Chapter 7. समकालीन विश्व में सुरक्षा - Class 12 Political Science-I Hindi CBSE Notes

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Chapter 7. समकालीन विश्व में सुरक्षा - Class 12 Political Science-I Hindi CBSE Notes

Chapter 7. समकालीन विश्व में सुरक्षा

Class 12 Political Science-I Hindi Updated : 14 March 2026

सुरक्षा : अवधारणा और परम्परागत दृष्टिकोण

सुरक्षा का अर्थ

सुरक्षा का सामान्य अर्थ है किसी भी प्रकार के खतरे, हिंसा या असुरक्षा से मुक्ति। यह तभी महत्वपूर्ण मानी जाती है जब व्यक्ति, समाज या राष्ट्र के मूलभूत मूल्य—जैसे स्वतंत्रता, संप्रभुता और जीवन का संरक्षण—खतरे में हों।

सुरक्षा की परंपरागत धारणाएँ

बाहरी सुरक्षा (External Security)

परंपरागत दृष्टिकोण में सुरक्षा मुख्यतः राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी होती है। इसमें सबसे बड़ा खतरा सैन्य आक्रमण माना जाता है, क्योंकि इससे देश की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता को प्रत्यक्ष खतरा होता है।

आंतरिक सुरक्षा (Internal Security)

आंतरिक सुरक्षा से आशय देश के भीतर उत्पन्न खतरों से है—जैसे सामाजिक संघर्ष, विद्रोह, कमज़ोर कानून-व्यवस्था या शासन के प्रति असंतोष। यह देश की आंतरिक शांति और कानून-व्यवस्था पर निर्भर करती है।

युद्ध की स्थिति में सरकार के विकल्प

  • आत्मसमर्पण — प्रत्यक्ष रूप से युद्ध समाप्त करने का सबसे निचला विकल्प।
  • समझौता/सहमति — प्रतिद्वंदी की शर्तें मान लेना या उसे रोकने के लिए इतना प्रतिकार दिखाना कि वह हमला टाल दे।
  • प्रतिरोध और पराजय — आक्रामक पक्ष से लड़ा जाए और उसे पराजित किया जाए।

अपरोध और रक्षा

अपरोध (Deterrence) का उद्देश्य युद्ध की संभावना को ही रोकना है—यानी हमलावर को इतना जोखिम महसूस कराना कि वह हमला न करे। रक्षा (Defence) का उद्देश्य है यदि संघर्ष हो जाए तो उसे सीमित कर के समाप्त करना।

परंपरागत सुरक्षा नीति के तत्व

शक्ति-संतुलन (Balance of Power)

देश अपनी रक्षा योग्य स्थिति बनाए रखने के लिए सैन्य, आर्थिक और तकनीकी ताकत बढ़ाते हैं तथा रणनीतिक फैसले लेते हैं।

गठबंधन (Alliances)

कई देश मिलकर ऐसे गठबंधन बनाते हैं जो हमलों को रोकने या सामूहिक रक्षा के लिए काम करते हैं। ये प्रायः औपचारिक संधियों पर आधारित होते हैं और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप समय के साथ बदल सकते हैं।

नव स्वतंत्र देशों के सामने चुनौतियाँ

विशेषकर एशिया और अफ्रीका के नव स्वतंत्र देशों को यूरोपीय देशों की तुलना में अलग प्रकार की चुनौतियाँ मिलीं:

  • पड़ोसी देशों से सैन्य हमले का डर
  • अंदरूनी विद्रोह और राजनीतिक अस्थिरता

युद्ध नीति — न्याय-युद्ध की परंपरा

  • युद्ध केवल आत्मरक्षा या मानवता की सुरक्षा (जैसे जनसंहार रोकना) के उद्देश्य से ही किया जाना चाहिए।
  • हथियारों और बल का प्रयोग सीमित होना चाहिए; निहत्थे या आत्मसमर्पण कर चुके व्यक्तियों को लक्षित नहीं करना चाहिए।
  • बल का प्रयोग उतना ही कितना आवश्यक हो—अनावश्यक हिंसा से बचना चाहिए।

शीतयुद्ध और तीसरी दुनिया में संघर्ष

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जो संघर्ष हुए उनमें से कई शीतयुद्ध की प्रतिद्वंद्विता के चलते हुए, विशेष रूप से तीसरी दुनिया के देशों में। इसमें उपनिवेशों के विघटन, गुटबंदी और बाहरी हस्तक्षेप शामिल थे।

