मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण - Class 9 Science Exploration Hindi CBSE Notes
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CBSE Notes for Class 9 – Chapter-wise Revision Notes
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मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण - Class 9 Science Exploration Hindi CBSE Notes
मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
अध्याय 5. मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
यह अध्याय हमें मिश्रण (Mixture), विलयन (Solution) तथा पदार्थों के पृथक्करण (Separation) की विभिन्न वैज्ञानिक विधियों से परिचित कराता है। इसमें समांगी एवं विषमांगी मिश्रणों का वर्गीकरण, विलयन की सांद्रता, विलेयता तथा क्रिस्टलीकरण जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है। साथ ही, यह भी समझाया गया है कि दैनिक जीवन, उद्योग, कृषि एवं चिकित्सा में मिश्रणों का पृथक्करण क्यों आवश्यक है।
Chapter Review
परिचय
- मिश्रण दो या दो से अधिक पदार्थों के भौतिक मिश्रण से बनते हैं।
- मिश्रणों के गुण उनके घटकों पर निर्भर करते हैं।
- मिश्रणों का पृथक्करण विज्ञान, उद्योग, चिकित्सा तथा दैनिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
- मिश्रण (Mixture) – दो या अधिक पदार्थों का ऐसा भौतिक मिश्रण जिसमें प्रत्येक पदार्थ अपने गुण बनाए रखता है।
- समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) – ऐसा मिश्रण जिसकी संरचना प्रत्येक भाग में समान हो।
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture) – ऐसा मिश्रण जिसकी संरचना सभी भागों में समान न हो।
- विलयन (Solution) – विलेय (Solute) एवं विलायक (Solvent) से बना समांगी मिश्रण।
- सांद्रता (Concentration) – किसी निश्चित मात्रा के विलयन या विलायक में उपस्थित विलेय की मात्रा।
- विलेयता (Solubility) – किसी निश्चित तापमान पर निश्चित मात्रा के विलायक में घुल सकने वाले विलेय की अधिकतम मात्रा।
- क्रिस्टलीकरण (Crystallization) – शुद्ध ठोस क्रिस्टलों को विलयन से पृथक करने की विधि।
महत्वपूर्ण शब्द (Important Terms)
- मिश्रण (Mixture)
- समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture)
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture)
- विलयन (Solution)
- विलेय (Solute)
- विलायक (Solvent)
- सांद्रता (Concentration)
- विलेयता (Solubility)
- संतृप्त विलयन (Saturated Solution)
- क्रिस्टल (Crystal)
- क्रिस्टलीकरण (Crystallization)
- निस्यंदन (Filtration)
- वाष्पीकरण (Evaporation)
मुख्य अवधारणाएँ
- मिश्रणों का वर्गीकरण।
- समांगी एवं विषमांगी मिश्रणों के गुण।
- विलयन, विलेय एवं विलायक।
- विलयन की सांद्रता व्यक्त करने की विधियाँ।
- विलेयता एवं तापमान का प्रभाव।
- समांगी मिश्रणों के पृथक्करण की विधियाँ।
- क्रिस्टलीकरण का सिद्धांत एवं उपयोग।
त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
- विलयन सदैव समांगी मिश्रण होता है।
- रेत और जल विषमांगी मिश्रण का उदाहरण हैं।
- सांद्रता विलेय की मात्रा को दर्शाती है।
- विलेयता तापमान पर निर्भर करती है।
- अधिकांश ठोस पदार्थों की विलेयता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है।
- क्रिस्टलीकरण द्वारा शुद्ध ठोस पदार्थ प्राप्त किए जाते हैं।
- मिश्रणों का पृथक्करण उनके भौतिक गुणों के अंतर पर आधारित होता है।
Exam Ready Key Points
- समांगी एवं विषमांगी मिश्रण का अंतर अवश्य याद रखें।
- विलेय, विलायक एवं विलयन की परिभाषाएँ महत्वपूर्ण हैं।
- सांद्रता की तीनों प्रतिशत विधियाँ परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
