Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत - Class 11 Business Study Hindi CBSE Notes
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Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत - Class 11 Business Study Hindi CBSE Notes
Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत
अध्याय 8 व्यवसायिक वित् के स्रोत
व्यवसायिक वित
प्रत्येक व्यवसाय में व्यवसाय को चलाने के लिए पैसे या वित् की जरूरत होती है | हर व्यवसाय की नीव और रक्षक उसका वित् होता है क्योंकि व्यवसाय में हर काम को करने के लिए इसकी जरूरत होती है यह व्यवसाय की पहली आवश्यकता है |
व्यवसाय चलाने के लिए तथा उसके विभिन्न कार्यो के लिए वित् की आवश्यकता को ही व्यवसायिक वित् कहतें है |
व्यवसायिक वित् की आवश्यकता
1. स्थायी सम्पतियो(fixed assets) को खरीदने के लिए व्यवसायिक वित् की आवश्यकता होती है | जैसे - भूमि, प्लांट, मशीनरी आदि |
2. दैनिक कार्यो और उससे सम्बंधित खर्चो के के लिए भी वित् की आवश्यकता होती है | जैसे - वेतन, मजदूरी, किराया आदि |
3. व्यवसाय को बढाने और उसके विकास के लिए व्यवसायिक वित् की आवश्यकता होती है |
4. आधुनिक तकनीके तथा अच्छी प्रद्योगिकी अपनाने के लिए व्यवसायिक वित् की आवश्यकता होती है |
5. व्यवसाय में यह जरूरी है की वह अपने उत्पादों में परिवर्तन करता रहे | उत्पादों में परिवर्तन तथा उत्पादों के विविधिकरण के लिए व्यवसायिक वित् की आवश्यकता होती है |
व्यवसायिक वित् की आवश्यकताओं का वर्गीकरण
(क) स्थायी पूंजी की आवश्यकता : किसी भी नए व्यवसाय को शुरू करने के लिए स्थायी सम्पतियो(fixed assets) की जरूरत होती है जिसे खरीदने के लिए व्यवसायिक वित् की आवश्यकता होती है, इसे व्यवसाय की स्थायी पूंजी की आवश्यकता कहते है | जैसे - भूमि, प्लांट, मशीनरी आदि |
(ख) कार्यशील पूंजी की आवश्यकता : व्यवसाय में स्थायी सम्पतियो की जरूरत के अलावा भी कई प्रकार की जरूरते तथा खर्चे होते है | दैनिक कार्यो और उससे सम्बंधित खर्चो के के लिए भी वित् की आवश्यकता होती है, इसे व्यवसाय की कार्यशील पूंजी की आवश्यकता कहते है | जैसे - वेतन, मजदूरी, किराया आदि |
व्यवसायिक वित् के स्रोतो के प्रकार
संचित आय(retained earnings) : कुल अर्जित लाभ में से देनदारो को देने के बाद जो आय या income बच जाती है उसे शुद्ध आय कहते है | शुद्ध आय का वह भाग जिसे भविष्य में उपयोग या दुबारा विनियोग(re-invest) के लिए व्यवसाय जमा कर लेती है उसे संचित आय कहते है |
व्यापारिक साख(trade credit): व्यापारिक साख वह उधार सुविधा है जिसे एक व्यापारी दूसरे व्यापारी को देता है | व्यवसायिक वित् के इस स्रोत में एक व्यापारी दूसरे व्यापारी की साख(Goodwill) तथा उनके बीच संबंधो के आधार पर वस्तुओं तथा सेवाओं को उधार खरीदनें की सुविधा प्रदान करता है |
लीज वितियन(Lease financing): लीज एक ऐसा अनुबंध होता है जिसमें एक पक्ष दूसरे पक्ष को अपनी सम्पतियो को प्रयोग करने का अधिकार देता है जिसके बदले में वह वार्षिक या मासिक किराया लेता है | यह अपनी सम्पति को निश्चित समय के लिए किराये पर देने जैसा है |
