वाच्य-Voice परिभाषा | भेद | उदाहरण | हिंदी व्याकरणfg
वाच्य-Voice ki paribhasha bhed aur udaharan sahit examples for preparation of exams based questions with answers. वर्ण, संधि, समास, उपसर्ग, प्रत्यय, अलंकर, वाच्य, वाच्य परिवर्तन,वाक्य, उपवाक्य, वाक्य भेद, संधि-विच्छेद,पद-परिचय,क्रिया-भेद,अलंकार, रचना के आधार पर वाक्य-भेद, अर्थ के आधार पर वाक्य-भेद, समास विग्रह, समास समस्त-पद, संज्ञा, सर्वनाम, विशे,षण, क्रिया-विशेषण, क्रिया, तत्सम, तद्भव रूप
CBSE Notes ⇒ Class th ⇒
वाच्य-Voice परिभाषा | भेद | उदाहरण | हिंदी व्याकरण
वाच्य-Voice
वाच्य-परिभाषा-Voice-definition
परिभाषा (Definition) : बोलने का विषय क्रिया के जिस रूपांतर से यह जाना जाए कि क्रिया द्वारा किए गए विधान (कही गई बात / कार्य) का विषय कर्ता है कर्म है या भाव है उसे 'वाच्य' कहते है |
उदाहरण:
(i) राम ने रावण को मारा | (कर्ता प्रधान)
(ii) रावण राम के द्वारा मारा गया | (कर्म प्रधान)
(iii) राम से रावण मारा गया | (भाव प्रधान)
वाच्य के भेद (Kinds of Voice):
वाच्य के तीन भेद होते हैं |
1. कर्तृ वाच्य (Active Voice)
2. कर्म वाच्य (Passive Voice)
3. भाव वाच्य (Impersonal Voice)
1. कर्तृ वाच्य (Active Voice): जिस वाच्य में कर्ता की प्रधानता हो उसे कर्तृ वाच्य कहते हैं |
जैसे- (i) गीता खाना पकाती है |
(ii) तुमने पुस्तक पढ़ी |
(iii) वह कल कार खरीदेगा |
(iv) हमलोग व्यायाम कर रहे हैं |
(v) सीता आराम कर चुकी है |
नोट: कर्तृ वाच्य में सकर्मक और अकर्मक दोनों ही प्रकार के क्रियाओं का प्रयोग होता है |
2. कर्म वाच्य (Passive Voice): किसी वाक्य में क्रिया का वह रूप जिसमें कर्म की प्रधानता का बोध हो | कर्म वाच्य कहते हैं |
उदाहरण :
(i) गीता के द्वारा खाना पकाया जाता है |
(ii) उसके द्वारा पुस्तक पढ़ी जा सकती है |
(iii) उसके द्वारा कार खरीदी जाएगी |
(iv) गेंद खेली जाती है |
(v) पत्र लिखा जाता है |
नोट : इसमें केवल सकर्मक क्रिया का प्रयोग होता है |
3. भाव वाच्य (Impersonal Voice) : जब किसी वाक्य में क्रिया या भाव की प्रधानता होती है उसे भाव वाच्य कहते है |
उदाहरण :
(i) मुझसे रोया नहीं जाता है |
(ii) उससे बोला नहीं जाता है |
(iii) तुमसे चला नहीं जाता है |
(iv) मोहन से टहला भी नहीं जाता।
(v) मुझसे उठा नहीं जाता।
नोट : इसमें अकर्मक क्रिया का प्रयोग होता है |
वाच्य-परिवर्तन-Changing-Voice
वाच्य परिवर्तन : वाच्य के आधार पर वाक्यों के एक वाच्य से दुसरे वाच्य वाले वाक्य में परिवर्तन को वाच्य परिवर्तन कहते हैं |
उदाहरण : कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तन :
| कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य |
| 1. वह आम खता है | | उसके द्वारा आम खाया जाता है | |
| 2. वह अंग्रेजी बोल सकती है | | उसके द्वारा अंग्रेजी बोली जा सकती है | |
