अपने परिवेश में गति का वर्णन - Class 9 Science Exploration Hindi CBSE Notes

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CBSE Notes for Class 9 – Chapter-wise Revision Notes

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अपने परिवेश में गति का वर्णन - Class 9 Science Exploration Hindi CBSE Notes

अपने परिवेश में गति का वर्णन

Class 9 Science Exploration Hindi Updated : 04 August 2026

अध्याय 4. अपने परिवेश में गति का वर्णन

गति (Motion) हमारे चारों ओर होने वाली सबसे सामान्य प्राकृतिक घटनाओं में से एक है। पक्षियों का उड़ना, वाहनों का चलना, नदियों का बहना और ग्रहों का घूमना—ये सभी गति के उदाहरण हैं। इस अध्याय में हम सरल रेखीय गति (Linear Motion), स्थिति (Position), संदर्भ बिंदु (Reference Point), दूरी (Distance), विस्थापन (Displacement), चाल (Speed), वेग (Velocity) तथा त्वरण (Acceleration) जैसी मूलभूत अवधारणाओं को समझेंगे। साथ ही इन राशियों का गणितीय एवं ग्राफीय रूप से वर्णन करना भी सीखेंगे। 

Chapter Review

परिचय (Introduction)

  • प्रकृति में प्रत्येक वस्तु किसी-न-किसी प्रकार की गति करती है।
  • गति का अध्ययन वस्तु की स्थिति में समय के साथ होने वाले परिवर्तन से किया जाता है।
  • गति का वर्णन शब्दों, संख्याओं, समीकरणों तथा ग्राफ द्वारा किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Definitions)

शब्द संक्षिप्त परिभाषा
गति (Motion) समय के साथ किसी वस्तु की स्थिति में परिवर्तन।
संदर्भ बिंदु (Reference Point) वह निश्चित बिंदु जिसके सापेक्ष स्थिति बताई जाती है।
स्थिति (Position) संदर्भ बिंदु के सापेक्ष किसी वस्तु का स्थान।
दूरी (Distance) वस्तु द्वारा तय किया गया कुल पथ।
विस्थापन (Displacement) प्रारंभिक एवं अंतिम स्थिति के बीच की सबसे छोटी निर्देशित दूरी।
माध्य चाल (Average Speed) कुल दूरी ÷ कुल समय।
माध्य वेग (Average Velocity) विस्थापन ÷ कुल समय।
माध्य त्वरण (Average Acceleration) वेग में परिवर्तन ÷ समय।

महत्वपूर्ण शब्द (Important Terms)

  • सरल रेखीय गति (Linear Motion)
  • एकसमान गति (Uniform Motion)
  • असमान गति (Non-uniform Motion)
  • संदर्भ बिंदु (Reference Point)
  • स्थिति (Position)
  • दूरी (Distance)
  • विस्थापन (Displacement)
  • चाल (Speed)
  • वेग (Velocity)
  • त्वरण (Acceleration)
  • क्षणिक वेग (Instantaneous Velocity)
  • SI मात्रक (SI Unit)

मुख्य अवधारणाएँ (Important Concepts)

  • स्थिति हमेशा किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष बताई जाती है।
  • दूरी अदिश (Scalar) राशि है जबकि विस्थापन सदिश (Vector) राशि है।
  • विस्थापन का परिमाण हमेशा दूरी के बराबर या उससे कम होता है।
  • एक ही दिशा में चलने पर दूरी और विस्थापन का परिमाण समान हो सकता है।
  • एकसमान गति में समान समय में समान दूरी तय होती है।
  • असमान गति में समान समय में असमान दूरी तय होती है।
  • माध्य चाल दिशा पर निर्भर नहीं करती।
  • माध्य वेग दिशा सहित व्यक्त किया जाता है।
  • त्वरण वेग के परिमाण, दिशा अथवा दोनों में परिवर्तन के कारण हो सकता है।
  • यदि वेग नियत रहे तो त्वरण शून्य होता है।

5 मिनट रिवीजन (Quick Revision)

  • ✔ गति = स्थिति में परिवर्तन
  • ✔ स्थिति = दूरी + दिशा
  • ✔ दूरी ≥ विस्थापन
  • ✔ दूरी अदिश, विस्थापन सदिश
  • ✔ माध्य चाल = कुल दूरी ÷ समय
  • ✔ माध्य वेग = विस्थापन ÷ समय
  • ✔ माध्य त्वरण = वेग परिवर्तन ÷ समय
  • ✔ चाल का SI मात्रक = m/s
  • ✔ वेग का SI मात्रक = m/s
  • ✔ त्वरण का SI मात्रक = m/s²

परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Booster)

  • दूरी और विस्थापन में अंतर अवश्य याद रखें।
  • माध्य चाल एवं माध्य वेग के सूत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
  • त्वरण का सूत्र तथा SI मात्रक अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
  • एकसमान एवं असमान गति के उदाहरण तैयार रखें।
  • दूरी, विस्थापन, चाल, वेग और त्वरण के SI मात्रकों को याद रखें।
  • सरल रेखीय गति से संबंधित संख्यात्मक प्रश्न CBSE परीक्षा में महत्वपूर्ण होते हैं।

अपने परिवेश में गति का वर्णन

Class 9 Science Exploration Hindi Updated : 04 August 2026

अध्याय 4. अपने परिवेश में गति का वर्णन

हमारे आसपास अनेक वस्तुएँ निरंतर गति करती रहती हैं। किसी वस्तु की गति का सही वर्णन करने के लिए उसकी स्थिति, संदर्भ बिंदु तथा समय के साथ होने वाले परिवर्तन को समझना आवश्यक है। इस भाग में हम सरल रेखीय गति (Linear Motion), स्थिति (Position) तथा संदर्भ बिंदु (Reference Point) जैसी मूलभूत अवधारणाओं का अध्ययन करेंगे। 

सरल रेखीय गति, स्थिति एवं संदर्भ बिंदु

सरल रेखीय गति (Linear Motion)

सरल रेखीय गति (Linear Motion) वह गति है जिसमें कोई वस्तु एक सीधी रेखा (Straight Line) के अनुदिश गति करती है। यह गति का सबसे सरल प्रकार माना जाता है। 

  • वस्तु केवल एक सीधी रेखा में चलती है।
  • गति की दिशा स्पष्ट होती है।
  • इसका अध्ययन करना अपेक्षाकृत सरल होता है।
  • अधिकांश प्रारम्भिक गति संबंधी अवधारणाएँ इसी पर आधारित होती हैं।

सरल रेखीय गति के उदाहरण

  • सीधी सड़क पर चलती कार।
  • सीधी पटरी पर चलती रेलगाड़ी।
  • तैराकी प्रतियोगिता में सीधे मार्ग पर तैरता खिलाड़ी।
  • ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर या नीचे जाती गेंद।

स्थिति (Position)

स्थिति (Position) किसी निश्चित समय पर संदर्भ बिंदु (Reference Point) के सापेक्ष किसी वस्तु का स्थान है। किसी वस्तु की स्थिति बताने के लिए केवल दूरी बताना पर्याप्त नहीं होता, उसकी दिशा बताना भी आवश्यक होता है। 

  • स्थिति हमेशा संदर्भ बिंदु के सापेक्ष बताई जाती है।
  • दूरी और दिशा दोनों मिलकर स्थिति का वर्णन करते हैं।
  • समय के साथ स्थिति बदलने पर वस्तु गतिशील कहलाती है।
  • यदि स्थिति नहीं बदलती तो वस्तु विरामावस्था में होती है।

संदर्भ बिंदु (Reference Point)

संदर्भ बिंदु (Reference Point) वह निश्चित बिंदु होता है जिसके आधार पर किसी वस्तु की स्थिति का निर्धारण किया जाता है। यही बिंदु गति का वर्णन करने का आधार बनता है। 

स्थिति अर्थ
धनात्मक दिशा (+) संदर्भ बिंदु के दाईं ओर की स्थिति।
ऋणात्मक दिशा (−) संदर्भ बिंदु के बाईं ओर की स्थिति।

गतिशील एवं विरामावस्था

गतिशील वस्तु विरामावस्था में वस्तु
समय के साथ स्थिति बदलती रहती है। समय के साथ स्थिति नहीं बदलती।
संदर्भ बिंदु के सापेक्ष स्थान परिवर्तित होता है। संदर्भ बिंदु के सापेक्ष स्थान स्थिर रहता है।