सार्वजानिक जमा(Public diposits) : सार्वजनिक जमा कोष जमा करने की ऐसी विधि है जिसमें कंपनिया या व्यवसायिक संगठन द्वारा अपने व्यवसाय को चलाने के लिए सीधे जनता से धन जमा किया जाता है |
वाणिज्यिक पत्र(Commerchial paper) : वाणिज्यिक पत्र ऐसे प्रतिज्ञा पत्र(promissory note)होते है जिसे एक कंपनी कोष जुटाने के लिए कंपनी के नाम पर बैंको को, दूसरी कंपनी को या बीमा कंपनी को जारी करती है |
अंशो का निर्गमन(Issue of shares) : एक कंपनी की पूंजी छोटे - छोटे भागो में बंटी होती है जिसे अंश कहतें है | अंशो का निर्गमन व्यवसायिक वित् के स्रोतों का ही एक प्रकार है जिसमे कंपनी अंशो को अंशो के कीमत के अनुसार जनता को बेचती है और बेच कर कोषों का प्रबंध करती है |
ऋण पत्र(Debentures) : ऋण पत्र व्यवसायिक वित् के स्रोतों का ही एक प्रकार है | ऋण पत्र ऐसे पत्र होते है जिसमे ऋणदाता कंपनी को निश्चित ब्याज दरो पर ऋण देते है जिसे कंपनी एक निश्चित अवधि के बाद लौटाने का वचन देती है | कंपनी को लाभ हो या हानि कंपनी को ऋणदाताओं को ब्याज देना ही होता है |
वाणिज्यिक बैंक(Commercial bank) : वाणिज्यिक बैंक व्यवसायिक वित् के स्रोत के रूप में प्रसिद्ध है | वाणिज्यिक बैंक कंपनी को निश्चित ब्याज दरो पर ऋण मुहैया कराती है | बैंक कंपनी को अल्प अवधि, मध्य अवधि तथा दीर्घ अवधि के लिए ऋण प्रदान करती है |
वितीय संस्थान(Financial institutions) : वितीय संस्थान सरकार द्वारा स्थापित ऐसी संस्थाएं होती है जिनकी स्थापना व्यवसायिक संगठनो के विकास के लिए किया गया है| ये संस्थाए देशभर में व्यवसायिक संगठनों को मध्य अवधि और दीर्घ अवधि के लिए वित् उपलब्ध कराती है |
Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत
अध्याय 8 व्यवसायिक वित् के स्रोत
संचित आय
कुल अर्जित लाभ में से देनदारो को देने के बाद जो आय या income बच जाती है उसे शुद्ध आय कहते है | शुद्ध आय का वह भाग जिसे भविष्य में उपयोग या दुबारा विनियोग(re-invest) के लिए व्यवसाय जमा कर लेती है उसे संचित आय कहते है | इस कोष का प्रयोग कंपनी अपने व्यवसाय के विकास तथा विस्तार के लिए करती है | संचित आय व्यवसाय के लाभ पर निर्भर करता है |
संचित आय के गुण तथा इसके लाभ
1. यह वित् प्राप्त करने का सस्ता तथा आसान साधन है क्योंकि इसके लिए न तो कंपनी को ब्याज देना होता है और न ही सम्पति गिरवी रखनी पड़ती है |
2. संचित आय कंपनी के लाभ से निकाला जाता है जिस कारण कंपनी इस आय का कही भी प्रयोग कर सकती है |
3. संचित आय कंपनी के अन्दर से ही जुटाई जाती है इसलिए कंपनी बाजार के उतार - चढावो से सुरक्षित रहती है |
4. संचित आय के कारण कंपनी के विस्तार के लिए पूँजी की चिंता नहीं करनी पड़ती जिससे कंपनी के विस्तार और उसके विकास में आसानी होती है |
5. यह कंपनी की स्थाई पूँजी होती है |
6. इससे कंपनी के अंशो के मूल्य में वृद्धि होती है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जितनी कंपनी की संचित आय ज्यादा होगी उतनी ही बाजार में उसकी स्थति अच्छी होगी, जिससे अंशो के मूल्य में वृद्धि होगी |
संचित आय की सीमाएँ तथा इसकी हानियाँ
