़प्पा सभ्यता से संबंधित पहला उत्खनित नगर कौन-सा था?
- लोथल
- धौलावीरा
- हड़प्पा
- राखीगढ़ी
- लगभग 3500 सा.सं.पू. से गाँव किसमें परिवर्तित होने लगे?
- किलों में
- नगरों में
- बंदरगाहों में
- राजधानियों में
- मोहनजो-दड़ो किस प्रसिद्ध संरचना के लिए जाना जाता है?
- विशाल स्तूप
- महास्नानागार
- विशाल मंदिर
- लोहे के स्तंभ
- धौलावीरा किसके लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है?
- जलाशयों और जल प्रबंधन के लिए
- लौह उद्योग के लिए
- गुफाओं के लिए
- स्तूपों के लिए
- हड़प्पाई नगर सामान्यतः कितने प्रमुख भागों में विभाजित थे?
- एक
- दो
- तीन
- चार
- हड़प्पाई नगर के निचले नगर में मुख्यतः कौन रहते थे?
- अभिजात वर्ग
- राजा
- सामान्य लोग
- सैनिक
- हड़प्पावासी किस फसल को उगाने वाले प्रारंभिक लोगों में थे?
- चाय
- कपास
- कॉफी
- गन्ना
- लोथल वर्तमान में किस राज्य में स्थित है?
- राजस्थान
- हरियाणा
- गुजरात
- पंजाब
- हड़प्पाई मुहरें मुख्यतः किस पदार्थ से बनाई जाती थीं?
- ग्रेनाइट
- संगमरमर
- स्टिऐटाइट
- लोहा
- तांबे में टिन मिलाने पर कौन-सी धातु बनती है?
- पीतल
- कांस्य
- लोहा
- इस्पात
- कार्नेलियन क्या है?
- एक धातु
- एक लाल रंग का पत्थर
- एक प्रकार की लकड़ी
- एक प्रकार की मिट्टी
- लगभग 1900 सा.स.पू. के आसपास किस सभ्यता का ह्रास हुआ?
- मिस्र की सभ्यता
- मेसोपोटामिया की सभ्यता
- सिंधु-सरस्वती सभ्यता
- मौर्य सभ्यता
- निम्नलिखित में से कौन-सा हड़प्पा सभ्यता के ह्रास का प्रमुख कारण माना जाता है?
- औद्योगिक क्रांति
- जलवायु परिवर्तन
- रेल मार्गों का विकास
- समुद्री युद्ध
रिक्त स्थान भरिए
- मानव समाज के उन्नत चरण को __________ कहते हैं।
- हड़प्पा सभ्यता को भारत का पहला __________ कहा जाता है।
- लगभग 3500 सा.सं.पू. से गाँव __________ में परिवर्तित होने लगे।
- मोहनजो-दड़ो का प्रसिद्ध __________ हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख संरचना है।
- धौलावीरा विशाल __________ के लिए प्रसिद्ध है।
- हड़प्पावासी __________ उगाने वाले प्रारंभिक लोगों में थे।
- तांबे में टिन मिलाने से __________ बनता है।
- लोथल का संबंध __________ व्यापार से माना जाता है।
- हड़प्पाई मुहरों पर विभिन्न __________ के चित्र बनाए गए हैं।
- लगभग 1900 सा.स.पू. के आसपास हड़प्पा सभ्यता का __________ हुआ।
सही या गलत लिखिए
- हड़प्पा सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक थी।
- धौलावीरा गुजरात में स्थित है।
- मोहनजो-दड़ो में महास्नानागार मिला है।
- हड़प्पाई नगरों में जल-निकास की व्यवस्था थी।
- लोथल का संबंध समुद्री व्यापार से था।
- हड़प्पावासी केवल शिकार पर निर्भर रहते थे।
- कार्नेलियन से मनके बनाए जाते थे।
- कांस्य तांबे की तुलना में अधिक कठोर होता है।
- हड़प्पाई लेखन प्रणाली को पूरी तरह पढ़ लिया गया है।
- जलवायु परिवर्तन हड़प्पा सभ्यता के ह्रास का एक कारण था।
एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दीजिए
- भारत की प्रारंभिक नगरीय सभ्यता का नाम क्या था?
- हड़प्पा सभ्यता से संबंधित पहला उत्खनित नगर कौन-सा था?
- विशाल जलाशयों के लिए प्रसिद्ध हड़प्पाई नगर कौन-सा है?
- महास्नानागार किस नगर में मिला है?
- समुद्री व्यापार से संबंधित प्रमुख हड़प्पाई स्थल कौन-सा है?
- तांबे और टिन से बनने वाली धातु का नाम क्या है?
