NCERT Solutions for Class 9 – Complete Chapter-wise Study Material

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2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति - Class 9 History Hindi NCERT Solutions

2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति

Class 9 History Hindi Updated : 06 March 2026

Class 9 History – यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति

मुख्य बिंदु:-


  • उदारवादी एक विचारधारा है जिसमें सभी धर्मों को बराबर का सम्मान और जगह मिले | वे व्यक्ति मात्र के अधिकारों की रक्षा के पक्षधर थे|
  • समाजवादियों ने अपने प्रयासों में समन्वय लाने के लिए 1870 के दशक में द्वितीय इंटरनेशनल नाम से संस्था बनाई |
  • 1917 में ज़ार का शासन खत्म होने के कारण 85% जनता कृषि पर निर्भर थी| किसानो की दशा खराब थी| बेरोजगार किसान धर्मार्थ लंगरों में खाना खाते थे और खस्तहाल मकानों में रहते थे| मजदूरों की दशा भी ख़राब थी| 

  •  फरवरी 1917 में राजशाही के पतन और 1917 के ही अक्टूबर के मिश्रित घटनाओं को अक्टूबर क्रांति कहा जाता है | अक्टूबर क्रांति के जरिए रूस की सत्ता पर समाजवादियों ने कब्ज़ा किया|

  •  रूस में जार शासन में जनवरी 1905 ई0 के एक रविवार के दिन कुछ लोगों ने जुलुस निकालकर जार से मिलने और एक याचिका देने की कोशिश किया परन्तु जार के सैनिकों ने उन पर गोलियाँ बरसाई जिसमें लगभग एक हजार मजदूर मारे गए और कई हजार घायल हुए इसलिए इस हत्याकांड को खुनी रविवार के नाम से प्रसिद्ध हुआ |

  • समाजवादी निजी सम्पति का विरोध इसलिए कर रहे थे क्योंकि निजि सम्पतियाँ सामंतवाद और समाज में असंतुलन को जन्म देते है | 

  •  समाजवादी विचारधारा , जो समाज के पुर्नगठन का काम करती है |

  • रैडिकल समूह  किसी भी निजी सम्पतियों के विरोधी नहीं थे लेकिन केवल चंद लोगों के पास सम्पति के केन्द्रण के खिलाफ थे | 

  •  1914 तक यूरोप में समाजवादी कही भी सरकार बनाने में सफल इसलिए नहीं पाए पाए क्योंकि सरकरों में रुढ़िवादियों, उदारवादियों और रैडिकलों का ही दबदबा बना रहा | 

  • बोल्वेशिक रूस की एक राजनैतिक पार्टी थी जिसका नेता लेनिन था | उनकी तीन  माँगे  थी -युद्ध को तुरंत बंद किया जाए , सारी जमीन किसानों को सौप देनी चाहिए |और  बैंकों का राष्ट्रियकरण किया जाए|

  • रूस के किसान समय-समय पर सारी जमीन को अपने कम्यून को सौप देते थे और फिर प्रत्येक परिवार की जरुरत के अनुसार के हिसाब से किसानों की जमीन बाँटी जाती थी|

  •  1789 ई0 की फ्रांस की क्रांति जिसने विश्व में स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के तीन महान सिद्धांतों नींव राखी जो लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तंभ सिद्ध हुए | 

  •  सोवियत शब्द रूस में मजदूरों और किसानों के संघ को कहा जाता है | 

Class 9 History – यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति

50 Quick Revision Points (1 लाइन)

  1. 1917 की रूसी क्रांति आधुनिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी।