1. संचित आय कंपनी के लाभ का हिस्सा होता है, जिसके कारण अंशधारियो के लाभांश का भाग कम हो जाता है | यह अंशधारियो के असंतोष तथा मतभेद का कारण बन सकता है |
2. व्यवसाय में लाभ हो भी सकता है और नहीं भी इसलिए यह व्यवसायिक स्रोत का अनिश्चित स्रोत है |
3. कई कम्पनियाँ संचित आय को सही नहीं मानती क्योकि कंपनी ने संचित आय का क्या किया, कहाँ इसका प्रयोग किया इसका जवाब किसी को नहीं देना पड़ता इसलिए इसका दुरूपयोग संभव है |
4. संचित आय के कारण एक कंपनी काफी विस्तार कर सकती है तथा अधिक लाभ कम सकती है | यदि ये कंपनिया अत्यधिक लाभ कम लेती है तो बाजार पर इनके एकाधिकार का खतरा पैदा हो जाता है |
व्यापारिक साख
व्यापारिक साख वह उधार सुविधा है जिसे एक व्यापारी दूसरे व्यापारी को देता है | व्यवसायिक वित् के इस स्रोत में एक व्यापारी दूसरे व्यापारी की साख(Goodwill) तथा उनके बीच संबंधो के आधार पर वस्तुओं तथा सेवाओं को उधार खरीदनें की सुविधा प्रदान करता है | यह व्यवसाय का अल्पकालीन वितीय स्रोत होता है |
व्यापारिक साख के निर्धारक तत्व
(i) उधार माल खरीदने वाली कंपनी(क्रेता) की साख |
(ii) विक्रेता की वितीय स्थति, इसका अर्थ है की विक्रेता इस स्थति में है या नहीं कि वह उधार सुविधा दे सके |
(iii) क्रय की मात्रा, इसका अर्थ है की यदि क्रेता कम खरीद रहा है तो वह पैसे से ख़रीदे |
(iv) व्यापारिक साख इसपे भी निर्भर करता है की क्रेता ने अपना पिछला उधार कितना चुकाया है |
(v) क्रेता की स्थति, उधार सुविधा क्रेता की स्थति को भी ध्यान में रखकर दिया जाता है क्योंकि क्रेता की स्थति इतनी तो खराब नहीं है की वो पैसे लौटा ही न पाए|
व्यापारिक साख के गुण तथा लाभ
1. यह कोष जुटाने का आसान तथा सुविधाजनक स्रोत है |
2. क्रेता तथा विक्रेता के बीच सम्बन्ध अच्छे हो तो उधार तुरंत और आसानी से मिल जाता है |
3. व्यापारिक साख व्यवसायिक संगठन की बिक्री को बढाता है क्योंकि व्यापारिक साख कंपनी की साख को देखकर ही दिया जाता है | यदि किसी कंपनी ने व्यापारिक साख की उधार सुविधा ले रखी है तो इसका अर्थ है बाजार में उसकी साख अच्छी है, जिससे बिक्री बढ़ेगी |
4. व्यापारिक साख की उधार सुविधा प्राप्त करने के लिए अपनी सम्पतियो को गिरवी नहीं रखना पड़ता है |
व्यापारिक साख की हानियाँ तथा सीमाएँ
1. व्यापारिक साख के द्वारा सीमित कोष ही जुटाएँ जा सकते है |
2. कोई भी व्यवसाय इतनी आसानी से कोष मिलाने पर आपने व्यवसाय को बढाने की सोच सकता है जिससे उसका जोखिम बढ़ सकता है |
लीज वितीयन
लीज एक ऐसा अनुबंध होता है जिसमें एक पक्ष दूसरे पक्ष को अपनी सम्पतियो को प्रयोग करने का अधिकार देता है जिसके बदले में वह वार्षिक या मासिक किराया लेता है | यह अपनी सम्पति को निश्चित समय के लिए किराये पर देने जैसा है | इसका प्रयोग कंपनी अपने आधुनिकीकरण तथा विविधीकरण के लिए करती है |
पट्टाकार : सम्पति का मालिक पट्टाकार कहलाता है |
पट्टाधारक : वह व्यक्ति जो सम्पति किराये पर लेता है |
लीज वितीयन के गुण
1. इसके कारण पट्टाधारक को सम्पति कम निवेश पर मिल जाती है |
2. ज्यादा कागजी कार्यवाही की आवश्यकता नहीं होती है |
3. इसके कारण व्यवसायी को अन्य जरूरतों के लिए ऋण लेने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता |
लीज वितीयन की हानियाँ
1. हम सम्पति का प्रयोग लीज में लिखे शर्तो से हटकर नहीं कार सकते तथा उसमे कोई परिवर्तन नहीं कार सकते |
2. जिस सम्पति को किराये पर लिय गया है उसमे परिवर्तन न करने पर व्यवसाय प्रभावित हो सकता है |
Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत
अध्याय 8 व्यवसायिक वित् के स्रोत
सार्वजानिक जमा
सार्वजनिक जमा कोष जमा करने की ऐसी विधि है जिसमें कंपनिया या व्यवसायिक संगठन द्वारा अपने व्यवसाय को चलाने के लिए सीधे जनता से धन जमा किया जाता है |सार्वजानिक जमा में जनता को बैंक जमा से अधिक दरो पर ब्याज दिया |
सार्वजानिक जमा के लाभ
1. यह वित् प्राप्त करने का सबसे सरल रास्ता है क्योंकि इसमें ज्यादा कागजी कार्यवाही नहीं होती है |
2. इस स्रोत से वित् प्राप्त करने पर कंपनी को अपनी सम्पतिओं को गिरवी नहीं रखना पड़ता |
3. जमाकर्ताओं का कंपनी के कार्यो में कोई हस्तक्षेप नहीं होता इसलिए कंपनी अपना काम आसनी से कर सकती है |
सार्वजानिक जमा की हानियां
1. नई कंपनियों के लिए सार्वजानिक जमा से कोष जुटाना थोडा मुश्किल होता है |
2. यह वित् का स्थाई स्रोत नहीं है क्योंकि, यह हो सकता है की जब कंपनी को वित् की जरूरत हो तो कोई धन जमा ही न कराएँ तथा जब कंपनी की आर्थिक स्थति अच्छी न हो तो को भी धन जमा करवाने के लिए तैयार नहीं होता है |
3. इससे वित् जुटाना कठिन होता है | यदि जमा की राशि बड़ी हो तो और भी मुश्किल होती है क्योकि जमाकर्ताओं को धन जमा करने के बदले कुछ भी सम्पति गिरवी नहीं मिलती इसलिए उन्हें डर रहता है |
वाणिज्यिक पत्र
वाणिज्यिक पत्र ऐसे प्रतिज्ञा पत्र(promissory note)होते है जिसे एक कंपनी कोष जुटाने के लिए कंपनी के नाम पर बैंको को, दूसरी कंपनी को या बीमा कंपनी को जारी करती है | वाणिज्यिक पत्र का प्रयोग अल्प अवधि वित् के स्रोत के रूप में किया जाता है | इसे अच्छी साख वाली फार्म ही जारी करती है |
वाणिज्यिक पत्र के लाभ और उसके गुण
1. इसमे किसी भी प्रकार की शर्ते नहीं होती है |
2. वाणिज्यिक पत्र को बिना किसी जमानत के बेचा जाता है |
3. अन्य कोषों की तुलना में इससे अधिक कोष जुटाएँ जा सकते है |
4. यह बैंको से कोष जमा करने या ऋण लेने में लगने वाले खर्चे की तुलना में सस्ता होता है |
5. वाणिज्यिक पत्रों को आसानी से बेचा जा सकता है |
वाणिज्यिक पत्र की हानियाँ
1. वाणिज्यिक पत्र से केवल अच्छी साख वाली या वह कंपनी जिसकी वितीय स्थति अच्छी हो वही कोष जमा कर सकती है |
2. वाणिज्यिक पत्र से उतना ही कोष जुटाया जा सकता है जितना कोष देने वाली कंपनी के पास अतरिक्त धन या रोकड़ हो |
3. वाणिज्यिक पत्र की भुगतान तिथि यानि जिस दिन पैसा वापस करना है, निश्चित होती है | उसे बढाया नहीं जा सकता है चाहे कंपनी की आर्थिक स्थति ख़राब ही क्यों न हो |
ऋण पत्र
ऋण पत्र व्यवसायिक वित् के स्रोतों का ही एक प्रकार है | ऋण पत्र ऐसे पत्र होते है जिसमे ऋणदाता कंपनी को निश्चित ब्याज दरो पर ऋण देते है जिसे कंपनी एक निश्चित अवधि के बाद लौटाने का वचन देती है | कंपनी को लाभ हो या हानि कंपनी को ऋणदाताओं को ब्याज देना ही होता है | ऋण पत्र दीर्घ अवधि के कोषों के लिए होता है |