- लाल रंग के पत्थर का नाम क्या है जिससे मनके बनाए जाते थे?
- हड़प्पा सभ्यता के ह्रास का एक प्रमुख प्राकृतिक कारण लिखिए।
लघु उत्तरीय प्रश्न
30–50 शब्दों में उत्तर दीजिए।
- सभ्यता क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
- हड़प्पा सभ्यता को भारत का पहला नगरीकरण क्यों कहा जाता है?
- हड़प्पाई नगर-योजना की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
- मोहनजो-दड़ो के महास्नानागार का वर्णन कीजिए।
- धौलावीरा की जल प्रबंधन व्यवस्था की विशेषताएँ लिखिए।
- हड़प्पावासियों की प्रमुख फसलों के नाम लिखिए।
- लोथल का व्यापारिक महत्व क्या था?
- हड़प्पाई मुहरों का क्या उपयोग रहा होगा?
अंतर स्पष्ट कीजिए
- ऊपरी नगर और निचले नगर में अंतर लिखिए।
- मोहनजो-दड़ो और धौलावीरा में अंतर लिखिए।
- तांबा और कांस्य में अंतर लिखिए।
- स्थल व्यापार और समुद्री व्यापार में अंतर लिखिए।
मिलान कीजिए
| कॉलम 'अ' | कॉलम 'ब' |
|---|---|
| 1. मोहनजो-दड़ो | क. गुजरात |
| 2. धौलावीरा | ख. महास्नानागार |
| 3. लोथल | ग. राखीगढ़ी |
| 4. हरियाणा | घ. समुद्री व्यापार |
| 5. स्टिऐटाइट | ङ. मुहरें |
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
80–120 शब्दों में उत्तर दीजिए।
- हड़प्पा सभ्यता की नगर-योजना और जल-निकास व्यवस्था का विस्तार से वर्णन कीजिए।
- हड़प्पावासियों की कृषि और भोजन के बारे में विस्तार से लिखिए।
- हड़प्पा सभ्यता के व्यापार और शिल्प-कौशल का वर्णन कीजिए।
- हड़प्पा सभ्यता के ह्रास के प्रमुख कारणों की व्याख्या कीजिए।
मानचित्र आधारित प्रश्न
- भारत के मानचित्र पर धौलावीरा, लोथल, राखीगढ़ी और कालीबंगा को चिह्नित कीजिए।
- पाकिस्तान के मानचित्र पर हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो को चिह्नित कीजिए।
- सिंधु नदी और उसके आसपास विकसित हड़प्पा सभ्यता के क्षेत्र को मानचित्र पर दर्शाइए।
गतिविधि आधारित प्रश्न
- हड़प्पाई नगर का एक सरल मॉडल बनाइए जिसमें सड़कें, घर और जल-निकास की व्यवस्था दिखाई गई हो।
- धौलावीरा के जलाशय का चित्र बनाकर जल-संचयन की व्यवस्था दर्शाइए।
- हड़प्पाई मुहर का चित्र बनाइए और उस पर किसी पशु का प्रतीक बनाइए।
- लोथल के विशाल बेसिन का रेखाचित्र बनाकर उसके संभावित उपयोग को दर्शाइए।
सोचिए और उत्तर दीजिए
- हड़प्पावासियों ने नदियों के किनारे नगर बसाना क्यों उचित समझा होगा?
- हड़प्पाई नगरों में जल-निकास की सुव्यवस्थित व्यवस्था क्यों आवश्यक रही होगी?
- धौलावीरा की जल प्रबंधन प्रणाली से आज हमें क्या सीख मिलती है?
- क्या हड़प्पा सभ्यता का ह्रास केवल युद्ध या आक्रमण के कारण हुआ था? अपने उत्तर के पक्ष में कारण दीजिए।
- हड़प्पावासियों के ग्रामीण जीवन की ओर लौटने से हमें गाँव और नगर के संबंध के बारे में क्या पता चलता है?
त्वरित परीक्षा अभ्यास
- हड़प्पा सभ्यता → भारत की प्रारंभिक नगरीय सभ्यता
- मोहनजो-दड़ो → महास्नानागार
- धौलावीरा → विशाल जलाशय और जल प्रबंधन
- लोथल → समुद्री व्यापार
- स्टिऐटाइट → मुहरों का निर्माण
- तांबा + टिन → कांस्य
- कार्नेलियन → मनके बनाने में प्रयुक्त लाल पत्थर
- लगभग 1900 सा.स.पू. → हड़प्पा सभ्यता का ह्रास
- प्रमुख कारण → जलवायु परिवर्तन, वर्षा में कमी और सरस्वती नदी के मध्य बेसिन का सूखना
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