निरस्त्रीकरण और अस्त्र-नियंत्रण

निरस्त्रीकरण का लक्ष्य खतरनाक हथियारों के निर्माण और भंडारण को रोकना है, जबकि अस्त्र-नियंत्रण में हथियारों के विकास और उपयोग पर नियम बनाये जाते हैं।

  • BWC (1972) — जैविक हथियारों पर प्रतिबंध।
  • CWC (1992) — रासायनिक हथियारों पर प्रतिबंध।
  • ABM (1972) — एंटी-बैलेस्टिक मिसाइलों पर सीमाएँ।
  • NPT (1968) — परमाणु अप्रसार संधि — 1967 तक परमाणु हथियार रख चुके देशों के लिए छूट, अन्य देशों के लिए रोक।

विश्वास बहाली के उपाय (Confidence-Building Measures)

देशों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए सैन्य जानकारी, योजना और तैनाती के बारे में पारदर्शिता बनाए रखी जाती है ताकि औचक हमले की आशंका घटे और गलतफहमियाँ कम हों।

अतिरिक्त वर्तमान और प्रासंगिक बिंदु

  • साइबर सुरक्षा — आधुनिक दौर में साइबर हमले राष्ट्रीय और व्यावसायिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। यह नेटवर्क, बुनियादी ढांचे और संवेदनशील जानकारियों को निशाना बनाते हैं।
  • मानव सुरक्षा (Human Security) — केवल सैन्य सुरक्षा नहीं, बल्कि भोजन, स्वास्थ्य, आवास और शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकताएँ भी सुरक्षा की परिभाषा में आती हैं।
  • आर्थिक सुरक्षा — आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा-आपूर्ति में बाधा या आर्थिक दबाव भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा — जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएँ और संसाधन-संकट भी दीर्घकालिक सुरक्षा चुनौतियाँ पैदा करते हैं।

परीक्षा-प्रासंगिक (Important Points for Exams)

  • सुरक्षा का अर्थ — जीवन और मूल्यों की रक्षा।
  • बाहरी और आंतरिक सुरक्षा में अंतर स्पष्ट करें।
  • अपरोध और रक्षा के उद्देश्य व अंतरों को समझें।
  • NPT, BWC, CWC जैसे प्रमुख संधियों के उद्देश्यों का संक्षेप में ज्ञान रखें।
  • आधुनिक सुरक्षा में साइबर, मानव और पर्यावरणीय आयामों का उल्लेख करें।

नोट: यह लेख NCERT के विचारों पर आधारित है परंतु भाषा और प्रस्तुति पूरी तरह से परिवर्तित और विस्तारित की गयी है ताकि यह आपके स्वयं के स्वरूप का, उपयोगी और सुरक्षित  बने। धन्यवाद !! सीबीएसई स्टडी Updated On: 03-Oct-2025

Chapter 7. समकालीन विश्व में सुरक्षा

Class 12 Political Science-I Hindi Updated : 14 March 2026

सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा

सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा केवल सैन्य खतरों तक सीमित नहीं है। इसमें वे सभी संभावित खतरे शामिल होते हैं जो मानवीय अस्तित्व और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।

सुरक्षा के तीन मुख्य तत्व

  • किन चीजों की सुरक्षा: व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और वैश्विक मानवता।
  • किन खतरों से सुरक्षा: युद्ध, आतंकवाद, महामारी, प्राकृतिक आपदा, आर्थिक संकट आदि।
  • सुरक्षा के तरीके: सहयोग, नीतियाँ, अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और मानवीय पहल।

मानवता की सुरक्षा या विश्व-रक्षा

अपारंपरिक दृष्टिकोण में सुरक्षा केवल राज्यों की नहीं, बल्कि व्यक्तियों और समुदायों की भी मानी जाती है। इसी कारण इसे मानवता की सुरक्षा या विश्व-रक्षा कहा जाता है।

मानवता की रक्षा का महत्व

  • राज्य की सुरक्षा से अधिक प्राथमिकता जनता की सुरक्षा को दी जाती है।
  • सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित नागरिक नहीं होता।
  • पिछले सौ वर्षों में अपनी ही सरकारों द्वारा मारे गए नागरिकों की संख्या विदेशी हमलों से ज्यादा रही है।
  • मुख्य लक्ष्य है व्यक्तियों की रक्षा
  • मुख्य जोर "अभाव से मुक्ति" और "भय से मुक्ति" पर है।