  2. इस क्रांति ने रूस में ज़ारशाही शासन का अंत कर दिया।

  3. रूस में 1917 से पहले ज़ार निकोलस द्वितीय का शासन था।

  4. ज़ार का शासन निरंकुश और दमनकारी था।

  5. रूस में समाज मुख्यतः किसान, मजदूर और कुलीन वर्ग में बँटा था।

  6. रूस की अधिकांश आबादी किसानों की थी।

  7. किसानों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी।

  8. उद्योगों के विकास के साथ मजदूर वर्ग का उदय हुआ।

  9. मजदूरों को लंबे समय तक काम करना पड़ता था।

  10. मजदूरों को बहुत कम मजदूरी मिलती थी।

  11. यूरोप में समाजवाद के विचार फैलने लगे थे।

  12. समाजवाद का मुख्य उद्देश्य समानता और श्रमिक अधिकारों की रक्षा था।

  13. समाजवादी निजी संपत्ति की असमानता का विरोध करते थे।

  14. कार्ल मार्क्स समाजवाद के प्रमुख विचारक थे।

  15. उन्होंने वर्ग संघर्ष का सिद्धांत दिया।

  16. रूस में कई क्रांतिकारी संगठन सक्रिय थे।

  17. इनमें से एक प्रमुख संगठन रूसी सोशल डेमोक्रेटिक वर्कर्स पार्टी था।

  18. इस पार्टी के दो गुट बने – बोल्शेविक और मेन्शेविक।

  19. बोल्शेविकों के नेता व्लादिमीर लेनिन थे।

  20. लेनिन क्रांति के समर्थक थे।

  21. 1905 में रूस में पहली क्रांति हुई।

  22. 1905 की क्रांति को रक्तरंजित रविवार (Bloody Sunday) से जोड़ा जाता है।

  23. इस घटना में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई।

  24. इससे पूरे रूस में विद्रोह फैल गया।

  25. इसके बाद ज़ार ने ड्यूमा (संसद) बनाने की घोषणा की।

  26. 1914 में रूस प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ।

  27. युद्ध के कारण रूस की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई।

  28. सैनिकों और नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

  29. लोगों में ज़ार के शासन के प्रति असंतोष बढ़ गया।

  30. 1917 में फरवरी क्रांति हुई।

  31. फरवरी क्रांति के परिणामस्वरूप ज़ार निकोलस द्वितीय ने सिंहासन छोड़ दिया।

  32. इसके बाद रूस में अस्थायी सरकार बनी।

  33. अस्थायी सरकार युद्ध जारी रखना चाहती थी।

  34. इससे जनता और मजदूरों में असंतोष बढ़ गया।

  35. लेनिन ने अप्रैल थीसिस प्रस्तुत की।

  36. इसमें “शांति, रोटी और भूमि” का नारा दिया गया।

  37. अक्टूबर 1917 में बोल्शेविक क्रांति हुई।

  38. बोल्शेविकों ने अस्थायी सरकार को हटा दिया।

  39. रूस में समाजवादी सरकार स्थापित हुई।

  40. लेनिन रूस के नए नेता बने।

  41. नई सरकार ने किसानों को भूमि बाँट दी।

  42. उद्योगों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।

  43. रूस ने प्रथम विश्व युद्ध से अलग होने का निर्णय लिया।

  44. इसके बाद रूस में गृहयुद्ध शुरू हो गया।

  45. लाल सेना (Red Army) ने अंततः विजय प्राप्त की।

  46. 1922 में सोवियत संघ (USSR) की स्थापना हुई।

  47. लेनिन ने समाजवादी नीतियाँ लागू कीं।

  48. रूसी क्रांति ने दुनिया भर में समाजवादी आंदोलनों को प्रेरित किया।

  49. इस क्रांति ने समानता और श्रमिक अधिकारों को महत्व दिया।

  50. रूसी क्रांति आधुनिक विश्व के राजनीतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बनी।

Class 9 History – यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति

25 Quick Revision Points (1-Line Sentences)

  1. 1917 की रूसी क्रांति आधुनिक विश्व इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी।

  2. इस क्रांति ने रूस में सदियों पुरानी ज़ारशाही शासन व्यवस्था को समाप्त कर दिया।

  3. रूस पर 1917 से पहले ज़ार निकोलस द्वितीय का निरंकुश शासन था।

  4. रूस का समाज मुख्य रूप से किसानों, मजदूरों और कुलीन वर्ग में विभाजित था।

  5. किसानों की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब थी और वे जमींदारों पर निर्भर थे।

  6. औद्योगिक विकास के साथ रूस में मजदूर वर्ग का उदय हुआ।

  7. मजदूरों को कम मजदूरी और लंबे कार्य घंटे झेलने पड़ते थे।

  8. यूरोप में इस समय समाजवाद के विचार तेजी से फैल रहे थे।

  9. समाजवाद का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक समानता स्थापित करना था।

  10. कार्ल मार्क्स ने समाजवाद और वर्ग संघर्ष के सिद्धांत को विकसित किया।

  11. रूस में रूसी सोशल डेमोक्रेटिक वर्कर्स पार्टी एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी संगठन था।

  12. इस पार्टी के दो गुट बने – बोल्शेविक और मेन्शेविक।

  13. बोल्शेविकों के नेता व्लादिमीर लेनिन थे।

  14. 1905 में रूस में पहली क्रांति हुई जिसे रक्तरंजित रविवार से जोड़ा जाता है।

  15. इस घटना के बाद ज़ार ने ड्यूमा (संसद) बनाने की घोषणा की।

  16. 1914 में रूस प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ।

  17. युद्ध के कारण रूस की आर्थिक और सामाजिक स्थिति और खराब हो गई।

  18. 1917 में फरवरी क्रांति हुई जिसके परिणामस्वरूप ज़ार को सत्ता छोड़नी पड़ी।

  19. इसके बाद रूस में अस्थायी सरकार की स्थापना हुई।

  20. अस्थायी सरकार की नीतियों से जनता असंतुष्ट रही।

  21. लेनिन ने “शांति, रोटी और भूमि” का नारा दिया।

  22. अक्टूबर 1917 में बोल्शेविकों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया।

  23. रूस में पहली बार समाजवादी सरकार की स्थापना हुई।

  24. नई सरकार ने किसानों को भूमि दी और उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया।

  25. 1922 में सोवियत संघ (USSR) की स्थापना हुई।

2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति

Class 9 History Hindi Updated : 06 March 2026

अध्याय 2. यूरोप में समाजवाद और रुसी क्रांति 


प्रश्न 1. रूस के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात 1905 से पहले कैसे थे?

