पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति - Class 6 Social Science Hindi CBSE Notes
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पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति - Class 6 Social Science Hindi CBSE Notes
पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
अध्याय 1 – पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
इस अध्याय में मानचित्र, उसके घटकों, दिशाओं, पैमाने तथा पृथ्वी पर किसी स्थान की सही स्थिति निर्धारित करने के लिए अक्षांश और देशांतर के उपयोग का अध्ययन किया गया है। साथ ही स्थानीय समय, मानक समय और समय क्षेत्रों को भी समझाया गया है।
अध्याय समीक्षा
मानचित्र
मानचित्र किसी क्षेत्र का प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन है, जिसमें स्थानों की स्थिति और वहाँ तक पहुँचने के मार्गों को दर्शाया जाता है। मानचित्र में धरातल को सामान्यतः ऊपर से देखने के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
मानचित्रावली (एटलस)
एटलस मानचित्रों की एक पुस्तक या संग्रह है।
मानचित्र के प्रकार
| मानचित्र का प्रकार | क्या दर्शाता है? |
|---|---|
| भौतिक मानचित्र | पर्वत, महासागर, नदियाँ आदि प्राकृतिक आकृतियाँ। |
| राजनैतिक मानचित्र | देश, राज्य, सीमाएँ, नगर और राजधानियाँ आदि। |
| विषयगत मानचित्र | किसी विशेष प्रकार की सूचना। |
मानचित्र के मुख्य घटक
मानचित्र के तीन मुख्य घटक हैं:
- दूरी
- दिशा
- प्रतीक चिह्न
पैमाना (Scale)
पैमाना मानचित्र पर दिखाई गई दूरी और धरातल पर वास्तविक दूरी के बीच संबंध बताता है। उदाहरण के लिए, यदि 1 सेंटीमीटर मानचित्र पर 500 मीटर वास्तविक दूरी को दर्शाता है, तो पैमाना 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर होगा।
दिशाएँ
चार मुख्य दिशाएँ उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम हैं। इन्हें प्रधान दिशाएँ या चतुर्दिश कहा जाता है।
चार मध्यवर्ती दिशाएँ हैं:
- उत्तर-पूर्व
- दक्षिण-पूर्व
- दक्षिण-पश्चिम
- उत्तर-पश्चिम
प्रतीक चिह्न
मानचित्र पर वास्तविक वस्तुओं को छोटे-छोटे प्रतीकों द्वारा दर्शाया जाता है। बड़े क्षेत्र के मानचित्र में रेलवे स्टेशन, विद्यालय, सड़क, नदी, तालाब, पुल, डाकघर, पुलिस स्टेशन आदि को दिखाने के लिए प्रतीक चिह्नों का प्रयोग किया जाता है।
ग्लोब
ग्लोब पृथ्वी का गोलाकार मॉडल है। क्योंकि ग्लोब और पृथ्वी का आकार लगभग समान है, इसलिए यह समतल मानचित्र की तुलना में पृथ्वी के आकार और स्थिति का बेहतर प्रतिनिधित्व करता है।
निर्देशांक
निर्देशांक ऐसी संख्यात्मक प्रणाली है जिसकी सहायता से पृथ्वी पर किसी स्थान की सही स्थिति निर्धारित की जाती है। अक्षांश और देशांतर मिलकर किसी स्थान के निर्देशांक बनाते हैं।
अक्षांश
अक्षांश भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की दूरी का माप है। अक्षांश रेखाएँ भूमध्य रेखा के समानांतर पृथ्वी के चारों ओर खींचे गए काल्पनिक वृत्त हैं।
- भूमध्य रेखा का अक्षांश 0° है।
- उत्तरी ध्रुव का अक्षांश 90° उत्तर है।
- दक्षिणी ध्रुव का अक्षांश 90° दक्षिण है।
- अक्षांशों को डिग्री में मापा जाता है।
भूमध्य रेखा
भूमध्य रेखा पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में बाँटने वाली 0° अक्षांश की काल्पनिक रेखा है। यह सबसे बड़ा अक्षांश वृत्त है।
अक्षांश और जलवायु
