Chapter 13. महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आन्दोलन - Class 12 History Part-3 Hindi CBSE Notes

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Chapter 13. महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आन्दोलन - Class 12 History Part-3 Hindi CBSE Notes

Chapter 13. महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आन्दोलन

Class 12 History Part-3 Hindi Updated : 14 March 2026

महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन

1. महात्मा गाँधी का राष्ट्रीय आंदोलन में आगमन

महात्मा गाँधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। उन्होंने भारतीय राजनीति में सत्याग्रह, अहिंसा और जनसहभागिता को आंदोलन का आधार बनाया। गाँधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन को शहरी नेतृत्व से निकालकर गाँवों और आम जनता तक पहुँचाया।

2. गाँधीजी के आंदोलन की विचारधारा

गाँधीजी की राजनीति नैतिक मूल्यों पर आधारित थी। उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि समाज का नैतिक और सामाजिक पुनर्निर्माण भी था।

  • सत्य (Truth)
  • अहिंसा (Non-violence)
  • सत्याग्रह (आत्मबल से अन्याय का विरोध)
  • स्वराज (आत्मशासन)
  • स्वदेशी और आत्मनिर्भरता

3. प्रारंभिक सत्याग्रह आंदोलन

भारत में गाँधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत स्थानीय समस्याओं से की। इन आंदोलनों ने उन्हें जनता से सीधे जोड़ दिया।

(i) चंपारण सत्याग्रह (1917)

यह आंदोलन नील की जबरन खेती और तिनकठिया प्रथा के विरोध में किया गया। इससे किसानों को राहत मिली और गाँधीजी को राष्ट्रीय पहचान प्राप्त हुई।

(ii) अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918)

यह आंदोलन मजदूरों के वेतन और अधिकारों के समर्थन में किया गया। गाँधीजी ने यहाँ अहिंसक सत्याग्रह का प्रयोग किया।

(iii) खेड़ा सत्याग्रह (1918)

फसल खराब होने के बावजूद लगान वसूली के विरोध में यह आंदोलन किया गया। सरकार को अंततः किसानों को राहत देनी पड़ी।

4. असहयोग आंदोलन (1920–22)

जलियाँवाला बाग हत्याकांड और खिलाफत आंदोलन के बाद गाँधीजी ने असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया। यह आंदोलन पहली बार व्यापक जन आंदोलन बना।

  • सरकारी पदों और उपाधियों का त्याग
  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार
  • खादी और चरखे का प्रचार
  • शिक्षण संस्थानों और न्यायालयों का बहिष्कार

5. सविनय अवज्ञा आंदोलन और दांडी यात्रा (1930)

नमक कानून के विरोध में गाँधीजी ने दांडी यात्रा प्रारंभ की। नमक जैसी सामान्य वस्तु को आंदोलन का प्रतीक बनाकर उन्होंने औपनिवेशिक शासन को सीधी चुनौती दी।

  • नमक कानून का उल्लंघन
  • अन्यायपूर्ण कानूनों को तोड़ना
  • आंदोलन का गाँव-गाँव फैलना

यह आंदोलन ब्रिटिश सत्ता की नैतिक वैधता पर सीधा प्रहार था।

6. गाँधीजी और सामाजिक सुधार

गाँधीजी का आंदोलन केवल अंग्रेजों के विरुद्ध नहीं था, बल्कि सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध भी था।

  • छुआछूत का विरोध
  • हरिजन आंदोलन
  • महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
  • खादी, स्वदेशी और ग्राम स्वराज का प्रचार

उन्होंने सामाजिक एकता को स्वतंत्रता की अनिवार्य शर्त माना।

7. भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गाँधीजी ने “करो या मरो” का नारा देकर भारत छोड़ो आंदोलन प्रारंभ किया।

  • तत्काल स्वतंत्रता की माँग
  • व्यापक जनभागीदारी
  • नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद आंदोलन जारी

यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत सिद्ध हुआ।

8. गाँधीजी की राजनीति की विशेषताएँ

  • जनसाधारण की व्यापक भागीदारी
  • नैतिक दबाव पर आधारित राजनीति
  • अहिंसक संघर्ष की नीति
  • प्रतीकों का प्रभावी उपयोग (नमक, चरखा)

9. महात्मा गाँधी का राष्ट्रीय आंदोलन में महत्व

महात्मा गाँधी ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने आंदोलन को जन आंदोलन बनाया और किसानों, मजदूरों तथा महिलाओं को इसमें जोड़ा। राजनीति को नैतिकता से जोड़कर उन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष को व्यापक और प्रभावशाली बनाया।

गोलमेज सम्मेलन, महात्मा गाँधी की जेल यात्रा और नमक आंदोलन

भूमिका

महात्मा गाँधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन ने एक नया रूप ग्रहण किया। गाँधीजी ने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह को आंदोलन का आधार बनाया। नमक आंदोलन, गाँधीजी की जेल यात्राएँ और गोलमेज सम्मेलन स्वतंत्रता संघर्ष के महत्वपूर्ण चरण थे।

नमक आंदोलन (1930)

नमक आंदोलन ब्रिटिश सरकार के नमक कानून के विरोध में शुरू किया गया। नमक जीवन की आवश्यक वस्तु थी, फिर भी उस पर कर लगाया गया था, जिसका सबसे अधिक बोझ गरीब जनता पर पड़ता था। गाँधीजी ने नमक को आंदोलन का प्रतीक बनाकर पूरे देश को संघर्ष से जोड़ा।

दांडी यात्रा

12 मार्च 1930 को महात्मा गाँधी ने साबरमती आश्रम से दांडी की यात्रा प्रारंभ की। लगभग 240 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद 6 अप्रैल 1930 को उन्होंने समुद्र तट पर नमक उठाकर कानून तोड़ा। इससे सविनय अवज्ञा आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला।

नमक आंदोलन का प्रभाव

देशभर में नमक कानून तोड़ा गया। महिलाओं, किसानों और मजदूरों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। हजारों लोग गिरफ्तार किए गए। इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की नैतिक वैधता को गंभीर चुनौती दी।

महात्मा गाँधी की जेल यात्रा

महात्मा गाँधी ने जब-जब अन्यायपूर्ण ब्रिटिश कानूनों का अहिंसक उल्लंघन किया, उन्हें जेल भेजा गया। गाँधीजी की जेल यात्राएँ आंदोलन को कमजोर करने के बजाय और अधिक सशक्त बनाती रहीं।

प्रमुख जेल यात्राएँ

1922 में असहयोग आंदोलन के बाद गाँधीजी को जेल भेजा गया। 1930 में नमक आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया। 1932 में गोलमेज सम्मेलन की असफलता के बाद पुनः जेल हुई। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय भी गाँधीजी जेल में रहे।

जेल यात्रा का महत्व

गाँधीजी की गिरफ्तारी से जनता में रोष बढ़ा। लोगों में त्याग और संघर्ष की भावना प्रबल हुई। जेल भी गाँधीजी के लिए संघर्ष और आत्मबल का केंद्र बन गई।

गोलमेज सम्मेलन

ब्रिटिश सरकार ने भारत के संवैधानिक भविष्य पर चर्चा के लिए 1930 से 1932 के बीच लंदन में तीन गोलमेज सम्मेलन आयोजित किए। इन सम्मेलनों का उद्देश्य भारत में संवैधानिक सुधारों पर विचार करना था।

प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930)

पहले गोलमेज सम्मेलन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भाग नहीं लिया। उस समय कांग्रेस सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय थी। कांग्रेस की अनुपस्थिति के कारण यह सम्मेलन प्रभावहीन रहा।

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931)

गाँधी-इरविन समझौते के बाद महात्मा गाँधी कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में शामिल हुए। गाँधीजी ने कांग्रेस को भारत का प्रतिनिधि बताया और पूर्ण स्वराज की माँग रखी। लेकिन अल्पसंख्यक प्रश्न और ब्रिटिश नीति के कारण यह सम्मेलन असफल रहा।

तृतीय गोलमेज सम्मेलन (1932)

तृतीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया और महात्मा गाँधी उस समय जेल में थे। इसी सम्मेलन के आधार पर बाद में 1935 का भारत शासन अधिनियम बनाया गया।

समग्र मूल्यांकन

नमक आंदोलन ने राष्ट्रीय आंदोलन को जनआंदोलन का रूप दिया। महात्मा गाँधी की जेल यात्राओं ने संघर्ष की भावना को और प्रबल किया। गोलमेज सम्मेलनों की असफलता से यह स्पष्ट हो गया कि ब्रिटिश सरकार भारत को वास्तविक स्वतंत्रता देने के लिए तैयार नहीं थी। इन सभी घटनाओं ने स्वतंत्रता संघर्ष को निर्णायक दिशा प्रदान की।

Chapter 13. महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आन्दोलन

Class 12 History Part-3 Hindi Updated : 14 March 2026

लघु उत्तरीय प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. महात्मा गाँधी भारत कब लौटे?

महात्मा गाँधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे।

प्रश्न 2. गाँधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन को किस प्रकार बदला?

उन्होंने आंदोलन को शहरी नेतृत्व से निकालकर गाँवों और आम जनता तक पहुँचाया।

प्रश्न 3. गाँधीजी के आंदोलन की मुख्य विचारधारा क्या थी?

सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, स्वराज और स्वदेशी।

प्रश्न 4. चंपारण सत्याग्रह क्यों किया गया?

नील की जबरन खेती और तिनकठिया प्रथा के विरोध में।

प्रश्न 5. अहमदाबाद मिल हड़ताल किससे संबंधित थी?

मजदूरों के वेतन और अधिकारों से संबंधित थी।

प्रश्न 6. खेड़ा सत्याग्रह का उद्देश्य क्या था?

फसल खराब होने पर भी लगान वसूली के विरोध में।

प्रश्न 7. असहयोग आंदोलन कब शुरू हुआ?

1920 में।

प्रश्न 8. असहयोग आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?

ब्रिटिश शासन से सहयोग समाप्त करना।

प्रश्न 9. दांडी यात्रा क्यों की गई?

नमक कानून के विरोध में।

प्रश्न 10. भारत छोड़ो आंदोलन कब प्रारंभ हुआ?

1942 में।

प्रश्न 11. भारत छोड़ो आंदोलन का नारा क्या था?

“करो या मरो”।

प्रश्न 12. गाँधीजी ने सामाजिक सुधारों पर क्यों जोर दिया?

क्योंकि वे स्वतंत्रता को सामाजिक एकता से जोड़ते थे।

प्रश्न 13. गाँधीजी की राजनीति की मुख्य विशेषता क्या थी?

अहिंसक और नैतिक दबाव की राजनीति।

प्रश्न 14. गाँधीजी ने किन वर्गों को आंदोलन से जोड़ा?

किसानों, मजदूरों और महिलाओं को।

प्रश्न 15. महात्मा गाँधी का राष्ट्रीय आंदोलन में क्या महत्व है?

उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन को जन आंदोलन बनाया और उसे नई दिशा दी।

Chapter 13. महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आन्दोलन

Class 12 History Part-3 Hindi Updated : 14 March 2026

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. महात्मा गाँधी का राष्ट्रीय आंदोलन में आगमन और उसकी महत्ता स्पष्ट कीजिए।

महात्मा गाँधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। भारत आने के बाद उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी। उन्होंने सत्याग्रह, अहिंसा और जनसहभागिता को राष्ट्रीय आंदोलन का आधार बनाया। गाँधीजी से पहले राष्ट्रीय आंदोलन मुख्यतः शिक्षित और शहरी वर्ग तक सीमित था, लेकिन गाँधीजी ने इसे गाँवों, किसानों, मजदूरों और आम जनता तक पहुँचाया। इससे राष्ट्रीय आंदोलन एक व्यापक जन आंदोलन बन गया।

