द्रव्य का परमाण्विक आधार - Class 9 Science Exploration Hindi CBSE Notes
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CBSE Notes for Class 9 – Chapter-wise Revision Notes
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द्रव्य का परमाण्विक आधार - Class 9 Science Exploration Hindi CBSE Notes
द्रव्य का परमाण्विक आधार
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
पिछले अध्याय में आपने परमाणु की संरचना, इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन तथा संयोजकता के बारे में अध्ययन किया था। इस अध्याय में हम समझेंगे कि परमाणु किस प्रकार निश्चित नियमों के अनुसार परस्पर संयोजित होकर यौगिकों का निर्माण करते हैं। साथ ही रासायनिक संयोजन के नियम, डाल्टन का परमाणु सिद्धांत, परमाणु एवं अणु, रासायनिक सूत्र, परमाणु द्रव्यमान, अणुभार तथा मोलर द्रव्यमान जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय आधुनिक रसायन विज्ञान की आधारशिला माना जाता है क्योंकि इसी से पदार्थों की संरचना एवं रासायनिक अभिक्रियाओं को वैज्ञानिक रूप से समझने की शुरुआत होती है।
Chapter Review
परिचय (Introduction)
- सभी पदार्थ परमाणुओं एवं अणुओं से मिलकर बने होते हैं।
- परमाणु निश्चित नियमों के अनुसार परस्पर संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं।
- रासायनिक अभिक्रियाओं में द्रव्यमान का संरक्षण होता है।
- प्रत्येक शुद्ध यौगिक में तत्व निश्चित द्रव्यमान अनुपात में उपस्थित होते हैं।
- डाल्टन के परमाणु सिद्धांत ने आधुनिक परमाणु सिद्धांत की नींव रखी।
- रासायनिक सूत्र किसी यौगिक के संघटन को दर्शाते हैं।
- परमाणु द्रव्यमान, अणुभार एवं मोलर द्रव्यमान रासायनिक गणनाओं के आधार हैं।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Definitions)
| शब्द | संक्षिप्त परिभाषा |
|---|---|
| रासायनिक संयोजन के नियम | वे नियम जो बताते हैं कि तत्व निश्चित नियमों के अनुसार संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं। |
| द्रव्यमान संरक्षण का नियम | रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों एवं उत्पादों का कुल द्रव्यमान समान रहता है। |
| स्थिर अनुपात का नियम | किसी शुद्ध यौगिक में तत्व सदैव निश्चित द्रव्यमान अनुपात में उपस्थित रहते हैं। |
| परमाणु (Atom) | किसी तत्व का सबसे छोटा कण जो उसके रासायनिक गुणों को बनाए रखता है। |
| अणु (Molecule) | दो या दो से अधिक परमाणुओं के रासायनिक संयोजन से बना स्वतंत्र कण। |
| रासायनिक सूत्र | किसी यौगिक में उपस्थित तत्वों एवं उनके परमाणुओं की संख्या का प्रतीकात्मक निरूपण। |
| परमाणु द्रव्यमान | किसी परमाणु का सापेक्ष द्रव्यमान। |
| अणुभार | किसी अणु के सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग। |
| मोलर द्रव्यमान | किसी पदार्थ के एक मोल का द्रव्यमान। |
महत्वपूर्ण शब्द (Important Terms)
- रासायनिक संयोजन (Chemical Combination)
- द्रव्यमान संरक्षण (Conservation of Mass)
- स्थिर अनुपात (Constant Proportion)
- डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (Dalton's Atomic Theory)
- परमाणु (Atom)
- अणु (Molecule)
- एकपरमाणुक अणु (Monoatomic Molecule)
- द्विपरमाणुक अणु (Diatomic Molecule)
- बहुपरमाणुक अणु (Polyatomic Molecule)
- रासायनिक सूत्र (Chemical Formula)
- परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass)
- अणुभार (Molecular Mass)
- सूत्र द्रव्यमान (Formula Mass)
- मोलर द्रव्यमान (Molar Mass)
मुख्य अवधारणाएँ (Important Concepts)
- रासायनिक अभिक्रिया में कुल द्रव्यमान सदैव संरक्षित रहता है।
- प्रत्येक शुद्ध यौगिक का संघटन निश्चित होता है।
- डाल्टन के अनुसार पदार्थ सूक्ष्म अविभाज्य परमाणुओं से बने हैं।
- परमाणु निश्चित अनुपात में संयोजित होकर अणु एवं यौगिक बनाते हैं।
- रासायनिक सूत्र किसी यौगिक की संरचना का प्रतीकात्मक निरूपण है।
- संयोजकता के आधार पर रासायनिक सूत्र लिखे जाते हैं।
- अणुभार परमाणु द्रव्यमानों के योग से प्राप्त होता है।
- आयनिक यौगिकों के लिए सूत्र द्रव्यमान तथा सहसंयोजक यौगिकों के लिए अणुभार ज्ञात किया जाता है।
- मोलर द्रव्यमान का उपयोग रासायनिक गणनाओं में किया जाता है।
5 मिनट रिवीजन (Quick Revision)
- ✔ द्रव्य का न निर्माण होता है, न विनाश।
- ✔ यौगिकों में तत्व निश्चित अनुपात में उपस्थित होते हैं।
- ✔ डाल्टन ने परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया।
- ✔ परमाणु मिलकर अणु एवं यौगिक बनाते हैं।
- ✔ रासायनिक सूत्र तत्वों के अनुपात को दर्शाता है।
- ✔ अणुभार = सभी परमाणुओं के द्रव्यमानों का योग।
- ✔ सूत्र द्रव्यमान आयनिक यौगिकों के लिए प्रयुक्त होता है।
- ✔ मोलर द्रव्यमान = एक मोल पदार्थ का द्रव्यमान।
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Booster)
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम – आन्त्वॉ लवाइजिए।
- स्थिर अनुपात का नियम – जोसेफ प्राउस्ट।
- डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के अभिगृहीत अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- रासायनिक सूत्र लिखने के नियम एवं संयोजकता आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
- परमाणु द्रव्यमान, अणुभार एवं सूत्र द्रव्यमान में अंतर याद रखें।
- मोलर द्रव्यमान तथा उससे संबंधित संख्यात्मक प्रश्न CBSE परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
द्रव्य का परमाण्विक आधार
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
पिछले अध्याय ‘एक यात्रा – परमाणु के भीतर’ में हमने परमाणु की संरचना, इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन तथा संयोजकता के बारे में अध्ययन किया था। हमने यह भी जाना कि परमाणु अपनी बाह्यतम कोश को स्थिर बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनों का त्याग, ग्रहण अथवा साझाकरण करते हैं। इन्हीं प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप विभिन्न तत्व परस्पर संयोजित होकर नए पदार्थों अर्थात् यौगिकों का निर्माण करते हैं। इस अध्याय में हम समझेंगे कि तत्व किस नियम के अनुसार निश्चित अनुपात में संयोजित होते हैं तथा रासायनिक अभिक्रियाओं के दौरान द्रव्यमान क्यों संरक्षित रहता है।
परमाणुओं के संयोजन से नए पदार्थों का निर्माण
अध्याय का परिचय
प्रकृति में पाए जाने वाले अधिकांश पदार्थ एक से अधिक तत्वों के रासायनिक संयोजन से बने होते हैं। जब दो या दो से अधिक तत्व मिलकर नया पदार्थ बनाते हैं, तब उस नए पदार्थ के गुण मूल तत्वों से पूर्णतः भिन्न हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन एक ज्वलनशील गैस है तथा ऑक्सीजन दहन में सहायक गैस है, जबकि इन दोनों के संयोजन से बनने वाला जल न तो स्वयं जलता है और न ही दहन में सहायता करता है, बल्कि आग बुझाने का कार्य करता है। इससे स्पष्ट होता है कि रासायनिक संयोजन के बाद पदार्थों के गुणों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकता है।
परमाणुओं के संयोजन से नए पदार्थों का निर्माण
परमाणु निश्चित नियमों के अनुसार परस्पर संयोजित होकर यौगिकों का निर्माण करते हैं। प्रत्येक यौगिक का अपना निश्चित संघटन तथा विशिष्ट गुण होता है। जल, कार्बन डाइऑक्साइड, सोडियम क्लोराइड तथा अमोनिया जैसे पदार्थ इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन यौगिकों के गुण उनके अवयव तत्वों से भिन्न होते हैं, क्योंकि परमाणु एक निश्चित अनुपात में जुड़कर नई रासायनिक संरचना बनाते हैं।
भौतिक परिवर्तन (Physical Change)
भौतिक परिवर्तन वह परिवर्तन है जिसमें किसी पदार्थ के आकार, अवस्था, रूप अथवा भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है, परंतु उसकी रासायनिक संरचना नहीं बदलती। ऐसे परिवर्तन में कोई नया पदार्थ नहीं बनता तथा मूल पदार्थ को सामान्यतः पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
पुस्तक में दिए गए क्रियाकलाप 9.1 में जल में साधारण नमक घोलकर यह दर्शाया गया है कि नमक का विलयन बनने पर भी कुल द्रव्यमान में कोई परिवर्तन नहीं होता। इससे स्पष्ट होता है कि भौतिक परिवर्तन के दौरान द्रव्यमान व्यावहारिक रूप से अपरिवर्तित रहता है।
भौतिक परिवर्तन की प्रमुख विशेषताएँ
- कोई नया पदार्थ नहीं बनता।
- पदार्थ की रासायनिक संरचना अपरिवर्तित रहती है।
- परिवर्तन सामान्यतः प्रतिवर्ती (Reversible) होता है।
- कुल द्रव्यमान में कोई परिवर्तन नहीं होता।
रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change)
रासायनिक परिवर्तन वह परिवर्तन है जिसमें एक या अधिक पदार्थ परस्पर अभिक्रिया करके नए पदार्थों का निर्माण करते हैं। इस परिवर्तन के बाद बने पदार्थों के गुण मूल पदार्थों से भिन्न होते हैं। रासायनिक परिवर्तन सामान्यतः स्थायी होता है तथा मूल पदार्थों को पुनः प्राप्त करना सरल नहीं होता।
अध्याय में सिरका तथा बेकिंग सोडा की अभिक्रिया का उदाहरण दिया गया है। इस अभिक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है तथा नए पदार्थ बनते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि रासायनिक परिवर्तन के दौरान पदार्थों की प्रकृति बदल जाती है।
रासायनिक परिवर्तन की प्रमुख विशेषताएँ
- नए पदार्थों का निर्माण होता है।
- रासायनिक संरचना बदल जाती है।
- नए पदार्थों के गुण मूल पदार्थों से भिन्न होते हैं।
- गैस का उत्सर्जन, अवक्षेप का निर्माण अथवा रंग एवं ताप में परिवर्तन देखा जा सकता है।
भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन में द्रव्यमान
अध्याय की प्रारम्भिक गतिविधियाँ यह जाँचने के लिए कराई गई हैं कि क्या परिवर्तन के दौरान द्रव्यमान बदलता है। भौतिक परिवर्तन में नमक और जल का कुल द्रव्यमान विलयन बनने के बाद भी समान रहता है। इसी प्रकार रासायनिक परिवर्तन में भी यदि सभी अभिकारक एवं उत्पाद बंद निकाय में सुरक्षित रहें, तो कुल द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है। यही अवलोकन आगे चलकर द्रव्यमान संरक्षण के नियम का आधार बनता है।
रासायनिक संयोजन के नियम की आवश्यकता
वैज्ञानिकों ने यह पाया कि तत्व किसी भी अनुपात में संयोजित होकर यौगिक नहीं बनाते। प्रत्येक यौगिक का संघटन निश्चित होता है तथा रासायनिक अभिक्रियाओं के दौरान कुल द्रव्यमान भी संरक्षित रहता है। इन प्रायोगिक तथ्यों के आधार पर रासायनिक संयोजन के नियम प्रतिपादित किए गए, जिनका अध्ययन अगले भाग में किया जाएगा।
Our Concept Builder
यदि एक गिलास जल में चीनी घोल दी जाए, तो चीनी दिखाई नहीं देती, परंतु उसका द्रव्यमान समाप्त नहीं होता। इसी प्रकार जब दो पदार्थ रासायनिक अभिक्रिया करते हैं, तब भी उनका कुल द्रव्यमान नष्ट नहीं होता, बल्कि नए पदार्थों के रूप में सुरक्षित रहता है। यही विचार आगे द्रव्यमान संरक्षण के नियम को समझने की आधारशिला बनता है।
Exam Booster
- भौतिक परिवर्तन में नया पदार्थ नहीं बनता।
- रासायनिक परिवर्तन में नए पदार्थों का निर्माण होता है।
- जल के गुण हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन दोनों से भिन्न होते हैं।
- भौतिक तथा रासायनिक दोनों प्रकार के परिवर्तनों में कुल द्रव्यमान का अध्ययन महत्वपूर्ण है।
- इन्हीं अवलोकनों के आधार पर रासायनिक संयोजन के नियम प्रतिपादित किए गए।
द्रव्य का परमाण्विक आधार
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
रासायनिक अभिक्रियाओं के अध्ययन से वैज्ञानिकों ने पाया कि तत्व किसी भी प्रकार से नहीं, बल्कि कुछ निश्चित नियमों का पालन करते हुए संयोजित होते हैं। इन्हीं नियमों को रासायनिक संयोजन के नियम (Laws of Chemical Combination) कहा जाता है। ये नियम यह स्पष्ट करते हैं कि रासायनिक अभिक्रियाओं में कुल द्रव्यमान सुरक्षित रहता है तथा प्रत्येक यौगिक में तत्व सदैव एक निश्चित द्रव्यमान अनुपात में उपस्थित होते हैं। यही नियम आगे चलकर डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का आधार बने।
रासायनिक संयोजन के नियम (Laws of Chemical Combination)
वैज्ञानिकों ने अनेक रासायनिक अभिक्रियाओं का अध्ययन करने के बाद पाया कि तत्व परस्पर किसी भी अनुपात में संयोजित नहीं होते, बल्कि कुछ निश्चित नियमों का पालन करते हैं। इन्हीं नियमों को रासायनिक संयोजन के नियम कहा जाता है। ये नियम बताते हैं कि रासायनिक अभिक्रियाओं के दौरान कुल द्रव्यमान सुरक्षित रहता है तथा किसी भी शुद्ध यौगिक में उसके अवयव तत्व सदैव एक निश्चित द्रव्यमान अनुपात में उपस्थित होते हैं। रासायनिक संयोजन के दो प्रमुख नियम हैं।
1. द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass)
परिभाषा (Definition):
किसी रासायनिक अभिक्रिया में अभिक्रिया से पहले उपस्थित अभिकारकों का कुल द्रव्यमान, अभिक्रिया के बाद बने उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है। अर्थात रासायनिक अभिक्रिया के दौरान द्रव्य का न तो निर्माण होता है और न ही विनाश। इस नियम का प्रतिपादन आन्त्वॉ लवाइजिए (Antoine Lavoisier) ने किया।
व्याख्या (Explanation):
जब किसी रासायनिक अभिक्रिया को बंद पात्र (Closed System) में किया जाता है, तब अभिक्रिया के दौरान बनने वाले सभी पदार्थ उसी पात्र में बने रहते हैं। इसलिए अभिक्रिया से पहले तथा बाद का कुल द्रव्यमान समान रहता है। यदि अभिक्रिया खुले पात्र में की जाए और बनने वाली गैस बाहर निकल जाए, तो द्रव्यमान कम प्रतीत हो सकता है, जबकि वास्तव में द्रव्य का विनाश नहीं होता। पुस्तक में सिरका एवं बेकिंग सोडा तथा सोडियम सल्फेट एवं बेरियम क्लोराइड के प्रयोगों द्वारा इस नियम की पुष्टि की गई है।
मुख्य बिंदु (Key Points)
- यह नियम सभी रासायनिक अभिक्रियाओं पर लागू होता है।
- रासायनिक समीकरणों के संतुलन का आधार यही नियम है।
- रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं, नष्ट नहीं होते।
- बंद पात्र में अभिक्रिया करने पर कुल द्रव्यमान सदैव समान रहता है।
2. स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions)
परिभाषा (Definition):
किसी शुद्ध यौगिक में उपस्थित तत्व सदैव द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात में ही संयोजित होते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो। इस नियम का प्रतिपादन जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) ने किया।
व्याख्या (Explanation):
प्रत्येक शुद्ध यौगिक का संघटन निश्चित होता है। यदि किसी यौगिक को अलग-अलग स्थानों या अलग-अलग विधियों से प्राप्त किया जाए, तब भी उसके अवयव तत्वों का द्रव्यमान अनुपात नहीं बदलता। उदाहरण के लिए, जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात सदैव 1 : 8 होता है। इसी प्रकार सिनेबार तथा सोडियम क्लोराइड में भी उनके तत्व निश्चित अनुपात में उपस्थित रहते हैं।
मुख्य बिंदु (Key Points)
- यह नियम केवल शुद्ध यौगिकों पर लागू होता है।
- यौगिक का स्रोत बदलने पर भी उसका संघटन नहीं बदलता।
- प्रत्येक यौगिक का द्रव्यमान अनुपात निश्चित होता है।
- यह नियम डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का आधार बना।
द्रव्यमान संरक्षण के नियम का महत्व
- रासायनिक अभिक्रियाओं का वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।
- रासायनिक समीकरणों के संतुलन का आधार यही नियम है।
- अभिकारकों एवं उत्पादों के द्रव्यमान की गणना में सहायता करता है।
- यह सिद्ध करता है कि अभिक्रिया में परमाणु नष्ट नहीं होते, केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं।
उदाहरण
यदि 4.0 g कैल्सियम कार्बोनेट तथा 2.92 g हाइड्रोक्लोरिक अम्ल अभिक्रिया करते हैं, तो अभिकारकों का कुल द्रव्यमान 6.92 g होता है। अभिक्रिया के बाद प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा कैल्सियम क्लोराइड का कुल द्रव्यमान भी 6.92 g ही होता है। इससे द्रव्यमान संरक्षण के नियम की पुष्टि होती है।
2. स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions)
लवाइजिए के बाद फ्रांसीसी रसायनज्ञ जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) ने प्रतिपादित किया कि दो या दो से अधिक तत्वों से बने किसी भी यौगिक में उसके अवयव तत्व सदैव द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात में उपस्थित होते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो। इस नियम को निश्चित अनुपात का नियम अथवा प्राउस्ट का नियम भी कहा जाता है।
जल का उदाहरण
जल चाहे नदी, वर्षा, बोरवेल अथवा समुद्र के जल से शुद्ध किया गया हो, उसमें हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात सदैव 1 : 8 होता है। अर्थात यदि 9 g शुद्ध जल का अपघटन किया जाए, तो सदैव 1 g हाइड्रोजन तथा 8 g ऑक्सीजन प्राप्त होगी। इससे सिद्ध होता है कि यौगिक का संघटन निश्चित होता है।
सिनेबार (Cinnabar) का उदाहरण
प्राचीन काल से लाल वर्णक के रूप में प्रयुक्त सिनेबार को गर्म करने पर पारा (Mercury) तथा गंधक (Sulfur) प्राप्त होते हैं। इनमें पारे का द्रव्यमान लगभग 86.22% तथा गंधक का लगभग 13.78% होता है। यह अनुपात सदैव समान रहता है, जिससे स्थिर अनुपात के नियम की पुष्टि होती है।{index=10}
