3. धातु और अधातु - Class 10 Science Hindi CBSE Notes

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CBSE Notes for Class 10 – Chapter-wise Revision Notes

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3. धातु और अधातु - Class 10 Science Hindi CBSE Notes

3. धातु और अधातु

Class 10 Science Hindi Updated : 23 March 2026

धातु और अधातु:


धातु (Metals) : 

धातुओं के भौतिक गुण (Physical Properties of metals): 

(i)  धातु ठोस और चमकीले होते हैं |

(ii) ये ऊष्मा और विद्युत के सुचालक होते हैं |

(iii) धातुएँ तन्य होती हैं | 

(iv) धातुएँ अघातवर्ध्य होती है |

(v) धातुएँ ध्वानिक होती हैं | 

अघातवर्ध्यता (Meliability): कुछ धातुएँ पतली चादरों में फैलाई जा सकती है, इस गुण को अघातवर्ध्यता कहते हैं |

तन्यता (Ductility) :  धातु के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्यता कहते हैं| 

All metals have hight melting point. सिल्वर तथा कॉपर ऊष्मा के सबसे अच्छे चालक हैं।इनकी तुलना में लेड तथा मर्करी ऊष्मा के  कुचालक हैं।

 PVC का पूरा नाम : पॉलिवाइनिल क्लोराइड(PVC)

PVC तथा रबड़ जैसी सामग्री ऊष्मा तथा विद्युत के  कुचालक हैं।

ध्वनिक (Sonorous) : धव्निक धातु का एक भौतिक गुण है| इस गुण से वे हड़ताली पर ध्वनि पैदा करते हैं। धातुओं की इस गुण का उपयोग से , स्कूल की घंटी बनाई गई है।

अधातु (Non-metals):

कार्बन, सल्फर, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन और आयोडीन अधातु हैं।

अधातु के भौतिक गुण (Physical Properties of metals):  

(i)  धातु ठोस और चमकीले नहीं होते हैं |

(ii) ये ऊष्मा और विद्युत के सुचालक नहीं होते हैं |

(iii) धातुएँ तन्य नहीं होती हैं | 

(iv) धातुएँ अघातवर्ध्य नहीं होती है |

(v) धातुएँ ध्वानिक नहीं होती हैं अर्थात पीटने पर ध्वनि नहीं निकालती हैं | 

अधातुएँ ब्रोमिन को छोड़कर या तो ठोस होती है या गैस, ब्रोमिन तरल होता है | 

धातु और अधातुओं का कुछ अन्य गुणधर्म :

(i) सभी धातुये मर्करी (पारा) को छोड़कर कमरे के ताप पर ठोस अवस्था में पाई जाती हैं |

(ii) मर्करी (पारा) कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पाया जाता है | 

(iii)  गैलियम और सीजियम दो ऐसी धातुएँ हैं जो जिनका गलनांक बहुत कम होता है, इन्हें हथेली पर रखते ही पिघल जाती हैं |

(iv)  आयोडीन एक अधातु है परन्तु यह चमकीला होता है | 

(v)  क्षार धातुएँ (लिथियम, सोडियम और पोटैशियम ) इतना मुलायम होती है कि इन्हें चाकू से काटा जा सकता है | इनका घनत्व और गलनांक कम होता है |

कार्बन और इसके अपररूप (Carbon And its Allotropes):

कार्बन एक अधातु है जो अलग-अलग रूपों में पाया जाता है | इसके प्रत्येक रूप कोकार्बन का अपररूप कहा जाता है | 

कार्बन के अपररूप (Allotropes of carbon):

(i) हीरा (Daimond) 

(ii) ग्रेफाइट (Graphite)

(iii) बुक्मिन्टरफुलेरिन (Buckminsterfullerene) 

(i) हीरा (Diamond)  यह कार्बन  का एक अपररूप है और अब तक का ज्ञात सबसे कठोर पदार्थ है | इसका क्वथनांक और गलनांक बहुत ही अधिक होता है | 

(ii) ग्रेफाइट (Graphite) यह कार्बन का एक अन्य अपररूप है जो विद्युत का बहुत ही अच्छा चालक है | 

(iii) बुक्मिन्टरफुलेरिन (Buckminsterfullerene) यह कार्बन का एक अन्य अपररूप है जो 60 कार्बन के अणुओं से बना है | इसकी संरचना फुटबॉल की तरह होता है | 

नोट: अधिकांश अधातुये पानी में घुलने पर अम्लीय ऑक्साइड बनाती है जबकि धातुएँ पानी में घुलकर क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं | 

3. धातु और अधातु

Class 10 Science Hindi Updated : 14 July 2026

धातुओं का रासायनिक गुणधर्म (CHEMICAL PROPERTIES OF METALS)


(i)  सभी धातुये ऑक्सीजन के साथ मिलकर संगत धातु ऑक्साइड बनाती हैं | 

धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड 

उदाहरण के लिए, जब कॉपर को वायु में गर्म किया जाता है तो यह ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर कॉपर (II) ऑक्साइड बनाता है जो कि एक काला ऑक्साइड है |

2Cu     +    O2    →    2CuO
(कॉपर)     ऑक्सीजन   (कॉपर(II) ऑक्साइड)

इसीप्रकार, एल्युमीनियम एल्युमीनियम ऑक्साइड बनाता है |

4Al     +    3O2      →        2Al2O3

(एल्युमीनियम)              (एल्युमीनियम ऑक्साइड)

उभयधर्मी (Amphoteric Oxides) : कुछ धातु ऑक्साइड्स जैसे एल्युमीनियम ऑक्साइड एवं जिंक ऑक्साइड इत्यादि अम्लीय तथा क्षारकीय व्यवहार को प्रदर्शित करते हैं | ऐसे धातु ऑक्साइड जो अम्ल और क्षारक दोनों के साथ के साथ अभिक्रिया कर लवण और जल का निर्माण करते हैं इन्हें उभयधर्मी ऑक्साइड कहते हैं | 

उदाहरण: एल्युमीनियम ऑक्साइड एवं जिंक ऑक्साइड इत्यादि | 

धातु ऑक्साइड का अम्ल के साथ अभिक्रिया (Reaction of Metal oxides with acids)

एल्युमीनियम ऑक्साइड हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कर एल्युमीनियम क्लोराइड का लवण और जल देता है | 

इस अभिक्रिया का समीकरण इस प्रकार है : 

Al2 O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O

धातु ऑक्साइड का क्षारक के साथ अभिक्रिया (Reaction of Metal oxides with bases):

एल्युमीनियम ऑक्साइड सोडियम हाइड्रोऑक्साइड से अभिक्रिया कर सोडियम एलुमिनेट और जल प्रदान करता है :

इस अभिक्रिया का समीकरण इस प्रकार है :  

Al2O3    +    2NaOH      →       2NaAlO2    +     H2O
                                      (सोडियम एलुमिनेट)

धातु ऑक्साइड्स का जल में धुलनशीलता (Solubility of metal oxides in water):

अधिकांश धातु ऑक्साइड्स जल में अधुलनशील होते हैं, परन्तु इनमें से कुछ जल में घुलकर क्षार (alkalis) बनाते हैं | सोडियम ऑक्साइड और पोटैशियम ऑक्साइड दो ऐसे ऑक्साइड्स हैं जो जल में घुलकर क्षार बनाते हैं | 

सोडियम ऑक्साइड और पोटैशियम ऑक्साइड के घुलने पर क्रमश: सोडियम हाइड्रोऑक्साइड क्षार और पोटैशियम ऑक्साइड क्षार देता है | 

Na2O(s) +  H2O(l)  →  2NaOH(aq)
K2O(s)   +  H2O(l)  →  2KOH(aq)

धातुओं का ऑक्सीजन के साथ अभिक्रियाशीलता 

Reactivity of metals with oxygen: 

अलग-अलग धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर अलग-अलग अभिक्रियाशीलता प्रदर्शित करती हैं | सोना प्लैटिनम और चाँदी जैसी धातुएँ तो ऑक्सीजन से बिल्कुल ही अभिक्रिया नहीं करती है | 

सोडियम और पोटैशियम का ऑक्सीजन से अभिक्रिया : 

Reaction of sodium and potassium with oxygen: 

कुछ धातुएँ जैसे सोडियम और पोटैशियम इतनी अधिक तेजी से ऑक्सीजन से अभिक्रिया करती हैं कि यदि इनको खुला छोड़ा जाये तो ये तेजी आग पकड़ लेती हैं | यही कारण है कि इनको अचानक आग लगने से बचाने के लिए इनकों किरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है | 

कुछ धातु ऑक्साइड रक्षात्मक कवच बनाते हैं

Some metal oxides form protective layer:

साधारण तापमान पर धातुओं की सतहें जैसे मैग्नीशियम, एल्युमीनियम, जिंक और शीशा इत्यादि पर ऑक्साइड की पतली परत चढ़ जाती हैं | ये रक्षात्मक कवच इन्हें आगे ऑक्सीडेशन (उपचयन) से बचाता है | इसका एक बहुत बड़ा फायदा धातुओं को यह मिलता है कि ये इन ऑक्साइड्स की वजह से संक्षारित होने से बच जाती हैं | 

कुछ धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया नहीं करती है:

Some metal does not react with oxygen:

गर्म करने पर आयरन का दहन तो नहीं होता है लेकिन जब बर्नर की ज्वाला में लौह चूर्ण डालते हैं तब वह तेज़ी से जलने लगता है। कॉपर का दहन तो नहीं होता है लेकिन गर्म धातु पर कॉपर (II) ऑक्साइड की काले रंग की परत चढ़ जाती है। सिल्वर एवं गोल्ड अत्यंत अधिक ताप पर भी ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।

एनोड़ीकरण (Anodising): 

ऐनोडीकरण (Anodising) ऐलुमिनियम पर मोटी ऑक्साइड की परत बनाने की प्रक्रिया है। वायु के संपर्क में आने पर ऐलुमिनियम पर ऑक्साइड की पतली परत का निर्माण होता है। ऐलुमिनियम ऑक्साइड की परत इसे संक्षारण से बचाती है। इस परत को मोटा करके इसे संक्षारण से अधिक सुरक्षित किया जा सकता है।

एलुमिनियम का एनोड़ीकरण (Anodising of Aluminium) : 

ऐनोडीकरण के लिए ऐलुमिनियम की एक साफ वस्तु को ऐनोड बनाकर तनु सल्फ्ऱयूरिक अम्ल के साथ इसका विद्युत-अपघटन किया जाता है। ऐनोड पर उत्सर्जित ऑक्सीजन गैस ऐलुमिनियम के साथ अभिक्रिया करके ऑक्साइड की एक मोटी परत बनाती है। इस ऑक्साइड की परत को आसानी से रँगकर ऐलुमिनियम की आकर्षक वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं।

जल के साथ धातु की अभिक्रिया (Reaction of metals with water) :

जल के साथ अभिक्रिया करके धातुएँ हाइड्रोजन गैस तथा धातु ऑक्साइड उत्पन्न
करती हैं। जो धातु ऑक्साइड जल में घुलनशील हैं, जल में घुलकर धातु हाइड्रॉक्साइड
प्रदान करते हैं। 

समान्य समीकरण (General equations) :

धातु + जल → धातु ऑक्साइड + हाइड्रोजन
धातु ऑक्साइड + जल  धातु हाइड्रोऑक्साइड

सोडियम और पोटैशियम का ठंढे जल से अभिक्रिया 

(Reaction of sodium and potassium with cold water) :

पोटैशियम एवं सोडियम जैसी धातुएँ ठंडे जल के साथ तेज़ी से अभिक्रिया करती
हैं। सोडियम तथा पोटैशियम की अभिक्रिया तेज़ तथा ऊष्माक्षेपी होती है कि इससे
उत्सर्जित हाइड्रोजन तत्काल प्रज्ज्वलित हो जाती है।
2K(s) + 2H2O(l) → 2KOH(aq) + H2(g) + ऊष्मीय ऊर्जा 
2Na(s) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq) + H2(g) + ऊष्मीय ऊर्जा 

Chemical Properties of Metals (धातुओं के रासायनिक गुण)

धातुएँ विभिन्न पदार्थों जैसे जल, भाप, अम्ल तथा अन्य धातुओं के लवणों के साथ अभिक्रिया करती हैं। अलग-अलग धातुओं की अभिक्रियाशीलता अलग होती है। कुछ धातुएँ अत्यधिक अभिक्रियाशील होती हैं, जबकि कुछ धातुएँ सामान्य परिस्थितियों में लगभग अभिक्रिया नहीं करतीं।

Reaction of Calcium with Water (कैल्शियम की जल के साथ अभिक्रिया)

कैल्शियम की जल के साथ होने वाली अभिक्रिया कम तीव्र होती है। इस अभिक्रिया में उत्पन्न ऊष्मा इतनी पर्याप्त नहीं होती कि हाइड्रोजन गैस में आग लग जाए।

Ca(s) + 2H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + H2(g)

इस अभिक्रिया में कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनती है। उत्पन्न हाइड्रोजन गैस के बुलबुले कैल्शियम धातु की सतह से चिपक जाते हैं, जिसके कारण कैल्शियम जल की सतह पर तैरने लगता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: कैल्शियम की जल के साथ अभिक्रिया सोडियम तथा पोटैशियम की तुलना में कम तीव्र होती है।

Reaction of Metals with Hot Water (धातुओं की गर्म जल के साथ अभिक्रिया)

मैग्नीशियम ठंडे जल के साथ सामान्यतः अभिक्रिया नहीं करता। यह केवल गर्म जल के साथ अभिक्रिया करके मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाता है।

Mg(s) + 2H2O(hot) → Mg(OH)2 + H2(g)

बनने वाली हाइड्रोजन गैस के बुलबुले मैग्नीशियम की सतह से चिपक जाते हैं, जिसके कारण मैग्नीशियम भी जल की सतह पर तैरने लगता है।

याद रखें: मैग्नीशियम ठंडे जल से लगभग अभिक्रिया नहीं करता, लेकिन गर्म जल के साथ अभिक्रिया करता है।

Reaction of Metals with Steam (धातुओं की भाप के साथ अभिक्रिया)

एलुमिनियम, लोहा तथा जस्ता जैसी धातुएँ न तो ठंडे जल और न ही गर्म जल के साथ अभिक्रिया करती हैं। लेकिन ये भाप (Steam) के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।

2Al(s) + 3H2O(g) → Al2O3(s) + 3H2(g)
3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)
Zn(s) + H2O(g) → ZnO(s) + H2(g)

इस प्रकार भाप के साथ अभिक्रिया करने पर धातु ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस प्राप्त होती है।

महत्वपूर्ण तथ्य: एलुमिनियम, जस्ता तथा लोहा केवल भाप के साथ अभिक्रिया करते हैं, ठंडे या गर्म जल के साथ नहीं।

Some Metals do not React with Water (कुछ धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं)

कुछ धातुएँ सामान्य परिस्थितियों में जल के साथ बिल्कुल भी अभिक्रिया नहीं करतीं। इन धातुओं की अभिक्रियाशीलता बहुत कम होती है।

  • सीसा (Lead - Pb)
  • ताँबा (Copper - Cu)
  • चाँदी (Silver - Ag)
  • सोना (Gold - Au)

ये धातुएँ जल के साथ किसी प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया नहीं करतीं, इसलिए इनसे हाइड्रोजन गैस भी उत्पन्न नहीं होती।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण: Lead, Copper, Silver तथा Gold जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते।

Reaction of Metals with Acids (धातुओं की अम्लों के साथ अभिक्रिया)

अधिकांश धातुएँ तनु अम्लों (Dilute Acids) के साथ अभिक्रिया करके संबंधित लवण (Salt) तथा हाइड्रोजन गैस (Hydrogen Gas) बनाती हैं। यह धातुओं का एक महत्वपूर्ण रासायनिक गुण है।

Metal + Dilute Acid → Salt + Hydrogen (H2)

जब कोई अभिक्रियाशील धातु तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) या तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) के साथ अभिक्रिया करती है, तब हाइड्रोजन गैस निकलती है तथा संबंधित धातु का लवण बनता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस

Nitric Acid (HNO3) – एक विशेष स्थिति

सामान्यतः जब कोई धातु नाइट्रिक अम्ल (HNO3) के साथ अभिक्रिया करती है, तब हाइड्रोजन गैस उत्पन्न नहीं होती।

इसका कारण यह है कि नाइट्रिक अम्ल (HNO3) एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक (Strong Oxidising Agent) है। यह अभिक्रिया के दौरान बनने वाली हाइड्रोजन गैस का ऑक्सीकरण करके उसे जल (H2O) में परिवर्तित कर देता है तथा स्वयं नाइट्रोजन के ऑक्साइडों (N2O, NO तथा NO2) में अपचयित (Reduced) हो जाता है।

अपवाद (Exception): मैग्नीशियम (Mg) तथा मैंगनीज़ (Mn) अत्यंत तनु HNO3 के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं।

Aqua Regia (एक्वा रेजिया)

एक्वा रेजिया (Aqua Regia) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Concentrated Hydrochloric Acid) तथा सांद्र नाइट्रिक अम्ल (Concentrated Nitric Acid) का 3 : 1 अनुपात में ताज़ा तैयार किया गया मिश्रण होता है।

Concentrated HCl : Concentrated HNO3 = 3 : 1

यह मिश्रण अत्यंत संक्षारक (Highly Corrosive) तथा धुआँ छोड़ने वाला (Fuming Liquid) होता है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह सोने (Gold) तथा प्लैटिनम (Platinum) जैसी अत्यंत कम अभिक्रियाशील धातुओं को भी घोल सकता है।

जबकि सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा सांद्र नाइट्रिक अम्ल अलग-अलग सोने को नहीं घोल सकते, लेकिन दोनों का ताज़ा मिश्रण अर्थात् एक्वा रेजिया सोने को आसानी से घोल देता है।

याद रखें: Aqua Regia = Concentrated HCl + Concentrated HNO3 (3 : 1)
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण: Aqua Regia उन बहुत कम अभिकारकों (Reagents) में से एक है जो Gold तथा Platinum दोनों को घोल सकते हैं।

Reaction of Metals with Other Metal Salt Solutions (धातुओं की अन्य धातुओं के लवणों के साथ अभिक्रिया)

अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ (Highly Reactive Metals) कम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके लवणों के जलीय विलयन (Salt Solution) अथवा द्रवित (Molten) यौगिकों से विस्थापित कर सकती हैं। इस प्रकार की अभिक्रिया को विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) कहते हैं।

