NCERT Solutions for Class 9 – Complete Chapter-wise Study Material

प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ is one of the most important chapters in the Class 9 Social Science Hindi NCERT Solutions curriculum. This chapter plays a significant role in helping students build a strong conceptual foundation while preparing for school examinations, class tests, unit tests, half-yearly examinations, annual examinations, and CBSE board assessments. The chapter has been carefully designed according to the latest NCERT syllabus, making it an essential part of every student's study plan.

The प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ - Class 9 Social Science Hindi NCERT Solutions available on ATP Education explain every question in a simple, accurate, and step-by-step manner. Each answer is prepared according to the latest CBSE guidelines so that students can understand the concepts clearly without confusion. Whether you are completing your homework, revising before examinations, or strengthening your understanding of the subject, these solutions provide reliable academic support throughout your learning journey.

One of the biggest advantages of studying प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ is that it helps students understand important concepts, definitions, examples, and textbook exercises in an organized way. Instead of memorizing answers, students learn how to develop logical thinking, improve analytical skills, and write well-structured answers in examinations. This chapter also helps improve problem-solving ability and encourages conceptual learning, which is essential for scoring higher marks in school and competitive examinations.

Our Class 9 Social Science NCERT Solutions cover all textbook questions, important exercise questions, and chapter-wise explanations in Hindi Medium. Every solution is written in easy-to-understand language, allowing students to revise the chapter quickly before examinations. Regular practice of these solutions improves confidence, strengthens subject knowledge, and reduces examination stress.

Students preparing for school assessments should carefully study प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ because questions from this chapter are frequently asked in objective questions, short answer questions, long answer questions, competency-based questions, and case-study questions. Understanding the concepts explained in this chapter also helps students connect related topics from other chapters, making overall learning more effective and meaningful.

At ATP Education, we continuously update our Class 9 Social Science Hindi NCERT Solutions according to the latest NCERT textbooks and CBSE curriculum. Students can confidently use these chapter-wise solutions for daily study, homework assistance, quick revision, examination preparation, and self-learning. By studying प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ thoroughly and practising every question regularly, students can strengthen their concepts, improve writing skills, and achieve better academic performance in both school and board examinations.

प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ - Class 9 Social Science Hindi NCERT Solutions

प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ

Chapter Review and Key Points

Class 9 Social Science Hindi Updated : 21 September 2026

अध्याय 4. प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ

अध्याय समीक्षा (Chapter Review)

मानव इतिहास का बहुत बड़ा भाग उस समय का है जब लेखन का आविष्कार नहीं हुआ था। इस काल को मुख्यतः पुरातात्त्विक प्रमाणों के आधार पर समझा जाता है। औजार, जीवाश्म, हड्डियाँ, मिट्टी के बर्तन, आभूषण, गुफा-चित्र, भवनों के अवशेष तथा अन्य वस्तुएँ प्रारम्भिक मानव जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं।

लेखन से पहले का इतिहास: मानव इतिहास के 99 प्रतिशत से अधिक समय में लेखन का अस्तित्व नहीं था। लगभग 30 लाख वर्ष पहले से लेकर लगभग 5000 वर्ष पहले तक के अधिकांश इतिहास को पुरातात्त्विक प्रमाणों से समझा जाता है। लेखन के विकास के बाद लिखित दस्तावेजों के साथ-साथ पुरातात्त्विक प्रमाण भी इतिहास को समझने के महत्वपूर्ण स्रोत बन गए।

पुरातत्त्व (Archaeology): पुरातत्त्व वह अध्ययन है जिसके माध्यम से अतीत के मानव जीवन को भौतिक अवशेषों के आधार पर समझा जाता है। पत्थर के औजार, जीवाश्म, हड्डियाँ, मिट्टी के बर्तन, मनके, आभूषण, गुफा-चित्र, भवन तथा अन्य वस्तुएँ इसके प्रमुख प्रमाण हैं।

प्रारम्भिक मानव: प्रारम्भिक मानवों का विकास अफ्रीका में हुआ और धीरे-धीरे वे दुनिया के अन्य भागों में फैल गए। प्रारम्भिक मानव-जैसे पूर्वजों और आधुनिक मानवों को व्यापक रूप से Hominins कहा जाता है। इस विकासक्रम में Homo habilis, Homo erectus, Homo neanderthalensis और Homo sapiens जैसे समूह शामिल हैं।

जैविक और सांस्कृतिक विकास: मानव विकास को दो प्रमुख रूपों में समझा जा सकता है। जैविक विकास में मानव शरीर और आनुवंशिक संरचना में लंबे समय के दौरान हुए परिवर्तन शामिल हैं। सांस्कृतिक विकास में मनुष्यों द्वारा अपने पर्यावरण के अनुसार जीवन-शैली, तकनीक, औजार, भोजन प्राप्त करने के तरीके और सामाजिक व्यवस्था में किए गए परिवर्तन शामिल हैं।

क्वाटरनरी काल (Quaternary Period): पिछले लगभग 26 लाख वर्षों का काल, जिसमें वर्तमान समय भी शामिल है, मानव विकास के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है। इस दौरान जलवायु और पर्यावरण में अनेक परिवर्तन हुए तथा मनुष्यों ने विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को अनुकूलित किया।

प्रारम्भिक मानवों के औजार: औजार बनाना प्रारम्भिक मानव व्यवहार की प्रमुख विशेषताओं में से एक था। पत्थर के औजारों का उपयोग मांस काटने, कंद-मूल खोदने, पशुओं की खाल खुरचने और हड्डियों से मज्जा निकालने जैसे कार्यों में किया जाता था। पुरातत्त्वविद् इन औजारों का अध्ययन तथा कभी-कभी उनका पुनर्निर्माण करके उनके संभावित उपयोग को समझते हैं।

जीवाश्म (Fossil): अतीत में जीवित रहे जीवों के सुरक्षित अवशेष, उनके निशान या छाप जीवाश्म कहलाते हैं। जीवाश्म प्रारम्भिक मानवों तथा अन्य जीवों के विकास को समझने के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

प्रागैतिहासिक काल का विभाजन: प्रारम्भिक मानव इतिहास को औजारों, तकनीक, जीवन-शैली और आर्थिक गतिविधियों में हुए परिवर्तनों के आधार पर अलग-अलग कालों में बाँटा जाता है।

1. पुरापाषाण काल (Palaeolithic Age): इसे पुराना पाषाण युग भी कहा जाता है। इस काल में मानव मुख्यतः शिकारी और खाद्य-संग्राहक था। साधारण पत्थर के औजारों का प्रयोग किया जाता था। हाथ की कुल्हाड़ी (handaxe), cleaver, chopper और scraper जैसे औजार इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ सबसे पुराने मानव निवास लगभग 20 लाख वर्ष पुराने माने जाते हैं। तमिलनाडु का अत्तिरमपक्कम (Attirampakkam) और कर्नाटक का इसामपुर (Isampur) महत्वपूर्ण पुरापाषाण स्थल हैं।

बाद के चरणों में नुकीले औजार, blades, microblades तथा धनुष-बाण जैसी तकनीकों का विकास हुआ। प्रारम्भिक मानवों ने गुफाओं और खुले शिविरों में निवास किया तथा शिकार और संग्रह पर निर्भर रहे। गुफा-चित्रों और शरीर की सजावट, पत्थर, हड्डी तथा शंख से बने मनकों से उनके प्रतीकात्मक और कलात्मक व्यवहार का भी प्रमाण मिलता है।

2. मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age): लगभग 12,000 वर्ष पहले जलवायु गर्म होने लगी। इससे जंगलों और घास के मैदानों का विस्तार हुआ तथा मनुष्यों को छोटे जानवरों, मछलियों और जंगली खाद्यान्नों जैसे नए संसाधन प्राप्त हुए। इस काल में बहुत छोटे पत्थर के औजार बनाए गए जिन्हें सूक्ष्म पाषाण या Microliths कहा जाता है। मछली पकड़ना भी महत्वपूर्ण गतिविधि बन गया।