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मान लीजिए आप रेलवे स्टेशन पर खड़े हैं। यदि कोई ट्रेन आपके सामने से गुजरती है, तो उसकी स्थिति आपके (संदर्भ बिंदु) के सापेक्ष लगातार बदलती रहती है, इसलिए वह गतिशील है। लेकिन यदि प्लेटफ़ॉर्म पर रखा एक बेंच पूरे समय उसी स्थान पर रहता है, तो वह आपके संदर्भ में विरामावस्था में माना जाएगा।

Exam Booster

  • सरल रेखीय गति एक सीधी रेखा में होती है।
  • स्थिति बताने के लिए दूरी और दिशा दोनों आवश्यक हैं।
  • संदर्भ बिंदु के बिना किसी वस्तु की स्थिति नहीं बताई जा सकती।
  • स्थिति में परिवर्तन होने पर वस्तु गतिशील कहलाती है।
  • संदर्भ बिंदु के दाईं ओर की दिशा धनात्मक (+) तथा बाईं ओर की दिशा ऋणात्मक (−) मानी जाती है।

अपने परिवेश में गति का वर्णन

Class 9 Science Exploration Hindi Updated : 04 August 2026

अध्याय 4. अपने परिवेश में गति का वर्णन

किसी वस्तु की गति का मात्रात्मक अध्ययन करने के लिए यह जानना आवश्यक है कि उसने कितनी दूरी तय की और अपनी प्रारंभिक स्थिति से कितनी दूर पहुँची। यद्यपि दूरी (Distance) और विस्थापन (Displacement) दोनों ही किसी वस्तु के स्थान परिवर्तन से संबंधित हैं, फिर भी इनका अर्थ, मापन तथा उपयोग अलग-अलग होता है।

दूरी एवं विस्थापन

दूरी (Distance)

दूरी (Distance) वह कुल पथ (Total Path) है, जिसे कोई वस्तु एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में तय करती है। दूरी केवल पथ की लंबाई बताती है, इसमें दिशा (Direction) का कोई महत्व नहीं होता। 

  • दूरी एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है।
  • इसका केवल परिमाण (Magnitude) होता है।
  • दूरी का मान कभी ऋणात्मक नहीं होता।
  • SI मात्रक (SI Unit) मीटर (m) है।

विस्थापन (Displacement)

विस्थापन (Displacement) किसी वस्तु की प्रारंभिक स्थिति से अंतिम स्थिति तक की सबसे छोटी सीधी दूरी होती है, जिसमें दिशा (Direction) भी शामिल होती है। इसलिए विस्थापन एक सदिश राशि (Vector Quantity) है।

  • विस्थापन में परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।
  • यह सदैव प्रारंभिक एवं अंतिम स्थिति पर निर्भर करता है।
  • विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य हो सकता है।
  • SI मात्रक (SI Unit) मीटर (m) है।

दूरी एवं विस्थापन में अंतर

दूरी (Distance) विस्थापन (Displacement)
कुल तय किया गया पथ। प्रारंभिक एवं अंतिम स्थिति के बीच की सबसे छोटी दूरी।
अदिश राशि (Scalar)। सदिश राशि (Vector)।
दिशा की आवश्यकता नहीं होती। दिशा आवश्यक होती है।
मान हमेशा धनात्मक होता है। मान धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।
दूरी का मान हमेशा विस्थापन के बराबर या उससे अधिक होता है। विस्थापन का मान दूरी से कभी अधिक नहीं होता।

दूरी एवं विस्थापन का संबंध

यदि कोई वस्तु बिना दिशा बदले सीधी रेखा में चलती है, तो दूरी और विस्थापन का मान समान होता है। लेकिन यदि वस्तु दिशा बदलती है या घुमावदार मार्ग से चलती है, तो दूरी का मान विस्थापन से अधिक हो जाता है। 

स्थिति परिणाम
सीधी रेखा में एक ही दिशा में गति दूरी = विस्थापन
दिशा बदलकर या घुमावदार मार्ग से गति दूरी > विस्थापन
प्रारंभिक बिंदु पर वापस आना विस्थापन = 0, लेकिन दूरी शून्य नहीं होती।

दैनिक जीवन के उदाहरण

  • यदि कोई छात्र घर से विद्यालय तक सीधे मार्ग से जाता है, तो दूरी और विस्थापन समान हो सकते हैं।
  • यदि वह घूमकर विद्यालय पहुँचता है, तो दूरी बढ़ जाएगी, लेकिन विस्थापन समान रहेगा।
  • यदि कोई धावक गोल ट्रैक का एक पूरा चक्कर लगाकर वहीं लौट आए, तो उसका विस्थापन शून्य होगा, जबकि दूरी ट्रैक की पूरी लंबाई होगी।