| 3. तुमने आज फल खाया | | तुम्हारे द्वारा फल खाया गया | |
| 4. हमलोग गेंद खेल रहे है | | हमारे द्वारा गेंद खेला जा रहा है | |
| 5. वह कल नकद गाड़ी खरीदेगा | | उसके द्वारा कल नकद गाड़ी ख़रीदा जायेगा | |
वाच्य परिवर्तन (Changing Voice) – विस्तृत व्याख्या एवं उदाहरण
हिंदी व्याकरण में वाच्य परिवर्तन का अर्थ है – वाक्य को एक वाच्य से दूसरे वाच्य में बदलना। सामान्यतः कर्तृ वाच्य को कर्म वाच्य या भाव वाच्य में बदला जाता है। वाच्य परिवर्तन करते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वाक्य का मूल अर्थ नहीं बदलना चाहिए, केवल उसकी रचना बदलती है।
सबसे पहले कर्तृ वाच्य से कर्म वाच्य में परिवर्तन को समझते हैं। कर्तृ वाच्य में कर्ता प्रधान होता है, जबकि कर्म वाच्य में कर्म प्रधान हो जाता है।
Example 1. राम पत्र लिखता है | (कर्तृ वाच्य)
Example 2. पत्र राम द्वारा लिखा जाता है | (कर्म वाच्य)
यहाँ ‘राम’ कर्ता था, लेकिन परिवर्तन के बाद ‘पत्र’ प्रधान हो गया।
Example 3. सीता खाना बनाती है |
Example 4. खाना सीता द्वारा बनाया जाता है |
Example 5. मोहन कहानी सुनाता है |
Example 6. कहानी मोहन द्वारा सुनाई जाती है |
भूतकाल में परिवर्तन देखें।
Example 7. राम ने पत्र लिखा |
Example 8. पत्र राम द्वारा लिखा गया |
Example 9. बच्चों ने मैच जीता |
Example 10. मैच बच्चों द्वारा जीता गया |
भविष्यकाल में भी यही नियम लागू होता है।
Example 11. वह घर बनाएगा |
Example 12. घर उसके द्वारा बनाया जाएगा |
अब कर्तृ वाच्य से भाव वाच्य में परिवर्तन समझते हैं। भाव वाच्य में कार्य के होने या न होने की स्थिति पर बल दिया जाता है।
Example 13. मैं दौड़ता हूँ | (कर्तृ वाच्य)
Example 14. मुझसे दौड़ा जाता है | (भाव वाच्य)
Example 15. वह गाती है |
Example 16. उससे गाया जाता है |
Example 17. बच्चे खेलते हैं |
Example 18. बच्चों से खेला जाता है |
नकारात्मक वाक्य में भी परिवर्तन किया जा सकता है।
Example 19. मैं तैर नहीं सकता |
Example 20. मुझसे तैरा नहीं जाता |
Example 21. वह सच नहीं बोलता |
Example 22. उससे सच बोला नहीं जाता |
वाच्य परिवर्तन करते समय कुछ मुख्य नियम ध्यान रखने चाहिए। कर्तृ वाच्य से कर्म वाच्य में बदलते समय कर्म को पहले स्थान पर रखा जाता है और “द्वारा” का प्रयोग किया जाता है। क्रिया का रूप “जाता है, गया, जाएगा” आदि में बदलता है। भाव वाच्य में “से” का प्रयोग होता है और क्रिया प्रायः पुल्लिंग एकवचन रूप में रहती है।
Example 23. शिक्षक पाठ पढ़ाते हैं |
Example 24. पाठ शिक्षक द्वारा पढ़ाया जाता है |
Example 25. हमसे जल्दी उठा नहीं जाता | (भाव वाच्य)
अंततः कहा जा सकता है कि वाच्य परिवर्तन भाषा की संरचना को समझने का महत्वपूर्ण अभ्यास है। इससे वाक्य निर्माण की क्षमता बढ़ती है और व्याकरणिक ज्ञान मजबूत होता है। नियमित अभ्यास से कर्तृ, कर्म और भाव वाच्य में परिवर्तन सरल हो जाता है।