मध्य प्रदेश का भीमबेटका (Bhimbetka) एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहाँ अनेक चित्रित शैलाश्रय पाए गए हैं। यहाँ मध्यपाषाण तथा इससे पहले के मानव निवास के प्रमाण मिले हैं।

3. नवपाषाण काल (Neolithic Age): नवपाषाण या नया पाषाण युग मानव जीवन में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का काल था। इस समय मनुष्य धीरे-धीरे शिकार और खाद्य-संग्रह से आगे बढ़कर कृषि तथा पशुपालन करने लगा। पौधों की खेती और पशुओं का पालतूकरण शुरू हुआ। इससे भोजन के उत्पादन पर मानव का नियंत्रण बढ़ा और स्थायी बस्तियों का विकास हुआ।

इस परिवर्तन को नवपाषाण क्रांति (Neolithic Revolution) कहा जाता है। इस काल में घिसे और अधिक परिष्कृत पत्थर के औजार, मिट्टी के बर्तन, बुनाई तथा खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों का विकास हुआ। यह परिवर्तन सभी स्थानों पर एक ही समय में नहीं हुआ।

मेहरगढ़ (Mehrgarh): मेहरगढ़ बोलन नदी के किनारे, वर्तमान पाकिस्तान में स्थित एक महत्वपूर्ण नवपाषाण स्थल है। यह उत्तर-पश्चिमी भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे पुराने नवपाषाण स्थलों में से एक है और इसका समय लगभग 7000 ईसा पूर्व तक जाता है। यहाँ हाथ से बनाए गए धूप में सुखाए गए ईंटों के घर और अनाज रखने के भंडार मिले हैं। लोग गेहूँ और जौ की खेती करते थे तथा भेड़, बकरी और भारतीय मवेशियों, विशेषकर ज़ेबू, को पालते थे।

मेहरगढ़ से लैपिस लाजुली, कार्नेलियन और शंख से बने आभूषणों के प्रमाण भी मिले हैं। बाद के समय में यहाँ तांबे की वस्तुएँ भी मिलने लगीं। लगभग 2500 ईसा पूर्व तक भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भागों में कृषि पर आधारित नवपाषाण समुदाय विकसित हो चुके थे।

4. ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic Age): इस काल में पत्थर के औजारों के साथ-साथ तांबे का उपयोग भी होने लगा। तांबे की तकनीक ने औजारों, कृषि और शिल्प के विकास में योगदान दिया। यह काल आगे चलकर धातु तकनीक और अधिक विकसित सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण बना।

5. कांस्य युग (Bronze Age): तांबे और टिन को मिलाकर कांस्य बनाया जाता था। कांस्य धातु के उपयोग से अधिक प्रभावी औजार और हथियार बनाए जा सके। व्यापार, शिल्प, नगरों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का विस्तार हुआ तथा प्रारम्भिक सभ्यताओं का विकास हुआ।

6. लौह युग (Iron Age): लौह धातु के व्यापक उपयोग से अधिक मजबूत औजार और हथियार बनाए जाने लगे। इससे कृषि तथा अन्य गतिविधियों में तकनीकी परिवर्तन हुए और अधिक विकसित समाजों के विकास में सहायता मिली।

सिन्धु–सरस्वती सभ्यता की ओर विकास: प्रारम्भिक कृषि समुदायों, तांबे की तकनीक, शिल्प उत्पादन और आर्थिक एकीकरण ने आगे चलकर नगरों के विकास का आधार तैयार किया। सिन्धु और घग्गर–सरस्वती क्षेत्रों में प्रारम्भिक बस्तियों का विकास हुआ। यहाँ मिट्टी के बर्तन, मनके, शंख की चूड़ियाँ, टेराकोटा की वस्तुएँ, तांबे का काम और अन्य शिल्प विकसित हुए।

कालीबंगा: कालीबंगा में जुताई किए हुए खेत के प्रमाण मिले हैं। खेत में क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों दिशाओं में बनी हुई नालियाँ मिली हैं, जो दोहरी फसल उगाने की व्यवस्था की ओर संकेत करती हैं।

मानकीकृत बाट और माप: हड़प्पाई समुदायों में मानकीकृत बाटों का प्रयोग होता था। छोटे मापों में 1, 2, 4, 8 और 16 जैसे द्विगुणित क्रम तथा बड़े मापों में दस के गुणकों का उपयोग किया जाता था। कई बाट घनाकार पत्थर के बने होते थे।

हड़प्पाई नगर: तकनीकी विकास और आर्थिक एकीकरण के परिणामस्वरूप नगर केन्द्रों का विकास हुआ। हड़प्पाई नगरों में योजनाबद्ध बस्तियाँ, जल प्रबंधन और जल निकासी की व्यवस्था, मानकीकृत बाट-माप, पत्थर के मनके, अभिलेखयुक्त मुहरें और लेखन जैसी विशेषताएँ दिखाई देती हैं। हड़प्पाई लिपि चित्रात्मक स्वरूप की थी, लेकिन अभी तक इसे पूरी तरह पढ़ा नहीं जा सका है।

कांस्य युग की नदी-घाटी सभ्यताएँ: कांस्य युग में चार प्रमुख नदी-घाटी सभ्यताओं का विकास हुआ—सिन्धु–सरस्वती क्षेत्र में हड़प्पाई सभ्यता, टिगरिस और यूफ्रेटीस नदियों के क्षेत्र में मेसोपोटामिया, नील नदी के किनारे मिस्र तथा हुआंग हे नदी के क्षेत्र में चीनी सभ्यता। इन सभ्यताओं ने कृषि, लेखन, वास्तुकला, प्रशासन, शिल्प और व्यापार के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मेसोपोटामिया: मेसोपोटामिया शब्द का अर्थ यूनानी भाषा में “दो नदियों के बीच की भूमि” है। यह मुख्यतः टिगरिस और यूफ्रेटीस नदियों के क्षेत्र में स्थित था। आज इसका अधिकांश भाग इराक और कुवैत तथा कुछ भाग तुर्की और दक्षिण-पश्चिमी ईरान में आता है। इसकी उपजाऊ भूमि के कारण इसे Fertile Crescent का हिस्सा माना जाता है।

लगभग 3500 ईसा पूर्व से मेसोपोटामिया में सुमेरियन, अक्कादी, असीरियाई और बेबीलोनियाई जैसी नगर-आधारित सभ्यताओं का विकास हुआ। सुमेरियनों ने सिंचाई के लिए बाँध और नहरें बनाईं तथा उर जैसे नगरों का विकास किया। उनके मंदिर आर्थिक और प्रशासनिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केन्द्र थे।

जिग्गुरात (Ziggurat): जिग्गुरात सीढ़ीनुमा, पिरामिड जैसी संरचना वाला मंदिर था। इसके कई स्तर होते थे और सबसे ऊपर मुख्य मंदिर स्थित होता था। इनका उपयोग धार्मिक कार्यों के साथ-साथ प्रशासन और भंडारण से संबंधित गतिविधियों में भी किया जाता था।

कीलाक्षर लिपि (Cuneiform): सुमेरियनों ने गीली मिट्टी की पट्टियों पर सरकंडे से कील के आकार के निशान बनाकर लेखन की एक प्रणाली विकसित की, जिसे कीलाक्षर या Cuneiform कहा जाता है। लगभग 3000 ईसा पूर्व तक इसका व्यापक प्रयोग हो रहा था। लेखकों या scribes का समाज में उच्च स्थान था। मिट्टी की पट्टियों पर मिथक, महाकाव्य, स्तुतिगान, कानून, शिक्षा तथा कृषि और शिल्प से संबंधित अभिलेख लिखे जाते थे।

