कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें - Class 9 Science Exploration Hindi CBSE Notes
CBSE Notes for Class 9 are one of the most useful study resources for students who want to understand every chapter clearly and perform well in school examinations. At ATP Education, we provide carefully prepared chapter-wise CBSE Notes for Class 9 based on the latest CBSE syllabus and NCERT curriculum. These notes are designed to simplify learning, improve conceptual understanding, and help students revise important topics quickly before examinations.
CBSE Notes for Class 9 – Chapter-wise Revision Notes
Every chapter is explained in a simple and student-friendly manner so that learners can understand difficult concepts without confusion. Whether you are preparing for class tests, periodic assessments, half-yearly examinations, annual examinations, or board-oriented assessments, our Class 9 CBSE Notes help you revise the complete syllabus in less time while covering all the important concepts.
कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें - Class 9 Science Exploration Hindi CBSE Notes
कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
अध्याय 7. कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
पिछले अध्यायों में आपने सीखा कि बल वस्तुओं की गति को कैसे प्रभावित करता है। इस अध्याय में हम समझेंगे कि जब कोई बल किसी वस्तु को विस्थापित करता है, तो कार्य (Work) कैसे होता है तथा कार्य और ऊर्जा (Energy) के बीच क्या संबंध है। साथ ही कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem), ऊर्जा के विभिन्न रूप, गतिज एवं स्थितिज ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत, शक्ति (Power) तथा सरल मशीनों (Simple Machines) के कार्य एवं उपयोग का अध्ययन करेंगे। ये अवधारणाएँ दैनिक जीवन, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के अनेक अनुप्रयोगों का आधार हैं।
Chapter Review
परिचय (Introduction)
- बल द्वारा वस्तु को विस्थापित करने पर कार्य किया जाता है।
- कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।
- कार्य और ऊर्जा एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से संबंधित हैं।
- ऊर्जा विभिन्न रूपों में एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है।
- सरल मशीनें कम प्रयास में कार्य करने में सहायता करती हैं।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Definitions)
| शब्द | संक्षिप्त परिभाषा |
|---|---|
| कार्य (Work) | बल एवं बल की दिशा में हुए विस्थापन का गुणनफल। |
| ऊर्जा (Energy) | कार्य करने की क्षमता। |
| कार्य-ऊर्जा प्रमेय | किया गया कार्य = ऊर्जा में परिवर्तन। |
| गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) | वस्तु की गति के कारण प्राप्त ऊर्जा। |
| स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) | स्थिति अथवा विन्यास के कारण प्राप्त ऊर्जा। |
| शक्ति (Power) | कार्य करने की दर। |
| सरल मशीन (Simple Machine) | ऐसा उपकरण जो कार्य को सरल बनाता है। |
| यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage) | भार एवं प्रयत्न का अनुपात। |
महत्वपूर्ण शब्द (Important Terms)
- कार्य (Work)
- ऊर्जा (Energy)
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem)
- यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy)
- गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)
- स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)
- ऊर्जा संरक्षण (Conservation of Energy)
- शक्ति (Power)
- सरल मशीनें (Simple Machines)
- लीवर (Lever)
- पुली (Pulley)
- तिर्यक तल (Inclined Plane)
- यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage)
- दक्षता (Efficiency)
मुख्य अवधारणाएँ (Important Concepts)
- कार्य तभी होता है जब बल के कारण विस्थापन हो।
- कार्य धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य हो सकता है।
- कार्य का SI मात्रक जूल (Joule) है।
- कार्य करने से वस्तु की ऊर्जा में परिवर्तन होता है।
- गतिज ऊर्जा वस्तु के वेग पर निर्भर करती है।
- स्थितिज ऊर्जा वस्तु की स्थिति पर निर्भर करती है।
- ऊर्जा न उत्पन्न की जा सकती है और न नष्ट, केवल रूपांतरित होती है।
- शक्ति कार्य करने की गति को दर्शाती है।
- सरल मशीनें प्रयास को कम करके कार्य को सुविधाजनक बनाती हैं।
- यांत्रिक लाभ एवं दक्षता मशीनों के प्रदर्शन का माप हैं।
5 मिनट रिवीजन (Quick Revision)
- ✔ कार्य = बल × बल की दिशा में विस्थापन
- ✔ कार्य का SI मात्रक = जूल (J)
- ✔ ऊर्जा = कार्य करने की क्षमता
- ✔ कार्य = ऊर्जा में परिवर्तन
- ✔ गतिज ऊर्जा = गति के कारण ऊर्जा
- ✔ स्थितिज ऊर्जा = स्थिति के कारण ऊर्जा