सोडियम क्लोराइड का उदाहरण
सोडियम क्लोराइड (NaCl) में सोडियम एवं क्लोरीन का द्रव्यमान अनुपात 23 : 35.5 होता है। यदि 46 g सोडियम पूर्णतः अभिक्रिया करता है, तो NaCl बनने के लिए 71 g क्लोरीन की आवश्यकता होगी। यह उदाहरण भी दर्शाता है कि यौगिक में तत्व निश्चित द्रव्यमान अनुपात में ही संयोजित होते हैं।
स्थिर अनुपात के नियम का महत्व
- प्रत्येक शुद्ध यौगिक का संघटन निश्चित होता है।
- यौगिक के स्रोत बदलने पर भी उसका द्रव्यमान अनुपात नहीं बदलता।
- यह नियम मिश्रण और यौगिक के बीच अंतर स्पष्ट करता है।
- डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का आधार प्रदान करता है।
Our Concept Builder
यदि किसी रासायनिक अभिक्रिया के सभी अभिकारकों और उत्पादों को एक बंद पात्र में सुरक्षित रखा जाए, तो कुल द्रव्यमान कभी नहीं बदलता। इसी प्रकार किसी भी शुद्ध यौगिक में उसके तत्व हमेशा एक निश्चित द्रव्यमान अनुपात में ही उपस्थित रहते हैं। यही दो तथ्य रासायनिक संयोजन के नियमों की आधारशिला हैं।
Exam Booster
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम – आन्त्वॉ लवाइजिए (1789)।
- स्थिर अनुपात का नियम – जोसेफ प्राउस्ट।
- रासायनिक अभिक्रिया में कुल द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।
- जल में H : O का द्रव्यमान अनुपात = 1 : 8।
- स्थिर अनुपात का नियम केवल यौगिकों पर लागू होता है, मिश्रणों पर नहीं।
द्रव्य का परमाण्विक आधार
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (Dalton's Atomic Theory)
परिचय:
रासायनिक संयोजन के नियमों की व्याख्या करने के लिए अंग्रेज़ वैज्ञानिक जॉन डाल्टन (John Dalton) ने सन् 1808 में परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया। इस सिद्धांत ने यह स्पष्ट किया कि पदार्थ परमाणुओं से बने होते हैं तथा रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु न तो नष्ट होते हैं और न ही नए बनते हैं, बल्कि केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं।
परिभाषा:
डाल्टन का परमाणु सिद्धांत उन मूल अभिगृहीतों (Postulates) का समूह है जो पदार्थ की संरचना तथा रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणुओं के व्यवहार की व्याख्या करता है।
डाल्टन के प्रमुख अभिगृहीत:
- संपूर्ण द्रव्य अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है, जिन्हें परमाणु कहते हैं।
- परमाणु अविभाज्य कण होते हैं। रासायनिक अभिक्रिया में उनका न तो निर्माण किया जा सकता है और न ही उन्हें नष्ट किया जा सकता है।
- किसी एक ही तत्व के सभी परमाणुओं का द्रव्यमान तथा रासायनिक गुण समान होते हैं।
- विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान एवं रासायनिक गुण अलग-अलग होते हैं।
- परमाणु सरल पूर्णांक अनुपात में संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं।
- किसी भी यौगिक में परमाणुओं की सापेक्ष संख्या एवं उनके प्रकार निश्चित होते हैं।
व्याख्या:
डाल्टन के अनुसार रासायनिक अभिक्रिया के समय परमाणु केवल अपना स्थान बदलते हैं और नए संयोजन बनाते हैं। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के परमाणु मिलकर जल का निर्माण करते हैं, जबकि मैग्नीशियम ऑक्सीजन के साथ संयोजित होकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है। इन अभिक्रियाओं में परमाणु नष्ट नहीं होते, केवल नए यौगिकों का निर्माण करते हैं।
महत्व:
- आधुनिक परमाणु सिद्धांत की आधारशिला रखी।
- रासायनिक संयोजन के नियमों की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत की।
- रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणुओं के व्यवहार को समझने में सहायता मिली।
- आधुनिक रसायन विज्ञान के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।
Our Concept Builder
डाल्टन का परमाणु सिद्धांत यह समझाता है कि पदार्थ सूक्ष्म परमाणुओं से बने होते हैं तथा रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु न तो बनते हैं और न ही नष्ट होते हैं। वे केवल पुनर्व्यवस्थित होकर नए यौगिकों का निर्माण करते हैं। यही कारण है कि रासायनिक अभिक्रियाओं में द्रव्यमान संरक्षण का नियम तथा स्थिर अनुपात का नियम सत्य सिद्ध होते हैं। :contentReference[oaicite:0]{index=0}
Exam Booster
- डाल्टन ने अपना परमाणु सिद्धांत वर्ष 1808 में प्रस्तुत किया। :contentReference[oaicite:1]{index=1}
- परमाणु रासायनिक अभिक्रिया में न तो उत्पन्न होते हैं और न ही नष्ट होते हैं। :contentReference[oaicite:2]{index=2}
- एक ही तत्व के सभी परमाणुओं के रासायनिक गुण समान होते हैं। :contentReference[oaicite:3]{index=3}
- परमाणु सरल पूर्णांक अनुपात में संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं। :contentReference[oaicite:4]{index=4}
- CBSE में डाल्टन के अभिगृहीत (Postulates) तथा उनसे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। :contentReference[oaicite:5]{index=5}
द्रव्य का परमाण्विक आधार
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
पिछले भाग में आपने डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का अध्ययन किया। अब हम समझेंगे कि परमाणु आपस में किस प्रकार संयोजित होकर अणु एवं यौगिक बनाते हैं तथा रासायनिक आबंध (Chemical Bond) का निर्माण कैसे होता है।
परमाणु किस प्रकार संयोजन करते हैं?
परिचय
एक ही तत्व के परमाणु परस्पर संयोजित होकर उस तत्व का अणु बना सकते हैं, जबकि विभिन्न तत्वों के परमाणु संयोजित होकर किसी यौगिक का अणु बनाते हैं। उदाहरण के लिए, दो हाइड्रोजन परमाणु मिलकर हाइड्रोजन (H₂) का अणु बनाते हैं, जबकि एक हाइड्रोजन तथा एक क्लोरीन परमाणु मिलकर हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) का अणु बनाते हैं।
अणु (Molecule)
परिभाषा:
अणु वह विद्युत उदासीन कण है जिसमें एक या एक से अधिक परमाणु रासायनिक आबंध द्वारा जुड़े होते हैं। यह स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकता है तथा उस पदार्थ के सभी रासायनिक गुणों को प्रदर्शित करता है।
परमाणु संयोजन क्यों करते हैं?
परमाणु अपनी बाह्यतम (संयोजकता) कोश को पूर्ण करके अधिक स्थायी बनने के लिए संयोजन करते हैं। जिन परमाणुओं की संयोजकता कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (या K कोश के लिए 2 इलेक्ट्रॉन) होते हैं, वे सामान्यतः स्थायी होते हैं। इसलिए अन्य परमाणु इलेक्ट्रॉनों का साझाकरण, ग्रहण अथवा त्याग करके स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करते हैं।
परमाणुओं के संयोजन के तरीके
परमाणु मुख्यतः दो प्रकार से संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं।
- इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing of Electrons): इसमें दो परमाणु अपने एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों को साझा करते हैं।
- इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण (Transfer of Electrons): इसमें एक परमाणु अपने एक या अधिक संयोजकता इलेक्ट्रॉन दूसरे परमाणु को दे देता है अथवा उससे ग्रहण कर लेता है।
रासायनिक आबंध (Chemical Bond)
परिचय:
जब दो या दो से अधिक परमाणु परस्पर संयोजित होकर अणु अथवा यौगिक का निर्माण करते हैं, तब उन्हें एक साथ बाँधे रखने वाला आकर्षण बल रासायनिक आबंध (Chemical Bond) कहलाता है। परमाणु स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए रासायनिक आबंध बनाते हैं।
परिभाषा:
दो या दो से अधिक परमाणुओं के बीच कार्य करने वाला वह आकर्षण बल, जो उन्हें एक साथ बाँधकर अणु या यौगिक का निर्माण करता है, रासायनिक आबंध कहलाता है।
रासायनिक आबंध की आवश्यकता
अधिकांश परमाणुओं की संयोजकता कोश अपूर्ण होती है, इसलिए वे स्थिरता प्राप्त करने के लिए अन्य परमाणुओं से जुड़ते हैं। इस प्रक्रिया में परमाणु अक्रिय गैसों जैसा स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करते हैं, जिससे उनका ऊर्जा स्तर कम हो जाता है और वे अधिक स्थायी बन जाते हैं।
रासायनिक आबंध के प्रकार
परमाणु मुख्यतः दो प्रकार के रासायनिक आबंध बनाते हैं।
- सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond)
- आयनिक आबंध (Ionic Bond)
1. सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond)
परिभाषा:
जब दो परमाणु अपनी संयोजकता कोश के एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing) करके आबंध बनाते हैं, तो उसे सहसंयोजी आबंध कहते हैं।
यह कैसे बनता है?