- विलेयता एवं संतृप्त विलयन में अंतर समझें।
- क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया एवं उपयोग अक्सर पूछे जाते हैं।
- मिश्रणों के पृथक्करण की विधियाँ दैनिक जीवन के उदाहरणों सहित तैयार रखें।
मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
अध्याय 5. मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
हमारे आसपास अधिकांश पदार्थ शुद्ध रूप में नहीं बल्कि मिश्रण (Mixture) के रूप में पाए जाते हैं। पीने का जल, वायु, दूध, मिट्टी, नमक का घोल तथा विभिन्न खाद्य पदार्थ मिश्रण के सामान्य उदाहरण हैं। किसी मिश्रण का अध्ययन करने के लिए सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि मिश्रण कितने प्रकार के होते हैं तथा उनके गुणों में क्या अंतर होता है।
मिश्रणों का वर्गीकरण
मिश्रण (Mixture)
मिश्रण (Mixture) दो या दो से अधिक पदार्थों का ऐसा भौतिक संयोजन है, जिसमें प्रत्येक पदार्थ अपने मूल गुणों को बनाए रखता है। मिश्रण के घटकों को भौतिक विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है।
- मिश्रण के घटक रासायनिक रूप से नहीं जुड़ते।
- मिश्रण का संघटन निश्चित होना आवश्यक नहीं है।
- घटकों को भौतिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है।
- मिश्रण ठोस, द्रव अथवा गैसीय हो सकते हैं।
समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture)
समांगी मिश्रण वह मिश्रण है जिसकी संरचना प्रत्येक भाग में समान होती है। इसमें सभी घटक समान रूप से फैले रहते हैं और अलग-अलग दिखाई नहीं देते। ऐसे मिश्रण को सामान्यतः विलयन (Solution) भी कहा जाता है।
- संघटन पूरे मिश्रण में एकसमान होता है।
- घटक अलग-अलग दिखाई नहीं देते।
- प्रकाश सामान्य रूप से गुजर जाता है।
- उदाहरण – नमक का घोल, चीनी का घोल, सिरका, सोडा जल।
विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture)
विषमांगी मिश्रण वह मिश्रण है जिसकी संरचना प्रत्येक भाग में समान नहीं होती। इसके घटक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकते हैं तथा समय के साथ अलग भी हो सकते हैं।
- संघटन असमान होता है।
- घटक आसानी से पहचाने जा सकते हैं।
- कुछ मिश्रणों में कण समय के साथ नीचे बैठ जाते हैं।
- उदाहरण – रेत और जल, तेल और जल, चॉक चूर्ण और जल।
समांगी एवं विषमांगी मिश्रण में अंतर
| समांगी मिश्रण | विषमांगी मिश्रण |
|---|---|
| संघटन समान होता है। | संघटन असमान होता है। |
| घटक दिखाई नहीं देते। | घटक स्पष्ट दिखाई देते हैं। |
| एक ही अवस्था (Single Phase) दिखाई देती है। | दो या अधिक अवस्थाएँ दिखाई दे सकती हैं। |
| उदाहरण – चीनी का घोल। | उदाहरण – रेत और जल। |
दैनिक जीवन में उपयोग
- पीने का जल सामान्यतः समांगी मिश्रण होता है।
- दूध एक विशेष प्रकार का मिश्रण है, जिसका व्यवहार सामान्य विलयन से भिन्न होता है।
- निर्माण कार्यों में सीमेंट, रेत और बजरी का मिश्रण उपयोग किया जाता है।
- रसोई में बनने वाले अधिकांश खाद्य पदार्थ विभिन्न प्रकार के मिश्रण होते हैं।
Our Concept Builder
यदि आप एक गिलास में चीनी घोलते हैं, तो कुछ समय बाद चीनी दिखाई नहीं देती और पूरा घोल एक जैसा दिखाई देता है। यह समांगी मिश्रण है। लेकिन यदि उसी गिलास में रेत मिलाई जाए, तो रेत नीचे बैठ जाती है और अलग दिखाई देती है। यह विषमांगी मिश्रण कहलाता है।
Exam Booster
- विलयन (Solution) सदैव समांगी मिश्रण होता है।
- रेत और जल विषमांगी मिश्रण का सबसे सामान्य उदाहरण है।
- समांगी मिश्रण में सभी भागों का संघटन समान होता है।
- विषमांगी मिश्रण में घटकों को आसानी से पहचाना जा सकता है।
- समांगी एवं विषमांगी मिश्रण का अंतर CBSE परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