उत्तर: 1905 से पहले रूस के समाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात निम्नलिखित थे:-

(अ) सामाजिक हालात :-  (i) समाजिक स्तर पर मजदूर विभाजित थे |

(ii) बहुत से मजदूर स्थायी रूप से शहरों में बस गये थे|

(iii) उनमें योग्यता और दक्षता के स्तर पर भी काफी फर्क था |

(iv) औरतो को पुरुषों से कम वेतन मिलता था |

(ब) आर्थिक हालात :- (i) रूसी साम्राज्य की 85 प्रतिशत जनता आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर थी|

(ii) उद्योग - धंधे बहुत कम थे|

(iii) सेंट पीटसबर्ग और मास्को प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र थे|

(iv) मजदूरों की दशा शोचनीय थी | उनको 10-15 घंटे कम करना पड़ता था |

(v) कोयला और स्टील उत्पादन काफी मात्रा में हो रहा था| ज्यादातर कारखाने उद्योगपतियों की निजी संपति थे|

(स) राजनीतिक हालात:- (i) जार निकोलस II का शासन था|

(ii) रूसी साम्राज्य में मास्को के आस-पास पड़ने वाले भूक्षेत्र के अलावा इसमें आज का फ़िनलैंड, लातविया, लिथुआनिया , एस्तोनिया तथा  पौलैंड, यूक्रेन व बेलारूस के कुछ हिस्से शामिल थे|

(iii)यह साम्राज्य प्रशांत महासागर तक फैला हुआ था और आज के मध्य एशियाई राज्यों के साथ-साथ जार्जिया, आर्मेनिया व अज़रबैजान भी इसमें शामिल थे| 

प्रश्न 2. 1917 से पहले रूस की कामकाजी आबादी यूरोप के बाकी देशों के मुकाबले किन-किन स्तरों पर भिन्न थी?

उत्तर: रूस की कामकाज करने वाली जनसँख्या यूरोप के अन्य देशो से 1917 ई. से पहले भिन्न थी| एसा इसलिए क्योंकि सभी रूसी कामगार कारखानों में काम करने के लिए गाँव से शहर नहीं आये थे| इनमें से ज्यादातर गाँवों में ही रहना पसंद करते थे और शहर में काम करने के निमित्त रोज गाव से आते और शाम को व३अपस लौट जाते थे| वे सामाजिक स्तर एवं दक्षता के अनुसार समूहों में बटे हुए थे और यह उनकी पोशाको से परिलक्षित होता था| धातुकर्मी अपने को मजदूरों में खुद को साहब मानते थे| क्योंकि उनके काम में ज्यादा प्रशिक्षण और निपुणता की जरुरत रहती थी तथापि  कामकाजी जनसँख्या कार्य स्थितियों एवं नियोक्ताओ के अत्याचार के विरुद्ध हड़ताल के मोर्चे पर एकजुट थी| 

अन्य यूरोपीय देशो के मुकाबले में रूस की कामगार जनसँख्या जैसे कि किसानो एवं कारखान मजदूरों की स्थिति बहुत भयावह थी| एसा जार निकोलस द्वितीय की निरंकुश सरकार के कारण था जिसकी भ्रष्ट एवं दमनकारी नीतियों से इन लोगो से उसकी दुश्मनी दिनों-दिन बढती जा  रहीं  थी | कारखाना मजदूरी की स्थिति भी इतनी ही ख़राब थी| वे अपनी शिकायतों को प्रकट करने के लिए कोई ट्रेड युनियन अथवा कोई राजनीतिक दल नहीं बना सकते थे| अधिकतर कारखाने उद्योगपतियों की निजी संपत्ति थी|

किसान ज़मीन पर सर्फ़ के रूप में काम करते थे और उनकी पैदावार का अधिकतम भाग ज़मीन के मालिकों एवं विशेषाधिकार प्राप्त वर्गो को चला जाता था| कुलीन वर्ग, सम्राट तथा रूढ़िवादी चर्च के पास बहुत अधिक संपत्ति थी| ब्रिटेन में फ्रांसीसी क्रांति के दौरान किसान कुलीनों का सम्मान करते थे और उनके लिए लड़ते थे किंतु रूस में किसानो को दी गई ज़मीन लेना चाहते थे| उन्होंने लगान देने से मना कर दिया और जमींदारों को मार भी डाला| तत्कालीन रूस के किसान अपनी भूमि एकत्र कर अपने कम्यून (मीर) को सौप देते थे और किसानो को कम्यून उस कृषि भूमि को प्रत्येक परिवार की आवश्यकता के अनुसार बाँट देता था, जिससे उस कृषि भूमि पर सुगमता से कृषि की जा सके|   

प्रश्न 3. 1917 में ज़ार का शासन क्यों खत्म हो गया?