दोनों परमाणु अपने-अपने इलेक्ट्रॉनों को साझा करते हैं। इस साझेदारी से दोनों परमाणुओं की बाहरी कोश पूर्ण हो जाती है और वे स्थायी हो जाते हैं। उदाहरण के लिए H₂, O₂, Cl₂ तथा H₂O जैसे अणुओं में सहसंयोजी आबंध पाया जाता है।

सहसंयोजी आबंध के गुणधर्म
- इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा बनता है।
- सामान्यतः अधातुओं के बीच बनता है।
- सहसंयोजी यौगिकों का गलनांक एवं क्वथनांक अपेक्षाकृत कम होता है।
- अधिकांश सहसंयोजी यौगिक विद्युत के कुचालक होते हैं।
- ये प्रायः जल में कम तथा कार्बनिक विलायकों में अधिक घुलनशील होते हैं।
महत्त्व:
जल, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन तथा अधिकांश कार्बनिक यौगिकों का निर्माण सहसंयोजी आबंध द्वारा होता है। जीव-जगत में पाए जाने वाले अधिकांश यौगिक इसी प्रकार के आबंध से बने होते हैं।
2. आयनिक आबंध (Ionic Bond)
परिभाषा:
जब एक परमाणु अपने इलेक्ट्रॉन दूसरे परमाणु को स्थानांतरित कर देता है और उनके बीच बने धनायन तथा ऋणायन के आकर्षण से आबंध बनता है, तो उसे आयनिक आबंध कहते हैं।
यह कैसे बनता है?
धातु परमाणु इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाता है, जबकि अधातु परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाता है। विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच आकर्षण बल उत्पन्न होता है, जिससे आयनिक आबंध बन जाता है। सोडियम क्लोराइड (NaCl) इसका प्रमुख उदाहरण है।

आयनिक आबंध के गुणधर्म
- इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण द्वारा बनता है।
- सामान्यतः धातु एवं अधातु के बीच बनता है।
- आयनिक यौगिकों का गलनांक एवं क्वथनांक अधिक होता है।
- पिघली हुई अथवा जलीय अवस्था में विद्युत का संचालन करते हैं।
- अधिकांश आयनिक यौगिक जल में घुलनशील होते हैं।
महत्त्व:
सामान्य नमक (NaCl), कैल्सियम क्लोराइड, मैग्नीशियम ऑक्साइड जैसे अनेक महत्वपूर्ण यौगिक आयनिक आबंध द्वारा बनते हैं। ये उद्योग, कृषि तथा दैनिक जीवन में अत्यंत उपयोगी हैं।
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रासायनिक आबंध का मुख्य उद्देश्य परमाणुओं को अधिक स्थिर बनाना है। यदि परमाणु इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं तो सहसंयोजी आबंध बनता है, जबकि इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होने पर आयनिक आबंध बनता है। इसी कारण विभिन्न पदार्थों के गुणधर्म अलग-अलग होते हैं।
Exam Booster
- रासायनिक आबंध दो प्रकार के होते हैं— सहसंयोजी एवं आयनिक।
- सहसंयोजी आबंध इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनता है।
- आयनिक आबंध इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनता है।
- NaCl आयनिक आबंध का तथा H₂, O₂, Cl₂ सहसंयोजी आबंध के प्रमुख उदाहरण हैं।
- परमाणु स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए रासायनिक आबंध बनाते हैं।
द्रव्य का परमाण्विक आधार
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
परमाणु स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी कर सकते हैं। इलेक्ट्रॉनों की ऐसी साझेदारी से बनने वाले आबंध को सहसंयोजी आबंध कहते हैं। इसमें परमाणु अपने साझा इलेक्ट्रॉन-युग्म के कारण एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।
सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond)
परिभाषा:
दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के एक या अधिक युग्मों की साझेदारी से बनने वाला आबंध सहसंयोजी आबंध कहलाता है। साझा इलेक्ट्रॉन-युग्म दोनों परमाणुओं के नाभिकों को आकर्षित करता है और उन्हें एक साथ बाँधे रखता है।
सहसंयोजी आबंध कैसे बनता है?
जिन परमाणुओं की संयोजकता कोश पूर्ण नहीं होती, वे स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं। इस प्रक्रिया में दो परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा करते हैं। साझा इलेक्ट्रॉन-युग्म दोनों परमाणुओं द्वारा उपयोग किया जाता है और इस प्रकार दोनों स्थायी विन्यास प्राप्त कर लेते हैं।
हाइड्रोजन अणु (H₂) का निर्माण
परिभाषा: हाइड्रोजन परमाणु के K-कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है, जबकि स्थायी होने के लिए उसे दो इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। इसलिए दो हाइड्रोजन परमाणु अपने-अपने एक-एक इलेक्ट्रॉन की साझेदारी करते हैं और H₂ अणु बनाते हैं।
आबंध: दोनों हाइड्रोजन परमाणुओं के बीच एक इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा होता है, इसलिए इनके बीच एकल सहसंयोजी आबंध बनता है। इसे H–H द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
क्लोरीन अणु (Cl₂) का निर्माण
क्लोरीन के संयोजकता कोश में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं। स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए प्रत्येक क्लोरीन परमाणु को एक और इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। इसलिए दो क्लोरीन परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करके Cl₂ अणु बनाते हैं।
आबंध: दोनों क्लोरीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा करते हैं, इसलिए इनके बीच एकल सहसंयोजी आबंध होता है। इसे Cl–Cl द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
ऑक्सीजन अणु (O₂) का निर्माण
ऑक्सीजन के संयोजकता कोश में छह इलेक्ट्रॉन होते हैं। अष्टक पूरा करने के लिए प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु को दो और इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। इसलिए दोनों ऑक्सीजन परमाणु दो-दो इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं।
आबंध: ऑक्सीजन के दोनों परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के दो युग्म साझा होते हैं। इसलिए इनके बीच द्वि-सहसंयोजी आबंध (Double Bond) होता है। इसे O=O द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) का निर्माण
हाइड्रोजन को स्थायी होने के लिए एक इलेक्ट्रॉन तथा क्लोरीन को अपना अष्टक पूरा करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। इसलिए हाइड्रोजन और क्लोरीन परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करके HCl का अणु बनाते हैं।
आबंध: HCl में हाइड्रोजन और क्लोरीन एक इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा करते हैं। इसलिए इनके बीच एकल सहसंयोजी आबंध होता है और इसे H–Cl द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
जल (H₂O) के अणु का निर्माण
हाइड्रोजन को स्थायी होने के लिए एक तथा ऑक्सीजन को दो इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। इसलिए एक ऑक्सीजन परमाणु दो हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ एक-एक इलेक्ट्रॉन की साझेदारी करता है। इस प्रकार H₂O का अणु बनता है।
आबंध: जल के अणु में ऑक्सीजन दो हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करती है। जल का रासायनिक सूत्र H₂O है, जो दो हाइड्रोजन परमाणुओं और एक ऑक्सीजन परमाणु की उपस्थिति को दर्शाता है।
सहसंयोजी आबंध के प्रकार
- एकल आबंध: जब दो परमाणु एक इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा करते हैं। उदाहरण— H₂ और Cl₂।
- द्वि-आबंध: जब दो परमाणु दो इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा करते हैं। उदाहरण— O₂।
सहसंयोजी यौगिकों का नामकरण
नियम: सहसंयोजी यौगिकों के नामकरण में उपसर्गों का प्रयोग करके अणु में उपस्थित प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या बताई जाती है। पहले तत्व का नाम सामान्य रूप से लिखा जाता है, जबकि दूसरे तत्व के नाम के अंत में -आइड (-ide) लगाया जाता है।
परमाणुओं की संख्या बताने वाले उपसर्ग:
| परमाणुओं की संख्या | उपसर्ग |
|---|---|
| 1 | मोनो (Mono) |
| 2 | डाइ (Di) |
| 3 | ट्राइ (Tri) |
| 4 | टेट्रा (Tetra) |
| 5 | पेंटा (Penta) |
| 6 | हेक्सा (Hexa) |
नामकरण के उदाहरण:
- CO — कार्बन मोनोऑक्साइड
- CO₂ — कार्बन डाइऑक्साइड
- CS₂ — कार्बन डाइसल्फाइड
- PCl₃ — फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड
- SF₆ — सल्फर हेक्साफ्लोराइड
- N₂O₄ — डाइनाइट्रोजन टेट्राऑक्साइड
- N₂O₅ — डाइनाइट्रोजन पेंटाऑक्साइड
विशेष नियम: यदि सूत्र में पहला तत्व हाइड्रोजन हो, तो उसके पहले सामान्यतः कोई उपसर्ग नहीं लगाया जाता। उदाहरण के लिए H₂S को हाइड्रोजन सल्फाइड कहा जाता है, न कि डाइहाइड्रोजन सल्फाइड।
सामान्य नाम: कुछ सहसंयोजी यौगिक अपने सामान्य नामों से अधिक प्रसिद्ध हैं। H₂O को सामान्यतः जल तथा NH₃ को अमोनिया कहा जाता है।
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सहसंयोजी आबंध में परमाणु इलेक्ट्रॉनों को एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं। जितने इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा किए जाते हैं, उसी के अनुसार एकल या द्वि-आबंध बन सकता है। H₂ और Cl₂ में एक-एक इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा होता है, जबकि O₂ में दो इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा होते हैं।
Exam Booster
- सहसंयोजी आबंध इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनता है।
- H₂ और Cl₂ में एकल सहसंयोजी आबंध होता है।
- O₂ में द्वि-आबंध होता है।
- HCl में H–Cl द्वारा एकल सहसंयोजी आबंध प्रदर्शित किया जाता है।
- जल का सूत्र H₂O है।
- सहसंयोजी यौगिकों के नामकरण में मोनो, डाइ, ट्राइ, टेट्रा, पेंटा और हेक्सा जैसे उपसर्गों का प्रयोग किया जाता है।
द्रव्य का परमाण्विक आधार
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
सहसंयोजी आबंध में परमाणु इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं, जबकि आयनिक आबंध में इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है। इस भाग में हम समझेंगे कि इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से आयन कैसे बनते हैं, आयनिक आबंध कैसे बनता है तथा आयनिक यौगिकों की प्रमुख विशेषताएँ क्या होती हैं।
आयनिक आबंध (Ionic Bond)
परिभाषा:
विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच उत्पन्न होने वाला स्थिर वैद्युत आकर्षण बल, जो उन्हें एक साथ बाँधे रखता है, आयनिक आबंध (Ionic Bond) कहलाता है।
आयनिक आबंध कैसे बनता है?