- ✔ ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- ✔ शक्ति = कार्य ÷ समय
- ✔ सरल मशीनें कार्य को आसान बनाती हैं।
- ✔ यांत्रिक लाभ एवं दक्षता मशीनों के महत्वपूर्ण माप हैं।
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Booster)
- कार्य होने की आवश्यक शर्तें अवश्य याद रखें।
- धनात्मक, ऋणात्मक एवं शून्य कार्य में अंतर समझें।
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुप्रयोग महत्वपूर्ण हैं।
- गतिज एवं स्थितिज ऊर्जा के सूत्र परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं।
- ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत CBSE की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- शक्ति, यांत्रिक लाभ तथा दक्षता के सूत्र याद रखें।
- सरल मशीनों के प्रकार एवं उनके दैनिक जीवन के उपयोगों का अध्ययन अवश्य करें।
कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
अध्याय 7. कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
हम अपने दैनिक जीवन में अनेक प्रकार के कार्य करते हैं, जैसे किसी वस्तु को उठाना, धक्का देना, खींचना या किसी वाहन को चलाना। विज्ञान में कार्य (Work) का अर्थ सामान्य बोलचाल से अलग होता है। किसी वस्तु पर बल लगाने मात्र से कार्य नहीं होता, बल्कि जब बल के कारण वस्तु बल की दिशा में विस्थापित होती है, तभी वैज्ञानिक दृष्टि से कार्य किया गया माना जाता है। इस भाग में हम कार्य की अवधारणा, नियत बल द्वारा किए गए कार्य तथा उसके SI मात्रक का अध्ययन करेंगे।
कार्य (Work)
कार्य की अवधारणा (Concept of Work)
विज्ञान में कार्य तभी माना जाता है जब किसी वस्तु पर लगाया गया बल उसे बल की दिशा में विस्थापित करे। यदि केवल बल लगाया जाए लेकिन वस्तु अपने स्थान से न हिले, तो वैज्ञानिक दृष्टि से कार्य नहीं माना जाता। इसलिए कार्य के लिए बल (Force) और विस्थापन (Displacement) दोनों आवश्यक हैं।
- कार्य के लिए बल लगना आवश्यक है।
- बल के कारण वस्तु का विस्थापन होना चाहिए।
- बल एवं विस्थापन एक-दूसरे से संबंधित होते हैं।
- केवल बल लगाने से हमेशा कार्य नहीं होता।
किसी नियत बल द्वारा किया गया कार्य
यदि किसी वस्तु पर नियत बल (Constant Force) लगाया जाए और वस्तु बल की दिशा में s दूरी तक विस्थापित हो, तो उस बल द्वारा किया गया कार्य, लगाए गए बल तथा बल की दिशा में हुए विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है। इसे निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है।
कार्य (W) = बल (F) × बल की दिशा में विस्थापन (s)
W = F × s
| राशि | प्रतीक |
|---|---|
| कार्य | W |
| बल | F |
| विस्थापन | s |
कार्य का SI मात्रक (SI Unit of Work)
कार्य का SI मात्रक जूल (Joule) है, जिसे J द्वारा दर्शाया जाता है। यदि 1 न्यूटन (N) का बल किसी वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर (m) तक विस्थापित करे, तो किया गया कार्य 1 जूल कहलाता है।
1 J = 1 N × 1 m
| भौतिक राशि | SI मात्रक |
|---|---|
| बल (Force) | न्यूटन (N) |
| विस्थापन (Displacement) | मीटर (m) |
| कार्य (Work) | जूल (J) |
Our Concept Builder
यदि आप 20 N का बल लगाकर किसी डिब्बे को उसी दिशा में 3 m तक धकेलते हैं, तो उस डिब्बे पर किया गया कार्य W = 20 × 3 = 60 J होगा। इससे स्पष्ट होता है कि जितना अधिक बल लगाया जाएगा या जितना अधिक विस्थापन होगा, उतना ही अधिक कार्य किया जाएगा।
Exam Booster
- कार्य तभी होता है जब बल के कारण विस्थापन हो।
- कार्य = बल × बल की दिशा में विस्थापन (W = F × s)
- कार्य का SI मात्रक जूल (J) है।
- 1 जूल = 1 न्यूटन × 1 मीटर
- कार्य का परिमाण बल एवं विस्थापन दोनों पर निर्भर करता है।
- कार्य के प्रश्नों में बल तथा विस्थापन की दिशा का विशेष महत्व होता है।
कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
अध्याय 7. कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
पिछले भाग में आपने कार्य (Work), उसके SI मात्रक तथा नियत बल द्वारा किए गए कार्य का अध्ययन किया। अब हम समझेंगे कि कार्य कब शून्य, धनात्मक अथवा ऋणात्मक होता है। साथ ही बल-विस्थापन ग्राफ (Force–Displacement Graph) की सहायता से कार्य ज्ञात करना भी सीखेंगे। ये अवधारणाएँ कार्य-ऊर्जा प्रमेय को समझने का आधार बनाती हैं।
शून्य, धनात्मक एवं ऋणात्मक कार्य
बल-विस्थापन ग्राफ (Force–Displacement Graph)
यदि किसी वस्तु पर नियत बल लगाया जाए, तो बल-विस्थापन (Force–Displacement) ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल उस वस्तु पर किए गए कार्य के बराबर होता है। यदि बल नियत न हो, तब भी प्रारंभिक एवं अंतिम स्थिति के बीच ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल कार्य का मान बताता है।
- ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = किया गया कार्य
- नियत बल के लिए क्षेत्रफल आयत के बराबर होता है।
- परिवर्ती बल के लिए भी क्षेत्रफल द्वारा कार्य ज्ञात किया जा सकता है।
कार्य शून्य कब होता है?