सुमेरियनों ने पहिए वाली गाड़ी और पाल वाली नाव जैसी तकनीकों का विकास किया। उन्होंने 60 पर आधारित संख्या प्रणाली का प्रयोग किया। आज एक घंटे में 60 मिनट, एक मिनट में 60 सेकंड और वृत्त में 360 डिग्री की व्यवस्था में इस प्राचीन प्रणाली की छाप दिखाई देती है।

अक्कादी, असीरियाई और बेबीलोनियाई: अक्कादियों ने लगभग 2334 ईसा पूर्व से शक्ति प्राप्त की। असीरियाई सभ्यता का केन्द्र अस्सुर था। बेबीलोनियाई सभ्यता मध्य मेसोपोटामिया में विकसित हुई। बेबीलोन के शासक हम्मुराबी ने लगभग 1792 ईसा पूर्व सत्ता संभाली और उसके नाम से प्रसिद्ध हम्मुराबी की संहिता (Code of Hammurabi) कानूनों का महत्वपूर्ण संग्रह है।

मिस्र की सभ्यता: मिस्र की सभ्यता नील नदी के किनारे विकसित हुई। नील नदी की वार्षिक बाढ़ उपजाऊ मिट्टी जमा करती थी। मिस्रवासी अपनी भूमि को केमेट (Kemet), अर्थात “काली भूमि”, कहते थे क्योंकि नदी की काली उपजाऊ मिट्टी कृषि के लिए अत्यंत उपयोगी थी।

मिस्रवासियों का कैलेंडर तीन ऋतुओं—Inundation (बाढ़), Peret (फसल उगने का समय) और Shemu (फसल काटने का समय)—पर आधारित था। प्रत्येक ऋतु चार महीनों की होती थी। वर्ष में 365 दिन माने जाते थे।

फराओ और पिरामिड: मिस्र के शासकों को फराओ कहा जाता था। उनके लिए विशाल समाधि संरचनाएँ बनाई जाती थीं। सक्कारा का Step Pyramid इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। मिस्रवासियों का विश्वास था कि शरीर के सुरक्षित रहने से व्यक्ति का आध्यात्मिक रूप या ka मृत्यु के बाद भी जीवित रह सकता है। इसी विश्वास के कारण ममीकरण की प्रक्रिया विकसित हुई।

ममीकरण: ममीकरण में शरीर के आंतरिक अंगों को निकालकर, हृदय को सामान्यतः शरीर में रखते हुए, शरीर को natron से सुखाया जाता था। इसके बाद तेल लगाया जाता और शरीर को लिनन के कपड़ों में लपेटकर ताबूत में रखा जाता था।

मिस्र का सामाजिक ढाँचा: समाज में सबसे ऊपर फराओ था। उसके नीचे सरकारी अधिकारी, कुलीन और पुजारी थे। इनके बाद स्वतंत्र भूमिधारी, कारीगर और व्यापारी तथा फिर कृषक/सेरफ और दास जैसे समूह आते थे। मिस्रवासियों ने Hieroglyphic लेखन प्रणाली का भी विकास किया।

चीनी सभ्यता: प्राचीन चीनी सभ्यता उत्तरी चीन में हुआंग हे नदी के बेसिन में विकसित हुई। यहाँ कृषि, शिल्प, कांस्य धातुकर्म और राजनीतिक संगठन का विकास हुआ। चीनी लेखन प्रणाली मुख्यतः logographic थी। जेड (Jade) की वस्तुएँ, मूर्तियाँ और अनुष्ठानिक वस्तुएँ प्रतिष्ठा और धार्मिक महत्व रखती थीं।

चीनी सभ्यता में कांस्य धातु से हथियार, औजार और धार्मिक पात्र बनाए जाते थे। जेड की नक्काशी तथा संगीत से संबंधित वस्तुओं का भी विकास हुआ।

चीन की महान दीवार: चीन की महान दीवार का निर्माण और विस्तार लगभग 2000 वर्षों तक विभिन्न चरणों में हुआ। प्रारम्भिक दीवारों का निर्माण लगभग 680 ईसा पूर्व से झोऊ तथा अन्य शासकों द्वारा घुमंतू समूहों के हमलों से सुरक्षा के लिए किया गया। बाद के शासकों ने इन दीवारों को जोड़ा, बढ़ाया और मजबूत किया।

रेशम (Silk): रेशम का ज्ञान नवपाषाण काल से ही था और कांस्य युग में यह एक महत्वपूर्ण शिल्प बन गया। बाद में हान काल में रेशम का बाहरी व्यापार बहुत महत्वपूर्ण हुआ और इससे संबंधित व्यापारिक मार्ग को Silk Route कहा गया।

सभ्यताओं के बीच संपर्क: सिन्धु–सरस्वती क्षेत्र और मेसोपोटामिया भौगोलिक रूप से अपेक्षाकृत निकट थे, इसलिए दोनों के बीच व्यापार और संपर्क के मजबूत प्रमाण मिलते हैं। इसके विपरीत, सिन्धु–सरस्वती सभ्यता और मिस्र या चीन के बीच सीधे संपर्क के ठोस भौतिक प्रमाण बहुत कम हैं।

अध्याय का मुख्य निष्कर्ष: मानव सभ्यता का विकास अचानक नहीं हुआ, बल्कि यह एक लंबी और क्रमिक प्रक्रिया थी। शिकार और खाद्य-संग्रह से कृषि तथा पशुपालन की ओर परिवर्तन, स्थायी बस्तियों का विकास, औजारों और धातुओं की तकनीक, शिल्प, व्यापार, लेखन, प्रशासन और नगरों का विकास—इन सभी परिवर्तनों ने प्रारम्भिक सभ्यताओं के निर्माण में योगदान दिया। सिन्धु–सरस्वती, मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन की सभ्यताएँ उपजाऊ नदी-घाटियों में विकसित हुईं और मानव समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ

Additional Questions With Solutions

Class 9 Social Science Hindi Updated : 21 September 2026

अध्याय 4. प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ

अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

प्रश्न 1. प्रारम्भिक मानव इतिहास को समझने का प्रमुख साधन क्या है?

उत्तर: लेखन के आविष्कार से पहले के मानव इतिहास को मुख्यतः पुरातात्त्विक प्रमाणों के आधार पर समझा जाता है।

प्रश्न 2. पुरातत्त्वविद् किन वस्तुओं का अध्ययन करके प्रारम्भिक मानव जीवन को समझते हैं?

उत्तर: वे पत्थर के औजार, जीवाश्म, हड्डियाँ, मिट्टी के बर्तन, मनके, आभूषण, गुफा-चित्र, भवनों तथा अन्य भौतिक अवशेषों का अध्ययन करते हैं।

प्रश्न 3. प्रारम्भिक मानवों का विकास सबसे पहले किस महाद्वीप में हुआ?

उत्तर: प्रारम्भिक मानवों का विकास अफ्रीका में हुआ।

प्रश्न 4. Hominins से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: Hominins में आधुनिक मानव और उनके प्रारम्भिक मानव-जैसे पूर्वजों के समूह शामिल हैं।

प्रश्न 5. प्रारम्भिक मानव व्यवहार की प्रमुख विशेषताओं में से एक क्या थी?

उत्तर: औजारों का निर्माण और उनका उपयोग प्रारम्भिक मानव व्यवहार की प्रमुख विशेषताओं में से एक था।

प्रश्न 6. जीवाश्म (Fossil) क्या है?

