3. परमाणु एवं अणु - Class 9 Science Hindi CBSE Notes
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CBSE Notes for Class 9 – Chapter-wise Revision Notes
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3. परमाणु एवं अणु - Class 9 Science Hindi CBSE Notes
3. परमाणु एवं अणु
अध्याय: परमाणु एवं अणु
तत्व(Element): किसी पदार्थ का वह मुल पदार्थ जिसे सरलीकृत नहीं किया जा सके तत्व कहलाता है |
जैसे- हाइड्रोजन, कार्बन, ऑक्सीजन, आयरन, चाँदी और सोना आदि |
परमाणु (Atom): पदार्थ का वह सूक्ष्मतम कण जिसे और आगे विभाजित नहीं किया जा सके वह परमाणु कहलाता है |
अणु (Molecules): एक ही तत्व या भिन्न-भिन्न के दो या दो से अधिक परमाणुओं के समूह जो रासायनिक से एक दुसरे से बंधे होते है अणु कहलाते हैं |
उदाहरण: O2, H2, N2, H2O, CO2, MgCl2 इत्यादि |
यौगिक (Compound): अणु जो एक से अधिक तत्वों से मिलकर बना है यौगिक कहलाता है |
उदाहरण: H2O, CO2, NH3, BrCl2, CH4 इत्यादि |
किसी तत्व के सबसे छोटे कण परमाणु होते हैं | जैसे - हाइड्रोजन के परमाणु (H), ऑक्सीजन के परमाणु (O), कार्बन के परमाणु (C), मैग्नीशियम के परमाणु (Mg) इत्यादि |
परमाणु की अवधारणा :
सभी द्रव्यों की रचनात्मक इकाई परमाणु होता है |
दुसरे शब्दों में, जैसे एक मकान की संरचनात्मक इकाई एक ईंट होता है ठीक उसी प्रकार सभी द्रव्यों की संरचनात्मक इकाई परमाणु है जिससे वह पदार्थ बना है |
परमाणु त्रिज्या को नेनोमीटर (nm) में मापा जाता है |
1 nm = 10-9 m
1 m = 109 nm
अत: सभी पदार्थ इन तत्वों के छोटे -छोटे कणों परमाणु से मिलकर बने हैं |
पदार्थ का निर्माण
तत्वों के परमाणु (Atoms of elements)
⇓
अणु या परमाणु (Molecules Or atoms)
⇓
यौगिक (Compounds)
⇓
पदार्थ (Matters)
रासायनिक संयोजन का नियम (Laws of Chemical Combination):
रासायनिक संयोजन का नियम अन्तोनी एल. लावोइजिए (Antonie L. Lavoisier) और जोशेफ़ एल. प्रोउस्ट (Joseph L. Proust) ने प्रतिपादित किये |
रासायनिक संयोजन के दो नियम है :
1. द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of conservation of mass): द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार किसी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का नहीं तो सृजन होता है और नहीं विनाश होता है |
नोट: इसका अर्थ यह हुआ कि किसी भी रासायनिक समीकरण के दो भाग होते है (i) अभिकारक और (ii) उत्पाद तो यदि हम उस अभिक्रिया में अभिकारक के रूप में मान लीजिये कि 2 ग्राम हाइड्रोजन और 16 ग्राम ऑक्सीजन का उपयोग करते है तो उत्पाद में कुल 18 ग्राम जल प्राप्त होगा | इसका मतलब यह हुआ कि अभिक्रिया के दौरान अभिकारक के पदार्थ नहीं तो घटेगा और नहीं वह उत्पाद के साथ बढेगा |
2. निश्चित अनुपात का नियम (Law of constant proportions): इस नियम के अनुसार "किसी भी यौगिक में तत्व सदैव एक निश्चित द्रव्यमान के अनुपात में विद्यमान होते हैं |"
नोट: इसका अर्थ यह हुआ कि कोई यौगिक चाहे वह किसी भी प्रान्त, देश, महादेश अथवा सृष्टि के किसी भी भाग का क्यों न हो यदि वह वही यौगिक है जिसके तत्व निश्चित अनुपात में हैं और हम जिसकी चर्चा कर रहे है तो वह भी उसी अनुपात में होगा | उदाहरण के लिए हमने पृथ्वी से जल का एक नमूना लिया और देखा की इसमे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन 1 : 8 के अनुपात में है | तो यदि चाँद पर मिले जल के नमूने में भी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ही होंगे और वे भी 1 : 8 के अनुपात में ही होंगे |
डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (Dalton's Atomic Theory):
ब्रिटिश रसायनशास्त्री जॉन डाल्टन ने पदार्थ के प्रकृति के बारे में एक अधारभूत सिद्धांत प्रस्तुत किया। डाल्टन ने द्रव्यों की विभाज्यता का विचार प्रदान किया जिसे उस समय तक दार्शनिकता माना जाता था। ग्रीक दार्शनिकों के द्वारा द्रव्यों के सूक्ष्मतम अविभाज्य कण, जिसे परमाणु नाम दिया था, उसे डाल्टन ने भी परमाणु नाम दिया। डाल्टन का यह सिद्धांत रासायनिक संयोजन के नियमों पर आधरित था।
डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के अनुसार, "सभी द्रव्य चाहे तत्व, यौगिक या मिश्रण हो, सूक्ष्म कणों से बने होते हैं जिन्हें परमाणु कहते हैं।"
डाल्टन के परमाणु सिद्धांत की अवधारणा (The postulates of dalton's theory):
(i) सभी द्रव्य परमाणुओं से निर्मित होते हैं।
(ii) परमाणु अविभाज्य सूक्ष्मतम कण होते हैं जो रासायनिक अभिक्रिया में न तो सृजित होते हैं
न ही उनका विनाश होता है।
(iii) दिए गए तत्व के सभी परमाणुओं का द्रव्यमान एवं रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं।
(iv) भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान एवं रासायनिक गुणधर्म भिन्न-भिन्न होते हैं।
(v) भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु परस्पर छोटी पूर्ण संख्या के अनुपात में संयोग कर यौगिक
निर्मित करते हैं।
(vi) किसी भी यौगिक में परमाणुओं की सापेक्ष संख्या एवं प्रकार निश्चित होते हैं।
तत्वों के नाम और उनका प्रतिक चिन्ह (The name of elements and its symbol):
आजकल इंटरनेशनल यूनियन ऑफ़ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री IUPAC तत्वों के नामों को स्वीकृति प्रदान करती है। अधिकतर तत्वों के प्रतीक उन तत्वों के अंगे्रजी नामों के एक या दो अक्षरों से बने होते हैं। किसी प्रतीक के पहले अक्षर को सदैव बड़े अक्षर (Capital Letter) में तथा दूसरे अक्षर को छोटे अक्षर (small letter) में लिखा जाता है।
उदाहरण:
हाइड्रोजन : H
कार्बन: C
एल्युमीनियम: Al
मैग्नेशियम : Mg
कुछ तत्वों के प्रतीक उनके अंग्रेजी नामों के प्रथम अक्षर तथा बाद में आने वाले किसी एक अक्षर
को संयुक्त करके बनाते हैं।
उदाहरण के लिए :
(i) क्लोरीन, Cl,
(ii) जिंक, Zn इत्यादि.
प्रत्येक तत्व के नाम और उनके प्रतिक चिन्ह भिन्न होता है |
कुछ तत्वों के उदाहरण और उनके प्रतिक चिन्ह:
| तत्व | प्रतिक चिन्ह | तत्व | प्रतिक चिन्ह |
|
एल्युमिनियम आर्गन बेरियम बोरोन कैल्शियम कार्बन क्लोरीन' |
Al Ar Ba B Br C Cl |
कॉपर फ्लोरीन सोना हाइड्रोजन आयोडीन लोहा सीसा |
Cu F Au H I Fe Pb |
3. परमाणु एवं अणु
परमाणु द्रव्यमान Atomic Mass:
डाल्टन के परमाणु सिद्धांत की उपलब्धियाँ (Achievvements of Dalton's Atomic Theory):
(i) डाल्टन के परमाणु सिद्धांत में परमाणु द्रव्यमान सबसे विशिष्ट संकल्पना थी और उनके अनुसार प्रत्येक तत्व का एक अभिलाक्षणिक परमाणु द्रव्यमान होता है |