जिन परमाणुओं की संयोजकता कोश में चार से कम इलेक्ट्रॉन होते हैं, वे सामान्यतः अपने संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को त्यागकर स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करते हैं। दूसरी ओर, चार से अधिक संयोजकता इलेक्ट्रॉन वाले परमाणु अष्टक पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर सकते हैं। इस प्रकार इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण से धनायन और ऋणायन बनते हैं।
धनायन (Cation) का निर्माण
परिभाषा: इलेक्ट्रॉन त्यागने के बाद बनने वाला धनावेशित आयन धनायन कहलाता है।
उदाहरण: सोडियम (Na) के संयोजकता कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है। यह एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करता है और Na⁺ धनायन बनाता है। Na⁺ में 11 प्रोटॉन और 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए इस पर एक इकाई धनावेश होता है।
ऋणायन (Anion) का निर्माण
परिभाषा: इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के बाद बनने वाला ऋणावेशित आयन ऋणायन कहलाता है।
उदाहरण: क्लोरीन के संयोजकता कोश में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपना अष्टक पूरा करता है और Cl⁻ ऋणायन बनाता है।
सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण
सोडियम परमाणु अपना एक संयोजकता इलेक्ट्रॉन क्लोरीन परमाणु को दे देता है। इससे सोडियम Na⁺ तथा क्लोरीन Cl⁻ बन जाता है। दोनों विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच स्थिर वैद्युत आकर्षण उत्पन्न होता है और वे एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। इस प्रकार सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण होता है।
इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण:
Na → Na⁺ + e⁻
Cl + e⁻ → Cl⁻
Na⁺ + Cl⁻ → NaCl
आयन (Ion)
परिभाषा: धनायन और ऋणायन दोनों को सामूहिक रूप से आयन कहा जाता है। धनायन धनावेशित तथा ऋणायन ऋणावेशित होता है।
आयनिक यौगिकों की क्रिस्टल संरचना
आयनिक यौगिक सामान्यतः स्वतंत्र अणुओं के रूप में नहीं पाए जाते। इनके आयन त्रिविमीय (3-D) क्रिस्टल में नियमित और पुनरावृत्त प्रतिरूप में व्यवस्थित होते हैं। इस नियमित व्यवस्था को क्रिस्टल संरचना कहा जाता है।
उदाहरण: सोडियम क्लोराइड (NaCl) की क्रिस्टल संरचना में प्रत्येक Na⁺ आयन छह Cl⁻ आयनों से तथा प्रत्येक Cl⁻ आयन छह Na⁺ आयनों से घिरा होता है। आयनों की इस नियमित व्यवस्था को क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice) द्वारा दर्शाया जाता है।
आयनिक यौगिकों के गुणधर्म
विलेयता: आयनिक यौगिक जैसे सोडियम क्लोराइड और कॉपर सल्फेट सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं, जबकि किरोसिन और पेट्रोल जैसे विलायकों में सामान्यतः अघुलनशील होते हैं।
ठोस अवस्था में विद्युत चालकता: आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते क्योंकि उनके आयन मजबूत आकर्षण बलों के कारण निश्चित स्थानों पर बँधे रहते हैं और स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर सकते।
जलीय विलयन में विद्युत चालकता: जब आयनिक यौगिक जल में घुलते हैं, तो उनके आयन गतिशील हो जाते हैं। इसलिए इनके जलीय विलयन विद्युत का चालन कर सकते हैं।
गलनांक एवं क्वथनांक: आयनिक यौगिकों में आयनों के बीच प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण बल होता है। इसलिए इनके गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः अधिक होते हैं।
आयनिक और सहसंयोजी यौगिकों में मुख्य अंतर
| आधार | आयनिक यौगिक | सहसंयोजी यौगिक |
|---|---|---|
| आबंध निर्माण | इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से | इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से |
| संरचना | 3-D क्रिस्टल संरचना बनाते हैं | सामान्यतः स्वतंत्र अणु बनाते हैं |
| जल में घुलनशीलता | प्रायः जल में घुलनशील | अधिकांश प्रायः जल में अघुलनशील |
| विद्युत चालकता | जलीय विलयन में विद्युत का चालन करते हैं | सामान्यतः विद्युत का चालन नहीं करते |
| गलनांक एवं क्वथनांक | सामान्यतः अधिक | सामान्यतः कम |
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आयनिक आबंध को समझने का सबसे आसान तरीका है—इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण → आयन का निर्माण → विपरीत आवेशों का आकर्षण → आयनिक आबंध। उदाहरण में Na एक इलेक्ट्रॉन देकर Na⁺ बनता है और Cl वही इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl⁻ बनता है। Na⁺ और Cl⁻ के बीच आकर्षण से NaCl बनता है।
Exam Booster
- आयनिक आबंध इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनता है।
- इलेक्ट्रॉन त्यागने पर धनायन तथा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर ऋणायन बनता है।
- NaCl आयनिक आबंध का प्रमुख उदाहरण है।
- Na → Na⁺ + e⁻ तथा Cl + e⁻ → Cl⁻ आयनिक आबंध निर्माण की प्रमुख प्रक्रियाएँ हैं।
- आयनिक यौगिक सामान्यतः 3-D क्रिस्टल संरचना में पाए जाते हैं।
- ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते।
- जलीय अवस्था में मुक्त आयनों के कारण आयनिक यौगिक विद्युत का चालन करते हैं।
- आयनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः अधिक होते हैं।
द्रव्य का परमाण्विक आधार
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
किसी यौगिक में उपस्थित तत्वों और उनके परमाणुओं की संख्या को संक्षेप में दर्शाने के लिए रासायनिक सूत्र का प्रयोग किया जाता है। इस भाग में हम सहसंयोजी तथा आयनिक यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखने की विधि समझेंगे।
रासायनिक सूत्र (Chemical Formula)
परिभाषा:
किसी यौगिक में उपस्थित विभिन्न तत्वों तथा उनके परमाणुओं या आयनों के सरलतम पूर्णांक अनुपात को प्रतीकों और पादांकों (subscripts) द्वारा दर्शाने वाले संक्षिप्त रूप को रासायनिक सूत्र कहते हैं।
रासायनिक सूत्र क्यों लिखे जाते हैं?