भूमध्य रेखा के आसपास सामान्यतः जलवायु गर्म होती है। भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की ओर जाने पर अक्षांश बढ़ता जाता है और जलवायु सामान्यतः ठंडी होती जाती है।
देशांतर
देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व या पश्चिम की दूरी का माप है। देशांतर रेखाएँ एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाने वाले काल्पनिक अर्धवृत्त हैं।
- देशांतर को डिग्री में मापा जाता है।
- प्रमुख याम्योत्तर का देशांतर 0° है।
- देशांतर का मान 0° से 180° पूर्व या 180° पश्चिम तक होता है।
प्रमुख याम्योत्तर (Prime Meridian)
प्रमुख याम्योत्तर वह 0° देशांतर रेखा है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदर्भ रेखा माना गया है। यह इंग्लैंड के ग्रिनिच से होकर गुजरती है, इसलिए इसे ग्रिनिच याम्योत्तर भी कहा जाता है।
उज्जयिनी याम्योत्तर
प्राचीन भारत में उज्जयिनी याम्योत्तर का खगोलीय गणनाओं में महत्वपूर्ण स्थान था। यह वर्तमान उज्जैन से होकर गुजरती थी। भारतीय खगोलविद अक्षांश और देशांतर की अवधारणाओं से परिचित थे।
अक्षांश और देशांतर में अंतर
| अक्षांश | देशांतर |
|---|---|
| भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की दूरी बताता है। | प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व या पश्चिम की दूरी बताता है। |
| अक्षांश रेखाएँ समानांतर वृत्त होती हैं। | देशांतर रेखाएँ ध्रुव से ध्रुव तक जाने वाले अर्धवृत्त होती हैं। |
| भूमध्य रेखा 0° अक्षांश है। | प्रमुख याम्योत्तर 0° देशांतर है। |
निर्देशांक द्वारा स्थान का निर्धारण
अक्षांश और देशांतर को एक साथ प्रयोग करके पृथ्वी पर किसी स्थान की स्थिति निर्धारित की जाती है। उदाहरण के लिए, किसी स्थान के अक्षांश और देशांतर ज्ञात होने पर उसकी स्थिति को पृथ्वी पर निश्चित किया जा सकता है।
ग्रिड रेखाएँ
ग्लोब पर अक्षांशों के समानांतर और देशांतरों के याम्योत्तर मिलकर एक जाल जैसी संरचना बनाते हैं, जिसे ग्रिड रेखाएँ कहा जाता है। इनकी सहायता से पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति निर्धारित की जाती है।
स्थानीय समय
स्थानीय समय किसी स्थान के देशांतर के आधार पर निर्धारित समय है। पृथ्वी के अलग-अलग देशांतरों पर सूर्य की स्थिति अलग होने के कारण स्थानीय समय भी अलग होता है।
समय और पृथ्वी का घूर्णन
पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 24 घंटे में एक पूरा चक्कर लगाती है। एक पूरा चक्कर 360° का होता है। इसलिए पृथ्वी लगभग 15° प्रति घंटे घूमती है।
देशांतर और समय का संबंध
- 15° देशांतर का अंतर लगभग 1 घंटे के समय के अंतर के बराबर होता है।
- पूर्व की ओर जाने पर स्थानीय समय आगे बढ़ता है।
- पश्चिम की ओर जाने पर स्थानीय समय पीछे होता है।
ग्रिनिच याम्योत्तर और GMT
ग्रिनिच से गुजरने वाली प्रमुख याम्योत्तर को 0° देशांतर माना जाता है। इसे ग्रिनिच मीन टाइम (GMT) के संदर्भ के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
मानक समय
किसी देश या क्षेत्र में समय की एकरूपता बनाए रखने के लिए एक निश्चित समय को मानक समय के रूप में अपनाया जाता है। इससे अलग-अलग स्थानों के स्थानीय समय के कारण होने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सकता है।
भारतीय मानक समय (IST)
भारत में एक मानक समय अपनाया गया है। ग्रिनिच के समय की तुलना में भारतीय मानक समय 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
समय क्षेत्र (Time Zone)