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कल्पना कीजिए कि आप एक पार्क के गोल रास्ते पर एक पूरा चक्कर लगाकर उसी स्थान पर वापस आ जाते हैं। आपने पूरा रास्ता तय किया, इसलिए दूरी शून्य नहीं होगी। लेकिन आपने अपनी प्रारंभिक स्थिति ही प्राप्त कर ली, इसलिए आपका विस्थापन (Displacement) शून्य होगा। यही दोनों राशियों का सबसे महत्वपूर्ण अंतर है।

Exam Booster

  • दूरी (Distance) अदिश राशि है, जबकि विस्थापन (Displacement) सदिश राशि है।
  • दूरी का मान हमेशा विस्थापन के बराबर या उससे अधिक होता है।
  • दूरी में दिशा का महत्व नहीं होता, जबकि विस्थापन में दिशा आवश्यक है।
  • एक पूरा चक्कर लगाने पर विस्थापन शून्य हो सकता है, लेकिन दूरी नहीं।
  • दूरी एवं विस्थापन का अंतर CBSE परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अपने परिवेश में गति का वर्णन

Class 9 Science Exploration Hindi Updated : 04 August 2026

अध्याय 4. अपने परिवेश में गति का वर्णन

किसी वस्तु की गति का वर्णन केवल दूरी और विस्थापन से ही नहीं किया जा सकता। यह जानना भी आवश्यक है कि वस्तु ने किसी निश्चित समय में कितनी तेजी से दूरी तय की तथा किस दिशा में गति की। इसके लिए चाल (Speed) और वेग (Velocity) जैसी राशियों का उपयोग किया जाता है। यद्यपि दोनों का SI मात्रक समान है, फिर भी इनके अर्थ एवं उपयोग में महत्वपूर्ण अंतर होता है।

चाल एवं वेग

चाल (Speed)

चाल (Speed) वह भौतिक राशि है, जो बताती है कि कोई वस्तु एकांक समय (Unit Time) में कितनी दूरी तय करती है। चाल केवल गति की तीव्रता (Rate of Motion) बताती है, इसमें दिशा का कोई महत्व नहीं होता।

  • चाल एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है।
  • इसमें केवल परिमाण (Magnitude) होता है।
  • चाल कभी ऋणात्मक नहीं होती।
  • SI मात्रक (SI Unit) मीटर प्रति सेकंड (m/s) है।

माध्य चाल (Average Speed)

माध्य चाल (Average Speed) कुल तय की गई दूरी और कुल लगे समय का अनुपात होती है। यदि किसी वस्तु की चाल यात्रा के दौरान बदलती रहती है, तो उसकी औसत चाल ज्ञात करने के लिए इस सूत्र का उपयोग किया जाता है।

सूत्र SI मात्रक
माध्य चाल = कुल दूरी ÷ कुल समय मीटर प्रति सेकंड (m/s)

वेग (Velocity)

वेग (Velocity) वह भौतिक राशि है, जो बताती है कि कोई वस्तु एकांक समय में कितना विस्थापन (Displacement) करती है। वेग में परिमाण के साथ-साथ दिशा भी शामिल होती है, इसलिए यह एक सदिश राशि (Vector Quantity) है।

  • वेग में परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं।
  • वेग धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य हो सकता है।
  • वेग दिशा परिवर्तन के साथ बदल जाता है।
  • SI मात्रक (SI Unit) मीटर प्रति सेकंड (m/s) है।

माध्य वेग (Average Velocity)

माध्य वेग (Average Velocity) कुल विस्थापन और कुल समय का अनुपात होता है। यदि वस्तु प्रारम्भिक बिंदु पर वापस आ जाए, तो उसका विस्थापन शून्य होने के कारण माध्य वेग भी शून्य हो सकता है।

सूत्र SI मात्रक
माध्य वेग = कुल विस्थापन ÷ कुल समय मीटर प्रति सेकंड (m/s)

चाल एवं वेग में अंतर

चाल (Speed) वेग (Velocity)
दूरी पर आधारित होती है। विस्थापन पर आधारित होता है।
अदिश राशि (Scalar)। सदिश राशि (Vector)।
दिशा की आवश्यकता नहीं होती। दिशा आवश्यक होती है।
हमेशा धनात्मक होती है। धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।