Metal A + Salt Solution of Metal B → Salt Solution of Metal A + Metal B

यदि धातु A, धातु B की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील है, तो वह धातु B को उसके लवण के विलयन से बाहर निकाल देती है। इसके विपरीत यदि धातु A कम अभिक्रियाशील है, तो कोई अभिक्रिया नहीं होती।

महत्वपूर्ण तथ्य: केवल अधिक अभिक्रियाशील धातु ही कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर सकती है।

Example of Displacement Reaction (विस्थापन अभिक्रिया का उदाहरण)

Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu

इस अभिक्रिया में जस्ता (Zn), ताँबे (Cu) से अधिक अभिक्रियाशील है। इसलिए जस्ता, कॉपर सल्फेट (CuSO4) के विलयन से ताँबे को विस्थापित कर देता है और जिंक सल्फेट (ZnSO4) बनता है।

Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu

इसी प्रकार लोहा (Fe) भी ताँबे से अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण कॉपर सल्फेट के विलयन से ताँबे को विस्थापित कर देता है।

याद रखें: यदि कोई धातु अभिक्रियाशीलता श्रेणी में ऊपर है, तो वह अपने से नीचे स्थित धातु को उसके यौगिक से विस्थापित कर सकती है।

Reactivity Series (अभिक्रियाशीलता श्रेणी)

धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता (Reactivity) के आधार पर एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। इस क्रम को अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) कहते हैं। सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु सबसे ऊपर तथा सबसे कम अभिक्रियाशील धातु सबसे नीचे रखी जाती है।

K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au
क्रम धातु रासायनिक संकेत
1 पोटैशियम K
2 सोडियम Na
3 कैल्शियम Ca
4 मैग्नीशियम Mg
5 एलुमिनियम Al
6 जस्ता Zn
7 लोहा Fe
8 सीसा Pb
9 हाइड्रोजन H
10 ताँबा Cu
11 पारा Hg
12 चाँदी Ag
13 सोना Au
महत्वपूर्ण तथ्य: अभिक्रियाशीलता श्रेणी में ऊपर स्थित धातुएँ नीचे स्थित धातुओं की अपेक्षा अधिक अभिक्रियाशील होती हैं।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण: Potassium (K) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है, जबकि Gold (Au) सबसे कम अभिक्रियाशील धातुओं में से एक है।

Chemical Properties of Metals - Key Points (धातुओं के रासायनिक गुण - मुख्य बिंदु)

धातुओं की विभिन्न पदार्थों के साथ होने वाली अभिक्रियाएँ उनकी अभिक्रियाशीलता (Reactivity) पर निर्भर करती हैं। अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ जल, अम्ल तथा अन्य धातुओं के लवणों के साथ आसानी से अभिक्रिया करती हैं, जबकि कम अभिक्रियाशील धातुएँ सामान्य परिस्थितियों में अभिक्रिया नहीं करतीं।

Quick Revision (त्वरित पुनरावृत्ति)

  • कैल्शियम जल के साथ कम तीव्रता से अभिक्रिया करके कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाता है।
  • मैग्नीशियम ठंडे जल से अभिक्रिया नहीं करता, लेकिन गर्म जल के साथ अभिक्रिया करता है।
  • एलुमिनियम, जस्ता तथा लोहा ठंडे या गर्म जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते, लेकिन भाप के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।
  • सीसा, ताँबा, चाँदी तथा सोना जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते।
  • अधिकांश धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण तथा हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
  • नाइट्रिक अम्ल (HNO3) सामान्यतः हाइड्रोजन गैस उत्पन्न नहीं होने देता क्योंकि यह एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है।
  • मैग्नीशियम तथा मैंगनीज़ अत्यंत तनु HNO3 के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं।
  • एक्वा रेजिया सांद्र HCl तथा सांद्र HNO3 का 3 : 1 अनुपात वाला ताज़ा मिश्रण है।
  • एक्वा रेजिया सोना तथा प्लैटिनम जैसी धातुओं को भी घोल सकता है।
  • अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ कम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके लवणों के विलयन से विस्थापित कर देती हैं।
  • इस प्रकार की अभिक्रिया को विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) कहते हैं।
  • अभिक्रियाशीलता श्रेणी धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में प्रदर्शित करती है।
  • पोटैशियम (K) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातुओं में से एक है।
  • सोना (Au) तथा चाँदी (Ag) सबसे कम अभिक्रियाशील धातुओं में शामिल हैं।

Exam Tips (परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य)

याद रखें: Metal + Dilute Acid → Salt + H2
विशेष तथ्य: HNO3 एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक (Strong Oxidising Agent) है, इसलिए सामान्यतः हाइड्रोजन गैस उत्पन्न नहीं होती।
महत्वपूर्ण अनुपात: Aqua Regia = Concentrated HCl : Concentrated HNO3 = 3 : 1
विस्थापन नियम: अधिक अभिक्रियाशील धातु, कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती है।
Reactivity Series:
K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au

Chapter Summary (अध्याय सारांश)

धातुओं की रासायनिक अभिक्रियाएँ उनकी अभिक्रियाशीलता पर निर्भर करती हैं। विभिन्न धातुएँ जल, गर्म जल, भाप, अम्ल तथा अन्य धातुओं के लवणों के साथ अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया करती हैं। धातुओं की अभिक्रियाशीलता की तुलना अभिक्रियाशीलता श्रेणी द्वारा की जाती है। अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ कम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके यौगिकों से विस्थापित कर सकती हैं। एक्वा रेजिया सोना तथा प्लैटिनम जैसी कम अभिक्रियाशील धातुओं को भी घोलने में सक्षम होता है। इन सभी अभिक्रियाओं का अध्ययन धातुओं के रासायनिक गुणों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

3. धातु और अधातु

Class 10 Science Hindi Updated : 14 July 2026

Formation of Ions and Ionic Compounds (आयनों तथा आयनिक यौगिकों का निर्माण)

अधिकांश धातुएँ तथा अधातुएँ रासायनिक अभिक्रियाओं के दौरान इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान करके आयनों (Ions) का निर्माण करती हैं। धातुएँ सामान्यतः इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन (Cation) बनाती हैं, जबकि अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (Anion) बनाती हैं। धातु एवं अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनने वाले यौगिकों को आयनिक अथवा विद्युत संयोजी यौगिक कहा जाता है।


Reaction of Metals and Non-metals (धातुओं तथा अधातुओं की अभिक्रिया)

अधिकांश धातुएँ अपने सबसे बाहरी कोश (Outermost Shell) के इलेक्ट्रॉनों को त्यागकर धनात्मक आयन (Positive Ion) बनाती हैं। दूसरी ओर, अधिकांश अधातुएँ अपना अष्टक (Octet) पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करती हैं तथा ऋणात्मक आयन (Negative Ion) बनाती हैं।

इस प्रकार धातु एवं अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है, जिसके परिणामस्वरूप विपरीत आवेश वाले आयन बनते हैं। इन आयनों के बीच उपस्थित विद्युतस्थैतिक आकर्षण बल उन्हें एक-दूसरे से बाँधकर आयनिक यौगिक का निर्माण करता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: अधिकांश धातुएँ धनायन (Cation) बनाती हैं, जबकि अधिकांश अधातुएँ ऋणायन (Anion) बनाती हैं।

Cation and Anion (धनायन एवं ऋणायन)

धनायन (Cation) तथा ऋणायन (Anion) को समझने के लिए किसी तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration) तथा उसकी संयोजकता (Valency) को समझना आवश्यक है।

धनायन (Cation)

जब कोई परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों का त्याग करता है, तब उसमें प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों से अधिक हो जाती है। परिणामस्वरूप उस पर धनात्मक आवेश आ जाता है और वह धनायन (Cation) कहलाता है।

Atom → Cation + Electron (e)

ऋणायन (Anion)

जब कोई परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करता है, तब उसमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों से अधिक हो जाती है। परिणामस्वरूप उस पर ऋणात्मक आवेश आ जाता है और वह ऋणायन (Anion) कहलाता है।

Atom + Electron (e) → Anion
याद रखें: Electron खोने पर धनायन (Cation) तथा Electron प्राप्त करने पर ऋणायन (Anion) बनता है।

Valency (संयोजकता)

किसी परमाणु के सबसे बाहरी कोश (Outermost Shell) में उपस्थित संयोजक इलेक्ट्रॉनों (Valence Electrons) की संख्या को उसकी संयोजकता (Valency) कहते हैं।

संयोजकता यह बताती है कि कोई परमाणु रासायनिक अभिक्रिया के दौरान कितने इलेक्ट्रॉनों का त्याग, ग्रहण अथवा साझाकरण (Sharing) कर सकता है।

उदाहरण : सोडियम (Na)

सोडियम (Na) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न प्रकार है—

2     8     1

सोडियम परमाणु में तीन कोश होते हैं तथा सबसे बाहरी कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है। यह एक इलेक्ट्रॉन आसानी से त्यागा जा सकता है, इसलिए सोडियम की संयोजकता 1 होती है।


Valence Electrons (संयोजक इलेक्ट्रॉन)