अध्याय 5. मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
सभी समांगी मिश्रण विलयन (Solution) कहलाते हैं। किसी भी विलयन के दो मुख्य घटक होते हैं—विलेय (Solute) और विलायक (Solvent)। इन दोनों की मात्रा के आधार पर विलयन की सांद्रता (Concentration), विलेयता (Solubility) तथा संतृप्त विलयन (Saturated Solution) जैसी अवधारणाएँ समझी जाती हैं।
विलयन, विलेय, विलायक एवं सांद्रता
विलयन (Solution)
विलयन (Solution) दो या दो से अधिक पदार्थों से बना एक समांगी मिश्रण है, जिसमें एक पदार्थ दूसरे पदार्थ में समान रूप से घुल जाता है।
- विलयन सदैव समांगी मिश्रण होता है।
- इसके सभी भागों का संघटन समान होता है।
- विलयन पारदर्शी (Transparent) हो सकता है।
- इसके घटकों को सामान्यतः आँखों से अलग नहीं देखा जा सकता।
विलेय (Solute)
विलेय (Solute) वह पदार्थ है जो विलायक में घुल जाता है। इसकी मात्रा सामान्यतः विलायक से कम होती है।
- विलायक में घुलने वाला पदार्थ।
- ठोस, द्रव या गैस हो सकता है।
- उदाहरण – नमक, चीनी, कॉपर सल्फेट।
विलायक (Solvent)
विलायक (Solvent) वह पदार्थ है जिसमें विलेय घुलता है। इसकी मात्रा सामान्यतः अधिक होती है। जल सबसे सामान्य विलायक है।
- विलेय को घोलने का कार्य करता है।
- द्रव, ठोस अथवा गैस भी हो सकता है।
- जल (Water) सार्वत्रिक विलायक के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
विलयन के घटक
| घटक | कार्य | उदाहरण |
|---|---|---|
| विलेय (Solute) | घुलने वाला पदार्थ | नमक, चीनी |
| विलायक (Solvent) | घोलने वाला पदार्थ | जल |
| विलयन (Solution) | विलेय एवं विलायक का समांगी मिश्रण | नमक का घोल |
सांद्रता (Concentration)
सांद्रता (Concentration) किसी निश्चित मात्रा के विलयन या विलायक में उपस्थित विलेय की मात्रा को दर्शाती है। विलेय की मात्रा बढ़ने पर विलयन अधिक सांद्र तथा कम होने पर तनु (Dilute) कहलाता है।
- विलेय की मात्रा बढ़ने पर सांद्रता बढ़ती है।
- विलायक की मात्रा बढ़ाने पर सांद्रता घटती है।
- सांद्रता की तुलना विभिन्न विलयनों के बीच की जा सकती है।
- रसायन विज्ञान एवं उद्योगों में इसका विशेष महत्व है।
तनु एवं सांद्र विलयन
| तनु विलयन (Dilute Solution) | सांद्र विलयन (Concentrated Solution) |
|---|---|
| विलेय की मात्रा कम होती है। | विलेय की मात्रा अधिक होती है। |
| सांद्रता कम होती है। | सांद्रता अधिक होती है। |
| उदाहरण – कम चीनी वाला शरबत। | उदाहरण – अधिक चीनी वाला शरबत। |
विलयन के दैनिक जीवन में उपयोग
- ORS घोल तैयार करने में।
- शरबत एवं पेय पदार्थ बनाने में।
- दवाइयों के निर्माण में।
- प्रयोगशालाओं में रासायनिक विलयन तैयार करने में।
Our Concept Builder
यदि एक गिलास पानी में एक चम्मच चीनी मिलाई जाए, तो विलयन तनु होगा। यदि उसी गिलास में पाँच चम्मच चीनी घोल दी जाए, तो वह अधिक सांद्र हो जाएगा। इससे स्पष्ट होता है कि सांद्रता विलेय की मात्रा पर निर्भर करती है।
Exam Booster
- विलयन एक समांगी मिश्रण होता है।
- विलेय घुलने वाला तथा विलायक घोलने वाला पदार्थ होता है।
- जल सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला विलायक है।
- सांद्रता विलेय की मात्रा को व्यक्त करती है।
- तनु एवं सांद्र विलयन का अंतर परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
अध्याय 5. मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
किसी पदार्थ के विलयन में घुलने की क्षमता निश्चित नहीं होती। यह विलेय (Solute), विलायक (Solvent) तथा तापमान (Temperature) पर निर्भर करती है। किसी निश्चित तापमान पर विलायक में विलेय की अधिकतम मात्रा को विलेयता (Solubility) कहते हैं। इस भाग में हम विलेयता, संतृप्त एवं असंतृप्त विलयन तथा सांद्रता व्यक्त करने की विधियों का अध्ययन करेंगे।