एकसमान एवं असमान चाल

एकसमान चाल (Uniform Speed) असमान चाल (Non-uniform Speed)
समान समय में समान दूरी तय होती है। समान समय में असमान दूरी तय होती है।
चाल नियत रहती है। चाल समय के साथ बदलती रहती है।
उदाहरण – सीधी सड़क पर नियत गति से चलती कार। उदाहरण – शहर के ट्रैफिक में चलती कार।

दैनिक जीवन के उदाहरण

  • स्पीडोमीटर (Speedometer) वाहन की चाल दर्शाता है।
  • हवा की दिशा बदलने पर विमान का वेग बदल सकता है, चाहे उसकी चाल समान रहे।
  • गोल ट्रैक पर दौड़ने वाला खिलाड़ी पूरे चक्कर के बाद शून्य विस्थापन के कारण शून्य माध्य वेग प्राप्त कर सकता है।

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यदि दो छात्र 100 मीटर की दौड़ एक ही समय में पूरी करते हैं, तो दोनों की चाल समान होगी। लेकिन यदि वे अलग-अलग दिशाओं में दौड़ रहे हों, तो उनके वेग अलग होंगे क्योंकि वेग में दिशा भी शामिल होती है। इसलिए चाल केवल "कितनी तेजी" बताती है, जबकि वेग "कितनी तेजी और किस दिशा में" बताता है।

Exam Booster

  • चाल (Speed) अदिश राशि है, जबकि वेग (Velocity) सदिश राशि है।
  • माध्य चाल = कुल दूरी ÷ कुल समय।
  • माध्य वेग = कुल विस्थापन ÷ कुल समय।
  • चाल में दिशा का महत्व नहीं होता, जबकि वेग में दिशा आवश्यक होती है।
  • चाल एवं वेग का SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड (m/s) है।
  • चाल और वेग में अंतर CBSE परीक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।

अपने परिवेश में गति का वर्णन

Class 9 Science Exploration Hindi Updated : 04 August 2026

अध्याय 4. अपने परिवेश में गति का वर्णन

गति का अध्ययन केवल परिभाषाओं और सूत्रों तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक किसी वस्तु की गति को समझने के लिए उसके समय के साथ होने वाले परिवर्तन का ग्राफ (Graph) भी बनाते हैं। ग्राफ गति का दृश्य (Visual) रूप प्रस्तुत करते हैं, जिससे किसी वस्तु की चाल, वेग तथा त्वरण को आसानी से समझा और विश्लेषित किया जा सकता है। 

गति का ग्राफीय निरूपण एवं विश्लेषण

गति का ग्राफ (Motion Graph)

गति ग्राफ (Motion Graph) किसी वस्तु की गति से संबंधित दो राशियों के बीच संबंध को दर्शाता है। सामान्यतः दूरी–समय (Distance–Time) तथा वेग–समय (Velocity–Time) ग्राफ का उपयोग किया जाता है।

  • गति को चित्रात्मक रूप में समझने में सहायता मिलती है।
  • दो राशियों के बीच संबंध स्पष्ट दिखाई देता है।
  • गति की तुलना करना सरल हो जाता है।
  • भौतिक राशियों का विश्लेषण आसानी से किया जा सकता है।

दूरी–समय ग्राफ (Distance–Time Graph)

दूरी–समय ग्राफ किसी वस्तु द्वारा समय के साथ तय की गई दूरी को दर्शाता है। इस ग्राफ से यह पता लगाया जा सकता है कि वस्तु एकसमान गति से चल रही है, असमान गति से चल रही है या विरामावस्था में है। 

ग्राफ का स्वरूप अर्थ
सीधी रेखा एकसमान चाल (Uniform Speed) को दर्शाती है।
वक्र रेखा (Curve) असमान चाल (Non-uniform Speed) को दर्शाती है।
क्षैतिज रेखा (Horizontal Line) वस्तु विरामावस्था (At Rest) में है।

वेग–समय ग्राफ (Velocity–Time Graph)

वेग–समय ग्राफ समय के साथ वेग में होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है। इस ग्राफ की प्रवणता (Slope) से त्वरण का पता लगाया जा सकता है। 