पृथ्वी को समय के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में बाँटा जाता है जिन्हें समय क्षेत्र कहा जाता है। सामान्यतः 15° देशांतर का क्षेत्र लगभग एक घंटे के समय अंतर से संबंधित होता है।
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा प्रमुख याम्योत्तर के लगभग विपरीत 180° देशांतर के पास स्थित है। इसे पार करने पर तिथि में एक दिन का परिवर्तन होता है।
गोलार्ध
| रेखा | पृथ्वी का विभाजन |
|---|---|
| भूमध्य रेखा | उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध |
| प्रमुख याम्योत्तर | पूर्वी और पश्चिमी गोलार्ध |
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
- मानचित्र – किसी क्षेत्र का प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन।
- एटलस – मानचित्रों की पुस्तक या संग्रह।
- पैमाना – मानचित्र की दूरी और वास्तविक दूरी के बीच संबंध।
- अक्षांश – भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की दूरी का माप।
- देशांतर – प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व या पश्चिम की दूरी का माप।
- निर्देशांक – अक्षांश और देशांतर द्वारा किसी स्थान की स्थिति निर्धारित करने की प्रणाली।
- प्रमुख याम्योत्तर – 0° देशांतर की संदर्भ रेखा।
- स्थानीय समय – किसी स्थान के देशांतर के आधार पर निर्धारित समय।
- मानक समय – किसी देश या क्षेत्र के लिए अपनाया गया निश्चित समय।
- समय क्षेत्र – समय के आधार पर पृथ्वी का विभाजन।
- मुहाना – वह स्थान जहाँ नदी समुद्र में मिलती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- भूमध्य रेखा का अक्षांश 0° है।
- उत्तरी ध्रुव 90° उत्तर और दक्षिणी ध्रुव 90° दक्षिण पर है।
- प्रमुख याम्योत्तर 0° देशांतर है।
- देशांतर का संबंध स्थानीय समय से है।
- पृथ्वी 24 घंटे में लगभग 360° घूमती है।
- 15° देशांतर का अंतर लगभग 1 घंटे के समय अंतर के बराबर है।
- भारत का मानक समय GMT से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा लगभग 180° देशांतर पर स्थित है।
- उज्जयिनी याम्योत्तर का प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान में महत्वपूर्ण स्थान था।
त्वरित पुनरावृत्ति
- मानचित्र → स्थानों को समझने और खोजने का साधन
- पैमाना → मानचित्र की दूरी : वास्तविक दूरी
- मुख्य दिशाएँ → उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम
- अक्षांश → भूमध्य रेखा से उत्तर/दक्षिण
- देशांतर → प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व/पश्चिम
- अक्षांश + देशांतर → किसी स्थान के निर्देशांक
- देशांतर → स्थानीय समय
- 15° देशांतर → लगभग 1 घंटे का समय अंतर
- 180° के पास → अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा
अध्याय का सार
मानचित्र → दिशा + दूरी + प्रतीक चिह्न → ग्लोब → निर्देशांक → अक्षांश + देशांतर → स्थान की स्थिति → देशांतर से स्थानीय समय → मानक समय → समय क्षेत्र → अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा
पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
अध्याय 1 – पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
मानचित्र
मानचित्र किसी क्षेत्र का प्रतीकों की सहायता से बनाया गया चित्र या रेखांकन है। इसका उपयोग किसी स्थान की स्थिति, दिशा, दूरी तथा विभिन्न भौगोलिक विशेषताओं को समझने के लिए किया जाता है।
मानचित्र का उपयोग
- किसी स्थान का पता लगाने के लिए।
- एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का मार्ग जानने के लिए।
- दो स्थानों के बीच की दूरी जानने के लिए।
- विभिन्न दिशाओं को समझने के लिए।
- प्राकृतिक तथा मानव निर्मित विशेषताओं को दर्शाने के लिए।
मानचित्रावली
मानचित्रावली मानचित्रों का संग्रह होती है, जो सामान्यतः एक पुस्तक के रूप में होती है।
मानचित्र के मुख्य घटक
किसी मानचित्र के तीन प्रमुख घटक होते हैं:
- दूरी – दो स्थानों के बीच की दूरी को दर्शाती है।
- दिशा – किसी स्थान की स्थिति को दूसरी जगह के संबंध में बताती है।
- प्रतीक चिह्न – मानचित्र पर विभिन्न वस्तुओं और स्थानों को दर्शाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं।
मुख्य दिशाएँ
चार मुख्य दिशाएँ हैं:
- उत्तर
- दक्षिण
- पूर्व
- पश्चिम
मध्यवर्ती दिशाएँ
दो मुख्य दिशाओं के बीच की दिशाओं को मध्यवर्ती दिशाएँ कहते हैं।
- उत्तर-पूर्व
- दक्षिण-पूर्व
- दक्षिण-पश्चिम
- उत्तर-पश्चिम
दिशाओं द्वारा स्थान बताना
किसी स्थान की स्थिति को किसी दूसरे स्थान के संबंध में दिशा बताकर स्पष्ट किया जा सकता है। जैसे – विद्यालय बाजार के उत्तर में स्थित है।
पैमाना
पैमाना मानचित्र पर दिखाई गई दूरी और धरातल पर वास्तविक दूरी के बीच का संबंध बताता है।
उदाहरण: यदि मानचित्र पर 1 सेंटीमीटर वास्तविक धरातल पर 500 मीटर को दर्शाता है, तो पैमाना 1 सेमी = 500 मीटर होगा।
मानचित्र में प्रतीक चिह्न
मानचित्र में वास्तविक वस्तुओं को उनके वास्तविक आकार में दिखाना संभव नहीं होता। इसलिए विभिन्न वस्तुओं को दर्शाने के लिए निश्चित प्रतीक चिह्नों का प्रयोग किया जाता है।
मानचित्र में सामान्य प्रतीक चिह्न
| वस्तु या स्थान | मानचित्र पर प्रतीक का उपयोग |
|---|---|
| रेलवे स्टेशन | विशेष प्रतीक द्वारा |
| सड़क | रेखा द्वारा |
| रेलवे लाइन | रेखा द्वारा |
| नदी | प्रतीक या रेखा द्वारा |
| कुआँ | विशेष प्रतीक द्वारा |
| तालाब | विशेष प्रतीक द्वारा |
| डाकघर | विशेष प्रतीक द्वारा |
| पुलिस स्टेशन | विशेष प्रतीक द्वारा |
परंपरागत प्रतीक चिह्न
परंपरागत प्रतीक चिह्न वे निश्चित संकेत होते हैं जिनका प्रयोग मानचित्रों में विभिन्न वस्तुओं और स्थानों को दर्शाने के लिए किया जाता है।
ग्लोब
ग्लोब पृथ्वी का गोलाकार मॉडल है। यह पृथ्वी के वास्तविक आकार और विभिन्न स्थानों की स्थिति को समझने में हमारी सहायता करता है।
पृथ्वी पर स्थानों का पता लगाना
पृथ्वी पर किसी स्थान की सही स्थिति बताने के लिए अक्षांश और देशांतर का प्रयोग किया जाता है। दोनों को मिलाकर किसी स्थान के निर्देशांक प्राप्त होते हैं।
निर्देशांक
निर्देशांक ऐसी माप हैं जिनकी सहायता से पृथ्वी पर किसी स्थान की सटीक स्थिति निर्धारित की जाती है। किसी स्थान के निर्देशांक के लिए उसके अक्षांश और देशांतर का प्रयोग किया जाता है।
अक्षांश
अक्षांश भूमध्य रेखा से किसी स्थान की उत्तर या दक्षिण दिशा में कोणीय दूरी का माप है। अक्षांश को डिग्री में मापा जाता है।
भूमध्य रेखा
भूमध्य रेखा पृथ्वी के बीचों-बीच खींची गई एक काल्पनिक रेखा है। इसका अक्षांश 0° है और यह पृथ्वी को उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाँटती है।
महत्वपूर्ण अक्षांश
| स्थान | अक्षांश |
|---|---|
| भूमध्य रेखा | 0° |
| उत्तरी ध्रुव | 90° उत्तर |
| दक्षिणी ध्रुव | 90° दक्षिण |
उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध
| उत्तरी गोलार्ध | दक्षिणी गोलार्ध |
|---|---|