उत्तर: 1917 में ज़ार का शासन खत्म होने के निम्नलिखित कारण थे:-

(i) 85% जनता कृषि पर निर्भर थी| किसानो की दशा खराब थी| बेरोजगार किसान धर्मार्थ लंगरों में खाना खाते थे और खस्तहाल मकानों में रहते थे|

(ii) मजदूरों की दशा भी ख़राब थी| उन्हें 10-15 घंटे तक की पाली में काम करना पड़ता था| उनके वेतन कम  थे|

(iii) 'ख़ूनी रविवार' की घटना ने हड़तालों में वृद्धि की| असंतोष बढ़ता गया|

(iv) 1905 की क्रांति के पश्चात् कुछ समय तक ट्रेड यूनियनें अस्तित्व में रहीं परन्तु फिर उन्हें गैर- कानूनी घोषित कर दिया गया|

(v) प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1914 से 1917 तक 70 लाख रूसी लोग मारे गये| ३० लाख से ज्यादा लोग शरणार्थी   बने| इसमें जार का शासन बदनाम हो गया| लोग भी युद्ध से तंग आ चुके थे| 

प्रश्न 4. दो सूचियाँ बनाइए : एक सूची में फरवरी क्रांति की मुख्य घटनाओं और प्रभावों को लिखिए और दूसरी सूची में अक्तूबर क्रांति की प्रमुख घटनाओं और प्रभावों को दर्ज कीजिए।

उत्तर: (क) फ़रवरी क्रांति की मुख्य घटनाए:-

(i) 1917 की सर्दी का मौसम - पोत्रोग्राद में मजदूरों के इलाके में खाद्य पदार्थो की कमी-भीषण कोहरा उअर बर्फबारी|

(ii) 22 फ़रवरी - एक फैक्ट्री में तालाबंदी|

(iii) 23 फ़रवरी - पचास फक्ट्रियों में हड़ताल |

(iv) 24-25 फ़रवरी - घुड़सवार सैनिक और पुलिस की तैनाती|

(v) 25 फ़रवरी - डयूमा को बर्खास्त करना|

(vi) 26 फ़रवरी- प्रदर्शनकारियों का इकट्ठा होना|

प्रभाव :-

(i) अंतरिम सरकार का गठन|

(ii) भविष्य के बारे में फैसला लेने की ज़िम्मेदारी संविधान सभा को सौपना, आधार सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार|

(iii) जनसभा करने और संगठन बनाने में लगी पाबन्दी को हटाना|

(iv) अन्य स्थानों पर सोवियतों का निर्माण |

(v) बोल्शेविक पार्टी का नाम कम्युनिस्ट पार्टी रखना|

(vi) ट्रेड यूनिनों की संख्यां में वृद्धि|

(vii) असंतोष में वृद्धि, सरकार की दमन नीति|

(ख) अक्टूबर की मुख्य घटनाएँ:-

(i) अंतरिम सरकार और बोल्शेविकों के टकराव में वृद्धि|

(ii) 24 अक्टूबर को विद्रोह प्रारंभ होना|

(iii) दिसंबर तक मास्को- पेत्रोग्राद इलाके पर बोल्शेविकों का नियंत्रण|

प्रभाव:-

(i) नवंबर, 1917 - ज्यादातर उद्योगों और बैंकों का राष्ट्रीयकरण|

(ii) ज़मीन को सामाजिक संपत्ति घोषित करना तथा किसानो को सामंतो की जमीनों पर कब्ज़ा करने की छूट देना|

(iii) अभिजात्य वर्ग द्वारा पुरानी पदवियों के प्रयोग पर रोक लगाना|

(iv) नवंबर में सविधान सभा के चुनाव करवाना|

(v) गुप्तचर पुलिस और बोल्शेविकों की आलोचना करने वालों को दंड देना|

(vi) रूस का एक- दलीय राजनीतिक व्यवस्था वाला देश|

(vii) गैर-रूसी राष्ट्रीयताओं को सोवियत संघ (दिसंबर , 1922) में राजनीतिक स्वायत्ता प्रदान करना|

प्रश्न 5. बोल्शेविकों ने अक्तूबर क्रांति के फौरन बाद कौन-कौन-से प्रमुख परिवर्तन किए?

उत्तर: अक्तूबर क्रांति के बाद निम्नलिखित प्रमुख परिवर्तन किये गए:

(i) ज़मीन को सामाजिक संपत्ति घोषित किया गया|

(ii) किसानों को सामंतो की ज़मीनों पर कब्ज़ा करने के लिए खुली छूट दे दी गई|

(iii) अभिजात्य वर्ग की पुरानी पदवियों पर रोक लगा डी गई|

(iv) सेना और सरकारी अफसरों की वर्दियां बदल दी गई|

(v) ज़मीनों के पुनर्वितरण का आदेश जारी किया गया|

(vi) बोल्शेविक पार्टी का नाम बदलकर रूसी कम्युनिस्ट पार्टी (बोल्शेविक) रखा गया|

(vii) मार्च 1918 में बोल्शेविकों ने जर्मनी से संधि कर ली|

(viii) अखिल रूसी सोवियत कांग्रेस को संसद का दर्ज़ा दिया गया और रूस एक दलीय प्रणाली वाला देश बन गया| 
प्रश्न 6. निम्नलिखित के बारे में संक्षेप में लिखिए :