उत्तर: अतीत में जीवित रहे जीवों के सुरक्षित अवशेष, उनके निशान या छाप को जीवाश्म कहा जाता है।

प्रश्न 7. पुरापाषाण काल को और किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: पुरापाषाण काल को Old Stone Age या पुराना पाषाण युग कहा जाता है।

प्रश्न 8. पुरापाषाण काल में मनुष्य मुख्यतः किस प्रकार जीवन-यापन करता था?

उत्तर: मनुष्य मुख्यतः शिकार और खाद्य-संग्रह करके जीवन-यापन करता था।

प्रश्न 9. मध्यपाषाण काल के छोटे पत्थर के औजारों को क्या कहा जाता है?

उत्तर: इन्हें Microliths या सूक्ष्म पाषाण कहा जाता है।

प्रश्न 10. भीमबेटका किस राज्य में स्थित है?

उत्तर: भीमबेटका मध्य प्रदेश में स्थित है।

प्रश्न 11. नवपाषाण काल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता क्या थी?

उत्तर: शिकार और खाद्य-संग्रह से कृषि तथा पशुपालन की ओर संक्रमण इसकी प्रमुख विशेषता थी।

प्रश्न 12. नवपाषाण क्रांति (Neolithic Revolution) से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: शिकार और खाद्य-संग्रह से कृषि, पशुपालन और स्थायी जीवन की ओर हुए क्रमिक परिवर्तन को नवपाषाण क्रांति कहा जाता है।

प्रश्न 13. मेहरगढ़ कहाँ स्थित है?

उत्तर: मेहरगढ़ बोलन नदी के किनारे, वर्तमान पाकिस्तान में स्थित है।

प्रश्न 14. मेहरगढ़ में लगभग किस समय से नवपाषाण जीवन के प्रमाण मिलते हैं?

उत्तर: मेहरगढ़ में लगभग 7000 ईसा पूर्व से नवपाषाण जीवन के प्रमाण मिलते हैं।

प्रश्न 15. ताम्रपाषाण काल में किन दो प्रकार की वस्तुओं के औजार प्रयोग किए जाते थे?

उत्तर: तांबे और पत्थर दोनों के औजारों का प्रयोग किया जाता था।

प्रश्न 16. कांस्य किस धातुओं के मिश्रण से बनता है?

उत्तर: कांस्य तांबे और टिन के मिश्रण से बनता है।

प्रश्न 17. कालीबंगा में किस प्रकार के खेत के प्रमाण मिले हैं?

उत्तर: कालीबंगा में जुताई किए गए खेत के प्रमाण मिले हैं, जिनमें क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों दिशाओं की नालियाँ दिखाई देती हैं।

प्रश्न 18. हड़प्पाई लिपि की वर्तमान स्थिति क्या है?

उत्तर: हड़प्पाई लिपि अभी तक पूरी तरह पढ़ी या समझी नहीं जा सकी है।

प्रश्न 19. मेसोपोटामिया का अर्थ क्या है?

उत्तर: मेसोपोटामिया का अर्थ “दो नदियों के बीच की भूमि” है।

प्रश्न 20. मेसोपोटामिया की दो प्रमुख नदियाँ कौन-सी थीं?

उत्तर: टिगरिस (Tigris) और यूफ्रेटीस (Euphrates) इसकी प्रमुख नदियाँ थीं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 21. लेखन के आविष्कार से पहले के इतिहास को समझना कठिन क्यों है?

उत्तर: लेखन के अभाव में प्रारम्भिक मानवों के विचारों, घटनाओं और सामाजिक जीवन का सीधा लिखित विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस काल को मुख्यतः औजारों, जीवाश्मों, हड्डियों, गुफा-चित्रों, बर्तनों और अन्य भौतिक अवशेषों के आधार पर समझना पड़ता है। इनके आधार पर अतीत की जानकारी प्राप्त की जाती है, लेकिन कई बातें अनुमान के आधार पर समझनी पड़ती हैं।

प्रश्न 22. पुरातात्त्विक प्रमाण प्रारम्भिक मानवों के जीवन को समझने में कैसे सहायता करते हैं?

उत्तर: पुरातात्त्विक प्रमाण प्रारम्भिक मानवों की तकनीक, भोजन, निवास और गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हैं। उदाहरण के लिए, पत्थर के औजारों से उनके कार्यों और तकनीकी क्षमता का पता चलता है, जबकि गुफा-चित्र उनके कलात्मक और प्रतीकात्मक व्यवहार की जानकारी देते हैं।

प्रश्न 23. पुरापाषाण काल और मध्यपाषाण काल में अंतर बताइए।

उत्तर: पुरापाषाण काल में मानव मुख्यतः बड़े और अपेक्षाकृत सरल पत्थर के औजारों का उपयोग करते हुए शिकार और खाद्य-संग्रह पर निर्भर था। मध्यपाषाण काल में जलवायु के गर्म होने के साथ जीवन में परिवर्तन आया और बहुत छोटे पत्थर के औजारों अर्थात Microliths का उपयोग बढ़ा। मछली पकड़ना तथा छोटे जानवरों और जंगली खाद्यान्नों का उपयोग भी महत्वपूर्ण हुआ।

प्रश्न 24. नवपाषाण काल को मानव इतिहास में महत्वपूर्ण परिवर्तन का काल क्यों माना जाता है?

उत्तर: नवपाषाण काल में मनुष्य केवल शिकार और खाद्य-संग्रह पर निर्भर रहने के बजाय कृषि तथा पशुपालन करने लगा। इससे भोजन के उत्पादन पर उसका नियंत्रण बढ़ा। स्थायी गाँव विकसित हुए और मिट्टी के बर्तन, बुनाई तथा खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियाँ बढ़ीं।

प्रश्न 25. कृषि और पशुपालन के विकास से मानव जीवन में क्या परिवर्तन आए?

उत्तर: कृषि और पशुपालन से मनुष्य भोजन का उत्पादन स्वयं करने लगा। इसके कारण स्थायी बस्तियों का विकास हुआ। भोजन के भंडारण की आवश्यकता बढ़ी तथा खेती, पशुपालन, बर्तन निर्माण और बुनाई जैसी नई गतिविधियों का विकास हुआ।

प्रश्न 26. मेहरगढ़ के लोगों के जीवन की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: मेहरगढ़ के लोग कृषि और पशुपालन करते थे। वे गेहूँ और जौ उगाते थे तथा भेड़, बकरी और भारतीय मवेशियों को पालते थे। वहाँ मिट्टी की ईंटों से बने घर और अनाज रखने के भंडार मिले हैं। लोग लैपिस लाजुली, कार्नेलियन और शंख जैसी वस्तुओं से आभूषण भी बनाते थे।

प्रश्न 27. ताम्रपाषाण काल ने आगे की सभ्यताओं के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?

उत्तर: ताम्रपाषाण काल में पत्थर के साथ तांबे का उपयोग होने लगा। तांबे की तकनीक ने औजारों और शिल्प उत्पादन को विकसित किया। कृषि और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि तथा शिल्प और व्यापार के विस्तार ने आगे चलकर अधिक जटिल समाजों और नगरों के विकास की आधारभूमि तैयार की।

प्रश्न 28. हड़प्पाई सभ्यता की कुछ प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: हड़प्पाई सभ्यता में योजनाबद्ध नगर, जल प्रबंधन और जल निकासी की व्यवस्था, मानकीकृत बाट और माप, विकसित शिल्प, पत्थर के मनके, शंख की वस्तुएँ, तांबे का काम, अभिलेखयुक्त मुहरें तथा लेखन जैसी विशेषताएँ दिखाई देती हैं।

प्रश्न 29. हड़प्पाई सभ्यता में मानकीकृत बाट और माप का क्या महत्व था?

उत्तर: मानकीकृत बाट और माप आर्थिक गतिविधियों तथा व्यापार में एकरूपता बनाए रखने में सहायक थे। इससे वस्तुओं के मापन और लेन-देन को व्यवस्थित करना संभव हुआ।

प्रश्न 30. कालीबंगा के जुताई किए हुए खेत का प्रमाण क्या बताता है?