| भूमध्य रेखा के उत्तर का भाग। | भूमध्य रेखा के दक्षिण का भाग। |
| अक्षांश को उत्तर के रूप में लिखा जाता है। | अक्षांश को दक्षिण के रूप में लिखा जाता है। |
अक्षांश और जलवायु
अक्षांश और जलवायु में संबंध होता है। भूमध्य रेखा के आसपास जलवायु सामान्यतः गर्म होती है। भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की ओर जाने पर अक्षांश बढ़ता जाता है और जलवायु सामान्यतः ठंडी होती जाती है।
महत्वपूर्ण शब्द
- मानचित्र – किसी क्षेत्र का प्रतीकों द्वारा बनाया गया चित्र।
- मानचित्रावली – मानचित्रों का संग्रह।
- पैमाना – मानचित्र की दूरी और वास्तविक दूरी के बीच संबंध।
- ग्लोब – पृथ्वी का गोलाकार मॉडल।
- अक्षांश – भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की कोणीय दूरी।
- भूमध्य रेखा – 0° अक्षांश की काल्पनिक रेखा।
- निर्देशांक – किसी स्थान की स्थिति निर्धारित करने के लिए अक्षांश और देशांतर का प्रयोग।
त्वरित पुनरावृत्ति
- मानचित्र किसी क्षेत्र को समझने और स्थानों का पता लगाने में सहायक होता है।
- मानचित्र के मुख्य घटक – दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।
- चार मुख्य दिशाएँ – उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम।
- चार मध्यवर्ती दिशाएँ – उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम।
- पैमाना मानचित्र की दूरी और वास्तविक दूरी का संबंध बताता है।
- ग्लोब पृथ्वी का गोलाकार मॉडल है।
- भूमध्य रेखा 0° अक्षांश पर स्थित है।
- अक्षांश से भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण में किसी स्थान की स्थिति ज्ञात होती है।
- अक्षांश और देशांतर मिलकर किसी स्थान के निर्देशांक बनाते हैं।
पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
अध्याय 1. पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
इस भाग में हम देशांतर के आधार पर किसी स्थान की स्थिति, स्थानीय समय, मानक समय, समय क्षेत्र और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को समझेंगे।
देशांतर
- देशांतर किसी स्थान की स्थिति को मुख्य याम्योत्तर के पूर्व या पश्चिम में मापने की विधि है।
- देशांतर का मापन 0° से 180° तक किया जाता है।
- मुख्य याम्योत्तर से पूर्व की ओर देशांतर को पूर्वी देशांतर तथा पश्चिम की ओर देशांतर को पश्चिमी देशांतर कहा जाता है।
- 180° पूर्व और 180° पश्चिम एक ही देशांतर रेखा को दर्शाते हैं।
मुख्य याम्योत्तर और ग्रिनिच
- 0° देशांतर को मुख्य याम्योत्तर कहा जाता है।
- यह ग्रिनिच से होकर गुजरता है।
- ग्रिनिच के स्थानीय समय को ग्रिनिच मीन टाइम (GMT) भी कहा जाता है।
- देशांतर का उपयोग किसी स्थान के स्थानीय समय को निर्धारित करने में भी किया जाता है।
पृथ्वी का घूर्णन और समय
- पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है और लगभग 24 घंटे में एक पूरा चक्कर लगाती है।
- पृथ्वी का पूरा चक्कर 360° का होता है।
- इसलिए पृथ्वी लगभग 15° देशांतर प्रति घंटे घूमती है।
- 15° देशांतर का अंतर = 1 घंटे का समय अंतर।
- 1° देशांतर का अंतर = 4 मिनट का समय अंतर।
पूर्व और पश्चिम जाने पर समय का अंतर
| दिशा | समय में परिवर्तन |
|---|---|
| पूर्व की ओर | समय बढ़ता है |
| पश्चिम की ओर | समय घटता है |
उदाहरण: यदि ग्रिनिच पर दोपहर 12 बजे हैं, तो 15° पूर्वी देशांतर पर स्थानीय समय लगभग 1 बजे होगा और 30° पूर्वी देशांतर पर लगभग 2 बजे होगा। पश्चिम की ओर जाने पर इसके विपरीत समय घटता जाता है।