कर्तृ-वाच्य-Kartri-Vachchya
कर्तृ वाच्य (Kartri Vachya) – विस्तृत व्याख्या एवं उदाहरण
हिंदी व्याकरण में वाच्य का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वाच्य से यह पता चलता है कि वाक्य में क्रिया का संबंध किससे है और वाक्य में कौन प्रधान है। कर्तृ वाच्य वह वाच्य है जिसमें कर्ता अर्थात कार्य करने वाला मुख्य होता है और वही क्रिया का संपादन करता है। सरल शब्दों में कहें तो जहाँ कर्ता स्वयं कार्य करता है और वही वाक्य का केंद्र बिंदु होता है, वहाँ कर्तृ वाच्य होता है। अंग्रेज़ी व्याकरण में इसे Active Voice कहा जाता है।
कर्तृ वाच्य की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वाक्य में कर्ता स्पष्ट रूप से उपस्थित रहता है और क्रिया उसी के अनुसार बदलती है। उदाहरण के लिए –
राम पुस्तक पढ़ता है।
यहाँ ‘राम’ कर्ता है और वही पढ़ने का कार्य कर रहा है। इसी प्रकार सीता भोजन बनाती है। इस वाक्य में ‘सीता’ कर्ता है और ‘बनाती है’ क्रिया उसी के अनुसार है। दोनों उदाहरणों में कार्य करने वाला स्पष्ट है, इसलिए ये कर्तृ वाच्य के वाक्य हैं।
कर्तृ वाच्य सभी कालों में प्रयुक्त होता है।
वर्तमान काल में
जैसे –
1. बच्चा खेलता है।
2. शिक्षक पढ़ाते हैं।
3. मैं स्कूल जाता हूँ।
इन वाक्यों में कर्ता स्वयं कार्य कर रहा है।
भूतकाल में देखें तो –
1. राम ने पत्र लिखा।
2. सीता ने गीत गाया।
3. बच्चों ने मैदान में खेला।
यहाँ भी कर्ता ने स्वयं कार्य किया है। भविष्यकाल में उदाहरण हैं –
1. मैं परीक्षा दूँगा।
2. वह कहानी सुनाएगी।
3. हम यात्रा करेंगे।
इन सभी वाक्यों में कर्ता ही क्रिया का करने वाला है।
कर्तृ वाच्य का प्रयोग सामान्य बोलचाल और लेखन में सबसे अधिक होता है क्योंकि यह सीधा और स्पष्ट होता है। जब हम कहते हैं कि किसान खेत जोतता है, तो यह स्पष्ट होता है कि खेत जोतने का कार्य किसान कर रहा है। जब हम कहते हैं कि डॉक्टर मरीज का इलाज करता है, तो कर्ता ‘डॉक्टर’ है और वही कार्य कर रहा है। इसी प्रकार
1. विद्यार्थी पाठ याद करते हैं।
2. लेखक कहानी लिखता है।
3. खिलाड़ी मैच जीतते हैं।
– ये सभी कर्तृ वाच्य के उदाहरण हैं।
कर्तृ वाच्य को समझने के लिए यह भी देखना आवश्यक है कि क्रिया कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलती है। जैसे – वह जाता है, वह जाती है, वे जाते हैं। यहाँ क्रिया का रूप कर्ता के अनुसार परिवर्तित हो रहा है। यही कर्तृ वाच्य की विशेषता है।
कर्तृ वाच्य से कर्म वाच्य में परिवर्तन भी किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए –
1. राम पत्र लिखता है।
यह कर्तृ वाच्य है। यदि इसे कर्म वाच्य में बदलें तो वाक्य होगा –
1. पत्र राम द्वारा लिखा जाता है।
यहाँ पत्र प्रधान हो गया और कर्ता पीछे चला गया। इससे स्पष्ट होता है कि कर्तृ वाच्य में कर्ता मुख्य होता है।