  •  कुलक
  •  ड्यूमा
  •  1900 से 1930 के बीच महिला कामगार
  •  उदारवादी
  •  स्तालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम

उत्तर: (क) कुलक:- रूस के संपन्न किसानों को कुलक कहा जाता था| 

(ख) ड्यूमा:- यह एक निर्वाचित परामर्शदाता संसद थी जिसका निर्वाचन 1905 की क्रांति के दौरान किया गया था|

(ग) 1900 से 1930 के बीच महिला कामगार:- 1914 में फैक्ट्री मजदूरों में औरतो की संख्या 31 प्रतिशत थी| उन्हें पुरूषों की तुलना में कम वेतन मिलता था| यह पुरुषों की तुलना में आधे से तीन चौथाई तक होता था| फ़रवरी 1917 में हड़ताल के समय बहुत सारे कारखानों में हड़ताल का नेतृत्व औरतों ने किया|

(घ) उदारवादी:- सभी धर्मों को समान जगह और सम्मान मिले| वे वंश आधारित शासको की अनियमित सत्ता के विरोधी थे| वे सरकार के समक्ष व्यक्ति मात्र के अधिकारों की रक्षा के पक्ष में थे| उनकीं नज़र में सरकार द्वारा व्यक्ति के अधिकारों को छीनने का अधिकार नहीं था| यह सार्वभौमिक मताधिकार के पक्ष में नही थे| उनके अनुसार वोट का अधिकार केवल संपत्तिधारियों को ही मिलना चाहिए| 

(ड़) स्टालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम:- स्टालिन ने स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने तथा व्यापारियों के पास जमा अनाज को जब्त करना चाहा| किसानों से जबरदस्ती अनाज खरीदा और संपन्न किसानों या कुलको के ठिकानो पर छपे मरे परन्तु आनाज की कमी बनी रही| उपयुक्त स्थिति में आनाज़ की कमी को पूरा करने के लिए सामूहिकरण की नीति अपनाई गई| इसके पक्ष में यह तर्क दिया गया कि अनाज की कमी का कारण छोटे-छोटे खेत हैं| छोटे खेतो का आधुनिकीकरण नहीं किया जा सकता था| खेतो को विकसित करने और उनपर आधुनिक मशीनों से खेती करने के लिए कई कदम उठाए गये|  

Topic Wise Notes:

1. समाजवाद का उदय

19वीं सदी में यूरोप में औद्योगिक क्रांति के कारण मजदूरों की स्थिति खराब हो गई। इसी के विरोध में समाजवाद के विचार विकसित हुए, जिनका उद्देश्य समानता और श्रमिक अधिकारों की रक्षा करना था।

2. समाजवाद के प्रमुख विचारक

कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स समाजवाद के प्रमुख विचारक थे। उन्होंने वर्ग संघर्ष का सिद्धांत दिया और मजदूरों को पूंजीपतियों के खिलाफ संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।

3. रूस की सामाजिक और आर्थिक स्थिति

रूस में समाज मुख्यतः किसानों, मजदूरों और कुलीन वर्ग में बँटा हुआ था। अधिकांश किसान गरीब थे और जमींदारों के अधीन काम करते थे।

4. औद्योगिक विकास और मजदूर वर्ग

रूस में औद्योगिक विकास के साथ कारखानों में मजदूरों की संख्या बढ़ी, लेकिन उनकी मजदूरी कम और काम के घंटे बहुत अधिक थे।

5. 1905 की क्रांति

1905 में रूस में पहली क्रांति हुई जिसे रक्तरंजित रविवार (Bloody Sunday) की घटना से जोड़ा जाता है। इसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई।

6. ड्यूमा की स्थापना

1905 की क्रांति के बाद ज़ार ने ड्यूमा (संसद) की स्थापना की, लेकिन वास्तविक सत्ता अभी भी ज़ार के हाथों में ही रही।

7. प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव

1914 में रूस प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ, जिससे आर्थिक संकट, खाद्य कमी और सैनिकों की मृत्यु बढ़ गई।

8. फरवरी क्रांति (1917)

1917 में पेट्रोग्राद में मजदूरों और सैनिकों के विद्रोह के कारण ज़ार निकोलस द्वितीय को सत्ता छोड़नी पड़ी और अस्थायी सरकार बनी।

9. लेनिन और अप्रैल थीसिस

व्लादिमीर लेनिन ने अप्रैल थीसिस प्रस्तुत की जिसमें “शांति, रोटी और भूमि” का नारा दिया गया।

10. अक्टूबर क्रांति (1917)

अक्टूबर 1917 में बोल्शेविकों ने अस्थायी सरकार को हटाकर रूस में समाजवादी सरकार की स्थापना की।

11. नई सरकार की नीतियाँ

नई सरकार ने भूमि किसानों में बाँट दी, उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया और रूस को युद्ध से अलग कर दिया।