ग्राफ का स्वरूप अर्थ
ऊपर की ओर सीधी रेखा धनात्मक त्वरण (Positive Acceleration)
क्षैतिज रेखा नियत वेग (Constant Velocity)
नीचे की ओर सीधी रेखा ऋणात्मक त्वरण या मंदन (Retardation)

ग्राफ का महत्व

  • गति का विश्लेषण सरल हो जाता है।
  • एकसमान एवं असमान गति की पहचान की जा सकती है।
  • वेग एवं त्वरण में परिवर्तन को आसानी से समझा जा सकता है।
  • विभिन्न वस्तुओं की गति की तुलना की जा सकती है।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान एवं दैनिक जीवन में ग्राफ का व्यापक उपयोग होता है।

दैनिक जीवन में उपयोग

  • वाहनों की गति का विश्लेषण करने में।
  • खेल प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के प्रदर्शन का अध्ययन करने में।
  • वैज्ञानिक प्रयोगों के परिणामों को प्रदर्शित करने में।
  • यातायात एवं परिवहन व्यवस्था के अध्ययन में।

Our Concept Builder

यदि आपको किसी विद्यार्थी के पूरे वर्ष के अंक केवल संख्याओं में दिए जाएँ, तो उन्हें समझने में समय लगेगा। लेकिन वही आँकड़े यदि ग्राफ के रूप में दिखाए जाएँ, तो उसकी प्रगति तुरंत समझ में आ जाती है। ठीक इसी प्रकार गति ग्राफ (Motion Graph) भी किसी वस्तु की गति को सरल एवं स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करते हैं।

Exam Booster

  • दूरी–समय ग्राफ से वस्तु की चाल का अध्ययन किया जाता है।
  • वेग–समय ग्राफ से वेग में परिवर्तन एवं त्वरण का अध्ययन किया जाता है।
  • दूरी–समय ग्राफ की सीधी रेखा एकसमान गति को दर्शाती है।
  • वेग–समय ग्राफ की क्षैतिज रेखा नियत वेग को दर्शाती है।
  • ग्राफ की प्रवणता (Slope) का महत्व परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • गति से संबंधित ग्राफ आधारित प्रश्न CBSE परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं।

अपने परिवेश में गति का वर्णन

Class 9 Science Exploration Hindi Updated : 04 August 2026

अध्याय 4. अपने परिवेश में गति का वर्णन

इस अध्याय के अभ्यास प्रश्न विद्यार्थियों की अवधारणात्मक समझ, संख्यात्मक समस्याओं को हल करने की क्षमता तथा परीक्षा की तैयारी को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। सभी प्रश्न अध्याय में वर्णित अवधारणाओं एवं नवीनतम CBSE परीक्षा पद्धति पर आधारित हैं।

Assignments

रिक्त स्थान भरिए

  1. समय के साथ किसी वस्तु की स्थिति में परिवर्तन को __________ कहते हैं।
  2. किसी वस्तु की स्थिति बताने के लिए __________ बिंदु आवश्यक होता है।
  3. कुल तय किए गए पथ की लंबाई को __________ कहते हैं।
  4. प्रारंभिक एवं अंतिम स्थिति के बीच की सबसे छोटी दूरी __________ कहलाती है।
  5. माध्य चाल = __________ ÷ कुल समय।
  6. माध्य वेग = __________ ÷ कुल समय।
  7. वेग में प्रति इकाई समय परिवर्तन की दर को __________ कहते हैं।
  8. त्वरण का SI मात्रक __________ है।
  9. दूरी एक __________ राशि है।
  10. विस्थापन एक __________ राशि है।

सत्य / असत्य लिखिए

  1. दूरी और विस्थापन हमेशा समान होते हैं।
  2. चाल एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है।
  3. वेग में दिशा का महत्व होता है।
  4. यदि वेग नियत हो, तो त्वरण शून्य होता है।
  5. विस्थापन का मान दूरी से अधिक हो सकता है।
  6. गोल पथ का एक पूरा चक्कर लगाने पर विस्थापन शून्य हो सकता है।
  7. वेग का SI मात्रक m/s है।
  8. दूरी–समय ग्राफ की क्षैतिज रेखा विरामावस्था को दर्शाती है।
  9. वेग–समय ग्राफ की प्रवणता (Slope) त्वरण को दर्शाती है।
  10. मंदन (Retardation) ऋणात्मक त्वरण का एक रूप है।

एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. गति (Motion) क्या है?
  2. संदर्भ बिंदु (Reference Point) क्या है?
  3. दूरी (Distance) क्या है?
  4. विस्थापन (Displacement) क्या है?
  5. चाल (Speed) का SI मात्रक क्या है?
  6. वेग (Velocity) किस प्रकार की राशि है?
  7. त्वरण (Acceleration) क्या है?
  8. माध्य चाल का सूत्र लिखिए।
  9. माध्य वेग का सूत्र लिखिए।
  10. मंदन (Retardation) क्या है?