उत्तर: कालीबंगा में मिले खेत में क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों दिशाओं की जुताई की नालियाँ मिली हैं। यह प्रमाण खेती की व्यवस्थित तकनीक और दोहरी फसल उगाने की संभावना की ओर संकेत करता है।

प्रश्न 31. मेसोपोटामिया को ‘दो नदियों के बीच की भूमि’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर: मेसोपोटामिया टिगरिस और यूफ्रेटीस नदियों के बीच के क्षेत्र में विकसित हुआ था। इसी कारण यूनानी भाषा में इसका नाम Mesopotamia पड़ा, जिसका अर्थ “दो नदियों के बीच की भूमि” है।

प्रश्न 32. जिग्गुरात क्या थे?

उत्तर: जिग्गुरात मेसोपोटामिया में बने सीढ़ीनुमा, पिरामिड जैसी संरचनाओं वाले मंदिर थे। इनमें कई स्तर होते थे और सबसे ऊपर मुख्य मंदिर स्थित होता था। ये धार्मिक गतिविधियों के साथ प्रशासन तथा भंडारण से भी जुड़े थे।

प्रश्न 33. कीलाक्षर लिपि (Cuneiform) की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: पहली, इसे गीली मिट्टी की पट्टियों पर सरकंडे से कील के आकार के निशान बनाकर लिखा जाता था। दूसरी, इसका उपयोग कानून, मिथक, शिक्षा, कृषि, शिल्प और अन्य प्रशासनिक रिकॉर्ड रखने के लिए किया जाता था।

प्रश्न 34. मिस्र की सभ्यता के विकास में नील नदी का क्या महत्व था?

उत्तर: नील नदी की वार्षिक बाढ़ उपजाऊ मिट्टी जमा करती थी, जिससे कृषि के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनती थीं। नदी ने जल, कृषि और परिवहन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया। इसी कारण नील नदी के किनारे एक समृद्ध सभ्यता विकसित हुई।

प्रश्न 35. मिस्रवासी अपनी भूमि को Kemet क्यों कहते थे?

उत्तर: नील नदी की बाढ़ के बाद नदी घाटी में गहरी काली और उपजाऊ मिट्टी जमा होती थी। इसी काली मिट्टी के कारण मिस्रवासी अपनी भूमि को Kemet, अर्थात “काली भूमि”, कहते थे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 36. मानव जीवन में पुरापाषाण से नवपाषाण काल तक हुए प्रमुख परिवर्तनों को समझाइए।

उत्तर: पुरापाषाण काल में मानव मुख्यतः शिकारी और खाद्य-संग्राहक था तथा पत्थर के औजारों का उपयोग करता था। मध्यपाषाण काल में जलवायु के गर्म होने के साथ नए संसाधनों का उपयोग बढ़ा और Microliths जैसे छोटे औजारों का विकास हुआ। नवपाषाण काल में मानव ने कृषि और पशुपालन शुरू किया। इससे भोजन उत्पादन पर नियंत्रण बढ़ा और स्थायी बस्तियों का विकास हुआ। मिट्टी के बर्तन, बुनाई तथा खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियाँ भी विकसित हुईं। इस प्रकार मानव जीवन धीरे-धीरे अधिक स्थायी और संगठित होता गया।

प्रश्न 37. प्रारम्भिक कृषि समुदायों और नदी-घाटी सभ्यताओं के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कृषि समुदायों ने खेती और पशुपालन के माध्यम से भोजन का नियमित उत्पादन करना शुरू किया। स्थायी जीवन के कारण गाँव विकसित हुए और जनसंख्या बढ़ी। शिल्प, व्यापार और तकनीक का विकास होने के साथ समाज अधिक संगठित हुआ। उपजाऊ नदी-घाटियों में जल और कृषि की सुविधाओं के कारण बड़े समुदायों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनीं। आगे चलकर इन्हीं प्रक्रियाओं ने नगरों, प्रशासन, लेखन और सामाजिक संगठन वाली प्रारम्भिक सभ्यताओं के विकास में योगदान दिया।

प्रश्न 38. सिन्धु–सरस्वती सभ्यता और मेसोपोटामिया के बीच संपर्क के प्रमाणों को समझाइए।

उत्तर: सिन्धु–सरस्वती क्षेत्र और मेसोपोटामिया भौगोलिक रूप से अपेक्षाकृत निकट थे। दोनों क्षेत्रों में विकसित शिल्प और व्यापारिक गतिविधियों के कारण इनके बीच संपर्क और व्यापार के प्रमाण मिलते हैं। हड़प्पाई क्षेत्र में विकसित मनके, शंख की वस्तुएँ तथा अन्य शिल्प उत्पाद व्यापक आर्थिक संपर्क की ओर संकेत करते हैं। अध्याय के अनुसार मिस्र और चीन की तुलना में मेसोपोटामिया के साथ संपर्क के प्रमाण अधिक स्पष्ट हैं।

प्रश्न 39. चार प्रमुख कांस्य युगीन नदी-घाटी सभ्यताओं की तुलना कीजिए।

उत्तर: चार प्रमुख सभ्यताएँ थीं—सिन्धु–सरस्वती, मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन। सिन्धु–सरस्वती सभ्यता सिन्धु तथा घग्गर–सरस्वती क्षेत्रों में विकसित हुई। मेसोपोटामिया टिगरिस और यूफ्रेटीस नदियों के बीच विकसित हुआ। मिस्र नील नदी के किनारे विकसित हुआ, जबकि चीनी सभ्यता हुआंग हे नदी के बेसिन में विकसित हुई। इन सभी में कृषि, शिल्प, राजनीतिक संगठन और सामाजिक व्यवस्था का विकास हुआ, लेकिन प्रत्येक सभ्यता ने अपने स्थानीय पर्यावरण और संसाधनों के अनुसार अलग-अलग तकनीकी और सांस्कृतिक विशेषताएँ विकसित कीं।

प्रश्न 40. प्रारम्भिक सभ्यताओं के विकास में पर्यावरण की भूमिका समझाइए।

उत्तर: पर्यावरण ने प्रारम्भिक मानव समाजों को अवसर भी दिए और चुनौतियाँ भी प्रस्तुत कीं। उपजाऊ मिट्टी और जल की उपलब्धता ने कृषि के विकास में सहायता की। नदियों ने कृषि और जीवन के लिए जल उपलब्ध कराया, लेकिन बाढ़ जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों ने जल प्रबंधन की आवश्यकता भी उत्पन्न की। इसी कारण विभिन्न समाजों ने सिंचाई, बाँध, नहरों और अन्य जल-प्रबंधन प्रणालियों का विकास किया। नदी-घाटियों में उपलब्ध संसाधनों ने आगे चलकर नगरों और सभ्यताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ

NCERT Textbook Questions & Answers

Class 9 Social Science Hindi Updated : 22 September 2026

अध्याय 4. प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ

NCERT पाठ्यपुस्तक प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. क्या आपको लगता है कि मनुष्यों द्वारा खेती शुरू करने के बाद जीवन आसान हो गया या अधिक चुनौतीपूर्ण? अपने उत्तर के लिए दो कारण दीजिए।

उत्तर: मनुष्यों द्वारा खेती शुरू करने के बाद जीवन कुछ मायनों में आसान हुआ, लेकिन साथ ही नई चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुईं।

पहला कारण: खेती के कारण मनुष्य नियमित रूप से भोजन का उत्पादन करने लगा। वह अनाज उगाकर उसे संग्रहित कर सकता था, जिससे भोजन की उपलब्धता अधिक नियंत्रित हुई।