विलेयता एवं संतृप्त विलयन
विलेयता (Solubility)
विलेयता (Solubility) किसी निश्चित तापमान पर निश्चित मात्रा के विलायक में घुल सकने वाले विलेय की अधिकतम मात्रा है। प्रत्येक पदार्थ की विलेयता अलग-अलग होती है।
- विलेयता तापमान पर निर्भर करती है।
- अलग-अलग पदार्थों की विलेयता अलग होती है।
- अधिकांश ठोस पदार्थों की विलेयता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है।
- विलेयता का उपयोग रसायन विज्ञान एवं उद्योगों में किया जाता है।
संतृप्त विलयन (Saturated Solution)
संतृप्त विलयन (Saturated Solution) वह विलयन है जिसमें किसी निश्चित तापमान पर विलेय की अधिकतम मात्रा घुल चुकी होती है। इसके बाद और विलेय मिलाने पर वह नहीं घुलता।
- इसमें विलेय की अधिकतम मात्रा घुली होती है।
- अतिरिक्त विलेय नीचे बैठ जाता है।
- तापमान बदलने पर इसकी स्थिति बदल सकती है।
असंतृप्त विलयन (Unsaturated Solution)
असंतृप्त विलयन (Unsaturated Solution) वह विलयन है जिसमें उसी तापमान पर अभी और विलेय घोला जा सकता है।
- इसमें विलेय की मात्रा अधिकतम से कम होती है।
- और विलेय आसानी से घुल सकता है।
- प्रयोगशाला में अधिकांश नए विलयन इसी प्रकार के होते हैं।
संतृप्त एवं असंतृप्त विलयन में अंतर
| संतृप्त विलयन | असंतृप्त विलयन |
|---|---|
| विलेय की अधिकतम मात्रा घुल चुकी होती है। | अभी और विलेय घोला जा सकता है। |
| अतिरिक्त विलेय नहीं घुलता। | अतिरिक्त विलेय आसानी से घुल जाता है। |
| निश्चित तापमान पर स्थिर अवस्था होती है। | अभी संतृप्त होने की क्षमता शेष रहती है। |
सांद्रता व्यक्त करने की विधियाँ
विलयन की सांद्रता को विभिन्न तरीकों से व्यक्त किया जाता है। प्रयोगशालाओं एवं उद्योगों में प्रतिशत सांद्रता का व्यापक उपयोग होता है।
| विधि | अर्थ |
|---|---|
| द्रव्यमान प्रतिशत (Mass by Mass %) | 100 g विलयन में विलेय का द्रव्यमान। |
| आयतन प्रतिशत (Volume by Volume %) | 100 mL विलयन में विलेय का आयतन। |
| द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत (Mass by Volume %) | 100 mL विलयन में विलेय का द्रव्यमान। |
दैनिक जीवन में उपयोग
- शीतल पेय एवं फलों के रस बनाने में।
- दवाइयों के घोल तैयार करने में।
- प्रयोगशाला में रासायनिक विलयन बनाने में।
- खाद्य उद्योग में विभिन्न उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने में।
Our Concept Builder
यदि आप एक गिलास पानी में लगातार चीनी मिलाते जाएँ, तो एक समय ऐसा आएगा जब चीनी घुलना बंद हो जाएगी और नीचे जमा होने लगेगी। उस समय बना घोल संतृप्त विलयन (Saturated Solution) कहलाता है। यदि चीनी अभी भी पूरी तरह घुल रही है, तो वह असंतृप्त विलयन (Unsaturated Solution) है।
Exam Booster
- विलेयता निश्चित तापमान पर मापी जाती है।
- संतृप्त विलयन में अतिरिक्त विलेय नहीं घुलता।
- असंतृप्त विलयन में और विलेय घोला जा सकता है।
- अधिकांश ठोस पदार्थों की विलेयता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है।
- द्रव्यमान %, आयतन % तथा द्रव्यमान/आयतन % परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
अध्याय 5. मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
दैनिक जीवन में अनेक मिश्रण ऐसे होते हैं जिनके घटकों की आवश्यकता अलग-अलग होती है। इसलिए मिश्रणों को उनके घटकों में पृथक करना आवश्यक होता है। पृथक्करण (Separation) की विधि मिश्रण के घटकों के भौतिक गुणों, जैसे कणों के आकार, घुलनशीलता, क्वथनांक (Boiling Point) तथा चुंबकीय गुणों के अंतर पर निर्भर करती है।
मिश्रणों के पृथक्करण की विधियाँ
मिश्रणों का पृथक्करण क्यों आवश्यक है?