संयुक्त राष्ट्र का दृष्टिकोण

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान के अनुसार: “व्यक्तियों और समुदायों को अंदरूनी खून-खराबे से बचाना मानवता की सुरक्षा का मूल आधार है।”

मानवता की सुरक्षा का व्यापक दृष्टिकोण

  • खतरों की सूची में अकाल, महामारी और प्राकृतिक आपदाएँ भी शामिल हैं।
  • युद्ध और आतंकवाद से ज्यादा लोग महामारियों और आपदाओं से प्रभावित होते हैं।
  • आर्थिक सुरक्षा और मानवीय गरिमा भी इस परिभाषा का हिस्सा हैं।

विश्वव्यापी खतरे

  • वैश्विक तापमान वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग)
  • अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद
  • महामारियाँ — जैसे एड्स, बर्ड फ्लू, SARS

अपारंपरिक सुरक्षा के दो पक्ष

  • मानवता की सुरक्षा
  • विश्व सुरक्षा

अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद

आतंकवाद का आशय जान-बूझकर नागरिकों को निशाना बनाकर राजनीतिक बदलाव लाना है। अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद कई देशों में फैला होता है और वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा है।

  • नागरिकों को आतंकित करना और राजनीतिक दबाव बनाना।
  • कई देशों में फैले नेटवर्क और फंडिंग।
  • उदाहरण: विमान अपहरण, भीड़भाड़ वाली जगहों पर बम धमाके।
  • 11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमला इसका प्रमुख उदाहरण है।

मानवाधिकार की श्रेणियाँ

  • राजनीतिक अधिकार — अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता।
  • आर्थिक और सामाजिक अधिकार।
  • उपनिवेशित जनता या जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकार।

मानवाधिकारों पर असहमति के कारण

  • कौन-सी श्रेणियों को सार्वभौमिक मानवाधिकार माना जाए?
  • उल्लंघन होने पर अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी की भूमिका क्या हो?

आंतरिक रूप से विस्थापित जन

वे लोग जो हिंसा या संघर्ष के कारण अपने घर छोड़ देते हैं लेकिन देश की सीमा के भीतर रहते हैं, उन्हें आंतरिक रूप से विस्थापित जन कहा जाता है। उदाहरण: 1990 के दशक में कश्मीर घाटी छोड़ने वाले कश्मीरी पंडित।

महामारियाँ और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा

  • एचआईवी-एड्स, बर्ड फ्लू, SARS जैसी महामारियाँ प्रवास, व्यापार और पर्यटन के माध्यम से तेजी से फैलती हैं।
  • एबोला, हेपेटाइटिस-सी जैसी नई बीमारियों ने वैश्विक चिंता बढ़ाई।
  • टीबी, मलेरिया, डेंगू जैसी पुरानी बीमारियाँ अब औषधि-प्रतिरोधी रूप ले चुकी हैं।
  • पशु-जनित रोग (जैसे मैड-काऊ, बर्ड फ्लू) आर्थिक नुकसान का बड़ा कारण हैं।

अतिरिक्त प्रासंगिक बिंदु

  • साइबर सुरक्षा: डिजिटल युग में साइबर हमले भी मानव सुरक्षा का हिस्सा हैं।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा: जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों की कमी।
  • मानवीय गरिमा: केवल जीवन की रक्षा नहीं बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने की शर्तें।

परीक्षा-उपयोगी बिंदु

  • अपारंपरिक सुरक्षा में मानव और वैश्विक आयाम शामिल।
  • मानवता की सुरक्षा का मुख्य आधार — "अभाव से मुक्ति" और "भय से मुक्ति"।
  • अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद और महामारियाँ प्रमुख खतरे।
  • मानवाधिकारों की श्रेणियाँ और विवाद परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण।

नोट: यह लेख NCERT के विचारों पर आधारित है परंतु भाषा और प्रस्तुति पूरी तरह से परिवर्तित और विस्तारित की गयी है ताकि यह आपके स्वयं के स्वरूप का, उपयोगी और सुरक्षित  बने। धन्यवाद !! सीबीएसई स्टडी Updated On: 03-Oct-2025

Chapter 7. समकालीन विश्व में सुरक्षा

Class 12 Political Science-I Hindi Updated : 14 March 2026

सहयोगमूलक सुरक्षा : 