(ii) डाल्टन का सिद्धांत स्थिर अनुपात के नियम को इतनी भली-भाँति समझाने में समर्थ था कि वैज्ञानिक इससे प्रेरित होकर परमाणु द्रव्यमान को मापने की ओर अग्रसर हुए।
(iii) एक परमाणु के द्रव्यमान को ज्ञात करना अपेक्षाकृत कठिन कार्य था इसलिए रासायनिक संयोजन के नियमों के उपयोग एवं उत्पन्न यौगिको के द्वारा सापेक्ष परमाणु द्रव्यमानों को ज्ञात किया गया।
परमाणु द्रव्यमान इकाई :
कार्बन -12 समस्थानिक (isotope) के एक परमाणु द्रव्यमान के 1/12 वें भाग को परमाणु द्रव्यमान इकाई के मानक इकाई के रूप में लिया गया है | और इसी के आधार पर अन्य परमाणुओं के द्रव्यमान को प्राप्त किया गया है |
परिभाषा: किसी तत्व के सापेक्षिक परमाणु द्रव्यमान को उसके परमाणुओं के औसत द्रव्यमान का कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान के 1/12वें भाग के अनुपात को परमाणु द्रव्यमान इकाई कहते है |
परमाणु द्रव्यमान इकाई को पहले amu से लिखा जाता था लेकिन वर्त्तमान में अब 'u' यूनिफाइड द्रव्यमान द्वारा प्रदर्शित किया जाता है |
उदाहरण:
ऑक्सीजन (O) का परमाणु द्रव्यमान = 16u
जिंक (Zn) का परमाणु द्रव्यमान = 65u
सोडियम (Na) का परमाणु द्रव्यमान = 23u
कार्बन (C) का परमाणु द्रव्यमान = 12u
परमाणु का अस्तित्व:
अधिकांश तत्वों के परमाणु स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में नहीं रह पाते। परमाणु अणु एवं आयन बनाते हैं। ये अणु अथवा आयन अत्यधिक संख्या में पुंजित होकर द्रव्य अर्थात पदार्थ का निर्माण करते हैं |
अणु (Molecule):
अणु ऐसे दो या दो से अधिक परमाणुओं का समूह होता है जो आपस में रासायनिक बंध् द्वारा
जुड़े होते है अथवा वे परस्पर आकर्षण बल के द्वारा कसकर जुड़े होते हैं। यह किसी तत्व या यौगिक का सूक्ष्मतम कण होता है |
अणु के गुण (Properties of Melecules) :
(i) ये स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकते हैं |
(ii) किसी तत्व या यौगिक का अणु उस तत्व या यौगिक के सभी गुण धर्म को प्रदर्शित करते हैं |
(iii) एक ही तत्व के परमाणु अथवा भिन्न-भिन्न तत्वों के' परमाणु परस्पर संयोग करके अणु निर्मित करते हैं।
तत्वों के परमाणु (Atoms of Elements) :
(i) किसी तत्व के अणु एक ही प्रकार के परमाणुओं द्वारा संरचित होते हैं |
(ii) आर्गन (Ar) हीलियम (He) इत्यादि जैसे अनेक उत्कृष्ट (गैसों) तत्वों के अणु उसी तत्व के केवल एक परमाणु द्वारा निर्मित होते हैं। अत: ये एक परमाणुक होते हैं क्योंकि उत्कृष्ट गैसें किसी भी तत्व से यहाँ तक की खुद से भी संयोजन नहीं करती है |
अणु की परमाणुकता (Atomicity of Atom):
किसी अणु संरचना में प्रयुक्त होने वाले परमाणुओं की संख्या को उस अणु की परमाणुकता कहते है | जैसे -
ऑक्सीजन के अणु (O2) की परमाणुकता 2 है |
फोस्फोरस के अणु (P4) की परमाणुकता 4 है |
सल्फर के अणु (S8) की परमाणुकता 8 है |
अत: किसी तत्व के अणु या यौगिक जितने परमाणुओं से मिलकर बने होते है वही संख्या उस तत्व या यौगिक की परमाणुकता होती है |
यह निम्नलिखित प्रकार के होते है :
(i) एक परमाणुक (Monoatomic): आर्गन (Ar) हीलियम (He) इत्यादि जैसे अनेक उत्कृष्ट (गैसों) तत्वों के अणु केवल एक परमाणु द्वारा निर्मित होते हैं। अत: इन्हें एक परमाणुक कहते है |
उदाहरण:
(a) हीलियम (He)
(b) आर्गन (Ar)
(c) निओन (Ne)
(d) क्रीप्टोन (Kr)
(e) जेक्नोंन (Xe)