अंततः कहा जा सकता है कि कर्तृ वाच्य वाक्य का सबसे सरल और सामान्य रूप है जिसमें कार्य करने वाला स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह भाषा को स्पष्ट, प्रभावी और सीधा बनाता है। लेखन और बोलचाल में अधिकतर वाक्य कर्तृ वाच्य में ही प्रयुक्त होते हैं क्योंकि इससे विचारों को सरलता से व्यक्त किया जा सकता है।
कर्म-वाच्य-Karm-Vachchya
कर्म वाच्य (Karm Vachya) – विस्तृत व्याख्या एवं उदाहरण
हिंदी व्याकरण में कर्म वाच्य वह वाच्य है जिसमें वाक्य का मुख्य केंद्र कर्ता नहीं बल्कि कर्म होता है। अर्थात जहाँ कार्य करने वाला व्यक्ति महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि जिस पर कार्य किया जा रहा है वह प्रधान होता है, वहाँ कर्म वाच्य होता है। अंग्रेज़ी में इसे Passive Voice कहा जाता है। कर्म वाच्य में क्रिया का रूप बदल जाता है और प्रायः “द्वारा” शब्द का प्रयोग किया जाता है।
कर्म वाच्य की पहचान यह है कि वाक्य में कर्म को पहले स्थान पर रखा जाता है और क्रिया उसके अनुसार बदली जाती है। उदाहरण के माध्यम से इसे आसानी से समझा जा सकता है।
Example 1. राम पत्र लिखता है | (कर्तृ वाच्य)
Example 2. पत्र राम द्वारा लिखा जाता है | (कर्म वाच्य)
पहले वाक्य में ‘राम’ कर्ता है और वही कार्य कर रहा है, इसलिए वह कर्तृ वाच्य है। दूसरे वाक्य में ‘पत्र’ प्रधान हो गया और वही वाक्य का केंद्र बन गया, इसलिए वह कर्म वाच्य है।
Example 3. सीता खाना बनाती है |
Example 4. खाना सीता द्वारा बनाया जाता है |
Example 5. शिक्षक पाठ पढ़ाते हैं |
Example 6. पाठ शिक्षक द्वारा पढ़ाया जाता है |
Example 7. मोहन गेंद फेंकता है |
Example 8. गेंद मोहन द्वारा फेंकी जाती है |
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि कर्म वाच्य में कर्म को महत्व दिया जाता है और क्रिया का रूप “जाता है, जाती है, जाते हैं” आदि में बदल जाता है।
कर्म वाच्य विभिन्न कालों में भी प्रयुक्त होता है।
Example 9. राम ने पत्र लिखा |
Example 10. पत्र राम द्वारा लिखा गया |
Example 11. बच्चों ने खेल खेला |
Example 12. खेल बच्चों द्वारा खेला गया |
Example 13. वह घर बनाएगा |
Example 14. घर उसके द्वारा बनाया जाएगा |
इन वाक्यों में भूतकाल और भविष्यकाल के रूप भी स्पष्ट दिखाई देते हैं। “लिखा गया”, “खेला गया”, “बनाया जाएगा” आदि कर्म वाच्य के संकेत हैं।
कर्म वाच्य का प्रयोग तब अधिक किया जाता है जब कार्य करने वाला व्यक्ति महत्वपूर्ण न हो या अज्ञात हो। जैसे – सड़क बनाई गई है | यहाँ यह आवश्यक नहीं कि सड़क किसने बनाई, बल्कि सड़क का बनना महत्वपूर्ण है।
Example 15. नियमों का पालन किया जाता है |
Example 16. विद्यालय में हिंदी पढ़ाई जाती है |
Example 17. निर्णय लिया गया |
इन वाक्यों में कर्ता का उल्लेख नहीं है, फिर भी वाक्य पूर्ण और अर्थपूर्ण है। यही कर्म वाच्य की विशेषता है।