यदि किसी परमाणु के सबसे बाहरी कोश में 1, 2, 3 या 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, तो सामान्यतः वे रासायनिक अभिक्रिया के दौरान त्यागे या साझे किए जा सकते हैं। इसलिए इन तत्वों की संयोजकता क्रमशः 1, 2, 3 तथा 4 होती है।

यदि सबसे बाहरी कोश में 5, 6 या 7 इलेक्ट्रॉन हों, तो ये इलेक्ट्रॉन सामान्यतः त्यागे नहीं जाते। ऐसे परमाणु अपना अष्टक (Octet) पूरा करने के लिए क्रमशः 3, 2 या 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं।

सबसे बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉन अष्टक पूरा करने हेतु आवश्यक इलेक्ट्रॉन
5 8 − 5 = 3
6 8 − 6 = 2
7 8 − 7 = 1
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण: किसी तत्व की संयोजकता का निर्धारण उसके सबसे बाहरी कोश में उपस्थित संयोजक इलेक्ट्रॉनों की संख्या के आधार पर किया जाता है।

Electronic Configuration of Elements (तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास)

किसी परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉन विभिन्न ऊर्जा स्तरों अथवा कोशों (Shells) में व्यवस्थित रहते हैं। इन कोशों को K, L, M तथा N आदि नामों से दर्शाया जाता है। किसी तत्व के इलेक्ट्रॉनों का इन कोशों में वितरण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration) कहलाता है।

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की सहायता से किसी तत्व की संयोजकता (Valency), अभिक्रियाशीलता (Reactivity) तथा आयन बनाने की क्षमता को आसानी से समझा जा सकता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: किसी परमाणु के सबसे बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को संयोजक इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons) कहते हैं।

Electronic Configuration Table (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास सारणी)

तत्व का प्रकार तत्व परमाणु संख्या K L M N
निष्क्रिय गैसें (Noble Gases) हीलियम (He) 2 2
नियॉन (Ne) 10 2 8
आर्गन (Ar) 18 2 8 8
धातुएँ (Metals) सोडियम (Na) 11 2 8 1
मैग्नीशियम (Mg) 12 2 8 2
एलुमिनियम (Al) 13 2 8 3
पोटैशियम (K) 19 2 8 8 1
कैल्शियम (Ca) 20 2 8 8 2
अधातुएँ (Non-metals) नाइट्रोजन (N) 7 2 5
ऑक्सीजन (O) 8 2 6
फ्लोरीन (F) 9 2 7
फॉस्फोरस (P) 15 2 8 5
सल्फर (S) 16 2 8 6
क्लोरीन (Cl) 17 2 8 7

Understanding Electronic Configuration (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को समझना)

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास यह दर्शाता है कि किसी परमाणु के विभिन्न कोशों में कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं। सबसे बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ही यह निर्धारित करती है कि वह तत्व इलेक्ट्रॉन त्यागेगा, ग्रहण करेगा अथवा साझा करेगा।

उदाहरण के लिए, सोडियम (Na) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है। इसके सबसे बाहरी कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए यह आसानी से एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर स्थिर अष्टक (Stable Octet) प्राप्त कर लेता है।

इसी प्रकार क्लोरीन (Cl) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है। इसके सबसे बाहरी कोश में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए इसे अपना अष्टक पूरा करने के लिए केवल एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है।

याद रखें: सबसे बाहरी कोश में 1, 2 या 3 इलेक्ट्रॉन वाले तत्व सामान्यतः इलेक्ट्रॉन त्यागते हैं, जबकि 5, 6 या 7 इलेक्ट्रॉन वाले तत्व इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके स्थिर अष्टक प्राप्त करते हैं।

Formation of Sodium Cation and Chloride Anion (सोडियम धनायन एवं क्लोराइड ऋणायन का निर्माण)

सोडियम (Na) तथा क्लोरीन (Cl) के बीच होने वाली अभिक्रिया यह समझने का सबसे सरल उदाहरण है कि धातु एवं अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण किस प्रकार आयनों का निर्माण करता है। सोडियम एक धातु है, जबकि क्लोरीन एक अधातु है। दोनों की इलेक्ट्रॉनिक संरचना अलग-अलग होने के कारण उनकी इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने या त्यागने की प्रवृत्ति भी भिन्न होती है।


Formation of Sodium Cation (Na+)

सोडियम परमाणु (Na) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 होता है। इसके सबसे बाहरी (M) कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है।

स्थिर अष्टक (Stable Octet) प्राप्त करने के लिए सोडियम अपने सबसे बाहरी कोश का एक इलेक्ट्रॉन आसानी से त्याग देता है। इलेक्ट्रॉन त्यागने के बाद उसका L कोश सबसे बाहरी कोश बन जाता है, जिसमें आठ इलेक्ट्रॉन उपस्थित रहते हैं।

सोडियम परमाणु के नाभिक (Nucleus) में 11 प्रोटॉन होते हैं। इलेक्ट्रॉन त्यागने के बाद इलेक्ट्रॉनों की संख्या 10 रह जाती है। परिणामस्वरूप प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों से एक अधिक हो जाती है, जिससे सोडियम पर एक धनात्मक आवेश आ जाता है। इस प्रकार सोडियम धनायन (Na+) का निर्माण होता है।

Na → Na+ + e
2, 8, 1   →   2, 8
सोडियम धनायन (Sodium Cation): एक इलेक्ट्रॉन खोने के बाद सोडियम पर +1 आवेश आ जाता है।

Formation of Chloride Anion (Cl)

क्लोरीन (Cl) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 होता है। इसके सबसे बाहरी कोश में सात इलेक्ट्रॉन उपस्थित रहते हैं।

स्थिर अष्टक प्राप्त करने के लिए क्लोरीन को केवल एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। जब क्लोरीन एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तब उसके सबसे बाहरी कोश में आठ इलेक्ट्रॉन हो जाते हैं और उसका अष्टक पूर्ण हो जाता है।

क्लोरीन के नाभिक में 17 प्रोटॉन होते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के बाद उसके पास कुल 18 इलेक्ट्रॉन हो जाते हैं। इस कारण इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों से एक अधिक हो जाती है और उस पर एक ऋणात्मक आवेश उत्पन्न हो जाता है। इस प्रकार क्लोराइड ऋणायन (Cl) बनता है।

Cl + e → Cl
2, 8, 7   →   2, 8, 8
क्लोराइड ऋणायन (Chloride Anion): एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के बाद क्लोरीन पर −1 आवेश आ जाता है।

Electron Transfer Between Sodium and Chlorine (सोडियम एवं क्लोरीन के बीच इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण)

जब सोडियम तथा क्लोरीन परस्पर अभिक्रिया करते हैं, तब सोडियम अपना एक संयोजक इलेक्ट्रॉन क्लोरीन को दे देता है। इस प्रकार सोडियम धनायन (Na+) तथा क्लोराइड ऋणायन (Cl) का निर्माण होता है।

विपरीत आवेश वाले ये दोनों आयन एक-दूसरे को विद्युतस्थैतिक आकर्षण (Electrostatic Force of Attraction) द्वारा आकर्षित करते हैं। यही आकर्षण बल दोनों आयनों को एक साथ बाँधकर आयनिक बंध (Ionic Bond) का निर्माण करता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: धातु इलेक्ट्रॉन त्यागती है, अधातु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती है तथा दोनों के बीच इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से आयनिक बंध का निर्माण होता है।

Ionic Compounds (आयनिक यौगिक)

जब किसी धातु से इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण किसी अधातु की ओर होता है, तब धातु धनायन (Cation) तथा अधातु ऋणायन (Anion) का निर्माण करती है। इन विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच उत्पन्न विद्युतस्थैतिक आकर्षण बल (Electrostatic Force of Attraction) उन्हें एक साथ बाँधकर आयनिक यौगिक (Ionic Compounds) अथवा विद्युत संयोजी यौगिक (Electrovalent Compounds) का निर्माण करता है।

दूसरे शब्दों में, धातु से अधातु की ओर इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण द्वारा बनने वाले यौगिकों को आयनिक यौगिक कहते हैं। इन यौगिकों में धनायन एवं ऋणायन एक-दूसरे से आयनिक बंध (Ionic Bond) द्वारा जुड़े रहते हैं।

परिभाषा: धातु से अधातु की ओर इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण द्वारा बनने वाले यौगिकों को आयनिक यौगिक (Ionic Compounds) अथवा विद्युत संयोजी यौगिक (Electrovalent Compounds) कहा जाता है।

Properties of Ionic Compounds (आयनिक यौगिकों के गुण)

आयनिक यौगिकों में धनायनों एवं ऋणायनों के बीच प्रबल विद्युतस्थैतिक आकर्षण बल पाया जाता है। इसी कारण इनके भौतिक तथा रासायनिक गुण सामान्य सहसंयोजी (Covalent) यौगिकों से भिन्न होते हैं।


1. Physical Nature (भौतिक प्रकृति)

आयनिक यौगिक सामान्यतः ठोस (Solid) होते हैं तथा धनात्मक एवं ऋणात्मक आयनों के बीच प्रबल आकर्षण बल के कारण अपेक्षाकृत कठोर (Hard) होते हैं।

ये यौगिक सामान्यतः भंगुर (Brittle) होते हैं। इन पर अधिक दबाव डालने पर ये छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य: आयनिक यौगिक ठोस, कठोर तथा भंगुर होते हैं।