दूसरा कारण: खेती के कारण मनुष्य को एक स्थान पर रहकर फसलों और पालतू पशुओं की देखभाल करनी पड़ती थी। वह मौसम, वर्षा, पानी की उपलब्धता, फसल खराब होने और कीटों जैसी परिस्थितियों पर अधिक निर्भर हो गया। इसलिए खेती ने स्थायी जीवन के अवसर दिए, लेकिन नई जिम्मेदारियाँ और चुनौतियाँ भी पैदा कीं।

प्रश्न 2. पर्यावरण मानव समाजों को अवसरों के साथ-साथ चुनौतियाँ भी प्रदान करता है। प्रारम्भिक कृषि समुदायों और नदी-घाटी सभ्यताओं के संदर्भ में समझाइए।

उत्तर: पर्यावरण ने प्रारम्भिक मानव समाजों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपजाऊ भूमि और जल की उपलब्धता ने कृषि के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान कीं। नदियों के आसपास की भूमि खेती के लिए उपयोगी थी और नदियों से जल प्राप्त होता था।

लेकिन नदियों और प्राकृतिक पर्यावरण ने कुछ चुनौतियाँ भी उत्पन्न कीं। बाढ़, जल की अनियमित उपलब्धता तथा बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों से निपटने के लिए मानव समाजों को जल प्रबंधन की तकनीक विकसित करनी पड़ी। मेसोपोटामिया में बाँधों और नहरों का निर्माण तथा विभिन्न नदी-घाटी सभ्यताओं में जल के प्रबंधन के प्रयास इसी आवश्यकता से जुड़े थे।

इस प्रकार पर्यावरण ने एक ओर कृषि, बस्तियों और सभ्यताओं के विकास के लिए संसाधन उपलब्ध कराए, वहीं दूसरी ओर मानव समाजों को प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन और तकनीकी विकास के लिए प्रेरित किया।

प्रश्न 3. इतिहासकार प्रारम्भिक मानव इतिहास को पाषाण युग, कांस्य युग और लौह युग जैसे विभिन्न युगों में क्यों बाँटते हैं? यह वर्गीकरण मानव प्रगति के बारे में क्या बताता है?

उत्तर: इतिहासकार प्रारम्भिक मानव इतिहास को अलग-अलग युगों में मुख्यतः तकनीकी विकास, औजारों के निर्माण और उपयोग, कृषि की शुरुआत तथा मानव जीवन और बस्तियों में हुए परिवर्तनों के आधार पर बाँटते हैं।

उदाहरण के लिए, पाषाण युग में पत्थर के औजारों का व्यापक उपयोग हुआ। बाद में ताम्रपाषाण काल में पत्थर के साथ तांबे का उपयोग शुरू हुआ। कांस्य युग में तांबे और टिन को मिलाकर कांस्य बनाने की तकनीक विकसित हुई तथा नगरों, व्यापार और प्रारम्भिक सभ्यताओं का विस्तार हुआ। लौह युग में लोहे के व्यापक उपयोग से अधिक मजबूत औजार और हथियार बनाए जाने लगे।

यह वर्गीकरण बताता है कि मानव समाजों में तकनीक, कृषि, शिल्प, व्यापार, बस्तियों और सामाजिक संगठन में धीरे-धीरे परिवर्तन और विकास हुआ। यह मानव प्रगति को समझने के लिए एक उपयोगी ऐतिहासिक ढाँचा प्रदान करता है।

प्रश्न 4. कल्पना कीजिए कि आप एक नवपाषाण किसान हैं। अपने जीवन के एक दिन का वर्णन कीजिए। ऐसी कौन-सी चुनौतियाँ होंगी जिनका सामना एक शिकारी-संग्राहक को नहीं करना पड़ता?

उत्तर: मैं एक नवपाषाण किसान के रूप में सुबह अपने खेतों की जाँच से दिन की शुरुआत करूँगा। मैं देखूँगा कि फसल को पर्याप्त पानी मिल रहा है या नहीं और खेत में खरपतवार या कीट तो नहीं हैं। इसके बाद खेत की देखभाल, मिट्टी की तैयारी और फसल से संबंधित कार्य करूँगा। मुझे अपने पालतू पशुओं को भी भोजन और पानी देना होगा। दिन के अन्य समय में अनाज को सुरक्षित रखना, भोजन तैयार करना, मिट्टी के बर्तन बनाना या बुनाई जैसे कार्य किए जा सकते हैं।

एक किसान के रूप में मुझे ऐसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा जो शिकारी-संग्राहक के जीवन में उसी रूप में नहीं थीं। मुझे एक स्थान पर रहकर खेतों और पशुओं की लगातार देखभाल करनी होगी। फसल के लिए वर्षा और पानी पर निर्भरता, मौसम में बदलाव, कीटों तथा फसल खराब होने का खतरा भी रहेगा। इसके अलावा भोजन के भंडारण और स्थायी बस्ती की व्यवस्था बनाए रखना भी आवश्यक होगा।

प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ

MCQs

Class 9 Social Science Hindi Updated : 22 September 2026

अध्याय 4. प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1. लेखन के आविष्कार से पहले के मानव इतिहास को मुख्यतः किसके आधार पर समझा जाता है?

(A) केवल साहित्यिक स्रोतों के आधार पर

(B) पुरातात्त्विक प्रमाणों के आधार पर

(C) केवल मौखिक परंपराओं के आधार पर

(D) केवल राजाओं के अभिलेखों के आधार पर

उत्तर: (B) पुरातात्त्विक प्रमाणों के आधार पर

प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-सा पुरातात्त्विक प्रमाण है?

(A) पत्थर का औजार

(B) जीवाश्म

(C) गुफा-चित्र

(D) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 3. प्रारम्भिक मानवों का विकास मुख्यतः किस महाद्वीप में हुआ?

(A) यूरोप

(B) एशिया

(C) अफ्रीका

(D) ऑस्ट्रेलिया

उत्तर: (C) अफ्रीका

प्रश्न 4. आधुनिक मानव का वैज्ञानिक नाम क्या है?

(A) Homo habilis

(B) Homo erectus

(C) Homo neanderthalensis

(D) Homo sapiens

उत्तर: (D) Homo sapiens

प्रश्न 5. प्रारम्भिक मानवों के लिए औजारों का निर्माण किस कारण से महत्वपूर्ण था?

(A) इससे वे केवल सजावट कर सकते थे

(B) इससे वे ऐसे कार्य कर सकते थे जो केवल हाथों से करना कठिन था

(C) इससे केवल खेती संभव हुई

(D) इससे लेखन का आविष्कार हुआ

उत्तर: (B) इससे वे ऐसे कार्य कर सकते थे जो केवल हाथों से करना कठिन था

प्रश्न 6. जीवाश्म (Fossil) किसे कहा जाता है?

(A) आधुनिक वस्तुओं को

(B) केवल पत्थर के औजारों को

(C) प्राचीन जीवों के सुरक्षित अवशेष, निशान या छाप को

(D) केवल मिट्टी के बर्तनों को

उत्तर: (C) प्राचीन जीवों के सुरक्षित अवशेष, निशान या छाप को

प्रश्न 7. पुरापाषाण काल को किस नाम से भी जाना जाता है?

(A) New Stone Age

(B) Old Stone Age

(C) Copper Age

(D) Bronze Age

उत्तर: (B) Old Stone Age

प्रश्न 8. पुरापाषाण काल में मानव मुख्यतः किस जीवन-शैली पर निर्भर था?

(A) कृषि और व्यापार

(B) शिकार और खाद्य-संग्रह

(C) उद्योग और व्यापार

(D) केवल पशुपालन

उत्तर: (B) शिकार और खाद्य-संग्रह

प्रश्न 9. निम्नलिखित में से कौन-सा पुरापाषाण काल का औजार है?