कार्य शून्य (Zero Work) दो स्थितियों में होता है। पहली, जब वस्तु पर कोई बल न लगाया जाए। दूसरी, जब बल लगाने के बाद भी वस्तु का विस्थापन न हो। उदाहरण के लिए, किसी मजबूत दीवार को पूरी शक्ति से धक्का देने पर भी यदि दीवार नहीं हिलती, तो वैज्ञानिक दृष्टि से उस पर किया गया कार्य शून्य माना जाता है।
| स्थिति | कार्य |
|---|---|
| बल = 0 | कार्य = 0 |
| विस्थापन = 0 | कार्य = 0 |
धनात्मक कार्य (Positive Work)
जब लगाया गया बल तथा वस्तु का विस्थापन एक ही दिशा में होते हैं, तब किया गया कार्य धनात्मक (Positive Work) कहलाता है। उदाहरण के लिए, किसी पहिएदार कुर्सी को आगे की ओर धक्का देने पर लगाया गया बल तथा कुर्सी का विस्थापन दोनों एक ही दिशा में होते हैं, इसलिए कार्य धनात्मक होता है।
- बल एवं विस्थापन एक ही दिशा में होते हैं।
- कार्य का मान धनात्मक होता है।
- वस्तु को ऊर्जा प्राप्त होती है।
ऋणात्मक कार्य (Negative Work)
जब लगाया गया बल वस्तु के विस्थापन की दिशा के विपरीत होता है, तब किया गया कार्य ऋणात्मक (Negative Work) कहलाता है। जैसे, गोलरक्षक (Goalkeeper) फुटबॉल को रोकते समय उसकी गति के विपरीत दिशा में बल लगाता है। इस स्थिति में फुटबॉल पर किया गया कार्य ऋणात्मक होता है।
- बल एवं विस्थापन विपरीत दिशाओं में होते हैं।
- कार्य का मान ऋणात्मक होता है।
- वस्तु की ऊर्जा कम होती है।
धनात्मक, ऋणात्मक एवं शून्य कार्य में अंतर
| धनात्मक कार्य | ऋणात्मक कार्य | शून्य कार्य |
|---|---|---|
| बल एवं विस्थापन समान दिशा में | बल एवं विस्थापन विपरीत दिशा में | बल या विस्थापन शून्य |
| ऊर्जा बढ़ती है। | ऊर्जा घटती है। | ऊर्जा में परिवर्तन नहीं होता। |
| उदाहरण: कुर्सी को धक्का देना | उदाहरण: फुटबॉल को रोकना | उदाहरण: दीवार को धक्का देना |
Our Concept Builder
मान लीजिए आप किसी ट्रॉली को आगे की ओर धक्का देते हैं। यदि ट्रॉली आगे बढ़ती है, तो आपके द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होगा। यदि कोई व्यक्ति उसी ट्रॉली को पीछे की ओर रोकने का प्रयास करता है, तो उसका कार्य ऋणात्मक होगा। लेकिन यदि ट्रॉली बिल्कुल नहीं हिलती, तो वैज्ञानिक दृष्टि से कार्य शून्य माना जाएगा।
Exam Booster
- बल-विस्थापन ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल कार्य के बराबर होता है।
- बल या विस्थापन शून्य होने पर कार्य शून्य होता है।
- बल एवं विस्थापन एक ही दिशा में होने पर कार्य धनात्मक होता है।
- बल एवं विस्थापन विपरीत दिशा में होने पर कार्य ऋणात्मक होता है।
- दीवार को धक्का देना, पहिएदार कुर्सी को धक्का देना तथा फुटबॉल को रोकना CBSE के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
अध्याय 7. कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
अब तक आपने कार्य (Work) की अवधारणा तथा धनात्मक, ऋणात्मक एवं शून्य कार्य का अध्ययन किया। अब हम कार्य और ऊर्जा (Energy) के बीच संबंध को समझेंगे। इस भाग में कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem), ऊर्जा की अवधारणा तथा ऊर्जा के विभिन्न रूपों का अध्ययन करेंगे। ये विषय यह स्पष्ट करते हैं कि कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा क्यों कहा जाता है और कार्य करने पर ऊर्जा में किस प्रकार परिवर्तन होता है।
कार्य-ऊर्जा प्रमेय एवं ऊर्जा के रूप
कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem)
कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) के अनुसार किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य उसके गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) में हुए परिवर्तन के बराबर होता है। जब किसी वस्तु पर कार्य किया जाता है, तो उसकी ऊर्जा में परिवर्तन होता है। यदि वस्तु पर धनात्मक कार्य किया जाता है, तो उसकी ऊर्जा बढ़ती है और यदि ऋणात्मक कार्य किया जाता है, तो उसकी ऊर्जा घटती है।
- कार्य एवं ऊर्जा एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
- किया गया कार्य ऊर्जा में परिवर्तन उत्पन्न करता है।
- धनात्मक कार्य से ऊर्जा बढ़ती है।
- ऋणात्मक कार्य से ऊर्जा घटती है।
ऊर्जा (Energy)
ऊर्जा (Energy) किसी वस्तु की कार्य करने की क्षमता है। प्रत्येक कार्य के लिए किसी न किसी रूप में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऊर्जा विभिन्न रूपों में उपस्थित होती है तथा आवश्यकता के अनुसार एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है। ऊर्जा का SI मात्रक जूल (Joule) है।
| भौतिक राशि | SI मात्रक |
|---|---|
| ऊर्जा (Energy) | जूल (J) |
| कार्य (Work) | जूल (J) |
ऊर्जा के विभिन्न रूप (Forms of Energy)
प्रकृति में ऊर्जा अनेक रूपों में पाई जाती है। परिस्थितियों के अनुसार एक प्रकार की ऊर्जा दूसरे प्रकार की ऊर्जा में परिवर्तित हो सकती है। यही कारण है कि ऊर्जा का उपयोग विभिन्न वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्यों में किया जाता है।
- यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy)
- गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)
- स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)
- ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy)
- प्रकाश ऊर्जा (Light Energy)
- ध्वनि ऊर्जा (Sound Energy)
- विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy)
- रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy)
ऊर्जा रूपांतरण (Energy Transformation)
ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है, बल्कि यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है। उदाहरण के लिए, विद्युत बल्ब में विद्युत ऊर्जा प्रकाश एवं ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है, जबकि बैटरी में रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
| उदाहरण | ऊर्जा रूपांतरण |
|---|---|
| विद्युत बल्ब | विद्युत → प्रकाश + ऊष्मा |
| बैटरी | रासायनिक → विद्युत |
| सौर पैनल | सौर → विद्युत |
| मानव शरीर | रासायनिक → यांत्रिक |
Our Concept Builder
जब कोई खिलाड़ी फुटबॉल को किक मारता है, तो उसके शरीर की रासायनिक ऊर्जा पहले यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। इसके बाद खिलाड़ी द्वारा किया गया कार्य गेंद की गतिज ऊर्जा बढ़ा देता है और गेंद गति करने लगती है। इससे स्पष्ट होता है कि कार्य और ऊर्जा का आपस में गहरा संबंध है।
Exam Booster
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार किया गया कार्य ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
- ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है।
- कार्य एवं ऊर्जा दोनों का SI मात्रक जूल (J) है।
- ऊर्जा अनेक रूपों में पाई जाती है तथा एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है।
- ऊर्जा रूपांतरण के दैनिक जीवन के उदाहरण CBSE परीक्षा में महत्वपूर्ण हैं।
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय एवं ऊर्जा के विभिन्न रूपों पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
अध्याय 7. कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
पिछले भाग में आपने कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) तथा ऊर्जा की अवधारणा का अध्ययन किया। अब हम ऊर्जा के प्रमुख रूपों में से यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) तथा गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) को समझेंगे। साथ ही कार्य-ऊर्जा प्रमेय की सहायता से गतिज ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त करना तथा गतिज ऊर्जा को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन करेंगे।
यांत्रिक ऊर्जा एवं गतिज ऊर्जा
यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy)
यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु में उसकी गति (Motion) अथवा स्थिति (Position) के कारण होती है। यांत्रिक ऊर्जा मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है— गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) तथा स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)।
- यांत्रिक ऊर्जा वस्तु की गति या स्थिति पर निर्भर करती है।
- यह गतिज एवं स्थितिज ऊर्जा का योग होती है।
- चलती हुई तथा ऊँचाई पर स्थित वस्तुओं में यांत्रिक ऊर्जा होती है।
गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)
गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु में उसकी गति के कारण होती है। यदि कोई वस्तु विरामावस्था में है, तो उसकी गतिज ऊर्जा शून्य होती है। वस्तु का वेग बढ़ने पर उसकी गतिज ऊर्जा भी बढ़ जाती है।
- गतिशील प्रत्येक वस्तु में गतिज ऊर्जा होती है।
- विरामावस्था में गतिज ऊर्जा शून्य होती है।
- वेग बढ़ने पर गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
- गतिज ऊर्जा का SI मात्रक जूल (J) है।
गतिज ऊर्जा का व्यंजक (Expression for Kinetic Energy)
कार्य-ऊर्जा प्रमेय तथा न्यूटन के गति के नियमों के आधार पर किसी m द्रव्यमान की v वेग से गतिमान वस्तु की गतिज ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त किया जाता है।
K = ½ mv²
| राशि | प्रतीक |
|---|---|
| गतिज ऊर्जा | K |
| द्रव्यमान | m |
| वेग | v |
गतिज ऊर्जा को प्रभावित करने वाले कारक
गतिज ऊर्जा मुख्य रूप से वस्तु के द्रव्यमान (Mass) तथा वेग (Velocity) पर निर्भर करती है। द्रव्यमान बढ़ने पर गतिज ऊर्जा बढ़ती है, जबकि वेग बढ़ने पर गतिज ऊर्जा का मान बहुत तेजी से बढ़ता है क्योंकि यह वेग के वर्ग (v²) के समानुपाती होती है।
| परिवर्तन | गतिज ऊर्जा पर प्रभाव |
|---|---|
| द्रव्यमान बढ़े | गतिज ऊर्जा बढ़ती है। |
| वेग बढ़े | गतिज ऊर्जा बहुत अधिक बढ़ती है। |
| वेग दोगुना हो | गतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है। |
दैनिक जीवन में गतिज ऊर्जा के उदाहरण
- चलती हुई कार में गतिज ऊर्जा होती है।