2. Melting and Boiling Points (गलनांक एवं क्वथनांक)

आयनिक यौगिकों के गलनांक (Melting Point) तथा क्वथनांक (Boiling Point) सामान्यतः बहुत अधिक होते हैं।

इसका कारण यह है कि धनायनों तथा ऋणायनों के बीच उपस्थित प्रबल विद्युतस्थैतिक आकर्षण बल को तोड़ने के लिए अधिक मात्रा में ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

याद रखें: आयनों के बीच जितना अधिक आकर्षण होगा, गलनांक तथा क्वथनांक उतने ही अधिक होंगे।

3. Solubility (विलेयता)

अधिकांश आयनिक अथवा विद्युत संयोजी यौगिक जल (Water) में घुलनशील होते हैं, जबकि मिट्टी का तेल (Kerosene), पेट्रोल तथा अन्य कार्बनिक विलायकों (Organic Solvents) में सामान्यतः अघुलनशील होते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य: Ionic Compounds → Water में Soluble तथा Kerosene/Petrol में Insoluble होते हैं।

4. Conduction of Electricity (विद्युत का चालन)

किसी विलयन में विद्युत का चालन आवेशित कणों (Charged Particles) की गति के कारण होता है। जब किसी आयनिक यौगिक को जल में घोला जाता है, तब वह धनायनों एवं ऋणायनों में विघटित हो जाता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर ये आयन विपरीत आवेश वाले इलेक्ट्रोडों की ओर गति करते हैं, जिससे विद्युत का चालन संभव हो जाता है।

ठोस अवस्था (Solid State) में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते क्योंकि उनकी कठोर क्रिस्टलीय संरचना (Rigid Crystal Structure) के कारण आयन स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर पाते।

लेकिन द्रवित (Molten State) अथवा जलीय विलयन (Aqueous Solution) में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन करते हैं। ऐसा इसलिए संभव होता है क्योंकि ऊष्मा अथवा जल की उपस्थिति में आयन स्वतंत्र रूप से गति करने लगते हैं।

अवस्था विद्युत का चालन कारण
ठोस अवस्था (Solid State) नहीं आयन स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर सकते।
द्रवित अवस्था (Molten State) हाँ आयन स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं।
जलीय विलयन (Aqueous Solution) हाँ धनायन एवं ऋणायन स्वतंत्र रूप से गति करते हैं।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण: आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते, जबकि द्रवित अवस्था एवं जलीय विलयन में विद्युत के अच्छे चालक होते हैं।

3. धातु और अधातु

Class 10 Science Hindi Updated : 14 July 2026

Extraction of Metals (धातुओं का निष्कर्षण)

पृथ्वी की भूपर्पटी (Earth's Crust) धातुओं का प्रमुख स्रोत है। अधिकांश धातुएँ प्रकृति में मुक्त अवस्था (Free State) में नहीं पाई जातीं, बल्कि अपने विभिन्न यौगिकों के रूप में विद्यमान रहती हैं। समुद्री जल (Sea Water) में भी सोडियम क्लोराइड, मैग्नीशियम क्लोराइड आदि अनेक घुलनशील लवण पाए जाते हैं।


Occurrence of Metals (धातुओं की उपलब्धता)

प्रकृति में धातुएँ मुख्यतः पृथ्वी की भूपर्पटी में खनिजों (Minerals) तथा अयस्कों (Ores) के रूप में प्राप्त होती हैं। कुछ कम अभिक्रियाशील धातुएँ, जैसे सोना (Gold) एवं चाँदी (Silver), मुक्त अवस्था (Native State) में भी पाई जाती हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य: पृथ्वी की भूपर्पटी धातुओं का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है।

Minerals (खनिज)

पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्वों अथवा उनके यौगिकों को खनिज (Minerals) कहते हैं।

परिभाषा: पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्व या उनके यौगिक खनिज (Minerals) कहलाते हैं।

Ores (अयस्क)

सभी खनिजों से धातु का निष्कर्षण आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं होता। जिन खनिजों में किसी विशेष धातु की मात्रा अधिक होती है तथा जिनसे धातु का निष्कर्षण लाभदायक ढंग से किया जा सकता है, उन्हें अयस्क (Ores) कहते हैं।

परिभाषा: जिन खनिजों से किसी धातु का आर्थिक रूप से लाभदायक निष्कर्षण किया जा सके, उन्हें अयस्क (Ore) कहते हैं।

Gangue (गैंग या अशुद्धियाँ)

पृथ्वी से प्राप्त अयस्कों में धातु के अतिरिक्त मिट्टी, रेत, पत्थर तथा अन्य अवांछित पदार्थ भी मिले रहते हैं। इन अशुद्धियों को गैंग (Gangue) कहा जाता है।

धातु का निष्कर्षण प्रारम्भ करने से पहले इन अशुद्धियों को अयस्क से अलग करना आवश्यक होता है।

याद रखें: अयस्क में उपस्थित मिट्टी, रेत तथा अन्य अवांछित अशुद्धियों को Gangue कहते हैं।

Extraction of Metals (धातुओं का निष्कर्षण)

लगभग सभी धातुएँ अपने अयस्कों (Ores) से प्राप्त की जाती हैं। कुछ धातुएँ प्रकृति में मुक्त अवस्था में मिलती हैं, जबकि अधिकांश धातुएँ अपने यौगिकों के रूप में पाई जाती हैं। इन यौगिकों से शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals) कहते हैं।


Common Ores of Important Metals (प्रमुख धातुएँ एवं उनके अयस्क)

धातु अयस्क (Ore) रासायनिक सूत्र
लोहा (Iron) हेमेटाइट / मैग्नेटाइट Fe2O3 / Fe3O4
पारा (Mercury) सिनाबार (Cinnabar) HgS
जस्ता (Zinc) जिंकाइट (Zincite) ZnO
सीसा (Lead) गैलेना (Galena) PbS
एलुमिनियम (Aluminium) बॉक्साइट (Bauxite) Al2O3.2H2O

Extraction of Metals According to Reactivity (अभिक्रियाशीलता के आधार पर धातुओं का निष्कर्षण)

धातुओं के निष्कर्षण की विधि उनकी अभिक्रियाशीलता (Reactivity) पर निर्भर करती है। अभिक्रियाशीलता के आधार पर धातुओं को मुख्यतः तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है।

धातुओं का वर्ग उदाहरण निष्कर्षण की विधि
अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ K, Na, Ca, Mg, Al विद्युत अपघटन (Electrolysis)
मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ Zn, Fe, Pb, Cu कार्बन द्वारा अपचयन (Reduction with Carbon)
कम अभिक्रियाशील धातुएँ Ag, Au प्राकृतिक मुक्त अवस्था अथवा साधारण अपचयन
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण: अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण विद्युत अपघटन द्वारा, मध्यम अभिक्रियाशील धातुओं का कार्बन द्वारा अपचयन से तथा कम अभिक्रियाशील धातुएँ प्रायः मुक्त अवस्था में प्राप्त होती हैं।

Extraction of Metals in Different Activity Series (अभिक्रियाशीलता श्रेणी के अनुसार धातुओं का निष्कर्षण)

धातुओं की निष्कर्षण विधि उनकी अभिक्रियाशीलता (Reactivity) पर निर्भर करती है। अभिक्रियाशीलता श्रेणी में नीचे स्थित धातुओं का निष्कर्षण अपेक्षाकृत सरल होता है, जबकि ऊपर स्थित अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं के निष्कर्षण के लिए विशेष विधियों की आवश्यकता होती है।


Extracting Metals Low in the Activity Series (अभिक्रियाशीलता श्रेणी के निचले भाग की धातुओं का निष्कर्षण)

अभिक्रियाशीलता श्रेणी के निचले भाग की धातुएँ (Low Reactive Metals) बहुत कम अभिक्रियाशील होती हैं। ताँबा (Copper) तथा चाँदी (Silver) जैसी धातुएँ कभी-कभी मुक्त अवस्था में भी प्राप्त हो जाती हैं, जबकि कुछ धातुएँ अपने सल्फाइड (Sulphide) अथवा ऑक्साइड (Oxide) अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं।

इन धातुओं के ऑक्साइडों को केवल गर्म करने (Heating) से ही धातु प्राप्त की जा सकती है। सल्फाइड अयस्कों को पहले वायु की उपस्थिति में गर्म करके धातु ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है, उसके बाद आगे गर्म करने पर शुद्ध धातु प्राप्त होती है।

2HgS(s) + 3O2(g) → 2HgO(s) + 2SO2(g)
2HgO(s) → 2Hg(l) + O2(g)
महत्वपूर्ण तथ्य: कम अभिक्रियाशील धातुओं के ऑक्साइड केवल गर्म करने पर ही धातु में परिवर्तित हो जाते हैं।

Extracting Metals in the Middle of the Activity Series (अभिक्रियाशीलता श्रेणी के मध्य भाग की धातुओं का निष्कर्षण)

जस्ता (Zn), लोहा (Fe), सीसा (Pb) तथा ताँबा (Cu) जैसी धातुएँ अभिक्रियाशीलता श्रेणी के मध्य भाग में स्थित होती हैं। ये धातुएँ सामान्यतः प्रकृति में सल्फाइड (Sulphide) अथवा कार्बोनेट (Carbonate) अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं।