रासायनिक सूत्र किसी यौगिक की संरचना को संक्षिप्त रूप में व्यक्त करता है। इससे यह पता चलता है कि यौगिक में कौन-कौन से तत्व उपस्थित हैं और उनके परमाणुओं या आयनों की संख्या अथवा सरलतम अनुपात क्या है।
सहसंयोजी यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखना
सूत्र लिखने की विधि:
सहसंयोजी यौगिक का सूत्र लिखते समय उसके घटक तत्वों के प्रतीक तथा उनकी संयोजकताएँ ज्ञात की जाती हैं। इसके बाद संयोजकताओें का तिर्यक (criss-cross) करके उन्हें संबंधित तत्वों के प्रतीकों के बाद पादांक के रूप में लिखा जाता है। :
चरण 1 — तत्वों के प्रतीक लिखना
सबसे पहले यौगिक बनाने वाले दोनों तत्वों के रासायनिक प्रतीक लिखे जाते हैं। उदाहरण के लिए हाइड्रोजन क्लोराइड के लिए H और Cl लिखा जाएगा।
चरण 2 — संयोजकताएँ लिखना
प्रत्येक तत्व की संयोजकता उसके प्रतीक के साथ लिखी जाती है। हाइड्रोजन की संयोजकता 1 तथा क्लोरीन की संयोजकता 1 है।
चरण 3 — संयोजकताओें का तिर्यक करना
एक तत्व की संयोजकता को दूसरे तत्व के प्रतीक के नीचे पादांक के रूप में लिखा जाता है। यदि तिर्यक करने के बाद संयोजकता 1 प्राप्त होती है, तो उसे सामान्यतः सूत्र में नहीं लिखा जाता।
उदाहरण:
- हाइड्रोजन क्लोराइड → HCl
- हाइड्रोजन सल्फाइड → H₂S
- कार्बन टेट्राक्लोराइड → CCl₄
हाइड्रोजन सल्फाइड में H की संयोजकता 1 और S की संयोजकता 2 होने के कारण सूत्र H₂S प्राप्त होता है। कार्बन की संयोजकता 4 तथा क्लोरीन की 1 होने के कारण कार्बन टेट्राक्लोराइड का सूत्र CCl₄ होता है।
आयनिक यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखना
सूत्र लिखने की विधि:
आयनिक यौगिक का सूत्र लिखते समय पहले धनायन का प्रतीक और उसके बाद ऋणायन का प्रतीक लिखा जाता है। इसके बाद उनके आवेशों की संख्याओं का तिर्यक करके उन्हें पादांक के रूप में लिखा जाता है।
चरण 1 — धनायन और ऋणायन के प्रतीक लिखना
सबसे पहले धनायन का प्रतीक तथा उसके बाद ऋणायन का प्रतीक लिखा जाता है। उदाहरण के लिए कैल्सियम क्लोराइड के लिए Ca और Cl लिखा जाएगा।
चरण 2 — आयनों के आवेश लिखना
दोनों आयनों के आवेश ज्ञात किए जाते हैं। कैल्सियम आयन का आवेश Ca²⁺ तथा क्लोराइड आयन का आवेश Cl⁻ है।
चरण 3 — आवेशों का तिर्यक करना
आवेशों की केवल संख्याओं को तिर्यक करके दूसरे आयन के प्रतीक के नीचे पादांक के रूप में लिखा जाता है। इस प्रकार Ca²⁺ और Cl⁻ से CaCl₂ प्राप्त होता है।
चरण 4 — आवेशों का संतुलन
किसी आयनिक यौगिक का अंतिम सूत्र विद्युत रूप से उदासीन होना चाहिए। इसलिए धन एवं ऋण आवेशों को इस प्रकार संतुलित किया जाता है कि पूरी संरचना का कुल आवेश शून्य हो।
मुख्य उदाहरण
- कैल्सियम क्लोराइड: Ca²⁺ और Cl⁻ → CaCl₂
- ऐलुमिनियम ऑक्साइड: Al³⁺ और O²⁻ → Al₂O₃
- मैग्नीशियम ऑक्साइड: Mg²⁺ और O²⁻ → MgO
विशेष ध्यान: यदि तिर्यक विधि से प्राप्त पादांकों में कोई सामान्य गुणनखंड हो, तो उन्हें उसी संख्या से भाग देकर सूत्र को सरलतम अनुपात में लिखा जाता है। उदाहरण के लिए Mg²⁺ और O²⁻ से प्राप्त Mg₂O₂ को 2 से भाग देने पर MgO प्राप्त होता है।
बहुपरमाण्विक आयनों के साथ सूत्र लिखना
जब किसी यौगिक में बहुपरमाण्विक आयन दो या दो से अधिक बार उपस्थित होता है, तब उस आयन को कोष्ठक में लिखा जाता है। कोष्ठक के बाहर दिया गया पादांक बताता है कि वह बहुपरमाण्विक आयन कितनी बार उपस्थित है।
उदाहरण:
- मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड → Mg(OH)₂
- ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड → Al(OH)₃
- ऐलुमिनियम सल्फेट → Al₂(SO₄)₃
- कैल्सियम कार्बोनेट → CaCO₃
महत्त्वपूर्ण नियम: यदि केवल एक बहुपरमाण्विक ऋणायन उपस्थित हो, तो सामान्यतः कोष्ठक की आवश्यकता नहीं होती। उदाहरण के लिए कैल्सियम कार्बोनेट का सूत्र CaCO₃ है। लेकिन Mg(OH)₂ में OH दो बार उपस्थित है, इसलिए कोष्ठक का प्रयोग किया जाता है।
रासायनिक सूत्र लिखते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- तत्वों के सही रासायनिक प्रतीक लिखें।
- संबंधित तत्वों या आयनों की संयोजकता/आवेश सही लिखें।
- आवेशों की केवल संख्याओं का तिर्यक किया जाता है।
- पादांक 1 को सूत्र में नहीं लिखा जाता।
- अंतिम सूत्र में धन और ऋण आवेश संतुलित होने चाहिए।
- सूत्र हमेशा तत्वों या आयनों के सरलतम पूर्णांक अनुपात को दर्शाता है।
- एक से अधिक बहुपरमाण्विक आयन होने पर कोष्ठक का प्रयोग किया जाता है।
- रासायनिक सूत्र में आयनों के आवेश अलग से नहीं लिखे जाते।
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रासायनिक सूत्र लिखने का मूल विचार बहुत सरल है—पहले घटक तत्व या आयन पहचानिए, फिर उनकी संयोजकता अथवा आवेश लिखिए और अंत में उन्हें इस प्रकार संयोजित कीजिए कि यौगिक विद्युत रूप से उदासीन तथा सरलतम अनुपात में हो। आयनिक यौगिकों में धनायन और ऋणायन के कुल आवेश बराबर होने चाहिए।
Exam Booster
- रासायनिक सूत्र यौगिक में उपस्थित तत्वों और उनके परमाणुओं/आयनों के सरलतम अनुपात को दर्शाता है।
- सहसंयोजी यौगिकों का सूत्र लिखने में संयोजकताओें की क्रिस-क्रॉस विधि उपयोगी है।
- आयनिक यौगिक का सूत्र लिखते समय पहले धनायन और फिर ऋणायन लिखा जाता है।
- अंतिम आयनिक यौगिक का कुल आवेश हमेशा शून्य होना चाहिए।
- Mg²⁺ और O²⁻ से Mg₂O₂ प्राप्त होने पर इसे सरल करके MgO लिखा जाता है।
- Mg(OH)₂ में कोष्ठक इसलिए लगाया गया है क्योंकि OH⁻ आयन दो बार उपस्थित है।
- Al(OH)₃ में 3, तीन OH⁻ आयनों को दर्शाता है।
- Al₂(SO₄)₃ में दो Al³⁺ और तीन SO₄²⁻ आयनों के बीच आवेश संतुलित होता है।
द्रव्य का परमाण्विक आधार
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
किसी यौगिक के रासायनिक सूत्र से उसके घटक परमाणुओं की संख्या ज्ञात की जा सकती है। इसी आधार पर उसके अणु या सूत्र इकाई का द्रव्यमान, उसमें उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों को जोड़कर ज्ञात किया जाता है।
सहसंयोजी यौगिकों का आण्विक द्रव्यमान
परिभाषा:
किसी अणु का आण्विक द्रव्यमान उसके सभी घटक परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का कुल योग होता है। इसे u (atomic mass unit) में व्यक्त किया जाता है।
आण्विक द्रव्यमान कैसे ज्ञात करते हैं?
किसी सहसंयोजी यौगिक का आण्विक द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए उसके रासायनिक सूत्र में उपस्थित प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या को उसके परमाणु द्रव्यमान से गुणा किया जाता है। इसके बाद सभी प्राप्त मानों को जोड़ दिया जाता है।
सूत्र:
आण्विक द्रव्यमान = सभी घटक परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग
उदाहरण 1 — जल (H₂O)
जल के लिए H = 1 u तथा O = 16 u दिया गया है। H₂O में 2 हाइड्रोजन तथा 1 ऑक्सीजन परमाणु है।
H₂O का आण्विक द्रव्यमान
= (1 u × 2) + (16 u × 1)
= 2 u + 16 u
= 18 u
अतः जल (H₂O) का आण्विक द्रव्यमान 18 u है।
उदाहरण 2 — कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
CO₂ के लिए C = 12 u तथा O = 16 u दिया गया है। CO₂ में 1 कार्बन तथा 2 ऑक्सीजन परमाणु होते हैं।
CO₂ का आण्विक द्रव्यमान
= (12 u × 1) + (16 u × 2)
= 12 u + 32 u
= 44 u
अतः कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का आण्विक द्रव्यमान 44 u है।
आण्विक द्रव्यमान ज्ञात करने के मुख्य चरण
- सबसे पहले यौगिक का रासायनिक सूत्र लिखें।
- सूत्र में उपस्थित प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या ज्ञात करें।
- प्रत्येक तत्व के परमाणु द्रव्यमान को उसके परमाणुओं की संख्या से गुणा करें।
- सभी प्राप्त द्रव्यमानों को जोड़ें।
- प्राप्त परिणाम आण्विक द्रव्यमान होगा और इसकी इकाई u होगी।
आयनिक यौगिकों का सूत्र इकाई द्रव्यमान
परिभाषा:
आयनिक यौगिकों में आयनों की सरलतम पूर्ण संख्या के अनुपात को सूत्र इकाई कहते हैं। इस सूत्र इकाई में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों के योग को सूत्र इकाई द्रव्यमान कहते हैं।
सूत्र इकाई द्रव्यमान कैसे ज्ञात करते हैं?