(f) राडोन (Rn)
(ii) द्वि परमाणुक (Diatomic): कुछ तत्व जैसे ऑक्सीजन, हाइड्रोजन और क्लोरीन आदि अपने दो परमाणुओं से अणु बनाते हैं | ऐसे तत्व को द्वि-परमाणुक अणु कहते हैं |
उदाहरण:
(a) हाइड्रोजन (H2)
(b) ऑक्सीजन (O2)
(c) नाइट्रोजन (N2)
(d) फ्लोरीन (F2)
(e) क्लोरीन (Cl2)
(f) ब्रोमिन (Br2)
(iii) त्रि-परमाणुक (Triatomic): वह अणु जो तीन परमाणुओं से मिलकर बना होता है त्रि-परमाणुक अणु कहलाता है |
जैसे - ओजोन (O3)
(iv) चतुर्परमाणुक (Tetra-atomic): किसी तत्व के वें अणु जिसमें चार परमाणु होते हैं चतुर्परमाणुक अणु कहलाता है |
जैसे - फोस्फोरस (P4)
(v) बहु-परमाणुक (Poly-atomic): किसी तत्व के वें अणु जिसमें परमाणुओं की संख्या चार से अधिक हो बहुपरमाणुक अणु कहलाता है | जैसे -
(a) सल्फर (S8)
(b) फुलेरिन (C60)
(c) बोरोन (B12)
यौगिकों के अणु
भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु एक निश्चित अनुपात में परस्पर जुड़कर यौगिकों के अणु का निर्माण करते हैं।
जैसे -
| यौगिक | संयुक्त तत्व | द्रव्यमान का अनुपात |
|
जल (H2O) अमोनिया (NH4) कार्बन डाइऑक्साइड |
हाइड्रोजन और ऑक्सीजन नाइट्रोजन और हाइड्रोजन कार्बन और ऑक्सीजन |
1 : 8 14: 3 3 : 8 |
3. परमाणु एवं अणु
नोट: इस पाठ के अन्य विषय जैसे अणु और आयन का बनना को समझने के लिए सबसे पहले हमें परमाणु के अवपरमाणुक कणों जैसे प्रोट्रांन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रान के बारे में समझना होगा | इलेक्ट्रॉनो के वितरण (electronic configuration) और संयोजकता (velency) को जानना होगा | वैसे इन विषयों को इस पुस्तक के अध्याय 4 परमाणु की संरचना में पढना है |
किसी भी परमाणु में चाहे वो किसी भी तत्व का परमाणु क्यों न हो सभी में तीन अवपरमाणुक कण होते हैं |
(i) प्रोट्रान: यह धन आवेशित (+) कण होता है जो परमाणु के नाभिक में रहता है | यह तत्व के सभी रासायनिक गुण धर्म को प्रदर्शित करता है | परमाणु में प्रोट्रान के घटने या बढ़ने से उसके रासायनिक गुणधर्म भी बदल जाते हैं |
(ii) इलेक्ट्रान: परमाणु: यह ऋण आवेशित (-) कण है जो नाभिक के चारों ओर भिन्न-भिन्न और निश्चित कक्षाओं में चक्कर काटते हैं |
(iii) न्यूट्रॉन: न्यूट्रॉन परमाणु के नाभिक में उपस्थित बिना आवेश वाला कण है जिस पर कोई आवेश नहीं होता है |
उदासीन परमाणु: समान्यत: कोई भी परमाणु उदासीन होता है क्योंकि परमाणु में धन प्रोट्रानो की संख्या ऋण इलेक्ट्रानों की संख्या के बराबर होता है यही कारण है कि किसी भी परमाणु पर नेट आवेश शून्य होता है और परमाणु उदासीन होता है |
जैसे ऑक्सीजन (O) के परमाणु में 8 धन प्रोट्रान होते है उतनी ही ऋण इलेक्ट्रान होते है |
इलेक्ट्रोनिक विन्यास (Electronic Configuration): किसी परमाणु के विभिन्न कोशों में इलेक्ट्रोनों के वितरण को इलेक्ट्रोनिक विन्यास कहते हैं |
हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक संरचना:

हाइड्रोजन में 1 इलेक्ट्रान होता है अत: इसके बाह्यतम कक्षा K में केवल एक ही इलेक्ट्रान रहता है |
कार्बन के परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक संरचना:

कार्बन के पास कुल 6 इलेक्ट्रॉन्स होते है तो इसके सबसे भीतरी कक्षा K में 2 इलेक्ट्रान रहता है और बहरी कक्षा L में शेष बचे 4 इलेक्ट्रॉन्स रहता है |