मिश्रणों का पृथक्करण उपयोगी पदार्थ प्राप्त करने, अशुद्धियाँ हटाने तथा शुद्ध पदार्थों का निर्माण करने के लिए किया जाता है। विभिन्न परिस्थितियों में अलग-अलग पृथक्करण विधियाँ अपनाई जाती हैं।
- शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए।
- अशुद्धियाँ हटाने के लिए।
- उपयोगी एवं अनुपयोगी पदार्थों को अलग करने के लिए।
- औद्योगिक एवं प्रयोगशाला कार्यों में शुद्ध रसायन प्राप्त करने के लिए।
हाथ से चुनना (Hand Picking)
जब मिश्रण में अशुद्धियाँ कम मात्रा में हों तथा उन्हें आसानी से पहचाना जा सके, तब हाथ से चुनकर अलग किया जाता है।
- ठोस-ठोस मिश्रणों के लिए उपयुक्त।
- घटक स्पष्ट दिखाई देते हैं।
- उदाहरण – चावल या दाल से कंकड़ निकालना।
फटकना (Winnowing)
हल्के एवं भारी कणों के भार में अंतर का उपयोग करके मिश्रण को अलग करने की विधि फटकना (Winnowing) कहलाती है।
- हल्के कण हवा के साथ उड़ जाते हैं।
- भारी कण नीचे गिर जाते हैं।
- उदाहरण – अनाज से भूसी अलग करना।
चलनी द्वारा पृथक्करण (Sieving)
जब मिश्रण के घटकों के कणों का आकार अलग-अलग हो, तब चलनी (Sieve) का उपयोग किया जाता है।
- कणों के आकार के अंतर पर आधारित विधि।
- बड़े कण चलनी पर रह जाते हैं।
- छोटे कण नीचे निकल जाते हैं।
- उदाहरण – आटे को छानना।
निस्यंदन (Filtration)
निस्यंदन (Filtration) का उपयोग किसी अघुलनशील ठोस (Insoluble Solid) को द्रव से अलग करने के लिए किया जाता है। इसमें फिल्टर पेपर (Filter Paper) या छन्नी का प्रयोग किया जाता है।
| घटक | अर्थ |
|---|---|
| अवशेष (Residue) | फिल्टर पेपर पर बचा ठोस पदार्थ। |
| निस्यंद (Filtrate) | फिल्टर पेपर से होकर निकलने वाला द्रव। |
वाष्पीकरण (Evaporation)
वाष्पीकरण (Evaporation) द्वारा किसी विलयन से विलायक को वाष्पित करके विलेय प्राप्त किया जाता है।
- विलायक वाष्प बनकर उड़ जाता है।
- विलेय पात्र में शेष रह जाता है।
- उदाहरण – समुद्री जल से नमक प्राप्त करना।
विभिन्न पृथक्करण विधियों की तुलना
| विधि | आधार | उदाहरण |
|---|---|---|
| हाथ से चुनना | दिखाई देने वाले कण | दाल से कंकड़ निकालना |
| फटकना | भार का अंतर | भूसी अलग करना |
| चलनी | कणों के आकार का अंतर | आटा छानना |
| निस्यंदन | अघुलनशील ठोस एवं द्रव | रेत और जल अलग करना |
| वाष्पीकरण | वाष्पशीलता का अंतर | नमक प्राप्त करना |
Our Concept Builder
यदि आपके पास रेत, नमक और जल का मिश्रण हो, तो पहले निस्यंदन (Filtration) द्वारा रेत को अलग किया जा सकता है। इसके बाद बचे हुए नमक के घोल को गर्म करके वाष्पीकरण (Evaporation) करने पर जल उड़ जाएगा और नमक प्राप्त हो जाएगा। इससे स्पष्ट होता है कि अलग-अलग मिश्रणों के लिए अलग-अलग पृथक्करण विधियाँ अपनाई जाती हैं।
Exam Booster
- पृथक्करण विधि का चयन घटकों के भौतिक गुणों पर निर्भर करता है।
- निस्यंदन द्वारा अघुलनशील ठोस को द्रव से अलग किया जाता है।
- वाष्पीकरण द्वारा विलयन से विलेय प्राप्त किया जाता है।
- फटकना भार के अंतर तथा चलनी कणों के आकार के अंतर पर आधारित है।
- अवशेष (Residue) एवं निस्यंद (Filtrate) की परिभाषाएँ परीक्षा में महत्वपूर्ण हैं।
मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
अध्याय 5. मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