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

  1. गति का वर्णन करने में संदर्भ बिंदु क्यों आवश्यक है?
  2. दूरी एवं विस्थापन में दो अंतर लिखिए।
  3. चाल एवं वेग में दो अंतर लिखिए।
  4. धनात्मक त्वरण एवं मंदन में अंतर लिखिए।
  5. एकसमान एवं असमान गति में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  6. दूरी–समय ग्राफ का महत्व लिखिए।
  7. वेग–समय ग्राफ की प्रवणता (Slope) क्या दर्शाती है?
  8. ऐसी कोई दो स्थितियाँ लिखिए, जिनमें विस्थापन शून्य हो सकता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)

  1. सरल रेखीय गति (Linear Motion) को उदाहरण सहित समझाइए।
  2. दूरी एवं विस्थापन की तुलना कीजिए।
  3. माध्य चाल एवं माध्य वेग के सूत्र लिखते हुए दोनों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  4. त्वरण (Acceleration) क्या है? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  5. दूरी–समय तथा वेग–समय ग्राफ का महत्व स्पष्ट कीजिए।
  6. एकसमान एवं असमान गति को उदाहरण सहित समझाइए।
  7. धनात्मक, ऋणात्मक एवं शून्य त्वरण को उदाहरण सहित समझाइए।
  8. गति के अध्ययन में ग्राफ का उपयोग क्यों किया जाता है?

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

  1. गति (Motion), स्थिति (Position) एवं संदर्भ बिंदु (Reference Point) की अवधारणाओं को उदाहरण सहित समझाइए।
  2. दूरी, विस्थापन, चाल एवं वेग की तुलना करते हुए उनके बीच के अंतर स्पष्ट कीजिए।
  3. त्वरण (Acceleration) क्या है? धनात्मक त्वरण, मंदन एवं शून्य त्वरण का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  4. दूरी–समय एवं वेग–समय ग्राफ का वर्णन करते हुए उनके महत्व को स्पष्ट कीजिए।
  5. गति से संबंधित भौतिक राशियों के SI मात्रक, सूत्र एवं उपयोग का वर्णन कीजिए।

Competency Based Questions

प्रश्न 1. एक छात्र अपने घर से विद्यालय तक 800 मीटर चलता है। विद्यालय की छुट्टी के बाद वह उसी मार्ग से वापस घर लौट आता है।

उत्तर दीजिए—

  1. छात्र द्वारा तय की गई कुल दूरी कितनी है?
  2. उसका कुल विस्थापन कितना होगा?
  3. अपने उत्तर का कारण लिखिए।

प्रश्न 2. एक कार पहले 10 मिनट तक समान चाल से चलती है, फिर अगले 5 मिनट में उसकी चाल बढ़ जाती है और अंत में चालक ब्रेक लगाकर कार रोक देता है।

उत्तर दीजिए—

  1. किस चरण में धनात्मक त्वरण होगा?
  2. किस चरण में त्वरण शून्य होगा?
  3. ब्रेक लगाने पर किस प्रकार का त्वरण होगा?

HOTS (Higher Order Thinking Skills)

  1. यदि कोई व्यक्ति एक गोल मैदान के चार पूरे चक्कर लगाकर उसी स्थान पर लौट आए, तो उसकी दूरी एवं विस्थापन में क्या अंतर होगा? कारण सहित उत्तर दीजिए।
  2. क्या किसी वस्तु की चाल समान रहते हुए उसका वेग बदल सकता है? उपयुक्त उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
  3. यदि किसी वाहन का वेग लगातार बढ़ रहा हो, तो क्या उसकी चाल भी अवश्य बढ़ेगी? अपने उत्तर का तर्क दीजिए।

गतिविधि आधारित प्रश्न (Activity Based Questions)