ये कोश होते हैं :
K, L, M, N आदि
कोश K में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन्स रह सकते हैं |
कोश L में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन्स रह सकते हैं |
कोश M में अधिकतम 18 इलेक्ट्रॉन्स रह सकते हैं और
कोश N में अधिकतम 32 इलेक्ट्रॉन्स रह सकते हैं |
कोशों में अधिकतम इलेक्ट्रॉन्स को रखने के लिए एक सूत्र है: 2n2
जिसके आधार अधिकतम इलेक्ट्रॉन्स की संख्या ज्ञात की जाती है :
जैसे पहले कोश K के लिए : 2(1)2 = 2 x 1 = 2
दुसरे कोश L के लिए : 2(2)2 = 2 x 4 = 8
तीसरे कोश M के लिए : 2(3)2 = 2 x 9 = 18
चौथे कोश N के लिए : 2(4)2 = 2 x 16 = 32
संयोकजता (valency): किसी परमाणु के बाह्यतम कक्षा में उपस्थिति संयोजी इलेक्ट्रॉन्स की संख्या को उस तत्व की संयोजकता कहते हैं |
जैसे :
कुछ तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और उनकी संयोजकता:
जैसे किसी तत्व के बाह्यतम कक्षा में 1 इलेक्ट्रॉन् है तो उसकी संयोजकता 1 ही होगी | यदि उसके बाह्यतम कक्षा में 2 , 3 या 4 है तो उसकी संयोजकता भी क्रमश: 2, 3 या 4 होगी | यदि बाह्यतम कोश में 5, 6 या 7 इलेक्ट्रॉन्स है तो संयोजकता निम्नानुसार ज्ञात किया जाता है |
जब बाह्यतम कोश में 5 हो तो संयोजकता = 8 - 5 = 3
जब बाह्यतम कोश में 6 हो तो संयोजकता = 8 - 6 = 2
जब बाह्यतम कोश में 7 हो तो संयोजकता = 8 - 7 = 1
जब बाह्यतम कोश में 8 हो तो संयोजकता = 8 - 8 = 0
अब यह तालिका देखिए:

किसी परमाणु के आवेशित कणों को आयन कहते है | आयन:
- धातु एवं अधातु युक्त आवेशित कणों से बने होते है |
- इन आयनों पर ऋण अथवा धन आवेश होता है |
- ऋण आवेशित कण को ऋणायन (anion) तथा धन आवेशित कण को धनायन (cation) कहते है |
- जो तत्व धनायन (cation) बनाते है उनपर (+) का चिन्ह लगा कर दर्शाया जाता है और जो ऋणायन (anion) बनाते है उन पर (-) का चिन्ह लगाया जाता है |
- आयन एक आवेशित परमाणु अथवा परमाणुओं का एक ऐसा समूह होता है
जिस पर नेट आवेश विद्यमान होता है।
बहुपरमाणुक आयन:
परमाणुओं के समूह जिन पर नेट आवेश विद्यमान हो उसे बहुपरमाणुक आयन कहते हैं।
उदाहरण:
N3- + H44+ = NH4+
यहाँ नाइट्रोजन पर 3 ऋण आवेश है और हाइड्रोजन पर 4 धन आवेश है तो कुल नेट आवेश अर्थात शुद्ध आवेश 1 धन (+) प्राप्त होगा | अत: यह अणु एक धन आवेश (+) वाला बहुपरमाणविक आयन बनाएगा |
अमोनियम (Ammonium) NH4+
कार्बोनेट (Carbonate) CO3-
हाइड्रोऑक्साइड (Hydroxide) OH-
नाइट्रेट (Nitrate) NO3-
नाइट्राइट (Nitrite) NO2-
फॉस्फेट (Phosphate) PO43-
सल्फेट (Sulfate) SO42-
सल्फाईट (Sulfite) SO32-
परमाणु तथा आयन में अंतर:
परमाणु:
1. यह विद्युत उदासीन कण होते हैं |परमाणु :
2. इसमें प्रोट्रॉन तथा इलेक्ट्रान बराबर संख्या में होते हैं |
3. अक्रिय गैस को छोड़कर सभी परमाणुओं का इलेक्ट्रोनिक रचनाएँ अस्थायी होते हैं |
4. ये स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में नहीं रह सकते हैं |
5. ये आयनिक अभिक्रिया में भाग नहीं लेते हैं |
6. ये अस्तित्व में बने रहने के लिए इलेक्ट्रॉन्स की साझेदारी करते हैं |
आयन:
1. यह विद्युत आवेशित कण होते हैं |
2. इसमें प्रोट्रॉन तथा इलेक्ट्रान बराबर संख्या में नहीं होते हैं |
3. आयनों का इलेक्ट्रोनिक रचनाएँ स्थायी होते हैं |