कुछ मिश्रणों को साधारण विधियों, जैसे निस्यंदन (Filtration) या वाष्पीकरण (Evaporation), द्वारा आसानी से अलग नहीं किया जा सकता। ऐसे मिश्रणों के लिए विशेष पृथक्करण विधियों का उपयोग किया जाता है। क्रिस्टलीकरण (Crystallization) एक ऐसी वैज्ञानिक विधि है, जिसके द्वारा किसी विलयन से शुद्ध ठोस पदार्थ के क्रिस्टल प्राप्त किए जाते हैं। यह विधि प्रयोगशालाओं तथा उद्योगों में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
क्रिस्टलीकरण एवं मिश्रणों का शुद्धिकरण
क्रिस्टलीकरण (Crystallization)
क्रिस्टलीकरण (Crystallization) वह प्रक्रिया है, जिसमें किसी संतृप्त विलयन से शुद्ध ठोस पदार्थ को क्रिस्टलों (Crystals) के रूप में प्राप्त किया जाता है। यह विधि अशुद्ध ठोस पदार्थों के शुद्धिकरण के लिए उपयोग की जाती है।
- शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त करने की वैज्ञानिक विधि है।
- संतृप्त विलयन का उपयोग किया जाता है।
- धीरे-धीरे ठंडा करने पर क्रिस्टल बनने लगते हैं।
- अशुद्धियाँ सामान्यतः विलयन में ही रह जाती हैं।
क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया
| चरण | कार्य |
|---|---|
| 1. | विलेय को उपयुक्त विलायक में घोलकर संतृप्त विलयन तैयार किया जाता है। |
| 2. | यदि आवश्यक हो, तो विलयन का निस्यंदन करके अघुलनशील अशुद्धियाँ हटाई जाती हैं। |
| 3. | विलयन को धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है। |
| 4. | शुद्ध पदार्थ के क्रिस्टल बनने लगते हैं। |
| 5. | क्रिस्टलों को अलग करके सुखाया जाता है। |
क्रिस्टलीकरण के लाभ
- उच्च शुद्धता (High Purity) वाले ठोस पदार्थ प्राप्त होते हैं।
- अधिकांश घुलनशील अशुद्धियाँ अलग हो जाती हैं।
- प्रयोगशाला एवं उद्योगों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
- रसायनों के शुद्धिकरण की प्रभावी विधि है।
क्रिस्टलीकरण के उपयोग
- कॉपर सल्फेट (Copper Sulphate) के शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त करने में।
- फिटकरी (Alum) के क्रिस्टल बनाने में।
- रासायनिक प्रयोगशालाओं में शुद्ध पदार्थ तैयार करने में।
- औषधि एवं रासायनिक उद्योगों में शुद्ध रसायनों के निर्माण में।
वाष्पीकरण एवं क्रिस्टलीकरण में अंतर
| वाष्पीकरण (Evaporation) | क्रिस्टलीकरण (Crystallization) |
|---|---|
| मुख्य उद्देश्य विलेय प्राप्त करना है। | मुख्य उद्देश्य शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त करना है। |
| अशुद्धियाँ भी साथ रह सकती हैं। | अधिक शुद्ध पदार्थ प्राप्त होता है। |
| विलायक को पूरी तरह वाष्पित किया जाता है। | संतृप्त विलयन को ठंडा करके क्रिस्टल बनाए जाते हैं। |
| सरल एवं सामान्य विधि है। | अधिक शुद्धिकरण वाली वैज्ञानिक विधि है। |
दैनिक जीवन एवं उद्योग में महत्व
- शुद्ध रसायनों के निर्माण में।
- औषधि उद्योग में दवाइयों के निर्माण में।
- रासायनिक प्रयोगशालाओं में नमूनों के शुद्धिकरण में।
- शिक्षण प्रयोगों में क्रिस्टलों का निर्माण करने में।
Our Concept Builder
यदि नमक के घोल का पूरा पानी उड़ा दिया जाए, तो नमक तो प्राप्त होगा, लेकिन उसमें अशुद्धियाँ भी रह सकती हैं। यदि उसी घोल से क्रिस्टलीकरण किया जाए, तो धीरे-धीरे बड़े और अधिक शुद्ध नमक के क्रिस्टल प्राप्त होते हैं। इसलिए शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए क्रिस्टलीकरण, वाष्पीकरण की तुलना में अधिक प्रभावी विधि मानी जाती है।