(A) Handaxe

(B) Cleaver

(C) Scraper

(D) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 10. अत्तिरमपक्कम (Attirampakkam) किस राज्य में स्थित है?

(A) मध्य प्रदेश

(B) कर्नाटक

(C) तमिलनाडु

(D) गुजरात

उत्तर: (C) तमिलनाडु

प्रश्न 11. इसामपुर (Isampur) किस राज्य में स्थित है?

(A) कर्नाटक

(B) तमिलनाडु

(C) बिहार

(D) राजस्थान

उत्तर: (A) कर्नाटक

प्रश्न 12. मध्यपाषाण काल के छोटे पत्थर के औजारों को क्या कहा जाता है?

(A) Megaliths

(B) Microliths

(C) Ziggurats

(D) Hieroglyphs

उत्तर: (B) Microliths

प्रश्न 13. लगभग 12,000 वर्ष पहले जलवायु में क्या प्रमुख परिवर्तन हुआ?

(A) जलवायु अधिक ठंडी हो गई

(B) जलवायु अधिक गर्म होने लगी

(C) वर्षा पूरी तरह समाप्त हो गई

(D) सभी नदियाँ सूख गईं

उत्तर: (B) जलवायु अधिक गर्म होने लगी

प्रश्न 14. भीमबेटका (Bhimbetka) किसके लिए प्रसिद्ध है?

(A) जिग्गुरातों के लिए

(B) चित्रित शैलाश्रयों के लिए

(C) पिरामिडों के लिए

(D) कांस्य मूर्तियों के लिए

उत्तर: (B) चित्रित शैलाश्रयों के लिए

प्रश्न 15. नवपाषाण काल में मानव जीवन में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन क्या था?

(A) लेखन की शुरुआत

(B) कृषि और पशुपालन की शुरुआत

(C) लौह धातु का व्यापक उपयोग

(D) समुद्री व्यापार की शुरुआत

उत्तर: (B) कृषि और पशुपालन की शुरुआत

प्रश्न 16. शिकार और खाद्य-संग्रह से कृषि तथा स्थायी जीवन की ओर परिवर्तन को क्या कहा जाता है?

(A) औद्योगिक क्रांति

(B) नवपाषाण क्रांति

(C) कांस्य क्रांति

(D) लौह क्रांति

उत्तर: (B) नवपाषाण क्रांति

प्रश्न 17. मेहरगढ़ किस नदी के किनारे स्थित था?

(A) नील

(B) बोलन

(C) हुआंग हे

(D) टिगरिस

उत्तर: (B) बोलन

प्रश्न 18. मेहरगढ़ में लगभग किस समय से नवपाषाण जीवन के प्रमाण मिलते हैं?

(A) 7000 ईसा पूर्व

(B) 3000 ईसा पूर्व

(C) 1500 ईसा पूर्व

(D) 500 ईसा पूर्व

उत्तर: (A) 7000 ईसा पूर्व

प्रश्न 19. मेहरगढ़ के लोग निम्नलिखित में से किस फसल की खेती करते थे?

(A) गेहूँ और जौ

(B) चाय और कॉफी

(C) कपास और चाय

(D) केवल चावल

उत्तर: (A) गेहूँ और जौ

प्रश्न 20. ताम्रपाषाण काल में किस धातु का उपयोग पत्थर के औजारों के साथ होने लगा?

(A) लोहा

(B) सोना

(C) तांबा

(D) चाँदी

उत्तर: (C) तांबा

प्रश्न 21. कांस्य किसका मिश्रण है?

(A) लोहा और कार्बन

(B) तांबा और टिन

(C) सोना और चाँदी

(D) तांबा और लोहा

उत्तर: (B) तांबा और टिन

प्रश्न 22. कांस्य युग की सभ्यताओं की प्रमुख विशेषताओं में से एक क्या थी?

(A) केवल शिकार

(B) नगरों, व्यापार और लेखन का विकास

(C) केवल गुफाओं में निवास

(D) कृषि का पूर्ण अभाव

उत्तर: (B) नगरों, व्यापार और लेखन का विकास

प्रश्न 23. कालीबंगा में मिले जुताई किए हुए खेत किस गतिविधि का प्रमाण देते हैं?

(A) समुद्री व्यापार

(B) व्यवस्थित कृषि

(C) धातु निर्माण

(D) मछली पकड़ने

उत्तर: (B) व्यवस्थित कृषि

प्रश्न 24. हड़प्पाई सभ्यता में मानकीकृत बाटों का उपयोग मुख्यतः किससे संबंधित था?

(A) संगीत

(B) व्यापार और आर्थिक गतिविधियाँ

(C) धार्मिक अनुष्ठान मात्र

(D) युद्ध प्रशिक्षण

उत्तर: (B) व्यापार और आर्थिक गतिविधियाँ

प्रश्न 25. हड़प्पाई लिपि के बारे में सही कथन कौन-सा है?

(A) इसे पूरी तरह पढ़ लिया गया है

(B) यह केवल मिस्र में प्रयोग होती थी

(C) इसे अभी तक पूरी तरह decipher नहीं किया गया है

(D) यह केवल मौखिक भाषा थी

उत्तर: (C) इसे अभी तक पूरी तरह decipher नहीं किया गया है

प्रश्न 26. निम्नलिखित में से कौन-सी चार प्रमुख नदी-घाटी सभ्यताओं में शामिल नहीं है?

(A) सिन्धु–सरस्वती

(B) मेसोपोटामिया

(C) मिस्र

(D) रोमन

उत्तर: (D) रोमन

प्रश्न 27. मेसोपोटामिया किन दो नदियों के बीच विकसित हुआ?

(A) नील और सिंधु

(B) टिगरिस और यूफ्रेटीस

(C) हुआंग हे और यांग्त्सी

(D) गंगा और यमुना

उत्तर: (B) टिगरिस और यूफ्रेटीस

प्रश्न 28. ‘Mesopotamia’ शब्द का अर्थ क्या है?

(A) काली भूमि

(B) दो नदियों के बीच की भूमि

(C) पहाड़ों की भूमि

(D) समुद्र के किनारे की भूमि

उत्तर: (B) दो नदियों के बीच की भूमि

प्रश्न 29. मेसोपोटामिया की सबसे प्रारम्भिक नगर-आधारित सभ्यता कौन-सी थी?

(A) सुमेरियन

(B) मिस्र की

(C) चीनी

(D) रोमन

उत्तर: (A) सुमेरियन

प्रश्न 30. जिग्गुरात (Ziggurat) क्या था?

(A) एक प्रकार का हथियार

(B) सीढ़ीनुमा मंदिर-संरचना

(C) एक प्रकार की नाव

(D) कृषि उपकरण

उत्तर: (B) सीढ़ीनुमा मंदिर-संरचना

प्रश्न 31. सुमेरियनों की लेखन प्रणाली को क्या कहा जाता था?

(A) Hieroglyphic

(B) Cuneiform

(C) Devanagari

(D) Logographic

उत्तर: (B) Cuneiform

प्रश्न 32. Cuneiform लेखन सामान्यतः किस पर किया जाता था?

(A) गीली मिट्टी की पट्टियों पर

(B) केवल पत्थर की दीवारों पर

(C) कपड़े पर

(D) लकड़ी की पट्टियों पर

उत्तर: (A) गीली मिट्टी की पट्टियों पर

प्रश्न 33. सुमेरियनों की संख्या प्रणाली किस संख्या पर आधारित थी?

(A) 5

(B) 10

(C) 12

(D) 60

उत्तर: (D) 60

प्रश्न 34. मिस्र की सभ्यता का विकास मुख्यतः किस नदी के किनारे हुआ?

(A) नील

(B) सिंधु

(C) टिगरिस

(D) हुआंग हे

उत्तर: (A) नील

प्रश्न 35. मिस्रवासी अपनी भूमि को Kemet क्यों कहते थे?