धातुओं को उनके सल्फाइड अथवा कार्बोनेट अयस्कों से सीधे प्राप्त करना कठिन होता है। इसलिए पहले इन अयस्कों को धातु ऑक्साइड (Metal Oxide) में परिवर्तित किया जाता है, क्योंकि ऑक्साइड से धातु प्राप्त करना अपेक्षाकृत सरल होता है।

याद रखें: सल्फाइड एवं कार्बोनेट अयस्कों को पहले धातु ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।

Converting Ores into Metal Oxides (अयस्कों को धातु ऑक्साइड में परिवर्तित करना)

सल्फाइड तथा कार्बोनेट अयस्कों को धातु ऑक्साइड में बदलने के लिए मुख्यतः दो प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है— रोस्टिंग (Roasting) तथा कैल्सीनेशन (Calcination)।


(a) Roasting (रोस्टिंग)

सल्फाइड अयस्कों को अधिक मात्रा में वायु (Excess Air) की उपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करके धातु ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है। इस प्रक्रिया को रोस्टिंग (Roasting) कहते हैं।

2ZnS(s) + 3O2(g) &xrightarrow{Heat} 2ZnO(s) + 2SO2(g)
Roasting: Sulphide Ore + Excess Air + Heat → Metal Oxide

(b) Calcination (कैल्सीनेशन)

कार्बोनेट अयस्कों को सीमित वायु (Limited Air) अथवा वायु की अनुपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करके धातु ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है। इस प्रक्रिया को कैल्सीनेशन (Calcination) कहते हैं।

ZnCO3(s) &xrightarrow{Heat} ZnO(s) + CO2(g)
Calcination: Carbonate Ore + Heat → Metal Oxide + Carbon Dioxide

Reduction of Metal Oxides (धातु ऑक्साइड का अपचयन)

रोस्टिंग अथवा कैल्सीनेशन के बाद प्राप्त धातु ऑक्साइडों का अपचयन (Reduction) कार्बन (Carbon) अथवा कोक (Coke) जैसे उपयुक्त अपचायक (Reducing Agent) की सहायता से किया जाता है। इस प्रक्रिया में धातु ऑक्साइड से ऑक्सीजन हट जाती है और शुद्ध धातु प्राप्त होती है।

ZnO(s) + C(s) → Zn(s) + CO(g)

इस अभिक्रिया में जिंक ऑक्साइड (ZnO) का अपचयन होकर जस्ता (Zn) प्राप्त होता है, जबकि कार्बन का ऑक्सीकरण होकर कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) बनती है।

महत्वपूर्ण तथ्य: कार्बन धातु ऑक्साइड से ऑक्सीजन हटाकर धातु प्राप्त करने का कार्य करता है।

Reduction by Displacement Reaction (विस्थापन अभिक्रिया द्वारा धातुओं का निष्कर्षण)

धातु ऑक्साइडों का अपचयन (Reduction) केवल कार्बन द्वारा ही नहीं किया जाता, बल्कि कुछ परिस्थितियों में अधिक अभिक्रियाशील धातुओं का उपयोग भी अपचायक (Reducing Agent) के रूप में किया जाता है। अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ कम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके यौगिकों से विस्थापित कर देती हैं। इस प्रकार की प्रक्रिया विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) पर आधारित होती है।

सोडियम (Na), कैल्शियम (Ca) तथा एलुमिनियम (Al) जैसी अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ कम अभिक्रियाशील धातुओं के ऑक्साइडों का अपचयन करके शुद्ध धातु प्राप्त करने में उपयोग की जाती हैं।

3MnO2(s) + 4Al(s) → 3Mn(l) + 2Al2O3(s) + Heat

इस अभिक्रिया में एलुमिनियम, मैंगनीज़ डाइऑक्साइड (MnO2) से ऑक्सीजन को हटाकर मैंगनीज़ धातु का निर्माण करता है। यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Highly Exothermic) होती है।

महत्वपूर्ण तथ्य: अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ कम अभिक्रियाशील धातुओं के ऑक्साइडों का अपचयन कर सकती हैं।

Thermit Reaction (थर्मिट अभिक्रिया)

कुछ विस्थापन अभिक्रियाएँ अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Highly Exothermic) होती हैं। इन अभिक्रियाओं में इतनी अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है कि प्राप्त धातु द्रवित (Molten) अवस्था में प्राप्त होती है। ऐसी अभिक्रियाओं को थर्मिट अभिक्रिया (Thermit Reaction) कहा जाता है।

परिभाषा: अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करने वाली विस्थापन अभिक्रिया, जिसमें धातु द्रवित अवस्था में प्राप्त होती है, थर्मिट अभिक्रिया कहलाती है।

Uses of Thermit Reaction (थर्मिट अभिक्रिया के उपयोग)

थर्मिट अभिक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग रेलवे पटरियों (Railway Tracks) को जोड़ने तथा मशीनों के टूटे हुए भागों की मरम्मत (Repair of Cracked Machine Parts) में किया जाता है।

Fe2O3(s) + 2Al(s) → 2Fe(l) + Al2O3(s) + Heat

इस अभिक्रिया में एलुमिनियम, आयरन (III) ऑक्साइड का अपचयन करके द्रवित लोहा (Molten Iron) उत्पन्न करता है। यही द्रवित लोहा रेलवे पटरियों के जोड़ को मजबूत करने के लिए उपयोग किया जाता है।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण: Thermit Reaction का उपयोग रेलवे पटरियों को जोड़ने तथा मशीनों के टूटे हुए भागों की मरम्मत में किया जाता है।

Extraction of Highly Reactive Metals (अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण)

अभिक्रियाशीलता श्रेणी के ऊपरी भाग में स्थित धातुएँ जैसे सोडियम (Na), मैग्नीशियम (Mg) तथा कैल्शियम (Ca) अत्यधिक अभिक्रियाशील होती हैं। इन धातुओं का निष्कर्षण कार्बन द्वारा नहीं किया जा सकता क्योंकि इनका ऑक्सीजन के प्रति आकर्षण (Affinity for Oxygen) बहुत अधिक होता है।

इसलिए इन धातुओं को उनके द्रवित लवणों (Molten Salts) के विद्युत अपघटन (Electrolysis) द्वारा प्राप्त किया जाता है।

उदाहरण के लिए, सोडियम, मैग्नीशियम तथा कैल्शियम को उनके द्रवित क्लोराइडों (Molten Chlorides) के विद्युत अपघटन द्वारा प्राप्त किया जाता है।

विद्युत अपघटन के दौरान धातु कैथोड (Cathode) पर निक्षेपित होती है, जबकि क्लोरीन गैस एनोड (Anode) पर मुक्त होती है।

याद रखें: अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण केवल विद्युत अपघटन (Electrolysis) द्वारा किया जाता है।

Why Carbon Cannot Reduce Highly Reactive Metal Oxides? (कार्बन अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं के ऑक्साइडों का अपचयन क्यों नहीं कर सकता?)

अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं का ऑक्सीजन के प्रति आकर्षण कार्बन की अपेक्षा अधिक होता है। इसलिए कार्बन, सोडियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम तथा एलुमिनियम जैसे धातुओं के ऑक्साइडों से ऑक्सीजन को नहीं हटा सकता।

इसी कारण इन धातुओं का निष्कर्षण कार्बन द्वारा नहीं, बल्कि विद्युत अपघटन (Electrolysis) द्वारा किया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: Highly Reactive Metals → High Affinity for Oxygen → Extraction by Electrolysis

Refining of Metals (धातुओं का परिष्करण)

विभिन्न अपचयन प्रक्रियाओं (Reduction Processes) द्वारा प्राप्त धातुएँ पूर्णतः शुद्ध नहीं होती हैं। इनमें अनेक प्रकार की अशुद्धियाँ (Impurities) उपस्थित रहती हैं, जिन्हें हटाकर शुद्ध धातु प्राप्त करना आवश्यक होता है। धातुओं से अशुद्धियाँ हटाने की प्रक्रिया को धातुओं का परिष्करण (Refining of Metals) कहते हैं।

धातुओं को शुद्ध करने के लिए अनेक विधियाँ अपनाई जाती हैं, जिनमें विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining) सबसे अधिक प्रचलित तथा प्रभावी विधि है।

परिभाषा: अशुद्ध धातु से अशुद्धियों को हटाकर शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया परिष्करण (Refining) कहलाती है।

Electrolytic Refining (विद्युत अपघटनी परिष्करण)

ताँबा (Copper), जस्ता (Zinc), टिन (Tin), निकल (Nickel), चाँदी (Silver), सोना (Gold) आदि अनेक धातुओं का परिष्करण विद्युत अपघटनी विधि द्वारा किया जाता है।

इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु (Impure Metal) को एनोड (Anode) बनाया जाता है, जबकि उसी धातु की शुद्ध पतली पट्टी को कैथोड (Cathode) बनाया जाता है। धातु के किसी उपयुक्त लवण के जलीय विलयन को इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte) के रूप में प्रयोग किया जाता है।

Electrolytic Refining में प्रयुक्त घटक:
  • एनोड (Anode) → अशुद्ध धातु (Impure Metal)
  • कैथोड (Cathode) → शुद्ध धातु की पतली पट्टी (Pure Metal Sheet)
  • इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte) → धातु के लवण का जलीय विलयन