स्थानीय समय
- किसी स्थान के देशांतर के आधार पर वहाँ निर्धारित समय को स्थानीय समय कहा जाता है।
- अलग-अलग देशांतरों पर स्थित स्थानों का स्थानीय समय अलग हो सकता है।
- एक ही देश में अनेक स्थानीय समय होने से दैनिक कार्यों में कठिनाई हो सकती है।
पोरबंदर और तिनसुकिया का उदाहरण
पोरबंदर और तिनसुकिया के बीच लगभग 30° देशांतर का अंतर है। इसलिए दोनों स्थानों के स्थानीय समय में लगभग 2 घंटे का अंतर हो सकता है। इसी कारण एक स्थान पर सूर्यास्त हो जाने के बाद भी दूसरे स्थान पर दिन का प्रकाश रह सकता है।
मानक समय
- एक देश में अनेक स्थानीय समयों की कठिनाई को दूर करने के लिए सामान्यतः एक मानक समय अपनाया जाता है।
- मानक समय किसी निश्चित याम्योत्तर के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
- किसी देश के सभी स्थान सामान्य कार्यों और समय-सारिणी के लिए इस मानक समय का उपयोग करते हैं।
भारतीय मानक समय
- भारत में भारतीय मानक समय (IST) का प्रयोग किया जाता है।
- भारतीय मानक समय ग्रिनिच के स्थानीय समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
- इसी कारण जब ग्रिनिच पर दोपहर 12 बजे होते हैं, तब भारत में शाम के 5:30 बजे होते हैं।
समय क्षेत्र
- समय क्षेत्र पृथ्वी के ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें एक समान मानक समय अपनाया जाता है।
- समय क्षेत्रों के निर्धारण में लगभग 15° देशांतर के क्षेत्र का व्यापक रूप से पालन किया जाता है।
- समय क्षेत्रों की सीमाएँ हमेशा सीधी नहीं होतीं।
- समय क्षेत्र की सीमाएँ कई बार अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं और प्रत्येक देश के मानक समय को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।
स्थानीय समय और मानक समय में अंतर
| स्थानीय समय | मानक समय |
|---|---|
| किसी स्थान के देशांतर के आधार पर निर्धारित होता है। | पूरे देश या निर्धारित क्षेत्र में अपनाया जाने वाला सामान्य समय है। |
| अलग-अलग देशांतरों पर अलग हो सकता है। | एक निर्धारित याम्योत्तर के आधार पर रखा जाता है। |
| एक ही देश में अलग-अलग स्थानीय समय हो सकते हैं। | दैनिक कार्यों में सुविधा के लिए एक समान समय रखने में सहायता करता है। |
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा मुख्य याम्योत्तर के लगभग विपरीत 180° देशांतर पर स्थित है।
- इस रेखा को पार करने पर तिथि में एक दिन का परिवर्तन होता है।
- यह रेखा पूरी तरह सीधी नहीं है।
- कुछ देशों में एक ही दिन को दो भागों में बाँटने से बचने के लिए यह रेखा टेढ़ी-मेढ़ी होकर गुजरती है।
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा पार करने पर तिथि में परिवर्तन
| यात्रा की दिशा | तिथि में परिवर्तन |
|---|---|
| पूर्व की ओर से रेखा पार करने पर | एक दिन घटता है |
| पश्चिम की ओर से रेखा पार करने पर | एक दिन जुड़ता है |
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
- देशांतर: मुख्य याम्योत्तर के पूर्व या पश्चिम किसी स्थान की कोणीय स्थिति का माप।
- मुख्य याम्योत्तर: 0° देशांतर की रेखा, जो ग्रिनिच से होकर गुजरती है।
- स्थानीय समय: किसी स्थान के देशांतर के आधार पर निर्धारित समय।
- मानक समय: किसी देश या क्षेत्र द्वारा सामान्य रूप से अपनाया गया निर्धारित समय।