(A) वहाँ बहुत अधिक पहाड़ थे

(B) वहाँ काली और उपजाऊ नदी-मिट्टी थी

(C) वहाँ बहुत अधिक सोना था

(D) वहाँ कोई नदी नहीं थी

उत्तर: (B) वहाँ काली और उपजाऊ नदी-मिट्टी थी

प्रश्न 36. मिस्र की लेखन प्रणाली को क्या कहा जाता था?

(A) Cuneiform

(B) Hieroglyphic

(C) Microlithic

(D) Pictorial Roman

उत्तर: (B) Hieroglyphic

प्रश्न 37. मिस्रवासियों की ममीकरण प्रक्रिया मुख्यतः किस विश्वास से जुड़ी थी?

(A) शरीर को सुरक्षित रखने से मृत्यु के बाद ka के अस्तित्व से

(B) व्यापार बढ़ाने से

(C) खेती करने से

(D) युद्ध में विजय से

उत्तर: (A) शरीर को सुरक्षित रखने से मृत्यु के बाद ka के अस्तित्व से

प्रश्न 38. प्राचीन चीनी सभ्यता मुख्यतः किस नदी के बेसिन में विकसित हुई?

(A) नील

(B) हुआंग हे

(C) यूफ्रेटीस

(D) सिंधु

उत्तर: (B) हुआंग हे

प्रश्न 39. चीन की महान दीवार के प्रारम्भिक निर्माण का एक प्रमुख उद्देश्य क्या था?

(A) सिंचाई करना

(B) घुमंतू समूहों के हमलों से सुरक्षा करना

(C) व्यापारिक वस्तुओं को संग्रहित करना

(D) खेती करना

उत्तर: (B) घुमंतू समूहों के हमलों से सुरक्षा करना

प्रश्न 40. सिन्धु–सरस्वती और मेसोपोटामिया सभ्यताओं के बीच संपर्क का प्रमुख कारण क्या था?

(A) दोनों भौगोलिक रूप से अपेक्षाकृत निकट थे

(B) दोनों एक ही नदी के किनारे स्थित थीं

(C) दोनों में एक ही भाषा बोली जाती थी

(D) दोनों एक ही शासक के अधीन थीं

उत्तर: (A) दोनों भौगोलिक रूप से अपेक्षाकृत निकट थे

उत्तर कुंजी (Answer Key)

1-B, 2-D, 3-C, 4-D, 5-B, 6-C, 7-B, 8-B, 9-D, 10-C
11-A, 12-B, 13-B, 14-B, 15-B, 16-B, 17-B, 18-A, 19-A, 20-C
21-B, 22-B, 23-B, 24-B, 25-C, 26-D, 27-B, 28-B, 29-A, 30-B
31-B, 32-A, 33-D, 34-A, 35-B, 36-B, 37-A, 38-B, 39-B, 40-A

📘

Social Science

Class 9 (Hindi Medium)

NCERT Social Science Textbook

Chapter-wise NCERT Solutions for Class 6 to 12 prepared according to the latest CBSE syllabus.

Hindi Medium

Class 9 Social Science Solutions

NCERT Solutions Class 9 Social Science

Chapter सामाजिक विज्ञान की समझ Solutions

सामाजिक विज्ञान की समझ Open Chapters

Explore Now →
Class 9 Social Science Solutions

NCERT Solutions Class 9 Social Science

Chapter पृथ्वी की सतह का स्वरूप निर्धारण Solutions

पृथ्वी की सतह का स्वरूप निर्धारण Open Chapters

Explore Now →
Class 9 Social Science Solutions

NCERT Solutions Class 9 Social Science

Chapter वायुमंडल और जलवायु Solutions

वायुमंडल और जलवायु Open Chapters

Explore Now →
Class 9 Social Science Solutions

NCERT Solutions Class 9 Social Science

Chapter प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ Solutions

प्रारम्भिक मानव और सभ्यता का आरम्भ Open Chapters

Explore Now →
Class 9 Social Science Solutions

NCERT Solutions Class 9 Social Science

Chapter 1000 ईस्वी तक राज्य और समाज Solutions

1000 ईस्वी तक राज्य और समाज Open Chapters

Explore Now →
Class 9 Social Science Solutions

NCERT Solutions Class 9 Social Science

Chapter लोकतंत्र Solutions

लोकतंत्र Open Chapters

Explore Now →
Class 9 Social Science Solutions

NCERT Solutions Class 9 Social Science

Chapter चुनाव Solutions

चुनाव Open Chapters

Explore Now →

Class 9 NCERT Book Solutions

Chapter-wise NCERT Solutions for Class 6 to 12 prepared according to the latest CBSE syllabus.

ENGLISH MEDIUM

Class 9 Science Solutions

NCERT Solutions Class 9 Science

Class 9 Science Book Solutions

Science Open Book

Explore Now →
Class 9 Geography Solutions

NCERT Solutions Class 9 Geography

Class 9 Geography Book Solutions

Open Book

Explore Now →
Class 9 Economics Solutions

NCERT Solutions Class 9 Economics

Class 9 Economics Book Solutions

Open Book

Explore Now →
Class 9 Civics Solutions

NCERT Solutions Class 9 Civics

Class 9 Civics Book Solutions

Open Book

Explore Now →
Class 9 History Solutions

NCERT Solutions Class 9 History

Class 9 History Book Solutions

Open Book

Explore Now →
Class 9 Mathematics Solutions

NCERT Solutions Class 9 Mathematics

Class 9 Mathematics Book Solutions

Mathematics Open Book

Explore Now →
Class 9 Beehive (English) Solutions

NCERT Solutions Class 9 Beehive (English)

Class 9 Beehive (English) Book Solutions

Open Book

Explore Now →
Class 9 Mathematics Ganita Manjari Solutions

NCERT Solutions Class 9 Mathematics Ganita Manjari

Class 9 Mathematics Ganita Manjari Book Solutions

GANITA MANJARI Open Book

Explore Now →
Class 9 Social Science Solutions

NCERT Solutions Class 9 Social Science

Class 9 Social Science Book Solutions

Understanding Society India and Beyond PART-I Open Book

Explore Now →

Benefits of Studying NCERT Solutions

Studying from NCERT Solutions helps students build strong conceptual understanding and improve problem-solving skills. These solutions are especially useful for revision because every answer is written according to the marking scheme followed by CBSE.

  • Improve conceptual understanding.
  • Learn correct answer-writing techniques.
  • Prepare effectively for school examinations.
  • Complete syllabus revision in less time.
  • Practice important textbook questions.
  • Build confidence before examinations.

Prepared According to the Latest CBSE Syllabus

All NCERT Book Solutions for Class 9 available on ATP Education are updated according to the latest CBSE curriculum. Whenever NCERT introduces changes in textbooks or syllabus, our study materials are revised accordingly so that students always receive accurate and updated content.

Helpful for Competitive Examinations

NCERT textbooks form the foundation of many competitive examinations. Students preparing for Olympiads, NTSE, CUET, UPSC Foundation, SSC and several entrance examinations can strengthen their basics through these chapter-wise solutions. Understanding NCERT concepts also improves analytical thinking and logical reasoning.

Simple and Student-Friendly Explanations

Our experts prepare every answer in a simple, clear and student-friendly format. Difficult concepts are explained step by step with proper reasoning so that students of every learning level can understand them easily. This approach helps students remember concepts for a longer period and perform confidently during examinations.

Start Learning with ATP Education

Explore the complete collection of NCERT Solutions for Class 9 and begin your preparation with confidence. Every chapter is available online for free and can be accessed anytime. Whether you want to complete homework, revise important chapters or prepare for examinations, ATP Education provides reliable and high-quality study resources to help you achieve academic success.