आयनिक यौगिक का सूत्र इकाई द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए उसके सूत्र में उपस्थित प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या को उसके परमाणु द्रव्यमान से गुणा किया जाता है। फिर सभी प्राप्त मानों को जोड़ दिया जाता है। इसकी इकाई भी u होती है।
सूत्र:
सूत्र इकाई द्रव्यमान = सूत्र इकाई में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग
उदाहरण 1 — सोडियम ऑक्साइड (Na₂O)
Na₂O के लिए Na = 23 u तथा O = 16 u दिया गया है। सूत्र में 2 सोडियम तथा 1 ऑक्सीजन परमाणु उपस्थित हैं।
Na₂O का सूत्र इकाई द्रव्यमान
= (23 u × 2) + (16 u × 1)
= 46 u + 16 u
= 62 u
अतः सोडियम ऑक्साइड (Na₂O) का सूत्र इकाई द्रव्यमान 62 u है।
उदाहरण 2 — कैल्सियम नाइट्रेट [Ca(NO₃)₂]
Ca(NO₃)₂ के लिए Ca = 40 u, N = 14 u तथा O = 16 u दिया गया है। इसमें 1 कैल्सियम, 2 नाइट्रोजन तथा 6 ऑक्सीजन परमाणु होते हैं।
Ca(NO₃)₂ का सूत्र इकाई द्रव्यमान
= (40 u × 1) + {(14 u × 1) + (16 u × 3)} × 2
= 40 u + (14 u + 48 u) × 2
= 40 u + 124 u
= 164 u
अतः कैल्सियम नाइट्रेट [Ca(NO₃)₂] का सूत्र इकाई द्रव्यमान 164 u है।
आण्विक द्रव्यमान और सूत्र इकाई द्रव्यमान में अंतर
| आधार | आण्विक द्रव्यमान | सूत्र इकाई द्रव्यमान |
|---|---|---|
| किसके लिए? | सहसंयोजी यौगिकों के अणुओं के लिए | आयनिक यौगिकों के लिए |
| आधार | अणु में उपस्थित परमाणुओं के द्रव्यमानों का योग | सूत्र इकाई में उपस्थित परमाणुओं के द्रव्यमानों का योग |
| उदाहरण | H₂O, CO₂ | Na₂O, Ca(NO₃)₂ |
| इकाई | u | u |
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याद रखने का आसान तरीका है—सहसंयोजी यौगिक → अणु → आण्विक द्रव्यमान और आयनिक यौगिक → सूत्र इकाई → सूत्र इकाई द्रव्यमान। गणना दोनों में लगभग समान होती है: सूत्र में प्रत्येक परमाणु की संख्या को उसके परमाणु द्रव्यमान से गुणा करके सभी मानों को जोड़ दिया जाता है।
Exam Booster
- आण्विक द्रव्यमान किसी अणु में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग है।
- सूत्र इकाई द्रव्यमान आयनिक यौगिक की सूत्र इकाई में उपस्थित परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग है।
- H₂O का आण्विक द्रव्यमान = 18 u।
- CO₂ का आण्विक द्रव्यमान = 44 u।
- Na₂O का सूत्र इकाई द्रव्यमान = 62 u।
- Ca(NO₃)₂ का सूत्र इकाई द्रव्यमान = 164 u।
- कोष्ठक के बाहर दिया गया पादांक कोष्ठक के अंदर उपस्थित सभी परमाणुओं की संख्या को प्रभावित करता है।
- आण्विक द्रव्यमान और सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना में रासायनिक सूत्र को सही ढंग से पढ़ना सबसे महत्वपूर्ण है।
द्रव्य का परमाण्विक आधार
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
आयनिक और सहसंयोजी यौगिक अपने आबंधों की प्रकृति के कारण अलग-अलग भौतिक गुणधर्म प्रदर्शित करते हैं। उनकी विलेयता, विद्युत चालकता तथा गलनांक और क्वथनांक का अध्ययन करके दोनों प्रकार के यौगिकों में अंतर को आसानी से समझा जा सकता है।
आयनिक एवं सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्म
विलेयता
आयनिक यौगिक: आयनिक यौगिक जैसे सोडियम क्लोराइड (NaCl) और कॉपर सल्फेट सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं, लेकिन किरोसिन और पेट्रोल जैसे विलायकों में सामान्यतः अघुलनशील होते हैं।
सहसंयोजी यौगिक: अधिकांश सहसंयोजी यौगिक जैसे कपूर और नैफ्थलीन जल में अघुलनशील होते हैं, लेकिन किरोसिन और पेट्रोल जैसे विलायकों में घुल सकते हैं।
ठोस अवस्था में विद्युत चालकता
आयनिक यौगिक: ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते। इसका कारण यह है कि उनके आयन प्रबल आकर्षण बलों के कारण निश्चित स्थानों पर बँधे रहते हैं और स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर सकते।
सहसंयोजी यौगिक: सामान्यतः सहसंयोजी यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते क्योंकि इनमें स्वतंत्र रूप से गति करने वाले आयन उपस्थित नहीं होते। उदाहरण के लिए कपूर और नैफ्थलीन विद्युत का चालन नहीं करते।
जलीय विलयन में विद्युत चालकता
आयनिक यौगिक: जब आयनिक यौगिक जल में घुलते हैं, तो उनके आयन स्वतंत्र रूप से गति करने लगते हैं। इसलिए उनके जलीय विलयन विद्युत का चालन करते हैं। सोडियम क्लोराइड और कॉपर सल्फेट इसके उदाहरण हैं।
सहसंयोजी यौगिक: कुछ सहसंयोजी यौगिक जल में घुल सकते हैं, लेकिन यदि वे विलयन में आयन नहीं बनाते हैं तो विद्युत का चालन नहीं करते। उदाहरण के लिए चीनी जल में घुलती है, लेकिन उसका विलयन विद्युत का चालन नहीं करता।
गलित अवस्था में विद्युत चालकता
आयनिक यौगिक: ठोस अवस्था में आयन निश्चित स्थानों पर बँधे रहते हैं, लेकिन गलित अवस्था में आयन गतिशील हो जाते हैं। इसलिए गलित आयनिक यौगिक विद्युत का चालन कर सकते हैं।
सहसंयोजी यौगिक: सामान्यतः सहसंयोजी यौगिकों में स्वतंत्र आयन नहीं होते, इसलिए उनकी गलित अवस्था में भी विद्युत चालकता सामान्यतः नहीं पाई जाती।
गलनांक एवं क्वथनांक
आयनिक यौगिक: आयनिक यौगिकों में धनायन और ऋणायन के बीच प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण बल होता है। इन आयनों को अलग करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए इनके गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः अधिक होते हैं।
सहसंयोजी यौगिक: अधिकांश सहसंयोजी यौगिकों में अणुओं के बीच आकर्षण अपेक्षाकृत कमजोर होता है। इसलिए इनके गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः कम होते हैं।
आयनिक और सहसंयोजी यौगिकों की तुलना
| गुणधर्म | आयनिक यौगिक | सहसंयोजी यौगिक |
|---|---|---|
| विलेयता | सामान्यतः जल में घुलनशील | अधिकांश जल में अघुलनशील |
| किरोसिन/पेट्रोल में विलेयता | सामान्यतः अघुलनशील | कुछ यौगिक घुलनशील |
| ठोस अवस्था में विद्युत चालकता | नहीं करते | सामान्यतः नहीं करते |
| जलीय विलयन में विद्युत चालकता | आमतौर पर करते हैं | सामान्यतः नहीं करते |
| गलित अवस्था में विद्युत चालकता | कर सकते हैं | सामान्यतः नहीं करते |
| गलनांक एवं क्वथनांक | सामान्यतः अधिक | सामान्यतः कम |
विद्युत चालकता का मुख्य कारण
आयनिक यौगिक: विद्युत का चालन स्वतंत्र रूप से गति करने वाले आयनों के कारण होता है। ठोस अवस्था में आयन गतिशील नहीं होते, जबकि जल में घुलने या गलने पर वे गति कर सकते हैं।
सहसंयोजी यौगिक: अधिकांश सहसंयोजी यौगिकों में स्वतंत्र आयन नहीं होते। इसलिए वे सामान्यतः विद्युत का चालन नहीं करते।
प्रयोग से प्राप्त निष्कर्ष
सोडियम क्लोराइड और कॉपर सल्फेट जैसे आयनिक यौगिकों तथा कपूर, चीनी और नैफ्थलीन जैसे सहसंयोजी पदार्थों की विलेयता और विद्युत चालकता की तुलना करने से स्पष्ट होता है कि रासायनिक आबंध की प्रकृति किसी पदार्थ के भौतिक गुणधर्मों को प्रभावित करती है।
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आयनिक यौगिकों की विद्युत चालकता को याद रखने का आसान तरीका है—आयन बँधे हैं तो चालकता नहीं, आयन स्वतंत्र हैं तो चालकता। ठोस NaCl में आयन अपनी जगह बँधे रहते हैं, इसलिए वह विद्युत का चालन नहीं करता; लेकिन NaCl के जलीय विलयन में आयन स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं, इसलिए विलयन विद्युत का चालन करता है।
Exam Booster
- आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते।
- आयनिक यौगिकों के जलीय विलयन विद्युत का चालन करते हैं क्योंकि आयन स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं।
- अधिकांश सहसंयोजी यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते।
- चीनी जल में घुलती है, लेकिन उसका विलयन विद्युत का चालन नहीं करता क्योंकि वह आयन नहीं बनाती।
- आयनिक यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः अधिक होते हैं।
- सहसंयोजी यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः कम होते हैं।
- NaCl और CuSO₄ आयनिक यौगिकों के उदाहरण हैं।
- कपूर और नैफ्थलीन सहसंयोजी यौगिकों के उदाहरण हैं।
द्रव्य का परमाण्विक आधार
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
इस अध्याय में आपने द्रव्यमान संरक्षण एवं स्थिर अनुपात के नियम, परमाणु एवं अणु, रासायनिक आबंध, सहसंयोजी एवं आयनिक आबंध, रासायनिक सूत्र, आण्विक द्रव्यमान तथा सूत्र इकाई द्रव्यमान का अध्ययन किया। अब इन अवधारणाओं को प्रश्नों और अभ्यासों के माध्यम से दोहराइए।
Assignments – What Have You Learned?