- समय क्षेत्र: ऐसा भौगोलिक क्षेत्र जहाँ एक समान मानक समय अपनाया जाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा: मुख्य याम्योत्तर के लगभग विपरीत 180° देशांतर पर स्थित वह रेखा जिसे पार करने पर तिथि में एक दिन का परिवर्तन होता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- पृथ्वी का एक पूरा घूर्णन = 360°।
- पृथ्वी का एक पूरा घूर्णन = 24 घंटे।
- 15° देशांतर = 1 घंटा।
- 1° देशांतर = 4 मिनट।
- पूर्व की ओर जाने पर स्थानीय समय बढ़ता है।
- पश्चिम की ओर जाने पर स्थानीय समय घटता है।
- भारतीय मानक समय (IST), GMT से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा मुख्य याम्योत्तर के लगभग विपरीत 180° पर है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका में 6 समय क्षेत्र और रूस में 11 समय क्षेत्र हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- 0° देशांतर को मुख्य याम्योत्तर कहते हैं।
- मुख्य याम्योत्तर ग्रिनिच से होकर गुजरता है।
- देशांतर का उपयोग स्थान की स्थिति के साथ-साथ स्थानीय समय निर्धारित करने में भी किया जाता है।
- पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है, इसलिए 15° = 1 घंटा।
- पूर्व की ओर समय बढ़ता और पश्चिम की ओर समय घटता है।
- एक देश में अलग-अलग स्थानीय समयों की कठिनाई को दूर करने के लिए मानक समय अपनाया जाता है।
- भारत का मानक समय GMT से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा लगभग 180° देशांतर पर स्थित है और इसे पार करने पर तिथि बदलती है।
पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
असाइनमेंट – अध्याय 1. पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
भाग – A : बहुविकल्पीय प्रश्न
-
0° देशांतर को क्या कहा जाता है?
- भूमध्य रेखा
- मुख्य याम्योत्तर
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा
- कर्क रेखा
-
मुख्य याम्योत्तर किस स्थान से होकर गुजरता है?
- दिल्ली
- ग्रिनिच
- मुंबई
- पेरिस
-
पृथ्वी 24 घंटे में कितने अंश घूमती है?
- 90°
- 180°
- 360°
- 720°
-
15° देशांतर का समय अंतर कितना होता है?
- 15 मिनट
- 30 मिनट
- 1 घंटा
- 2 घंटे
-
1° देशांतर का समय अंतर कितना होता है?
- 1 मिनट
- 2 मिनट
- 4 मिनट
- 15 मिनट
-
पूर्व की ओर जाने पर स्थानीय समय में क्या परिवर्तन होता है?
- समय घटता है
- समय बढ़ता है
- समय समान रहता है
- तिथि बदल जाती है
-
पश्चिम की ओर जाने पर स्थानीय समय क्या होता है?
- बढ़ता है
- घटता है
- दोगुना होता है
- समान रहता है
-
भारत का मानक समय ग्रिनिच के समय से कितना आगे है?
- 4 घंटे
- 5 घंटे
- 5 घंटे 30 मिनट
- 6 घंटे 30 मिनट
-
भारतीय मानक समय को संक्षेप में क्या कहा जाता है?
- GMT
- IST
- UTC
- ITL
-
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा लगभग किस देशांतर पर स्थित है?
- 0°
- 90°
- 120°
- 180°
-
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को पार करने पर क्या परिवर्तन होता है?
- समय में 1 घंटा परिवर्तन
- अक्षांश में परिवर्तन
- तिथि में एक दिन का परिवर्तन
- ऋतु में परिवर्तन
-
मानक समय अपनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- मानचित्र बनाना
- अलग-अलग स्थानीय समयों की कठिनाई को कम करना
- अक्षांश मापना
- महासागरों की गहराई मापना
-
समय क्षेत्र लगभग कितने देशांतर के क्षेत्र का पालन करते हैं?
- 5°
- 10°
- 15°
- 30°
-
संयुक्त राज्य अमेरिका में कितने समय क्षेत्र बताए गए हैं?
- 4
- 5
- 6
- 11
-
रूस में कितने समय क्षेत्र बताए गए हैं?