4. ये स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकते हैं |
5. ये आयनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं |
6. ये अस्तित्व में बने रहने के लिए इलेक्ट्रान को ग्रहण करते है या त्याग करते है |
3. परमाणु एवं अणु
रासायनिक सूत्र लिखते समय निम्न नियमों का पालन करे :
(i) आयन की संयोजकता अथवा आवेश संतुलित होना चाहिए।
(ii) जब एक यौगिक किसी धातु एवं अधातु के संयोग से निर्मित होता है तो धातु के नाम अथवा उसके प्रतीक को रासायनिक सूत्रा में पहले लिखते हैं। उदाहरणार्थः कैल्सियम आॅक्साइड
(CaO) सोडियम क्लोराइड (NaCl) आयरन सल्फाइड (FeS) काॅपर आॅक्साइड (CuO) इत्यादि|
(iii) आॅक्सीजन, क्लोरीन, सल्फर अधातुयें हैं तथा उन्हें दायीं तरफ लिखते हैं, जबकि कैल्सियम, सोडियम, आयरन एवं काॅपर धातुएँ हैं तथा उन्हें बायीं तरपफ लिखते हैं।
(iv) बहुपरमाणुक आयनों द्वारा निर्मित यौगिकों में आयन को पहले कोष्ठक में रखते हैं। तत्पश्चात् अनुपातों को दर्शाने वाली संख्या को लिखते हैं।
द्विअंगी यौगिक: दो भिन्न-भिन्न तत्वों से निर्मित सरलतम यौगिकों को द्विअंगी यौगिक कहते हैं |
सरल यौगिकों के सूत्र लिखना:
आण्विक यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखते समय हम पहले संघटक तत्वों के प्रतीक लिखकर
उनकी संयोजकताएँ लिखते हैं तत्पश्चात् संयोजित परमाणुओं की संयोजकताओं को क्राॅस करके (cross over) अणु सूत्र लिखते हैं।

यहाँ अणु में भाग लेने वाले दोनों तत्व अधातु हैं |
उदाहरण 1:
हाइड्रोजन क्लोराइड का सूत्र:

अत: सूत्र : HCl
उदाहरण 2:
हाइड्रोजन सल्फाईड़ का सूत्र:

उदाहरण 3:
कार्बन टेट्राक्लोराइड का सूत्र:

अत: सूत्र : CCl4
आयनिक यौगिकों का सूत्र (Formula of Ionic Compound): इसमें पहला तत्व धातु होता है जो धनायन (cation) बनाता है और दूसरा तत्व अधातु होता है जो ऋणायन (anion) बनाता है |
मैग्नीशियम क्लोराइड का सूत्र:
मैग्नीशियम क्लोराइड का सूत्र ज्ञात करने के लिए पहले हम धनायन का संकेत (Mg+) लिखते हैं इसके पश्चात् ऋणायन क्लोराइड (Cl-) लिखते हैं। तत्पश्चात् इनके आवेशों को आड़ा-तिरछा (criss-cross) करके हम सूत्र प्राप्त करते हैं।
उदाहरण 4:

अत: सूत्र : MgCl2
उदाहरण 5:
ऐलुमिनियम ऑक्साइड का सूत्र:

अत: सूत्र : Al2O3
बहुपरमाणुक आयनों वाले यौगिक:
उदाहरण 6:
सोडियम नाइट्रेट का सूत्र:

अत: सूत्र : NaNO3
उदाहरण 6:

अत: सूत्र : (NH4)2SO4
आण्विक द्रव्यमान (Molecular Mass):
किसी पदार्थ का आण्विक द्रव्यमान उसके सभी संघटक परमाणुओं के द्रव्यमानों का योग होता है। जैसे- जल (H2O) का आण्विक द्रव्यमान
हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान = 1 u
ऑक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान = 16 u
जल के अणु में हाइड्रोजन के 2 अणु है और ऑक्सीजन के 1 अणु है
∴ जल का आण्विक द्रव्यमान = 2 x 1 + 16 = 18 u
इस प्रकार यह अणु का वह सापेक्ष द्रव्यमान है जिसे परमाणु द्रव्यमान इकाई (u) द्वारा व्यक्त किया जाता है।
सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass):
किसी पदार्थ का सूत्र इकाई द्रव्यमान उसके सभी संघटक परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग होता है। सूत्र द्रव्यमान का उपयोग तब करते हैं जब पदार्थ का संघटक आयन हों |
जैसे -