- फेंकी गई क्रिकेट गेंद में गतिज ऊर्जा होती है।
- दौड़ता हुआ खिलाड़ी गतिज ऊर्जा का उदाहरण है।
- बहता हुआ नदी का जल गतिज ऊर्जा रखता है।
Our Concept Builder
यदि समान द्रव्यमान की दो कारों में से एक कार 40 km/h तथा दूसरी 80 km/h की गति से चल रही हो, तो दूसरी कार की गतिज ऊर्जा पहली कार से कई गुना अधिक होगी। इसलिए तेज गति वाले वाहनों में दुर्घटना होने पर क्षति भी अधिक होती है।
Exam Booster
- यांत्रिक ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा।
- गतिज ऊर्जा गति के कारण उत्पन्न होती है।
- गतिज ऊर्जा का सूत्र K = ½ mv² है।
- गतिज ऊर्जा का SI मात्रक जूल (J) है।
- वेग दोगुना होने पर गतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है।
- गतिज ऊर्जा के सूत्र एवं संख्यात्मक प्रश्न CBSE परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
अध्याय 7. कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
पिछले भाग में आपने यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) तथा गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) का अध्ययन किया। अब हम स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) तथा ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत (Law of Conservation of Energy) को समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि किसी वस्तु की स्थिति में परिवर्तन होने पर उसमें ऊर्जा कैसे संचित होती है तथा ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होने पर भी उसकी कुल मात्रा क्यों स्थिर रहती है।
स्थितिज ऊर्जा एवं ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत
स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)
स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु में उसकी स्थिति (Position) अथवा विन्यास (Configuration) के कारण संचित रहती है। जब किसी वस्तु को पृथ्वी की सतह से ऊपर उठाया जाता है, तो उसमें गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा संचित हो जाती है। यही ऊर्जा वस्तु के नीचे आने पर अन्य रूपों में परिवर्तित हो सकती है।
- स्थितिज ऊर्जा वस्तु की स्थिति पर निर्भर करती है।
- ऊँचाई बढ़ने पर स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है।
- विरामावस्था में भी किसी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा हो सकती है।
- गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा दैनिक जीवन में सबसे सामान्य उदाहरण है।
स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक (Expression for Potential Energy)
यदि m द्रव्यमान की किसी वस्तु को पृथ्वी की सतह से h ऊँचाई तक उठाया जाए, तो उस पर किए गए कार्य के बराबर उसमें गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा संचित हो जाती है। इसका गणितीय व्यंजक निम्न प्रकार है।
PE = mgh
| राशि | प्रतीक |
|---|---|
| स्थितिज ऊर्जा | PE |
| द्रव्यमान | m |
| गुरुत्वीय त्वरण | g |
| ऊँचाई | h |
ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत (Law of Conservation of Energy)
ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है। किसी बंद निकाय (Closed System) में कुल ऊर्जा का मान सदैव स्थिर रहता है।
- ऊर्जा केवल रूप बदलती है।
- कुल ऊर्जा सदैव नियत रहती है।
- ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत प्रकृति का मूलभूत नियम है।
स्थितिज एवं गतिज ऊर्जा का परिवर्तन
जब किसी वस्तु को ऊँचाई से छोड़ा जाता है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा धीरे-धीरे घटती जाती है और उसी अनुपात में गतिज ऊर्जा बढ़ती जाती है। भूमि पर पहुँचने से ठीक पहले वस्तु की गतिज ऊर्जा अधिकतम तथा स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होती है।
| वस्तु की स्थिति | स्थितिज ऊर्जा | गतिज ऊर्जा |
|---|---|---|
| सबसे ऊपर | अधिकतम | न्यूनतम |
| बीच में | घटती है | बढ़ती है |
| भूमि के निकट | न्यूनतम | अधिकतम |
दैनिक जीवन में उदाहरण
- बाँध में संचित जल में स्थितिज ऊर्जा होती है।
- खींचा हुआ धनुष स्थितिज ऊर्जा का उदाहरण है।
- ऊँचाई पर रखा पत्थर नीचे गिरते समय स्थितिज ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में बदल देता है।
- झूले की गति में स्थितिज एवं गतिज ऊर्जा का निरंतर रूपांतरण होता है।
Our Concept Builder
मान लीजिए एक गेंद को किसी इमारत की छत से गिराया जाता है। प्रारंभ में गेंद की स्थितिज ऊर्जा अधिक तथा गतिज ऊर्जा लगभग शून्य होती है। जैसे-जैसे गेंद नीचे आती है, उसकी स्थितिज ऊर्जा घटती जाती है और गतिज ऊर्जा बढ़ती जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में कुल यांत्रिक ऊर्जा लगभग स्थिर रहती है, जो ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत को स्पष्ट करती है।
Exam Booster
- स्थितिज ऊर्जा स्थिति के कारण उत्पन्न होती है।
- गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा का सूत्र PE = mgh है।