Exam Booster
- क्रिस्टलीकरण द्वारा शुद्ध ठोस पदार्थ के क्रिस्टल प्राप्त किए जाते हैं।
- यह संतृप्त विलयन पर आधारित विधि है।
- क्रिस्टलीकरण अशुद्ध ठोस पदार्थों के शुद्धिकरण के लिए उपयोग किया जाता है।
- वाष्पीकरण एवं क्रिस्टलीकरण में अंतर परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
- कॉपर सल्फेट एवं फिटकरी के क्रिस्टल क्रिस्टलीकरण के प्रमुख उदाहरण हैं।
मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
अध्याय 5. मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण
इस अध्याय के अभ्यास प्रश्न विद्यार्थियों की अवधारणात्मक समझ, विश्लेषणात्मक क्षमता तथा परीक्षा की तैयारी को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। सभी प्रश्न अध्याय में वर्णित मिश्रण, विलयन तथा पृथक्करण की विधियों पर आधारित हैं और नवीनतम CBSE परीक्षा पद्धति के अनुरूप हैं।
Assignments
रिक्त स्थान भरिए
- दो या दो से अधिक पदार्थों का भौतिक संयोजन __________ कहलाता है।
- विलयन (Solution) एक __________ मिश्रण होता है।
- विलयन में घुलने वाला पदार्थ __________ कहलाता है।
- जल सबसे सामान्य __________ है।
- किसी निश्चित तापमान पर विलेय की अधिकतम घुलने की क्षमता __________ कहलाती है।
- जिस विलयन में और विलेय नहीं घुल सकता, वह __________ विलयन कहलाता है।
- अघुलनशील ठोस को द्रव से अलग करने की विधि __________ कहलाती है।
- समुद्री जल से नमक प्राप्त करने के लिए __________ विधि का उपयोग किया जाता है।
- शुद्ध ठोस क्रिस्टल प्राप्त करने की प्रक्रिया __________ कहलाती है।
- दाल से कंकड़ अलग करने की विधि __________ कहलाती है।
सत्य / असत्य लिखिए
- समांगी मिश्रण के सभी भागों का संघटन समान होता है।
- रेत और जल समांगी मिश्रण का उदाहरण हैं।
- विलेय हमेशा विलायक से अधिक मात्रा में होता है।
- संतृप्त विलयन में और विलेय नहीं घुलता।
- जल एक सामान्य विलायक है।
- चलनी द्वारा पृथक्करण कणों के आकार के अंतर पर आधारित है।
- निस्यंदन द्वारा घुला हुआ नमक जल से अलग किया जा सकता है।
- क्रिस्टलीकरण द्वारा शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त किए जाते हैं।
- फटकना भार के अंतर पर आधारित विधि है।
- वाष्पीकरण में सामान्यतः विलायक वाष्प बनकर उड़ जाता है।
एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दीजिए
- मिश्रण (Mixture) क्या है?
- समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) क्या है?
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture) क्या है?
- विलेय (Solute) क्या है?
- विलायक (Solvent) क्या है?
- सांद्रता (Concentration) क्या दर्शाती है?
- विलेयता (Solubility) क्या है?
- निस्यंदन (Filtration) का उपयोग कब किया जाता है?
- क्रिस्टलीकरण (Crystallization) क्या है?
- संतृप्त विलयन (Saturated Solution) क्या है?
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
- मिश्रण एवं यौगिक में दो अंतर लिखिए।
- समांगी एवं विषमांगी मिश्रण में अंतर लिखिए।
- विलेय एवं विलायक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- तनु एवं सांद्र विलयन में अंतर लिखिए।
- संतृप्त एवं असंतृप्त विलयन में अंतर लिखिए।
- निस्यंदन (Filtration) की प्रक्रिया संक्षेप में समझाइए।
- फटकना (Winnowing) किन परिस्थितियों में उपयोगी होता है?