- 6
- 8
- 10
- 11
भाग – B : रिक्त स्थान भरिए
- 0° देशांतर को __________ कहा जाता है।
- मुख्य याम्योत्तर __________ से होकर गुजरता है।
- पृथ्वी 24 घंटे में __________ का एक पूरा चक्कर लगाती है।
- 15° देशांतर का समय अंतर __________ होता है।
- भारत का मानक समय GMT से __________ आगे है।
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा लगभग __________ देशांतर पर स्थित है।
भाग – C : सही या गलत लिखिए
- पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है।
- पूर्व की ओर जाने पर स्थानीय समय घटता है।
- पश्चिम की ओर जाने पर स्थानीय समय घटता है।
- भारत का मानक समय GMT से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा 0° देशांतर पर स्थित है।
- एक देश में अलग-अलग स्थानीय समय होने की कठिनाई को दूर करने के लिए मानक समय अपनाया जाता है।
भाग – D : अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- देशांतर किसे कहते हैं?
- मुख्य याम्योत्तर क्या है?
- स्थानीय समय क्या होता है?
- मानक समय क्या है?
- समय क्षेत्र किसे कहते हैं?
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा क्या है?
भाग – E : लघु उत्तरीय प्रश्न
- देशांतर और स्थानीय समय के बीच क्या संबंध है?
- पूर्व और पश्चिम की ओर जाने पर स्थानीय समय में क्या परिवर्तन होता है?
- किसी देश के लिए मानक समय अपनाना क्यों आवश्यक है?
- स्थानीय समय और मानक समय में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को सीधा न रखकर टेढ़ा-मेढ़ा क्यों बनाया गया है?
भाग – F : संख्यात्मक प्रश्न
- यदि दो स्थानों के बीच देशांतर का अंतर 30° है, तो उनके स्थानीय समय में कितना अंतर होगा?
- यदि ग्रिनिच में दोपहर 12 बजे हैं, तो 30° पूर्वी देशांतर पर स्थानीय समय क्या होगा?
- यदि किसी स्थान का देशांतर ग्रिनिच से 45° पूर्व है, तो वहाँ ग्रिनिच की तुलना में स्थानीय समय कितना आगे होगा?
- यदि दो स्थानों के बीच देशांतर का अंतर 60° है, तो उनके स्थानीय समय में कितना अंतर होगा?
भाग – G : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- पृथ्वी के घूर्णन के आधार पर समय क्षेत्र की अवधारणा को समझाइए।
- स्थानीय समय, मानक समय और समय क्षेत्र के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।
- भारतीय मानक समय (IST) की आवश्यकता और महत्व समझाइए।
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा का महत्व उदाहरण सहित समझाइए।
भाग – H : गतिविधि
- अपने घर या विद्यालय के आसपास की आठ दिशाओं में स्थित प्रमुख स्थानों की सूची बनाइए।
- भारत के मानचित्र पर ग्रिनिच के मुख्य याम्योत्तर और भारत के मानक समय से संबंधित देशांतर को पहचानिए।
- पोरबंदर और तिनसुकिया के स्थानीय समय में अंतर क्यों होता है? कारण लिखिए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
- 0° देशांतर → मुख्य याम्योत्तर
- मुख्य याम्योत्तर → ग्रिनिच
- 360° ÷ 24 घंटे → 15° प्रति घंटा
- 15° → 1 घंटा
- 1° → 4 मिनट
- पूर्व → समय बढ़ता है
- पश्चिम → समय घटता है
- भारत → GMT से 5 घंटे 30 मिनट आगे
- 180° के लगभग → अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा
Why Choose CBSE Notes for Class 6?
Reading the complete textbook is essential for building knowledge, but revision notes help students organize that knowledge effectively. Our CBSE Revision Notes for Class 6 summarize every chapter by highlighting important concepts, definitions, keywords, formulas, examples, and important points that students should remember during examinations. This approach saves valuable study time and makes revision much easier.
Students often find it difficult to revise lengthy chapters before examinations. Our notes solve this problem by presenting important information in a structured format that is easy to understand and remember. Regular revision using these notes helps improve confidence and strengthens conceptual clarity.
Chapter-wise Study Material
Each chapter included in the CBSE Notes for Class 6 section is prepared according to the latest academic session. Every topic is explained in simple language while maintaining accuracy and completeness. Students can easily revise important concepts, learn key points, and strengthen their understanding of each chapter.
The notes are suitable for daily classroom learning, homework preparation, revision before examinations, and self-study. They also serve as an excellent companion to NCERT textbooks by presenting the most important information in an organized manner.
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