- ऊर्जा न उत्पन्न की जा सकती है और न नष्ट, केवल रूपांतरित होती है।
- ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत CBSE परीक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
- स्थितिज एवं गतिज ऊर्जा के रूपांतरण पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
- बाँध, झूला तथा गिरती हुई वस्तु ऊर्जा संरक्षण के प्रमुख उदाहरण हैं।
कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
अध्याय 7. कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
पिछले भाग में आपने स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) तथा ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का अध्ययन किया। अब इस अध्याय के अंतिम भाग में हम शक्ति (Power), सरल मशीनें (Simple Machines), यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage) तथा दक्षता (Efficiency) की अवधारणाओं को समझेंगे। ये सभी विषय बताते हैं कि किसी कार्य को कम समय, कम प्रयास तथा अधिक सुविधा के साथ कैसे किया जा सकता है।
शक्ति एवं सरल मशीनें
शक्ति (Power)
शक्ति (Power) कार्य करने की दर (Rate of Doing Work) है। यदि समान कार्य दो व्यक्ति अलग-अलग समय में करते हैं, तो जो व्यक्ति कम समय में कार्य पूरा करता है, उसकी शक्ति अधिक होती है। शक्ति यह बताती है कि कार्य कितनी तेजी से किया गया है।
शक्ति (P) = कार्य (W) ÷ समय (t)
P = W / t
| भौतिक राशि | SI मात्रक |
|---|---|
| कार्य (Work) | जूल (J) |
| समय (Time) | सेकंड (s) |
| शक्ति (Power) | वाट (W) |
- अधिक शक्ति का अर्थ कम समय में अधिक कार्य करना है।
- कार्य समान होने पर कम समय लेने वाले की शक्ति अधिक होती है।
- विद्युत उपकरणों की क्षमता वाट (W) में व्यक्त की जाती है।
सरल मशीनें (Simple Machines)
सरल मशीनें (Simple Machines) ऐसे उपकरण हैं जो किसी कार्य को कम प्रयास (Effort) तथा अधिक सुविधा के साथ करने में सहायता करते हैं। ये कार्य को आसान बनाती हैं, परंतु ऊर्जा उत्पन्न नहीं करतीं। दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली अधिकांश जटिल मशीनें कई सरल मशीनों के संयोजन से बनी होती हैं।
- सरल मशीनें कार्य को सुविधाजनक बनाती हैं।
- ये प्रयत्न (Effort) को कम करने में सहायता करती हैं।
- ये बल की दिशा भी बदल सकती हैं।
- ये ऊर्जा उत्पन्न नहीं करतीं।
सरल मशीनों के प्रकार
- लीवर (Lever)
- पुली (Pulley)
- तिर्यक तल (Inclined Plane)
- पहिया एवं धुरी (Wheel and Axle)
- स्क्रू (Screw)
- कील (Wedge)
यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage)
यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage) बताता है कि मशीन द्वारा लगाया गया भार (Load) प्रयत्न (Effort) की तुलना में कितना अधिक है।
यांत्रिक लाभ = भार ÷ प्रयत्न
MA = Load / Effort
| राशि | प्रतीक |
|---|---|
| यांत्रिक लाभ | MA |
| भार | Load |
| प्रयत्न | Effort |
दक्षता (Efficiency)
दक्षता (Efficiency) किसी मशीन द्वारा प्राप्त उपयोगी कार्य तथा उसमें दी गई कुल ऊर्जा या कार्य के अनुपात को दर्शाती है। वास्तविक मशीनों में कुछ ऊर्जा घर्षण आदि के कारण नष्ट हो जाती है, इसलिए उनकी दक्षता सदैव 100% से कम होती है।
दक्षता = (उपयोगी कार्य ÷ कुल कार्य) × 100%
सरल मशीनों के उपयोग
- कुएँ से पानी निकालने में पुली का उपयोग।
- ढलान वाले मार्ग पर तिर्यक तल का उपयोग।
- कैंची, सरौता एवं झूला लीवर के उदाहरण हैं।
- स्क्रू जैक द्वारा भारी वाहन उठाए जाते हैं।
- दरवाजे की कील (Wedge) तथा कुल्हाड़ी भी सरल मशीनों के उदाहरण हैं।
Our Concept Builder
यदि किसी भारी वस्तु को सीधे ऊपर उठाने के बजाय ढलान (Inclined Plane) के माध्यम से ऊपर ले जाया जाए, तो कम बल लगाना पड़ता है। इसी प्रकार पुली और लीवर जैसी सरल मशीनें भी कार्य को अधिक सुविधाजनक बनाती हैं। वे ऊर्जा नहीं बढ़ातीं, बल्कि उपलब्ध बल का अधिक प्रभावी उपयोग करने में सहायता करती हैं।
Exam Booster
- शक्ति = कार्य ÷ समय (P = W/t)
- शक्ति का SI मात्रक वाट (W) है।
- सरल मशीनें कार्य को आसान बनाती हैं, ऊर्जा उत्पन्न नहीं करतीं।
- यांत्रिक लाभ = भार ÷ प्रयत्न (MA = Load/Effort)
- वास्तविक मशीनों की दक्षता सदैव 100% से कम होती है।
- लीवर, पुली एवं तिर्यक तल के उपयोग तथा यांत्रिक लाभ पर आधारित प्रश्न CBSE परीक्षा में महत्वपूर्ण हैं।
कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
अध्याय 7. कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
इस असाइनमेंट का उद्देश्य विद्यार्थियों की कार्य (Work), ऊर्जा (Energy), कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem), गतिज एवं स्थितिज ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत, शक्ति (Power) तथा सरल मशीनों की अवधारणाओं को सुदृढ़ करना है। सभी प्रश्न नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम एवं अध्याय की प्रमुख अवधारणाओं पर आधारित हैं।
Assignments – What Have You Learned?