- क्रिस्टलीकरण का एक प्रमुख उपयोग लिखिए।
लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
- मिश्रण क्या है? इसके प्रमुख प्रकारों का वर्णन कीजिए।
- विलयन, विलेय एवं विलायक को उदाहरण सहित समझाइए।
- सांद्रता एवं विलेयता में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- मिश्रणों के पृथक्करण की विभिन्न विधियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
- निस्यंदन एवं वाष्पीकरण में अंतर लिखिए।
- क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
- क्रिस्टलीकरण एवं वाष्पीकरण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- दैनिक जीवन में मिश्रणों के पृथक्करण का महत्व लिखिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
- समांगी एवं विषमांगी मिश्रण का विस्तृत वर्णन उदाहरण सहित कीजिए।
- विलयन, विलेय, विलायक, सांद्रता एवं विलेयता को उदाहरण सहित समझाइए।
- मिश्रणों के पृथक्करण की विभिन्न विधियों का सिद्धांत एवं उपयोग लिखिए।
- क्रिस्टलीकरण क्या है? इसकी प्रक्रिया, लाभ एवं उपयोगों का वर्णन कीजिए।
- मिश्रणों के पृथक्करण का दैनिक जीवन, उद्योग एवं प्रयोगशाला में महत्व स्पष्ट कीजिए।
Competency Based Questions
प्रश्न 1. एक छात्र के पास नमक, रेत और जल का मिश्रण है। उसे तीनों पदार्थ अलग-अलग प्राप्त करने हैं।
उत्तर दीजिए—
- सबसे पहले कौन-सी पृथक्करण विधि अपनाई जाएगी?
- उसके बाद नमक प्राप्त करने के लिए कौन-सी विधि अपनाई जाएगी?
- प्रत्येक विधि का कारण लिखिए।
प्रश्न 2. प्रयोगशाला में एक छात्र कॉपर सल्फेट (Copper Sulphate) के शुद्ध क्रिस्टल तैयार करना चाहता है।
उत्तर दीजिए—
- उसे कौन-सी विधि अपनानी चाहिए?
- इस विधि का मुख्य लाभ क्या है?
- वाष्पीकरण की तुलना में यह विधि अधिक प्रभावी क्यों है?
HOTS (Higher Order Thinking Skills)
- यदि किसी संतृप्त विलयन का तापमान धीरे-धीरे कम किया जाए, तो उसमें क्या परिवर्तन होंगे? कारण सहित उत्तर दीजिए।
- यदि रेत और नमक के मिश्रण को सीधे गर्म किया जाए, तो क्या शुद्ध नमक प्राप्त होगा? अपने उत्तर का तर्क दीजिए।
- क्रिस्टलीकरण को वाष्पीकरण की अपेक्षा अधिक शुद्धिकरण विधि क्यों माना जाता है?
गतिविधि आधारित प्रश्न (Activity Based Questions)
- घर में उपलब्ध नमक एवं रेत का मिश्रण बनाकर निस्यंदन तथा वाष्पीकरण द्वारा उन्हें अलग करने की प्रक्रिया का चार्ट तैयार कीजिए।
- समांगी एवं विषमांगी मिश्रणों के पाँच-पाँच उदाहरण एकत्र करके तालिका बनाइए।
- विभिन्न पृथक्करण विधियों का एक फ्लो-चार्ट तैयार कीजिए तथा प्रत्येक का एक दैनिक जीवन उदाहरण लिखिए।
- फिटकरी या कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया का चित्र सहित प्रोजेक्ट तैयार कीजिए।
Case Study Based Questions
एक विज्ञान प्रयोगशाला में विद्यार्थियों को नमक, रेत और जल का मिश्रण दिया गया। शिक्षक ने पहले मिश्रण को फिल्टर पेपर से छानने के लिए कहा। इसके बाद प्राप्त द्रव को गर्म किया गया, जिससे जल वाष्प बनकर उड़ गया और पात्र में नमक शेष रह गया। बाद में छात्रों ने कॉपर सल्फेट के शुद्ध क्रिस्टल भी तैयार किए।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
- फिल्टर पेपर पर बचा पदार्थ क्या कहलाता है?
- फिल्टर पेपर से निकलने वाले द्रव को क्या कहते हैं?
- नमक प्राप्त करने के लिए कौन-सी पृथक्करण विधि अपनाई गई?
- कॉपर सल्फेट के शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त करने के लिए कौन-सी विधि अपनाई गई?
- निस्यंदन एवं क्रिस्टलीकरण का एक-एक उपयोग लिखिए।
Why Choose CBSE Notes for Class 9?
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Chapter-wise Study Material
Each chapter included in the CBSE Notes for Class 9 section is prepared according to the latest academic session. Every topic is explained in simple language while maintaining accuracy and completeness. Students can easily revise important concepts, learn key points, and strengthen their understanding of each chapter.
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