NaCl, CaCl2, Al2O3, MgCl2 आदि |
सूत्र द्रव्यमान का परिकलन उसी प्रकार से करते हैं जिस प्रकार से हमने आण्विक द्रव्यमान का परिकलन किया है। अंतर केवल इतना होता है कि यहाँ पर हम उस पदार्थ के लिए सूत्र इकाई का उपयोग करते हैं, जिसके संघटक आयन होते हैं।
- किसी पदार्थ की मात्रा उसके द्रव्यमान से अथवा उसके परमाणुओं की संख्या से अभिलक्षित कर सकते हैं।
मोल (Mole):
मोल पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें कणों की संख्या (परमाणु, आयन, अणु या सूत्र इकाई इत्यादि) कार्बन-12 के ठीक 12 g में विद्यमान परमाणुओं के बराबर होती है। वह मात्रा उस पदार्थ का एक मोल कहलाता है |
मोल एक प्रकार से बहुत सारे परमाणुओं का ढेर (heap) है | जिसमें' किसी भी तत्व के परमाणुओं, अणुओं अथवा आयनों की संख्या 6.022 x 1023 होता है |
आवोगाद्रो संख्या आवोगाद्रो स्थिरांक: किसी पदार्थ के एक मोल में कणों (परमाणु, अणु अथवा आयन) की संख्या निश्चित होती है | जिसका मान 6.022 x 1023 होता है | इसी संख्या को आवोगाद्रो स्थिरांक या आवोगाद्रो संख्या कहते हैं |
जैसे -
| तत्व के परमाणु | परमाणु द्रव्यमान (u) | मात्रा (g) में | मोलों की संख्या | परमाणुओं की संख्या |
| हाइड्रोजन | 1 u | 1 g | 1 | 6.022 x 1023 |
| कार्बन | 12 u | 12 g | 1 | 6.022 x 1023 |
| नाइट्रोजन | 14 u | 14 g | 1 | 6.022 x 1023 |
| ऑक्सीजन | 16 u | 16 g | 1 | 6.022 x 1023 |
| सोडियम | 23 u | 23 g | 1 | 6.022 x 1023 |
तालिका को देखें और निम्न बातों को समझें :
-- हाइड्रोजन का 1 g परमाणु में 1 मोल होता है और उस 1 मोल में परमाणुओं की संख्या 6.022 x 1023 होती है |
-- कार्बन का 12 g परमाणु में 1 मोल होता है और उस 1 मोल में परमाणुओं की संख्या 6.022 x 1023 होती है |
-- ऑक्सीजन के 16 g परमाणु में 1 मोल होता है और उस 1 मोल में ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या 6.022 x 1023 होती है |
इसी प्रकार आप सभी परमाणु का मोल ज्ञात कर सकते है और उसमें परमाणुओं की संख्या ज्ञात कर सकते हैं |
अब इसे समझे :
-- हाइड्रोजन के 1 u में 1 परमाणु होता है |
-- कार्बन के 12 u में भी 1 परमाणु होता है |
-- नाइट्रोजन के 14 u में भी 1 परमाणु होता है |
-- ऑक्सीजन के 16 u में भी 1 परमाणु होता है |
इसी प्रकार आप सभी तत्वों के परमाणुओं का भी ज्ञात कर सकते हैं |
मोलर द्रव्यमान (Molar mass): किसी तत्व के परमाणुओं के एक मोल का द्रव्यमान को मोलर द्रव्यमान कहते है | परमाणुओं के मोलर द्रव्यमान को ग्राम परमाणु द्रव्यमान भी कहते हैं |
उदाहरण:
हाइड्रोजन के एक परमाणु का द्रव्यमान = 1 u
अत: हाइड्रोजन का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 1 g होगा, और 1 g हाइड्रोजन में हाइड्रोजन के 1 मोल परमाणु होते है और इस 1 मोल में हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या 6.022 x 1023 होता है |
इसी प्रकार कार्बन के 1 मोल का मोलर द्रव्यमान 12 g है |
ऑक्सीजन के 1 मोल का मोलर द्रव्यमान 16 g है |
सोडियम के 1 मोल का मोलर द्रव्यमान 23 g है |
इसीप्रकार:
1 u हाइड्रोजन में केवल 1 हाइड्रोजन परमाणु होता है |
4 u हीलियम में केवल 1 हीलियम परमाणु होता है |
12 u कार्बन में केवल 1 कार्बन परमाणु होता है |
Why Choose CBSE Notes for Class 9?