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

Working of Electrolytic Refining (विद्युत अपघटनी

 परिष्करण की कार्यविधि)

जब इलेक्ट्रोलाइट में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तब एनोड पर उपस्थित अशुद्ध धातु ऑक्सीकरण होकर इलेक्ट्रोलाइट में घुल जाती है।

इलेक्ट्रोलाइट में उपस्थित धातु आयन (Metal Ions) कैथोड की ओर गति करते हैं और वहाँ इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके शुद्ध धातु के रूप में निक्षेपित (Deposit) हो जाते हैं। इस प्रकार धीरे-धीरे कैथोड पर शुद्ध धातु की परत बनती जाती है।

घुलनशील अशुद्धियाँ (Soluble Impurities) इलेक्ट्रोलाइट में ही बनी रहती हैं, जबकि अघुलनशील अशुद्धियाँ (Insoluble Impurities) एनोड के नीचे एकत्रित हो जाती हैं। इन्हें एनोड मड (Anode Mud) कहा जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: अघुलनशील अशुद्धियाँ एनोड के नीचे एकत्रित होकर Anode Mud बनाती हैं।

Summary of Electrolytic Refining (विद्युत अपघटनी परिष्करण का सारांश)

घटक भूमिका
एनोड (Anode) अशुद्ध धातु (Impure Metal)
कैथोड (Cathode) शुद्ध धातु की पतली पट्टी (Pure Metal Sheet)
इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte) धातु के लवण का जलीय विलयन
एनोड पर अशुद्ध धातु घुलकर आयनों में परिवर्तित होती है।
कैथोड पर शुद्ध धातु निक्षेपित (Deposit) होती है।
एनोड मड (Anode Mud) अघुलनशील अशुद्धियाँ नीचे एकत्रित हो जाती हैं।

Chapter Quick Revision (त्वरित पुनरावृत्ति)

  • धातुएँ मुख्यतः खनिज (Minerals) तथा अयस्क (Ores) के रूप में प्राप्त होती हैं।
  • जिन खनिजों से धातु का आर्थिक रूप से निष्कर्षण किया जा सके, उन्हें अयस्क (Ore) कहते हैं।
  • अयस्कों में उपस्थित मिट्टी, रेत तथा अन्य अशुद्धियों को गैंग (Gangue) कहते हैं।
  • अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण विद्युत अपघटन (Electrolysis) द्वारा किया जाता है।
  • मध्यम अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण रोस्टिंग, कैल्सीनेशन तथा कार्बन द्वारा अपचयन से किया जाता है।
  • कम अभिक्रियाशील धातुएँ सामान्यतः मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं या केवल गर्म करने से प्राप्त हो जाती हैं।
  • थर्मिट अभिक्रिया का उपयोग रेलवे पटरियों तथा मशीनों के टूटे भागों को जोड़ने में किया जाता है।
  • धातुओं के परिष्करण की सबसे महत्वपूर्ण विधि विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining) है।
  • Electrolytic Refining में अशुद्ध धातु एनोड तथा शुद्ध धातु कैथोड होती है।
  • अघुलनशील अशुद्धियाँ एनोड मड (Anode Mud) के रूप में एकत्रित होती हैं।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण: Electrolytic Refining, Thermit Reaction, Roasting, Calcination तथा Reactivity Series इस अध्याय के सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं।

3. धातु और अधातु

Class 10 Science Hindi Updated : 14 July 2026

Corrosion (संक्षारण)

जब कुछ धातु की वस्तुएँ ऑक्सीजन या नमी (Moisture) के संपर्क में आती हैं, तब वे ऑक्सीजन या जलवाष्प के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं। इसके परिणामस्वरूप धातु की सतह पर जंग लग जाती है और धातु की सतह धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है। धातु की सतह के इस क्षय (Surface Loss) को संक्षारण (Corrosion) कहते हैं।

Prevention of Corrosion (संक्षारण की रोकथाम)

संक्षारण को निम्नलिखित विधियों द्वारा रोका जा सकता है—

(i) पेंट (Painting), तेल (Oiling) तथा ग्रीस (Greasing) लगाकर।

(ii) गैल्वनाइजेशन (Galvanisation), क्रोम प्लेटिंग (Chrome Plating) अथवा एनोडाइजिंग (Anodising) द्वारा।

(iii) मिश्रधातु (Alloy) बनाकर।

Galvanisation (गैल्वनाइजेशन)

स्टील तथा लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए उनकी सतह पर जस्ते (Zinc) की एक पतली परत चढ़ाई जाती है। इस प्रक्रिया को गैल्वनाइजेशन (Galvanisation) कहते हैं।

Alloying (मिश्रधातु बनाना)

शुद्ध धातुओं का उपयोग सामान्यतः वस्तुएँ बनाने में नहीं किया जाता। उन्हें अधिक कठोर, अधिक मजबूत तथा उनके गुणों में परिवर्तन करने के लिए अन्य पदार्थों के साथ मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया को मिश्रधातु बनाना (Alloying) कहते हैं।

  • मिश्रधातु बनाना धातुओं के गुणों में सुधार करने की एक बहुत अच्छी विधि है।
  • मिश्रधातु दो या दो से अधिक धातुओं अथवा एक धातु एवं एक अधातु का समांगी (Homogeneous) मिश्रण होती है।
  • मिश्रधातु बनाने के लिए पहले मुख्य धातु को पिघलाया जाता है, फिर उसमें अन्य तत्वों को निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है। इसके बाद मिश्रण को सामान्य तापमान तक ठंडा किया जाता है।

Some Examples of Alloys (मिश्रधातुओं के कुछ उदाहरण)

(i) लोहा सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली धातु है, लेकिन इसका उपयोग शुद्ध अवस्था में नहीं किया जाता। शुद्ध लोहा बहुत मुलायम होता है तथा गर्म अवस्था में आसानी से फैल जाता है। यदि इसमें थोड़ी मात्रा (लगभग 0.05%) कार्बन मिला दिया जाए, तो यह कठोर एवं मजबूत इस्पात (Steel) बन जाता है।

(ii) स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) बनाने के लिए लोहे में निकेल (Nickel) तथा क्रोमियम (Chromium) मिलाए जाते हैं।

(iii) शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है, जो बहुत मुलायम होता है। इसलिए इससे आभूषण नहीं बनाए जा सकते। इसे कठोर बनाने के लिए इसमें चाँदी (Silver) अथवा ताँबा (Copper) मिलाया जाता है। 22 भाग शुद्ध सोने में 2 भाग ताँबा या चाँदी मिलाने पर प्राप्त मिश्रधातु को 22 कैरेट सोना कहा जाता है।

मिश्रधातु (Alloy) मिश्रण (Mixture) प्रतीक (Symbols)
पीतल (Brass) ताँबा + जस्ता Cu + Zn
काँसा (Bronze) ताँबा + टिन Cu + Sn
सोल्डर (Solder) सीसा + टिन Pb + Sn

Assignment:


1 अंक के प्रश्न : 

Q1. उभयधर्मी ऑक्साइड किसे कहते हैं ?

Q2. आयनिक आबंध किसे कहते है ? 

Q3. अयस्क किसे कहते है ? 

Q4. खनिज और अयस्क में कोई दो अंतर लिखिए |

Q5. धत्विकी क्या है ?

Q6. गैंग किसे कहते है ? 

Q7. एनोड पंक क्या है ? 

Q8. संक्षारण को परिभाषित कीजिए |

Q9. जस्तीकरण का एक उपयोग लिखिए |

Q10. मिश्र धातु किसे कहते हैं ? 

Q11. एक ताँबा और जस्ता से बनने वाले एक मिश्र धातु का नाम लिखिए |

Q12. एक्वा रेजिया क्या है ? इसका एक उपयोग लिखिए | 

Q13. दो धातुओं के नाम लिखिए जो ऊष्मा की सर्वाधिक चालक हैं ?

Q14. तन्यता को परिभाषित कीजिए। एक सर्वाधिक तन्य धातु का नाम लिखिए।
Q15. दो ऐसी धातुओं के नाम लिखिए जिन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।
Q16. बिजली की तारों पर पी.वी.सी. की परत क्यों चढ़ाई जाती है?
Q17. कौन सी धातुएँ ‘सोनोरस’ (ध्वानिक) कहलाती है?
Q18. एक धातु एवम् एक अधातु का नाम बताइए जो कक्ष ताप पर द्रव अवस्था में पाई जाती है।
Q19. उस अधातु का नाम लिखो जिसका अपररूप विद्युत का चालक होता है? अपर रूप का नाम भी लिखो।

Q20. कार्बन के उस अपररूप का नाम बताइए जो अभी तक ज्ञात पदार्थों में सर्वाधिक कठोर है?
Q21. ऐसी दो धातुओं के नाम लिखिए जो जल के भाप रूप में भी उसके साथ अभिक्रिया नहीं करती।
Q22. सोडियम तथा पोटैशियम धातु को किरोसिन तेल में डुबा कर क्यों रखा जाता है?