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम क्या है?
- स्थिर अनुपात का नियम किसे कहते हैं?
- अणु की परिभाषा दीजिए।
- रासायनिक आबंध क्या है?
- सहसंयोजी आबंध कैसे बनता है?
- आयनिक आबंध किसे कहते हैं?
- धनायन और ऋणायन में क्या अंतर है?
- सूत्र इकाई किसे कहते हैं?
- आण्विक द्रव्यमान की इकाई क्या है?
- आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन क्यों नहीं करते?
लघु उत्तरीय प्रश्न
- परमाणु स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए रासायनिक आबंध क्यों बनाते हैं?
- सहसंयोजी और आयनिक आबंध के निर्माण में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
- NaCl के निर्माण में सोडियम और क्लोरीन के बीच इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण समझाइए।
- H₂ अणु में सहसंयोजी आबंध कैसे बनता है?
- O₂ में द्वि-सहसंयोजी आबंध क्यों बनता है?
- आयनिक यौगिकों के जलीय विलयन विद्युत का चालन क्यों करते हैं?
- चीनी का जलीय विलयन विद्युत का चालन क्यों नहीं करता?
- आयनिक और सहसंयोजी यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक में अंतर क्यों होता है?
- आयनिक यौगिकों की क्रिस्टल संरचना से आप क्या समझते हैं?
- रासायनिक सूत्र लिखते समय संयोजकता का क्या महत्त्व है?
रासायनिक सूत्र लिखिए
- ऐलुमिनियम नाइट्रेट
- कैल्सियम ऑक्साइड
- फेरिक ऑक्साइड
- Ca²⁺ और Br⁻ से बनने वाला यौगिक
- Al³⁺ और CO₃²⁻ से बनने वाला यौगिक
- K⁺ और SO₄²⁻ से बनने वाला यौगिक
- NH₄⁺ और Cl⁻ से बनने वाला यौगिक
- मैग्नीशियम और नाइट्रोजन से बनने वाला यौगिक
- लीथियम और नाइट्रोजन से बनने वाला यौगिक
- सोडियम और सल्फर से बनने वाला यौगिक
- ऐलुमिनियम और ऑक्सीजन से बनने वाला यौगिक
आण्विक द्रव्यमान ज्ञात कीजिए
दिए गए परमाणु द्रव्यमानों का प्रयोग कीजिए।
- H₂O — H = 1 u, O = 16 u
- CO₂ — C = 12 u, O = 16 u
- HNO₃ — H = 1 u, N = 14 u, O = 16 u
- CH₄ — C = 12 u, H = 1 u
सूत्र इकाई द्रव्यमान ज्ञात कीजिए
- KCl — K = 39 u, Cl = 35.5 u
- Mg(OH)₂ — Mg = 24 u, O = 16 u, H = 1 u
- Na₂O — Na = 23 u, O = 16 u
- Ca(NO₃)₂ — Ca = 40 u, N = 14 u, O = 16 u
- NH₄NO₃ — N = 14 u, H = 1 u, O = 16 u
- H₃PO₄ — H = 1 u, P = 31 u, O = 16 u
- NaHCO₃ — Na = 23 u, H = 1 u, C = 12 u, O = 16 u
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास आधारित प्रश्न
- किसी तत्व ‘क’ के तीसरे कोश में एक इलेक्ट्रॉन है। वह स्थायित्व प्राप्त करने के लिए कितने इलेक्ट्रॉन त्यागेगा या ग्रहण करेगा? वह कौन-सा आयन बनाएगा?
- किसी तत्व ‘ख’ के दूसरे कोश में छह इलेक्ट्रॉन हैं। स्थायित्व प्राप्त करने के लिए वह कितने इलेक्ट्रॉन ग्रहण करेगा? वह किस प्रकार का आयन बनाएगा?
- यदि ‘क’ और ‘ख’ उपर्युक्त प्रकार से संयोजित होते हैं, तो उनके बीच किस प्रकार का आबंध बनेगा?
- किसी तत्व के बाह्यतम कोश में छह इलेक्ट्रॉन हैं और वह द्विपरमाणुक अणु बनाता है। इसका कारण समझाइए।
- क्लोरीन की परमाणु संख्या 17 है। Cl⁻ आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
आयन एवं परमाणु पर आधारित प्रश्न
- यदि किसी स्पीशीज में 11 प्रोटॉन, 12 न्यूट्रॉन और 10 इलेक्ट्रॉन हैं, तो उसकी परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए।
- उपरोक्त स्पीशीज उदासीन है, धनायन है या ऋणायन? कारण दीजिए।
- उस स्पीशीज का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
- ²⁷Al, ⁸⁰Br⁻ और ²⁰¹Hg²⁺ में इलेक्ट्रॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
द्रव्यमान संरक्षण पर आधारित प्रश्न
5.3 g सोडियम कार्बोनेट और 6.0 g ऐसीटिक अम्ल अभिक्रिया करके 2.2 g कार्बन डाइऑक्साइड, 0.9 g जल और 8.2 g सोडियम ऐसीटेट बनाते हैं। जाँच कीजिए कि क्या इस अभिक्रिया में द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन होता है।
अभिकथन एवं कारण
अभिकथन: गलित अवस्था में कॉपर सल्फेट विद्युत का चालन करता है, परंतु ठोस अवस्था में नहीं करता।
कारण: जालक की गलित अवस्था में कॉपर और सल्फेट आयन अपनी स्थिति पर स्थिर रहते हैं, जबकि ठोस अवस्था में वे स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं।
सही विकल्प चुनिए:
- (i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं तथा कारण अभिकथन की सही व्याख्या है।
- (ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं, परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।
- (iii) अभिकथन सत्य है, परंतु कारण असत्य है।
- (iv) अभिकथन असत्य है, परंतु कारण सत्य है।
सोचिए और बताइए
- ऐसा कौन-सा रासायनिक आबंध होगा जिसमें ठोस अवस्था में पदार्थ विद्युत का चालन न करे, लेकिन जल में घुलने पर विद्युत का चालन करे? कारण सहित बताइए।
- एक धातु X की संयोजकता कोश में दो इलेक्ट्रॉन हैं और वह ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके एक यौगिक बनाती है। इस यौगिक के सूत्र, आबंध के प्रकार और जलीय विलयन की विद्युत चालकता का पूर्वानुमान कीजिए।
परियोजना कार्य
- एक प्रयोग की योजना बनाकर यह दर्शाइए कि जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन सदैव समान अनुपात में उपस्थित होते हैं, चाहे जल का स्रोत कुछ भी हो।
- किसी तीन तत्वों के परमाणुओं एवं आयनों की तुलना कीजिए। स्तंभ आलेख (Bar Graph) द्वारा आयन निर्माण के पूर्व और पश्चात इलेक्ट्रॉनों की संख्या दर्शाइए।
- धनायनों और ऋणायनों का एक कार्ड गेम तैयार कीजिए। कार्डों का मिलान करके विद्युत रूप से उदासीन यौगिक बनाने का प्रयास कीजिए।
- अणुओं की संरचना को समझने के लिए किसी Molecule Building Simulation का प्रयोग कीजिए।
अध्याय आधारित चुनौती
दो तत्व ‘क’ और ‘ख’ के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्रमशः 2, 8, 5 और 2, 8, 7 हैं। बताइए—
- इनमें कौन-सा तत्व अधिक अभिक्रियाशील होगा?
- दोनों के संयोजन पर किस प्रकार का आबंध बनने की संभावना है?
- इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण अथवा साझेदारी के आधार पर आबंध निर्माण समझाइए।
- बनने वाले यौगिक के सूत्र का पूर्वानुमान कीजिए।
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