सुरक्षा पर मंडराते अनेक अपारंपरिक ख़तरों से निपटने के लिए सैन्य- संघर्ष की नहीं बल्कि आपसी सहयोग की
जरुरत है। आतंकवाद से लड़ने अथवा मानवाधिकारों को बहाल करने में भले ही सैन्य-बल की कोई भूमिका हो लेकिन गरीबी मिटाने, तेल तथा बहुमूल्य धातुओं की आपूर्ति बढ़ाने, आप्रवासियों और शरणार्थियों की आवाजाही के प्रबंधन तथा महामारी के नियंत्रण में सैन्य-बल की बजाय देशों की आपसी सहयोग द्वारा निपटा जा सकता है | 

सहयोग मूलक व्यवस्था में विभिन्न तत्वों की भूमिका : 

(i) द्विपक्षीय (दो देशों वेफ बीच) सहयोग, क्षेत्रीय सहयोग, महादेशीय अथवा वैश्विक स्तर का सहयोग |

(ii) सहयोगमूलक सुरक्षा में विभिन्न देशों के अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय-राष्ट्रीय स्तर की अन्य संस्थाएँ जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन ;संयुक्त राष्ट्रसंघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष आदि) स्वयंसेवी संगठन (एमनेस्टी
इंटरनेशनल, रेड क्रॉस, निजी संगठन तथा दानदाता संस्थाएँ, चर्च और धर्मिक संगठन, मजदूर संगठन, सामाजिक और विकास संगठन) और

(iii) कुछ जानी-मानी हस्तियाँ जैसे नेल्सन मंडेला एवं मदर टेरेसा | 

(iv) अंतिम उपाय के रूप में बल प्रयोग ऐसा अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी के अनुमति से किया जा सकता है ! 

भारत के समक्ष खतरे : 

(i) पारंपरिक (सैन्य) 

(ii) अपारंपरिक (आतंरिक) 

भारत के सुरक्षा निति के घटक : 

भारत की सुरक्षा-नीति के चार बड़े घटक हैं और अलग-अलग वक्त में इन्हीं घटकों के हेर-फेर से सुरक्षा की रणनीति बनायी गई है।

(i) सैन्य-क्षमता को मजबूत करना : सुरक्षा-नीति का पहला घटक रहा सैन्य-क्षमता को मजबूत करना क्योंकि भारत पर पड़ोसी देशों से हमले होते रहे हैं। पाकिस्तान ने 1947-48, 1965, 1971 तथा 1999 में और चीन ने सन् 1962 में भारत पर हमला किया। दक्षिण एशियाई इलाके में भारत के चारों तरफ परमाणु हथियारों से लैस देश हैं। ऐसे में भारत के परमाणु परीक्षण करने के फैसले (1998) को उचित ठहराते हुए भारतीय सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क दिया था। भारत ने सन् 1974 में पहला परमाणु परीक्षण किया था।

(ii) सुरक्षा हितों को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कायदों और संस्थाओं को मजबूत करना : भारत की सुरक्षा नीति का दूसरा घटक है अपने सुरक्षा हितों को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कायदों और संस्थाओं को मजबूत करना। भारत के पहले प्रधनमंत्राी जवाहरलाल नेहरू ने एशियाई एकता, अनौपनिवेशीकरण (Decolonisation) और निरस्त्रीकरण के प्रयासों की हिमायत की। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय
संघर्षों में संयुक्त राष्ट्रसंघ को अंतिम पंच मानने पर जोर दिया।

(iii) देश की अंदरूनी सुरक्षा-समस्याओं से निबटने की तैयारी : भारत की सुरक्षा रणनीति का तीसरा घटक है देश की अंदरूनी सुरक्षा-समस्याओं से निबटने की तैयारी। नगालैंड, मिजोरम, पंजाब और कश्मीर जैसे क्षेत्रों से कई उग्रवादी समूहों ने समय-समय पर इन प्रांतों को भारत से अलगाने की कोशिश की। भारत ने राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था का पालन किया है। यह विभिन्न समुदायों और जन-समूहों को अपनी शिकायतों को खुलकर रखने और सत्ता में भागीदारी करने का मौका देती है।

(iv) अर्थव्यवस्था को विकसित करना : भारत में अर्थव्यवस्था को इस तरह विकसित करने के प्रयास किए गए हैं कि बहुसंख्यक नागरिकों को गरीबी और अभाव से निजात मिले तथा नागरिकों के बीच आर्थिक असमानता ज्यादा न हो।

 

 

Chapter 7. समकालीन विश्व में सुरक्षा

Class 12 Political Science-I Hindi Updated : 24 March 2026

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