प्रश्न 2. गाँधीजी के आंदोलन की विचारधारा का वर्णन कीजिए।

गाँधीजी की राजनीति नैतिक मूल्यों पर आधारित थी। उनका विश्वास था कि सच्चा राजनीतिक संघर्ष नैतिकता और आत्मबल पर टिका होना चाहिए। सत्य और अहिंसा उनके आंदोलन की आधारशिला थे। सत्याग्रह के माध्यम से उन्होंने अन्याय का अहिंसक विरोध किया। गाँधीजी स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के समर्थक थे। उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करना नहीं, बल्कि भारतीय समाज का नैतिक और सामाजिक पुनर्निर्माण करना भी था।

प्रश्न 3. प्रारंभिक सत्याग्रह आंदोलनों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

भारत में गाँधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत स्थानीय समस्याओं से की। 1917 का चंपारण सत्याग्रह नील की जबरन खेती और तिनकठिया प्रथा के विरोध में था, जिससे किसानों को राहत मिली और गाँधीजी को राष्ट्रीय पहचान प्राप्त हुई। 1918 में अहमदाबाद मिल हड़ताल मजदूरों के वेतन और अधिकारों के लिए की गई। इसी वर्ष खेड़ा सत्याग्रह में फसल खराब होने के बावजूद लगान वसूली का विरोध किया गया। इन आंदोलनों ने जनता में गाँधीजी के प्रति विश्वास को मजबूत किया।

प्रश्न 4. असहयोग आंदोलन (1920–22) की विशेषताएँ और महत्व लिखिए।

जलियाँवाला बाग हत्याकांड और खिलाफत आंदोलन के बाद गाँधीजी ने 1920 में असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया। इस आंदोलन के अंतर्गत सरकारी पदों और उपाधियों का त्याग, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, खादी और चरखे का प्रचार तथा शिक्षण संस्थानों और न्यायालयों का बहिष्कार किया गया। यह पहला अवसर था जब राष्ट्रीय आंदोलन में किसानों, मजदूरों और छात्रों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की नींव को हिला दिया।

प्रश्न 5. सविनय अवज्ञा आंदोलन और दांडी यात्रा का महत्व स्पष्ट कीजिए।

1930 में गाँधीजी ने नमक कानून के विरोध में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया। दांडी यात्रा के माध्यम से उन्होंने नमक जैसी साधारण वस्तु को राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक बना दिया। 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी तक की गई यात्रा और 6 अप्रैल को नमक कानून का उल्लंघन ब्रिटिश शासन के लिए एक बड़ी चुनौती था। इस आंदोलन ने गाँव-गाँव तक स्वतंत्रता की चेतना फैलाई और औपनिवेशिक सत्ता की नैतिक वैधता पर सीधा प्रहार किया।

प्रश्न 6. गाँधीजी और सामाजिक सुधारों पर प्रकाश डालिए।

गाँधीजी का आंदोलन केवल अंग्रेजों के विरुद्ध नहीं था, बल्कि सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध भी था। उन्होंने छुआछूत का विरोध किया और हरिजन आंदोलन चलाया। महिलाओं को राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल किया। खादी, स्वदेशी और ग्राम स्वराज के माध्यम से उन्होंने आत्मनिर्भर और समतामूलक समाज की कल्पना की। गाँधीजी मानते थे कि सामाजिक एकता के बिना स्वतंत्रता अधूरी है।

प्रश्न 7. भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और उसके महत्व का वर्णन कीजिए।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942 में गाँधीजी ने भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया। उन्होंने “करो या मरो” का नारा दिया और तत्काल स्वतंत्रता की माँग की। इस आंदोलन में व्यापक जनभागीदारी देखने को मिली। यद्यपि गाँधीजी और अन्य नेता गिरफ्तार कर लिए गए, फिर भी आंदोलन पूरे देश में फैल गया। इस आंदोलन ने स्पष्ट कर दिया कि ब्रिटिश शासन अब भारत में अधिक समय तक नहीं टिक सकता।