Q23. कौन सी दो धातुएं तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती है?
Q24. मैग्नीशियम धातु जब हवा में जलती है तब उसकी लौ का रंग क्या होता हैं?
Q25. मैग्नीशियम क्लोराइड में किस प्रकार का आबन्ध उपस्थित है?
Q26. उस विधि का नाम बताइए जिसके द्वारा सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं को निष्कर्षित किया जाता है?
Q27. धातुओं के निष्कर्षण में सामान्यतः उपयोग लाया जाने वाले एक सस्ते अपचायक का नाम लिखिए।

Q28. निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया में अपचायक का नाम क्या है ? 

     Fe2O3 + Al  → Al2O3 + Fe

Q29. विद्युत अपघटनी परिष्करण में अशुद्ध धातु से कौन-सी इलेक्ट्रोड बनाया जाता है और शुद्ध धातु से कौन-सा इलेक्ट्रोड बनाया जाता है ? 

Q30. तांबे के विद्युत अपघटनी परिष्करण में उपयोग होने वाले विद्युत अपघटय का नाम लिखिए।
Q31. अमलगम किसे कहते हैं?

Q32. आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च क्यों होता है ? 

Q33. सल्फाइड अयस्कों को ऑक्साइड में परिवर्तित करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है ? 

Q34. कैल्शियम धातु पानी के साथ अभिक्रिया करने के पश्चात सतह पर तैरने क्यों लगती है ? इसमें होने वाली रासायनिक समीकरण लिखिए।

Q35. आयनिक यौगिक केवल पिघली अवस्था में विद्युत के सुचालक होते हैं, ठोस अवस्था में नहीं। कारण बताइए।

Q36. मिश्र धातु सोल्डर के घटकों के नाम बताइए |

Q37. सोडियम क्लोराइड का इलेक्ट्रोन डॉट संरचना को दर्शाइए | 

Q42. एनोडिकरण क्या है ? इसका एक उपयोग लिखिए |

Q43. ऐसे दो धातुओं का नाम लिखिए जिनकों हथेली पर रखते ही पिघल जाती है ? 

Q44. थर्मिट अभिक्रिया किसे कहते है ? 

Q45. लोहे को संक्षारण से बचाने के दो तरीके लिखिए |

Q46. धातुओं का परिष्करण से आप क्या समझते हैं ? 

Q47. पारा (मर्करी) के अयस्क का नाम लिखिए |

Q48. कार्बोनेट अयस्कों को ऑक्साइड में परिवर्तित करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है ? 

Q49. लोहे को कठोर स्टील बनाने के लिए उसमें क्या मिलाया है ? 

Q50. आयरन का भाप के साथ रासायनिक अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखिए |

Q51. अमलगम किसे कहते हैं ? 

Q52. उस विधी का नाम बताइए जिसके द्वारा सक्रियता श्रेणी में सबसे उपर स्थित धातुओं को निष्कर्षित किया जाता है।

Q53. भर्जन किसे कहते हैं ?

Q54. निस्तापन किसे कहते है ? 

Q55. भर्जन का उपयोग किस प्रकार के अयस्कों के लिए किया जाता है ? 

Q56. ताँबा और टीन से बने एक मिश्रधातु का नाम लिखे।

Q57. शुद्ध सोने का उपयोग आभूषण बनाने के लिए क्यों नहीं किया जाता है ?

Q58. आभूषण बनाने के लिए शुद्ध सोने में क्या मिलाया जाता है ?

Q59. तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के पास अभिक्रिया न करने वाली एक धातु का नाम लिखिए ।

Q60. सक्रियता श्रेणी में नीचेें आने वाले धातुओं के अयस्कों निष्कर्षण कैसे किया जाता है ?

Q61. उस अभिक्रिया का नाम बताइए जिसका उपयोग रेल की पटरी एवं मशीनी पुर्जो की दरारों को जोडने के लिए किया जाता है। 

Q62. सोडियम क्लोराइड का क्वथनांक उच्च क्यों होता है ?

Q63. एल्युमिनियम के अयस्क का नाम बताइए |

Q64. सक्रियता श्रेणी के मध्य में पाई जाने वाली धातुएँ पृथ्वी की भू - पर्पटी में मुख्यतः किस रूप में पाई जाती है?

Q65. ऐसे दो धातुओं के नाम बताइए जो न तो शीतल जल के साथ न ही गर्म जल के साथ ही अभिक्रिया करती है ।  

Q66. दो उभयधर्मी ऑक्साइडो के नाम लिखिए |

Q67. स्टेनलेस स्टील के दो गुण लिखिए ।

Q68. मैग्नेशियम तथा क्लोरीन के लिए इलेक्ट्रॉन बिंदु सरंचना बनाइए ।

Q69. निम्न में से सर्वाधिक अभिक्रियाशील तथा सबसे कम अभिक्रियाशील धातु बताइए। 

Al, Ca , Zn, Fe, Hg, Cu.    

Q70. लोहे के अयस्क का नाम लिखिए | 

Q71. किसी वस्तु पर जिंक की परत चढ़ाने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं ? 

Q72. अधातुओं के ऑक्साइड की प्रकृति कैसी होती है ? 

Q73. सक्रियता श्रेणी में दो सबसे कम अभिक्रियाशील धातुओं के नाम बताइए |

Q74. सल्फाइड और कार्बोनेट की अपेक्षा ऑक्साइड से धातु प्राप्त करना आसान क्यों है ?   

Q75. ध्वानिक को परिभाषित कीजिए |

Q76. दो ऐसे धातुओं के नाम बताइए जो विद्युत के कुचालक होते हैं ?

Q77. एक ऐसे अधातु का नाम लिखिए जो विद्युत का चालन बहुत ही आसानी से करता है |  

2 तथा 3 अंक के प्रश्न :

Q1.  एक धातु X और Fe2O3 के बीच अभिक्रिया अत्यधिक उष्माक्षेपी होती हैं और इसका उपयोग रेलवे को जोडनें में किया जाता है। 

(i) X की पहचान कीजिए।
(ii) अभिक्रिया का नाम बताइए। 
(iii) Fe2O3 के साथ इस अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए ।

Q2. उभयधर्मी ऑक्साइड के दो गुण लिखिए | 

Q3. निम्न अभिक्रिओं के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए |

(i) जब लोहा वाष्प से अभिक्रिया करता है |

(ii) जब मैग्नेशियम तनु हाइड्रोजन क्लोराइड से अभिक्रिया करता है |

(iii) तांबे को वायु की उपस्थिति में गरम किया जाता है |

Q4. आपको तीन धातुओं के नमूने दिए गए हैं - सोडियम, मैग्नेशियम तथा ताँबा | किन्ही दो क्रियाकलापों के सुझाव दीजिए जिससे इन्हें अभिक्रियाशिलता के घटते क्रम में व्यवस्थित किया जा सके | 

Q5. बिजली की तारों पर PVC की परत क्यों चढ़ाई जाती हैं ?

Q6. लोहे के औजारों को रखने से पहले तेल क्यों लगाया जाता है ?

Q7. गर्म पानी 2में मैग्नीशियम रिबन तैरने क्यों लगता है ?

Q8. धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए किस रासायनिक प्रक्रम का उपयोग किया जाता है? रासायनिक समीकरण भी लिखें।

Q9. अयस्कों से धातु प्राप्त करने के विभिन्न चरण कौन-कौन से हैं ?

Q10. स्कूल की घंटियाँ धातु की ही क्यों बनाई जाती है ?  

 

 

5 अंक के प्रश्न : 


Q1. एक धातु A को मिट्टी के तेल में भंडारित किया जाता है। हवा के संपर्क में आते ही यह गर्म होने लगती है एवम् उत्पाद जल के साथ अभिक्रिया के उपरान्त लाल लिटमस को नीला कर देता है। (1 + 2 + 2) 
(i) धातु A का नाम लिखिए?
(ii) रासायनिक समीकरण लिखिए - जब धातु वायु के सम्पर्क में आती है एवम् इस अभिक्रिया के उत्पाद की जल से अभिक्रिया।
(iii) यह धातु A अपने गलित क्लोराइड से किस प्रक्रम द्वारा प्राप्त की जाती है वर्णन कीजिए।
Q2. एक धातु M विद्युत एवम् ऊष्मा की सर्वाधिक चालक है इसका उपयोग विद्युत तार बनाने में किया जाता है एवम् यह प्रकृति में सल्फाइड अयस्क M2S के रूप में पाई जाती है।   (1 + 1 + 1 + 2)
(1) धातु M को पहचानिए।
(2) इस धातु के निष्कर्षण के लिए उपर्युक्त प्रक्रम बताइए।
(3) निष्कर्षण में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए।
(4) एक नामांकित चित्र द्वारा इस धातु के विद्युत अपघटय परिष्करण को दर्शाइए।

Q3. एक धातु X को जब नम वायु में लंबे समय तक वायु में छोड दिया जाता है तो उसकी चमकदार भूरी सतह पर हरे रंग का आवरण चढ जाता है बताइए।

(i) हरे रंग के यौगिक का नाम ।
(ii) धातु X को पहचानिए। 
(iii) इस धातु के सल्फेट के जलीय विलयन में लोहे की कील डालने पर विलयन का रंग क्यों बदल जाता है ?
(iv) हरे रंग के आवरण चढने के बाद धातु की सतह का ह्रास होता है इस प्रक्रिया को क्या कहते है ? 

Q4. आयनिक यौगिकों के चार गुणधर्म लिखिए। 

Q5. कई धातुओं के अयस्क ऑक्साइड के रूप में पाए जाते हैं क्यों ?

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