12. रूसी गृहयुद्ध

क्रांति के बाद रूस में लाल सेना (Red Army) और श्वेत सेना (White Army) के बीच गृहयुद्ध हुआ।

13. सोवियत संघ की स्थापना

1922 में रूस सहित कई क्षेत्रों को मिलाकर सोवियत संघ (USSR) की स्थापना की गई।

14. रूसी क्रांति का प्रभाव

रूसी क्रांति ने पूरी दुनिया में समाजवादी विचारों को फैलाया और मजदूर वर्ग के अधिकारों को मजबूत किया।

2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति

Class 9 History Hindi Updated : 06 March 2026

Class 9 History Chapter 2 – यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति

Very Short Questions and Answers

प्रश्न: वह कौन सी विचारधारा है जो समाज के पुनर्गठन का काम करती है?

उत्तर: समाजवादी विचारधारा।

प्रश्न: उदारवादी किसे कहा जाता है?

उत्तर: उदारवादी वह विचारधारा है जिसमें सभी धर्मों को समान सम्मान मिलता है और व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा का समर्थन किया जाता है।

प्रश्न: रूस में उदारवादी समूह 'लोकतंत्रवादी' क्यों नहीं था?

उत्तर: क्योंकि वे सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के पक्ष में नहीं थे और उनका मानना था कि वोट देने का अधिकार केवल संपत्ति रखने वालों को मिलना चाहिए।

प्रश्न: समाजवादी विचारधारा से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: समाजवादी विचारधारा निजी संपत्ति के विरोध पर आधारित है और समाज में समानता तथा न्याय स्थापित करना चाहती है।

प्रश्न: समाजवादी निजी संपत्ति का विरोध क्यों करते थे?

उत्तर: क्योंकि उनका मानना था कि निजी संपत्ति सामाजिक असमानता और शोषण को जन्म देती है।

प्रश्न: समाजवादियों ने अपने प्रयासों में समन्वय लाने के लिए 1870 के दशक में कौन सी संस्था बनाई?

उत्तर: द्वितीय इंटरनेशनल।

प्रश्न: किस क्रांति के जरिए रूस की सत्ता पर समाजवादियों ने कब्जा किया?

उत्तर: अक्टूबर क्रांति।

प्रश्न: अक्टूबर क्रांति किसे कहते हैं?

उत्तर: 1917 में रूस में हुई घटनाओं की श्रृंखला, जिसमें बोल्शेविकों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया, अक्टूबर क्रांति कहलाती है।

प्रश्न: निरंकुश राजशाही किसे कहते हैं?

उत्तर: ऐसा शासन जिसमें राजा के हाथों में पूर्ण सत्ता होती है और जनता को कोई अधिकार नहीं होता।

प्रश्न: रूसी साम्राज्य की अधिकांश जनता की आजीविका का साधन क्या था?

उत्तर: कृषि।

प्रश्न: खुनी रविवार से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: 1905 में रूस में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सैनिकों द्वारा गोली चलाने की घटना को खुनी रविवार कहा जाता है।

प्रश्न: सोवियत शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर: सोवियत मजदूरों और किसानों के प्रतिनिधियों की परिषद को कहा जाता था।

प्रश्न: समाजवादियों ने अपने प्रयासों में समन्वय लाने के लिए 1870 के दशक में किस नाम से संस्था बनाई?

उत्तर: द्वितीय इंटरनेशनल।

प्रश्न: इंग्लैंड और जर्मनी के मजदूरों ने अपने जीवन और कार्यस्थिति में सुधार लाने के लिए कौन-कौन से प्रयास किये?

उत्तर:

  • संगठन बनाना शुरू किया।
  • अपने सदस्यों की सहायता के लिए कोष बनाए।
  • काम के घंटे कम करने तथा मताधिकार के लिए आवाज उठाई।

प्रश्न: 1914 तक यूरोप में समाजवादी कहीं भी सरकार बनाने में क्यों सफल नहीं हो पाए?

उत्तर: समाजवादी प्रतिनिधि चुनावों में जीतते रहे और कानून बनाने में भूमिका निभाई, लेकिन सरकारों में रूढ़िवादियों, उदारवादियों और रैडिकलों का प्रभुत्व बना रहा, इसलिए वे सत्ता में नहीं आ सके।

प्रश्न: किस क्रांति के जरिए रूस की सत्ता पर समाजवादियों ने कब्जा किया?

उत्तर: अक्टूबर क्रांति।

प्रश्न: अक्टूबर क्रांति किसे कहते हैं?

उत्तर: फरवरी 1917 में राजशाही के पतन और उसी वर्ष अक्टूबर में बोल्शेविकों द्वारा सत्ता पर कब्जा करने की घटनाओं को अक्टूबर क्रांति कहा जाता है।

प्रश्न: निरंकुश राजशाही किसे कहते हैं?

उत्तर: ऐसा शासन जिसमें राजा के हाथों में पूर्ण सत्ता होती है और जनता को कोई अधिकार प्राप्त नहीं होता।

प्रश्न: रूसी साम्राज्य की अधिकांश जनता का आजीविका का साधन क्या था?