प्रश्न 8. महात्मा गाँधी का राष्ट्रीय आंदोलन में महत्व स्पष्ट कीजिए।

महात्मा गाँधी ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को जन आंदोलन में परिवर्तित किया। उन्होंने किसानों, मजदूरों, महिलाओं और दलितों को आंदोलन से जोड़ा। राजनीति को नैतिकता से जोड़कर उन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष को नई दिशा दी। गाँधीजी के नेतृत्व में राष्ट्रीय आंदोलन न केवल स्वतंत्रता प्राप्ति का साधन बना, बल्कि भारतीय समाज के व्यापक परिवर्तन का माध्यम भी बना।

Chapter 13. महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आन्दोलन

Class 12 History Part-3 Hindi Updated : 22 March 2026

1. महात्मा गाँधी भारत कब लौटे?
A. 1905   B. 1910   C. 1915   D. 1920

2. महात्मा गाँधी भारत लौटने से पहले कहाँ कार्यरत थे?
A. इंग्लैंड   B. दक्षिण अफ्रीका   C. अमेरिका   D. जापान

3. गाँधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन का आधार किसे बनाया?
A. हिंसा   B. क्रांति   C. सत्याग्रह और अहिंसा   D. आतंक

4. गाँधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन को किन तक पहुँचाया?
A. केवल नेताओं तक   B. सैनिकों तक   C. गाँवों और आम जनता तक   D. राजाओं तक

5. चंपारण सत्याग्रह किस वर्ष हुआ?
A. 1915   B. 1916   C. 1917   D. 1918

6. चंपारण सत्याग्रह का संबंध किससे था?
A. कपास   B. नील की खेती   C. चाय बागान   D. नमक

7. अहमदाबाद मिल हड़ताल किस वर्ग से संबंधित थी?
A. किसान   B. व्यापारी   C. मजदूर   D. विद्यार्थी

8. खेड़ा सत्याग्रह का मुख्य कारण क्या था?
A. अधिक लगान   B. अकाल के बावजूद लगान वसूली   C. नमक कर   D. विदेशी वस्तुएँ

9. असहयोग आंदोलन कब प्रारंभ हुआ?
A. 1918   B. 1919   C. 1920   D. 1922

10. असहयोग आंदोलन का एक प्रमुख कार्यक्रम क्या था?
A. हिंसक संघर्ष   B. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार   C. कर भुगतान   D. सैनिक भर्ती

11. सविनय अवज्ञा आंदोलन किस वर्ष शुरू हुआ?
A. 1927   B. 1928   C. 1930   D. 1932

12. दांडी यात्रा किस कानून के विरोध में की गई?
A. रौलट एक्ट   B. भूमि कर   C. नमक कानून   D. प्रेस कानून

13. दांडी यात्रा कहाँ से शुरू हुई?
A. वर्धा   B. साबरमती आश्रम   C. अहमदाबाद   D. बंबई

14. दांडी यात्रा का समापन कहाँ हुआ?
A. सूरत   B. कराची   C. दांडी   D. गोवा

15. भारत छोड़ो आंदोलन कब प्रारंभ हुआ?
A. 1939   B. 1940   C. 1942   D. 1945

16. भारत छोड़ो आंदोलन का नारा क्या था?
A. इंकलाब जिंदाबाद   B. जय हिंद   C. करो या मरो   D. वंदे मातरम्

17. गाँधीजी के अनुसार स्वतंत्रता के साथ क्या आवश्यक था?
A. केवल सत्ता परिवर्तन   B. सामाजिक और नैतिक सुधार   C. सैन्य शक्ति   D. विदेशी सहायता

18. गाँधीजी ने किन वस्तुओं को स्वदेशी का प्रतीक बनाया?
A. मशीन   B. चरखा और खादी   C. हथियार   D. रेल

19. गाँधीजी की राजनीति की प्रमुख विशेषता क्या थी?
A. हिंसक संघर्ष   B. नैतिक दबाव और अहिंसा   C. गुप्त संगठन   D. सैनिक शक्ति

20. महात्मा गाँधी का राष्ट्रीय आंदोलन में सबसे बड़ा योगदान क्या था?
A. केवल नेतृत्व   B. आंदोलन को जन आंदोलन बनाना   C. विदेशी समर्थन   D. सैनिक संगठन

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