Reading the complete textbook is essential for building knowledge, but revision notes help students organize that knowledge effectively. Our CBSE Revision Notes for Class 9 summarize every chapter by highlighting important concepts, definitions, keywords, formulas, examples, and important points that students should remember during examinations. This approach saves valuable study time and makes revision much easier.
Students often find it difficult to revise lengthy chapters before examinations. Our notes solve this problem by presenting important information in a structured format that is easy to understand and remember. Regular revision using these notes helps improve confidence and strengthens conceptual clarity.
Chapter-wise Study Material
Each chapter included in the CBSE Notes for Class 9 section is prepared according to the latest academic session. Every topic is explained in simple language while maintaining accuracy and completeness. Students can easily revise important concepts, learn key points, and strengthen their understanding of each chapter.
The notes are suitable for daily classroom learning, homework preparation, revision before examinations, and self-study. They also serve as an excellent companion to NCERT textbooks by presenting the most important information in an organized manner.
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Chapter-wise NCERT Solutions for Class 6 to 12 prepared according to the latest CBSE syllabus.
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Chapter 1. हमारे आस-पास के पदार्थ (CBSE NOTES)
1. हमारे आस-पास के पदार्थ ()
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Chapter 2. क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध है (CBSE NOTES)
2. क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध है ()
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Chapter 3. परमाणु एवं अणु (CBSE NOTES)
3. परमाणु एवं अणु ()
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Chapter 4. परमाणु की संरचना (CBSE NOTES)
4. परमाणु की संरचना ()
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Chapter 5. जीवन की मौलिक इकाई (CBSE NOTES)
5. जीवन की मौलिक इकाई ()
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Chapter 7. जीवों में विविधता (CBSE NOTES)
7. जीवों में विविधता ()
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Chapter 9. बल और गति का नियम (CBSE NOTES)
9. बल और गति का नियम ()
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Chapter 10. गुरुत्वाकर्षण (CBSE NOTES)
10. गुरुत्वाकर्षण ()
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Chapter 11. कार्य और उर्जा (CBSE NOTES)
11. कार्य और उर्जा ()
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Chapter 13. हम बीमार क्यों होते है (CBSE NOTES)
13. हम बीमार क्यों होते है ()
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Chapter 14. प्राकृतिक संसाधन (CBSE NOTES)
14. प्राकृतिक संसाधन ()
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Chapter 15. खाद्ध्य संसाधनों में सुधार (CBSE NOTES)
15. खाद्ध्य संसाधनों में सुधार ()
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- Latest CBSE syllabus based notes.
- Chapter-wise revision material.
- Easy-to-understand explanations.
- Important concepts and key points.
- Quick revision before examinations.
- Useful for school tests and annual exams.
- Available in Hindi and English Medium.
- Free educational resources for every student.
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Success in examinations depends on regular practice, conceptual understanding, and effective revision. Our Class 9 CBSE Notes are designed to help students study smarter instead of studying longer. By revising chapter-wise notes regularly, learners can improve their understanding, remember important concepts for a longer period, and write better answers during examinations.
Along with these notes, students can also explore NCERT Solutions, MCQ Questions, Online Tests, Important Questions, Study Materials, and other learning resources available on ATP Education. Together, these resources provide complete academic support for effective learning and better examination preparation.
Start exploring the CBSE Notes for Class 9 today and make your learning journey easier with well-organized chapter-wise notes, quick revision material, and reliable study resources prepared especially for CBSE students.
Benefits of Studying with Our CBSE Notes
- Chapter-wise Coverage: Every chapter is explained in a structured and easy-to-follow format.
- Latest CBSE Syllabus: Notes are prepared according to the latest CBSE curriculum and NCERT guidelines.
- Quick Revision: Revise important concepts, formulas, definitions, and key points in less time.
- Simple Language: Difficult topics are explained in clear and student-friendly language for better understanding.
- Concept-Based Learning: Focus on understanding concepts instead of memorizing answers.
- Exam-Oriented Preparation: Helps students prepare effectively for class tests, unit tests, half-yearly, annual, and board examinations.
- Subject-wise Organization: Easily access notes for Mathematics, Science, English, Hindi, Social Science, Physics, Chemistry, Biology, Economics, and more.
- Time-Saving Study Material: Well-organized notes reduce study time and improve learning efficiency.
- Improves Answer Writing: Learn important points and present answers in a better and more organized manner.
- Boosts Confidence: Regular revision strengthens concepts and increases confidence before examinations.
- Free Learning Resource: Access high-quality CBSE Notes without any subscription or hidden charges.
- Available in Hindi & English Medium: Study comfortably in your preferred medium with chapter-wise notes.