A. रिक्त स्थान भरिए (Fill in the Blanks)
- कार्य का SI मात्रक __________ है।
- कार्य = __________ × बल की दिशा में विस्थापन।
- कार्य करने की क्षमता को __________ कहते हैं।
- गतिज ऊर्जा का सूत्र __________ है।
- शक्ति का SI मात्रक __________ है।
B. सत्य / असत्य लिखिए (True / False)
- केवल बल लगाने से हमेशा कार्य किया जाता है। ( )
- कार्य धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य हो सकता है। ( )
- ऊर्जा का SI मात्रक जूल (J) है। ( )
- गतिज ऊर्जा वस्तु की स्थिति पर निर्भर करती है। ( )
- सरल मशीनें ऊर्जा उत्पन्न करती हैं। ( )
C. एक शब्द / एक वाक्य में उत्तर दीजिए
- कार्य का SI मात्रक क्या है?
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय क्या बताता है?
- गतिज ऊर्जा किस कारण उत्पन्न होती है?
- स्थितिज ऊर्जा किस पर निर्भर करती है?
- शक्ति (Power) किसे कहते हैं?
D. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)
- कार्य होने के लिए आवश्यक दो शर्तें लिखिए।
- धनात्मक एवं ऋणात्मक कार्य में अंतर लिखिए।
- कार्य शून्य कब होता है?
- यांत्रिक ऊर्जा क्या है?
- सरल मशीनें कार्य को कैसे सरल बनाती हैं?
E. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय को उदाहरण सहित समझाइए।
- ऊर्जा के विभिन्न रूपों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
- गतिज एवं स्थितिज ऊर्जा में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
- सरल मशीनों के चार प्रमुख उपयोग लिखिए।
F. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
- कार्य की अवधारणा, कार्य का सूत्र, SI मात्रक तथा धनात्मक, ऋणात्मक एवं शून्य कार्य का विस्तृत वर्णन कीजिए।
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय की सहायता से ऊर्जा एवं कार्य के संबंध को स्पष्ट कीजिए।
- गतिज एवं स्थितिज ऊर्जा के सूत्रों सहित विस्तृत व्याख्या कीजिए तथा दैनिक जीवन के उदाहरण दीजिए।
- शक्ति, सरल मशीनें, यांत्रिक लाभ एवं दक्षता का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
G. Competency Based Questions
प्रश्न 1. एक छात्र 20 N का बल लगाकर किसी बक्से को 5 m तक धकेलता है।
- (a) बक्से पर किया गया कार्य ज्ञात कीजिए।
- (b) यदि बक्सा न हिले, तो कार्य कितना होगा?
- (c) अपने उत्तर का कारण लिखिए।
प्रश्न 2. एक गेंद ऊँचाई से नीचे गिरती है।
- (a) प्रारंभ में गेंद में कौन-सी ऊर्जा होती है?
- (b) नीचे आते समय ऊर्जा में क्या परिवर्तन होता है?
- (c) यह किस सिद्धांत को दर्शाता है?
H. Assertion & Reason
प्रश्न 1.
Assertion (A): यदि किसी वस्तु पर बल लगाया जाए लेकिन वह विस्थापित न हो, तो कार्य शून्य होगा।
Reason (R): कार्य होने के लिए बल के साथ विस्थापन भी आवश्यक है।
प्रश्न 2.
Assertion (A): गतिज ऊर्जा वस्तु के वेग पर निर्भर करती है।
Reason (R): गतिज ऊर्जा का सूत्र K = ½mv² है।
I. Case Study Based Questions
रवि ने एक भारी बक्से को पहले सीधे ऊपर उठाने का प्रयास किया, लेकिन उसे अधिक बल लगाना पड़ा। बाद में उसने उसी बक्से को एक तिर्यक तल (Inclined Plane) की सहायता से ऊपर पहुँचाया। इस बार कम बल लगा और कार्य करना अधिक सुविधाजनक हो गया।
- रवि ने किस प्रकार की सरल मशीन का उपयोग किया?
- इस मशीन का मुख्य लाभ क्या है?
- क्या इस प्रक्रिया में ऊर्जा उत्पन्न हुई? कारण सहित उत्तर दीजिए।
- इस उदाहरण में यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage) की अवधारणा कैसे स्पष्ट होती है?
J. HOTS (Higher Order Thinking Skills)
- यदि किसी वस्तु का वेग दोगुना कर दिया जाए, तो उसकी गतिज ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ेगा? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
- ऊँचाई पर स्थित जल से बिजली कैसे उत्पन्न की जाती है? उत्तर में स्थितिज एवं गतिज ऊर्जा का उपयोग कीजिए।
- यदि संसार में घर्षण बिल्कुल न हो, तो सरल मशीनों तथा दैनिक जीवन के कार्यों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? अपने विचार वैज्ञानिक आधार पर लिखिए।
Why Choose CBSE Notes for Class 9?