ऋण पत्रों को जारी करने के लिए आवश्यक करक
1. कंपनी के विकास का लेखा - जोखा |
2. कितना लाभ कमाती है |
3. उधार चुकाने की क्षमता |
4. कंपनी की साख |
5. पिछला हिसाब - किताब |
ऋण पत्रों के लाभ
1. ऋणपत्रधारियों का कंपनी के लाभ में कोई हिस्सा नहीं होता है |
2. ऋण पत्र जारी करना तब अच्छा होता है जब व्यवसाय की आर्थिक स्थति अच्छी हो |
3. ऋण देने वालो के लिए यह स्थाई आय का स्रोत होता है क्योकि कंपनी को लाभ हो या हानि ब्याज मिलता ही है |
4. ऋण पत्रों को अंशो की तुलना मं आसानी से बचा जा सकता है |
5. ऋणपत्रधारियों का कंपनी के कार्यो तथा निर्णयों में कोई हस्तक्षेप नहीं होता है |
6. ऋणपत्रों पर दिए जाने वाले ब्याज को लाभ में से काटकर बचे लाभ पर कंपनी आयकर देती है जिससे कंपनी को कर कम देना पड़ता है |
ऋण पत्रों की हानियाँ
1. कंपनी को लाभ हो या हानि कंपनी को ऋणदाताओं को ब्याज देना ही होता है |
2. अगर कंपनी मूल तथा ब्याज का भुगतान नहीं कर सकते तो ऋणपत्रधारी कंपनी पर कानूनी कार्यवाही कर सकती है |
3. ऋण पत्र से कोष जुटाने के लिए सम्पतियो को गिरवी रखना पड़ता है तथा इसके कारण कंपनी की साख भी प्रभावित होती है |
4. प्रत्येक कंपनी की ऋण लेने की निश्चित क्षमता होती है, इससे कम्पनी की ऋण लेने की क्षमता कम हो जाती है |
वाणिज्यिक बैंक
वाणिज्यिक बैंक व्यवसायिक वित् के स्रोत के रूप में प्रसिद्ध है | वाणिज्यिक बैंक कंपनी को निश्चित ब्याज दरो पर ऋण मुहैया कराती है | बैंक कंपनी को अल्प अवधि, मध्य अवधि तथा दीर्घ अवधि के लिए ऋण प्रदान करती है इसके अलावा यह बैंक और भी कई प्रकार की सुविधाए प्रदान करता है | ऋण लेने के लिए व्यवसायिक संगठनों को संपतियां गिरवी रखना पड़ता है |
वाणिज्यिक बैंको के लाभ
1. व्यवसाय में जब भी धन की जरूरत होती बैंक हमेशा समय पर ऋण देकर मदद करते है |
2. बैंको को जो भी व्यवसाय से सम्बंधित जानकारियां दी जाती है उसे गुप्त रखा जाता है | जिससे गोपनीयता बनी रहती है |
3. यह वित् का लचीला स्रोत है क्योकि उधार लिए गए धन को समय से पहले भी चुकाया जा सकता है या और ऋण लिया जा सकता है |
वाणिज्यिक बैंको की हानियाँ
1. ऋण आमतौर पर छोटी अवधि के लिए दिया जाता है न की लम्बी अवधि के लिए |
2. ऋण लेने के लिए व्यवसायिक संगठनों को संपतियां गिरवी रखना पड़ता है |
3. ऋण लेने के लिए काफी दौड़-भाग करना पड़ता है और ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया जटिल होती है क्योकि बैंक काफी जांच पड़ताल करते है |
4. कई प्रकार की प्रतिबंधित शर्तो का पालन करना पड़ता है |
Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत
अध्याय 8 व्यवसायिक वित् के स्रोत
अंशो का निर्गमन
एक कंपनी की पूंजी छोटे - छोटे भागो में बंटी होती है जिसे अंश कहतें है | अंशो का निर्गमन व्यवसायिक वित् के स्रोतों का ही एक प्रकार है जिसमे कंपनी अंशो को अंशो के कीमत के अनुसार जनता को बेचती है और बेच कर कोषों का प्रबंध करती है |
अंशो के प्रकार
(क) समता अंश -
Chapter 8. व्यावसायिक वित्त के स्रोत
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