अंततः कहा जा सकता है कि कर्म वाच्य में कर्म प्रधान होता है और क्रिया उसी के अनुसार परिवर्तित होती है। भाषा को औपचारिक और प्रभावशाली बनाने में कर्म वाच्य का महत्वपूर्ण योगदान है। सरकारी घोषणाओं, समाचारों और औपचारिक लेखन में इसका अधिक प्रयोग किया जाता है।
भाव-वाच्य-Bhav-Vachchya
भाव वाच्य (Bhav Vachya) – विस्तृत व्याख्या एवं उदाहरण
हिंदी व्याकरण में भाव वाच्य वह वाच्य है जिसमें न तो कर्ता प्रधान होता है और न ही कर्म, बल्कि केवल कार्य का भाव प्रमुख होता है। अर्थात कार्य होने या न होने की स्थिति पर बल दिया जाता है। इस प्रकार के वाक्यों में यह स्पष्ट नहीं होता कि कार्य कौन कर रहा है, बल्कि यह बताया जाता है कि कार्य हो पा रहा है या नहीं।
भाव वाच्य प्रायः अकर्मक क्रियाओं के साथ प्रयोग होता है और इसमें “से” का प्रयोग अधिकतर देखा जाता है। इसमें क्रिया सामान्यतः पुल्लिंग एकवचन रूप में रहती है, चाहे कर्ता कोई भी हो।
Example 1. मैं दौड़ता हूँ | (कर्तृ वाच्य)
Example 2. मुझसे दौड़ा जाता है | (भाव वाच्य)
पहले वाक्य में ‘मैं’ स्वयं कार्य कर रहा है, इसलिए वह कर्तृ वाच्य है। दूसरे वाक्य में केवल दौड़ने का भाव व्यक्त हो रहा है, इसलिए वह भाव वाच्य है।
Example 3. वह हँसता है |
Example 4. उससे हँसा जाता है |
Example 5. बच्चे खेलते हैं |
Example 6. बच्चों से खेला जाता है |
इन उदाहरणों में स्पष्ट है कि यहाँ कार्य करने वाले की अपेक्षा कार्य के होने या होने की क्षमता पर बल है।
भाव वाच्य का प्रयोग प्रायः असमर्थता, आदत या सामान्य स्थिति बताने के लिए किया जाता है।
Example 7. मैं तैर नहीं सकता |
Example 8. मुझसे तैरा नहीं जाता |
Example 9. वह गा नहीं सकती |
Example 10. उससे गाया नहीं जाता |
इन वाक्यों में यह बताया जा रहा है कि कार्य करने की क्षमता नहीं है। इसलिए यह भाव वाच्य के उदाहरण हैं।
भाव वाच्य में प्रायः कर्ता के साथ “से” विभक्ति लगती है और क्रिया “जाता है” के रूप में आती है। जैसे – मुझसे चला नहीं जाता | उससे बोला नहीं जाता | बच्चों से पढ़ा नहीं जाता | यहाँ मुख्य बात कार्य के होने या न होने का भाव है।
Example 11. हमसे जल्दी उठा नहीं जाता |
Example 12. उससे सत्य बोला नहीं जाता |
इन वाक्यों में न तो कर्ता प्रधान है और न ही कर्म, बल्कि कार्य की स्थिति व्यक्त की जा रही है।
अंततः कहा जा सकता है कि भाव वाच्य में क्रिया का भाव मुख्य होता है। इसमें कार्य के संपादन की क्षमता या स्थिति पर बल दिया जाता है। यह वाच्य भाषा को विशेष भावात्मक अभिव्यक्ति देता है और दैनिक बोलचाल में भी प्रचलित है।
Paragraphs
Advertise
Chapter Lists Hindi Vyakaran (हिंदी व्याकरण)
1. वर्ण
2. संधि
3. समास
4. उपसर्ग
5. प्रत्यय
6. अलंकार
7. वाच्य-Voice
8. वाक्य-उपवाक्य
9. अर्थ के आधार पर वाक्य-भेद
10. रचना के आधार पर वाक्य-भेद
11. miscllaneous Exercise on Hindi Vyakaran
sponser's ads