Reading the complete textbook is essential for building knowledge, but revision notes help students organize that knowledge effectively. Our CBSE Revision Notes for Class 9 summarize every chapter by highlighting important concepts, definitions, keywords, formulas, examples, and important points that students should remember during examinations. This approach saves valuable study time and makes revision much easier.
Students often find it difficult to revise lengthy chapters before examinations. Our notes solve this problem by presenting important information in a structured format that is easy to understand and remember. Regular revision using these notes helps improve confidence and strengthens conceptual clarity.
Chapter-wise Study Material
Each chapter included in the CBSE Notes for Class 9 section is prepared according to the latest academic session. Every topic is explained in simple language while maintaining accuracy and completeness. Students can easily revise important concepts, learn key points, and strengthen their understanding of each chapter.
The notes are suitable for daily classroom learning, homework preparation, revision before examinations, and self-study. They also serve as an excellent companion to NCERT textbooks by presenting the most important information in an organized manner.
Explore CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter-wise NCERT Solutions for Class 6 to 12 prepared according to the latest CBSE syllabus.
Hindi Medium
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter अन्वेषण: माध्यमिक विज्ञान के संसार में प्रवेश (CBSE NOTES)
अन्वेषण: माध्यमिक विज्ञान के संसार में प्रवेश (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter कोशिका: जीवन की निर्माण इकाई (CBSE NOTES)
कोशिका: जीवन की निर्माण इकाई (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter क्रियाशील ऊतक (CBSE NOTES)
क्रियाशील ऊतक (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter अपने परिवेश में गति का वर्णन (CBSE NOTES)
अपने परिवेश में गति का वर्णन (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण (CBSE NOTES)
मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter गति पर बलों का प्रभाव (CBSE NOTES)
गति पर बलों का प्रभाव (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें (CBSE NOTES)
कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter एक यात्रा: परमाणु के भीतर (CBSE NOTES)
एक यात्रा: परमाणु के भीतर (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter द्रव्य का परमाण्विक आधार (CBSE NOTES)
द्रव्य का परमाण्विक आधार (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग (CBSE NOTES)
ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter जनन: जीवन की निरंतरता (CBSE NOTES)
जनन: जीवन की निरंतरता (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण (CBSE NOTES)
जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण (अन्वेषण)
Explore Now →
CBSE Notes Class 9 Science Exploration
Chapter पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन (CBSE NOTES)
पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन (अन्वेषण)
Explore Now →Benefits of Using ATP Education Notes
- Latest CBSE syllabus based notes.
- Chapter-wise revision material.
- Easy-to-understand explanations.
- Important concepts and key points.
- Quick revision before examinations.
- Useful for school tests and annual exams.
- Available in Hindi and English Medium.
- Free educational resources for every student.
Your CBSE Notes Library Class 9:
Chapter-wise CBSE Notes for Class 6 to 12 prepared according to the latest CBSE syllabus.
HINDI MEDIUM
CBSE Class 9 Science Exploration
Class 9 Science Exploration CBSE Notes
अन्वेषण Open Notes
Explore Now →Your CBSE Notes Library For Class 9
Chapter-wise CBSE Notes for Class 6 to 12 prepared according to the latest CBSE syllabus.
ENGLISH MEDIUM
NCERT Solutions Class 9 Science Exploration
Class 9 Science Exploration CBSE Notes
Exploration Open Book
Explore Now →Prepare with Confidence
Success in examinations depends on regular practice, conceptual understanding, and effective revision. Our Class 9 CBSE Notes are designed to help students study smarter instead of studying longer. By revising chapter-wise notes regularly, learners can improve their understanding, remember important concepts for a longer period, and write better answers during examinations.
Along with these notes, students can also explore NCERT Solutions, MCQ Questions, Online Tests, Important Questions, Study Materials, and other learning resources available on ATP Education. Together, these resources provide complete academic support for effective learning and better examination preparation.
Start exploring the CBSE Notes for Class 9 today and make your learning journey easier with well-organized chapter-wise notes, quick revision material, and reliable study resources prepared especially for CBSE students.
Benefits of Studying with Our CBSE Notes
- Chapter-wise Coverage: Every chapter is explained in a structured and easy-to-follow format.
- Latest CBSE Syllabus: Notes are prepared according to the latest CBSE curriculum and NCERT guidelines.
- Quick Revision: Revise important concepts, formulas, definitions, and key points in less time.
- Simple Language: Difficult topics are explained in clear and student-friendly language for better understanding.
- Concept-Based Learning: Focus on understanding concepts instead of memorizing answers.
- Exam-Oriented Preparation: Helps students prepare effectively for class tests, unit tests, half-yearly, annual, and board examinations.
- Subject-wise Organization: Easily access notes for Mathematics, Science, English, Hindi, Social Science, Physics, Chemistry, Biology, Economics, and more.
- Time-Saving Study Material: Well-organized notes reduce study time and improve learning efficiency.
- Improves Answer Writing: Learn important points and present answers in a better and more organized manner.
- Boosts Confidence: Regular revision strengthens concepts and increases confidence before examinations.
- Free Learning Resource: Access high-quality CBSE Notes without any subscription or hidden charges.
- Available in Hindi & English Medium: Study comfortably in your preferred medium with chapter-wise notes.