उत्तर: कृषि।

2. यूरोप में समाजवाद एवं रुसी क्रांति

Class 9 History Hindi Updated : 06 March 2026

Class 9 History Chapter 2 – यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति

Long Answer Questions

प्रश्न: रैडिकल समूह की विचारधाराएँ क्या थीं?

उत्तर:

  • वे ऐसी सरकार चाहते थे जो बहुसंख्यक जनता के समर्थन पर आधारित हो।
  • वे महिला मताधिकार के समर्थक थे।
  • वे बड़े जमींदारों और उद्योगपतियों के विशेषाधिकारों के विरोधी थे।
  • वे निजी संपत्ति के विरोधी नहीं थे, लेकिन संपत्ति के केंद्रीकरण के खिलाफ थे।

प्रश्न: रूस में रूढ़िवादी किस प्रकार के बदलाव चाहते थे?

उत्तर:

  • वे रैडिकल और उदारवादियों दोनों के विरोधी थे।
  • वे धीरे-धीरे बदलाव चाहते थे।
  • वे अतीत और परंपराओं का सम्मान बनाए रखना चाहते थे।

प्रश्न: रूस में समाजवादियों की प्रमुख विचारधाराएँ क्या थीं?

उत्तर:

  • वे निजी संपत्ति के विरोधी थे।
  • वे मानते थे कि निजी संपत्ति सभी समस्याओं की जड़ है।
  • वे सामूहिक खेती और सहकारी उद्यम के पक्षधर थे।
  • वे चाहते थे कि सरकार सामूहिक खेती को बढ़ावा दे।
  • वे पूंजीवादी उद्यम के स्थान पर सामूहिक उद्यम का समर्थन करते थे।

प्रश्न: रूस में उदारवादी विचारधारा का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

  • सभी धर्मों को समान सम्मान और स्थान मिलना चाहिए।
  • वे व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के समर्थक थे।
  • वे चाहते थे कि सरकार नागरिक अधिकारों का हनन न करे।
  • वे प्रतिनिधि लोकतांत्रिक सरकार के पक्ष में थे।

प्रश्न: इंग्लैंड और जर्मनी के मजदूरों ने अपने जीवन और कार्यस्थिति में सुधार लाने के लिए क्या प्रयास किए?

उत्तर:

  • उन्होंने मजदूर संगठनों का निर्माण किया।
  • सदस्यों की सहायता के लिए कोष बनाए।
  • काम के घंटे कम करने और मताधिकार के लिए आंदोलन किया।

प्रश्न: 1914 तक यूरोप में समाजवादी सरकार बनाने में क्यों सफल नहीं हो पाए?

उत्तर: समाजवादियों ने चुनावों में प्रतिनिधित्व प्राप्त किया और कानून बनाने में भूमिका निभाई, लेकिन सरकारों में रूढ़िवादियों, उदारवादियों और रैडिकलों का प्रभुत्व बना रहा, इसलिए वे सत्ता में नहीं आ सके।

प्रश्न: 20वीं शताब्दी के आरंभ में रूस में कारीगरों और मिल मजदूरों की स्थिति का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

  • मजदूरों को लंबे समय तक काम करना पड़ता था।
  • नौकरी से निकाले जाने पर मजदूर हड़ताल करते थे।
  • मजदूरों के रहने के लिए डॉर्मिटरी जैसी व्यवस्था थी।
  • वे सामाजिक रूप से विभाजित थे।
  • आर्थिक संकट में एक-दूसरे की मदद के लिए संगठन बनाते थे।

प्रश्न: रूसी किसान यूरोप के अन्य किसानों से किस प्रकार भिन्न थे?

उत्तर:

  • रूस में किसान अपनी जमीन सामूहिक रूप से कम्यून को सौंपते थे।
  • कम्यून परिवारों की आवश्यकता के अनुसार जमीन बाँटता था।
  • रूसी किसान जमींदारों की जमीन छीनकर किसानों में बाँटने के पक्ष में थे।

प्रश्न: विश्व में लोकतंत्र स्थापित करने वाली तीन प्रमुख घटनाओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

  • 1688 की इंग्लैंड की शानदार क्रांति।
  • 1776 में अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा।
  • 1789 की फ्रांसीसी क्रांति।

प्रश्न: लेनिन और बोल्शेविकों की प्रमुख माँगें क्या थीं?