  1. अपने विद्यालय के खेल मैदान में 50 मीटर की सीधी दूरी मापिए तथा किसी विद्यार्थी की चाल एवं माध्य चाल का अनुमान लगाइए।
  2. एक दूरी–समय (Distance–Time) ग्राफ बनाइए और उससे वस्तु की गति का विश्लेषण कीजिए।
  3. अपने घर से विद्यालय तक का मार्ग बनाकर दूरी एवं विस्थापन का अंतर समझाइए।
  4. किसी चलती हुई साइकिल, मोटरसाइकिल या कार का अवलोकन कीजिए और उसमें एकसमान गति तथा असमान गति के उदाहरण खोजिए।

Case Study Based Questions

रिया प्रतिदिन अपने घर से पार्क तक 500 मीटर चलकर जाती है और व्यायाम करने के बाद उसी मार्ग से वापस घर लौट आती है। उसी समय उसका भाई आरव साइकिल से सीधे विद्यालय जाता है। रिया का भाई पूरे रास्ते लगभग समान वेग से चलता है, जबकि रिया की चाल बीच-बीच में बदलती रहती है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

  1. रिया द्वारा तय की गई कुल दूरी कितनी होगी?
  2. रिया का कुल विस्थापन कितना होगा?
  3. यदि आरव समान वेग से चलता है, तो उसका त्वरण कितना होगा?
  4. रिया की चाल बदलने पर उसकी गति किस प्रकार की कहलाएगी?
  5. रिया एवं आरव की गति का अध्ययन करने के लिए कौन-सा ग्राफ अधिक उपयोगी होगा?

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Chapter कोशिका: जीवन की निर्माण इकाई (CBSE NOTES)

कोशिका: जीवन की निर्माण इकाई (अन्वेषण)

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Chapter क्रियाशील ऊतक (CBSE NOTES)

क्रियाशील ऊतक (अन्वेषण)

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Chapter अपने परिवेश में गति का वर्णन (CBSE NOTES)

अपने परिवेश में गति का वर्णन (अन्वेषण)

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Chapter मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण (CBSE NOTES)

मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण (अन्वेषण)

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Chapter गति पर बलों का प्रभाव (CBSE NOTES)

गति पर बलों का प्रभाव (अन्वेषण)

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Chapter कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें (CBSE NOTES)

कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें (अन्वेषण)

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Chapter एक यात्रा: परमाणु के भीतर (CBSE NOTES)

एक यात्रा: परमाणु के भीतर (अन्वेषण)

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Chapter द्रव्य का परमाण्विक आधार (CBSE NOTES)

द्रव्य का परमाण्विक आधार (अन्वेषण)

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Chapter ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग (CBSE NOTES)

ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग (अन्वेषण)

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Chapter जनन: जीवन की निरंतरता (CBSE NOTES)

जनन: जीवन की निरंतरता (अन्वेषण)

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Chapter जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण (CBSE NOTES)

जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण (अन्वेषण)

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Chapter पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन (CBSE NOTES)

पृथ्वी एक तंत्र: ऊर्जा, द्रव्य और जीवन (अन्वेषण)

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Prepare with Confidence

Success in examinations depends on regular practice, conceptual understanding, and effective revision. Our Class 9 CBSE Notes are designed to help students study smarter instead of studying longer. By revising chapter-wise notes regularly, learners can improve their understanding, remember important concepts for a longer period, and write better answers during examinations.

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Benefits of Studying with Our CBSE Notes

  • Chapter-wise Coverage: Every chapter is explained in a structured and easy-to-follow format.
  • Latest CBSE Syllabus: Notes are prepared according to the latest CBSE curriculum and NCERT guidelines.
  • Quick Revision: Revise important concepts, formulas, definitions, and key points in less time.
  • Simple Language: Difficult topics are explained in clear and student-friendly language for better understanding.
  • Concept-Based Learning: Focus on understanding concepts instead of memorizing answers.
  • Exam-Oriented Preparation: Helps students prepare effectively for class tests, unit tests, half-yearly, annual, and board examinations.
  • Subject-wise Organization: Easily access notes for Mathematics, Science, English, Hindi, Social Science, Physics, Chemistry, Biology, Economics, and more.
  • Time-Saving Study Material: Well-organized notes reduce study time and improve learning efficiency.
  • Improves Answer Writing: Learn important points and present answers in a better and more organized manner.
  • Boosts Confidence: Regular revision strengthens concepts and increases confidence before examinations.
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