उत्तर:

  • युद्ध को तुरंत समाप्त किया जाए।
  • सारी जमीन किसानों को दे दी जाए।
  • बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए।

प्रश्न: 1917 की रूसी क्रांति में लेनिन और बोल्शेविकों की भूमिका का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

  • लेनिन ने बोल्शेविक पार्टी का नेतृत्व किया और क्रांति का मार्गदर्शन किया।
  • उन्होंने “शांति, रोटी और भूमि” का नारा दिया।
  • रूस को प्रथम विश्व युद्ध से अलग किया गया।
  • किसानों को जमीन दी गई और समाजवादी नीतियाँ लागू की गईं।
  • सोवियतों को सत्ता सौंपकर समाजवादी शासन की स्थापना की गई।

प्रश्न: 20वीं शताब्दी के आरंभ में रूस में कारीगरों एवं मिल मजदूरों की दशा का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

  • नौकरी से निकाले जाने पर मजदूर एकजुट होकर हड़ताल करते थे।
  • काम के घंटे निर्धारित करने के लिए सरकारी विभाग फैक्ट्रियों पर नजर रखते थे।
  • मजदूरों के रहने के लिए डॉर्मिटरी जैसी व्यवस्था होती थी।
  • सामाजिक स्तर पर मजदूर विभाजित थे।
  • आर्थिक संकट में एक-दूसरे की सहायता के लिए संगठन बनाए गए थे।

प्रश्न: रूसी किसान यूरोप के अन्य किसानों से किस प्रकार भिन्न थे?

उत्तर:

  • रूसी किसान समय-समय पर अपनी जमीन कम्यून को सौंप देते थे और आवश्यकता के अनुसार भूमि बाँटी जाती थी।
  • फ्रांसीसी क्रांति के समय ब्रिटनी के किसान नबाबों का सम्मान करते थे और उनके लिए लड़ाइयाँ भी लड़ते थे।
  • इसके विपरीत रूसी किसान नबाबों की जमीन छीनकर किसानों में बाँटने के पक्ष में थे।

प्रश्न: विश्व में लोकतंत्र स्थापित करने वाली तीन प्रमुख घटनाओं का नाम बताइए।

उत्तर:

  • 1688 ई. की इंग्लैंड की शानदार क्रांति।
  • 1776 ई. में अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा।
  • 1789 ई. की फ्रांसीसी क्रांति।

प्रश्न: खुनी रविवार से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: 1905 में रूस में एक शांतिपूर्ण जुलूस पर जार की सेना ने गोली चला दी जिसमें लगभग एक हजार मजदूर मारे गए और हजारों घायल हुए। इस घटना को खुनी रविवार कहा जाता है।

प्रश्न: सोवियत शब्द का अर्थ क्या है?

उत्तर: सोवियत मजदूरों और किसानों के प्रतिनिधियों की परिषद को कहा जाता था। यह शब्द पहली बार 1905 की रूसी क्रांति के दौरान प्रयोग किया गया।

प्रश्न: बोल्शेविक कौन थे? उनकी तीन प्रमुख माँगें क्या थीं?

उत्तर: बोल्शेविक रूस की एक राजनीतिक पार्टी थी जिसका नेता लेनिन था। उनकी प्रमुख माँगें थीं:

  • युद्ध को तुरंत समाप्त किया जाए।
  • सारी जमीन किसानों को सौंप दी जाए।
  • बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए।

प्रश्न: 1917 की रूसी क्रांति में लेनिन और बोल्शेविकों की भूमिका का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

  • लेनिन ने बोल्शेविक पार्टी का नेतृत्व किया और क्रांति को दिशा दी।
  • उन्होंने “शांति, रोटी और भूमि” का नारा दिया।
  • रूस को प्रथम विश्व युद्ध से अलग कर लिया गया।
  • किसानों को जमीन दी गई और समाजवादी नीतियाँ लागू की गईं।
  • सोवियतों को सत्ता देकर समाजवादी शासन की स्थापना की गई।

प्रश्न: रैडिकल समूह की क्या विचारधाराएँ थीं?

उत्तर:

  • वे बहुमत के समर्थन पर आधारित सरकार चाहते थे।
  • वे महिला मताधिकार के समर्थक थे।
  • वे बड़े जमींदारों और उद्योगपतियों के विशेषाधिकारों के विरोधी थे।
  • वे संपत्ति के अत्यधिक केंद्रीकरण के खिलाफ थे।

प्रश्न: रूढ़िवादी रूस में किस प्रकार के बदलाव चाहते थे?

उत्तर:

  • वे रैडिकल और उदारवादी दोनों के विरोधी थे।
  • वे धीमी गति से परिवर्तन चाहते थे।
  • वे अतीत और परंपराओं का सम्मान बनाए रखना चाहते थे।

प्रश्न: रूस में समाजवादियों की प्रमुख विचारधाराएँ क्या थीं?

उत्तर:

  • वे निजी संपत्ति के विरोधी थे।
  • वे निजी संपत्ति को सामाजिक समस्याओं की जड़ मानते थे।
  • वे सामूहिक उद्यम और सहकारी खेती के समर्थक थे।
  • वे सरकार द्वारा सामूहिक खेती को बढ़ावा देने के पक्षधर थे।
  • वे पूंजीवादी उद्यम के स्थान पर सामूहिक उद्यम चाहते थे।

प्रश्न: रूस में उदारवादी विचारधारा का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

  • सभी धर्मों को समान सम्मान और स्थान मिलना चाहिए।
  • वे व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के पक्षधर थे।
  • वे चाहते थे कि सरकार नागरिक अधिकारों का हनन न करे।
  • वे प्रतिनिधि लोकतांत्रिक सरकार के समर्थक थे।

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